अमिताभ बच्चन को केबीसी में आवाज़ देने वाले आरडी तैलंग की कहानी

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- Author, मधु पाल
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी के लिए
नमस्कार, आदाब, सतश्री अकाल, देवियों और सज्जनों, कौन बनेगा करोड़पति में आपका स्वागत है!
ये शब्द आपने 'कौन बनेगा करोड़पति' (केबीसी) शो के दौरान अमिताभ बच्चन की आवाज़ में सुना होगा.
इन शब्दों के लिए अमिताभ बच्चन को बहुत तारीफ़ भी मिलती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शो की कामयाबी के पीछे अमिताभ बच्चन की कड़ी मेहनत के अलावा एक और शख्स की जादूगरी है जो शो के हर डायलॉग में जान फूँक देते हैं.
शो में बोले जानेवाले हिंदी और उर्दू के बेहतरीन शब्दों का श्रेय जाता है लेखक आरडी तैलंग को.
तैलंग ही वो शख्स हैं जो साल 2000 से लेकर 2020 तक 'कौन बनेगा करोड़पति' शो की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं.
इतने सालों में उन्होंने सिर्फ अमिताभ बच्चन के लिए ही नहीं बल्कि तीसरे सीज़न के होस्ट शाहरुख़ ख़ान के लिए भी स्क्रिप्ट लिखी थी.

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कौन बनेगा करोड़पति से कैसे जुड़े तैलंग?
मध्यप्रदेश के रहने वाले आरडी तैलंग ने ये कभी नहीं सोचा था कि मुंबई उनकी कर्मभूमि बन जाएगी.
बीबीसी हिंदी को उन्होंने बताया कि अपने एक रिश्तेदार को छोड़ने के लिए वो मुंबई आए थे.
उन्होंने कहा, "मैं जब यहाँ आया तो मुझे ये शहर अच्छा लगा. तब मैंने खुद से और इस शहर से एक सवाल किया कि इतनी भीड़ में क्या मेरा कुछ नहीं हो सकता? ये शहर मुंबई के लोगों की आवाज़ सुनता है, इसने मुझे भी सुन लिया."
"मुंबई ने मुझे अपना लिया. मैंने एक छोटे से अख़बार से पत्रकार के तौर पर अपनी शुरुआत की. 1995 में जिस दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का आगाज़ ही हुआ था, उन दिनों हम भी सीखते-सीखते इस नए मीडिया के साथ आगे बढ़े."
"पहले पहल मैंने एसिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया. फिर मुझे लगा कि मैं लेखन में अपना हाथ आज़मा सकता हूँ. अपने आसपास मैंने ये भी देखा कि लोग उस दौरान लेखक की बहुत इज़्ज़त भी किया करते थे. इसलिए मैंने फ़ैसला किया कि मैं लेखक ही बनूँगा."
"मैंने धीरे-धीरे थोड़ा बहुत लिखना शुरू किया और फिर बड़ा ब्रेक मिला 'मूवर्स और शेकर्स' के साथ. इसके बाद साल 2000 में मुझे 'कौन बनेगा करोड़पति' शो के साथ जुड़ने का मौक़ा मिला. अब पूरे बीस साल हो गए हैं केबीसी और अमिताभ बच्चन के साथ काम करते हुए.
तैलंग कहते हैं कि उनके सफल लेखक बनने में पत्रकारिता का बहुत बड़ा हाथ है.

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शब्दों और आवाज़ का अनोखा तालमेल
'कौन बनेगा करोड़पति' शो को आज देश के हज़ारों घरों में देखा जाता है. साथ ही इस शो से जुड़ना भी सम्मान की बात मानी जाती है.
शो को कामयाब बनाने में इसके डायलॉग्स की भूमिका अहम है. शो में बोले जाने वाले डायलॉग्स और कविताएं शो में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने और दर्शकों को शो से बांधे रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
तैलंग के शब्द और अमिताभ बच्चन की आवाज़- ये वो बेहतरीन तालमेल हैं जो इस शो को हिट करते हैं.
इस तालमेल के बारे में तैलंग कहते हैं, "हमारे लिए ये बेहद चुनौतीपूर्ण होता है कि हम जो कुछ भी लिखें, उसे शो में पढ़ते वक्त ऐसा न लगे कि होस्ट सामने रखी स्क्रिप्ट पढ़ रहा है. बल्कि ऐसा होना चाहिए कि लेखक अपनी लेखनी बताने की बजाय सामने वाले की शब्दावली को पूरी तरह अपना ले."
"आप इसी को अपनी लेखनी के मूल में रखेंगे तो ऐसा लगेगा कि होस्ट जो बोल रहा है वो उसकी खुद की सोच है. अगर ऐसा होता है तो ये ही लेखक की सफलता है. मैंने यही कोशिश की है और इसी का परिणाम है कि ऐसा लगता है कि शो में अमिताभ बच्चन जो कह रहे हैं वो उनके अपने विचार हैं."

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अमिताभ के सामने पसीने छूटते हैं मेरे
अमिताभ बच्चन के साथ अपनी कामयाब जोड़ी के बारे में तैलंग कहते हैं, "बच्चन जी के साथ काम करने का ये मेरा 20वां साल है. अगर लोगों को लगता है कि इतने सालों में मेरा उनके साथ एक कम्फर्ट लेवल बन गया होगा तो ऐसा कतई नहीं है."
"आज भी उनके पास कविता या डायलॉग लेकर जाता हूँ तो वो सबसे पहले उसे पढ़ते हैं. उन्हें लाइनें सुनना अच्छा नहीं लगता. उन्हें खुद पढ़ना अच्छा लगता है."
"मैं आज भी लोगों को कहता हूँ कि मेरे लिए सबसे कठिन समय वो होता है जब वो मेरी लाइनें पढ़ रहे होते हैं. इस दौरान वो बेहद संजीदा अंदाज़ में होते हैं लेकिन इस तरफ मेरी धड़कनें बढ़ रही होती हैं. मुझे समझ नहीं आता है कि रिएक्शन कैसा होगा?"
"पहले दिन यही हुआ और आज तक यही होता है. मेरी धड़कन आज भी उतनी ही तेज़ी से चलती है. वही घबराहट, वही बैचेनी, पहले की तरह पसीने छूटते हैं. जबकि केबीसी के अलावा भी मैं बच्चन साहब के इवेंट के लिए कविताएं लिखता हूँ. हाल में 26/11 पर गेट ऑफ़ इंडिया में एक प्रोग्राम के लिए मैंने एक कविता लिखी थी जिसे अमिताभ जी ने पढ़ी थी. उस पर बहुत अच्छी प्रतिक्रिया भी मिली थी."
"एक तरह से हमारी अच्छी जोड़ी बन गई है क्योंकि मुझे पता है कि उनको क्या चाहिए, किस तरह का उनका मूड है, वो क्या कहना चाहते हैं. वो भी मुझे समझने लगे हैं. कोई अच्छी स्क्रिप्ट दिमाग़ में आई तो आगे चल कर बच्चन साहब के लिए फ़िल्म भी लिखना चाहूंगा."

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हिंदी ने कामयाब बनाया
कौन बनेगा करोड़पति कार्यक्रम में कई अजीबोगरीब लेकिन दिलचस्प शब्दों का इस्तेमाल लोगों ने देखा है.
कई तकनीकी चीजों को रोचक शब्दों में कहा जाता है. जैसे - कंप्यूटर जी, कंप्यूटर महाशय, कंप्यूटर महोदय, घड़ियाल बाबू, श्रीमती टिकटिकी, चोटी की कोटी, ताला लगा दें, पंचकोटी महामनी, सुईमुई, मिस चलपड़ी.
साथ ही तैलंग ने कार्यक्रम के लिए दिलचस्प टैगलाइन भी बनाए हैं. जैसे - कोई भी इंसान छोटा नहीं होता, ज्ञान ही आपको आपका हक़ दिलाता है, विश्वास है तो उस पर खड़े रहो, अड़े रहो और इस साल हर चीज़ को ब्रेक लग सकता है, सपनों को नहीं.
अपनी कलम से तैलंग ये कमाल कैसे करते हैं? इस सवाल पर तैलंग कहते हैं "शब्दों की बात करूं तो मेरे शुरूआती दिनों की जो निराशा और दर्द है वही अब मेरी कलम से निकल रहा है. क्योंकि मैंने एमटीवी, म्यूज़िक चैनल जैसे प्राइवेट चैनलों के लिए बहुत लिखने की कोशिश की. लेकिन मैं ठहरा हिंदी लिखने वाला इसलिए शुरुआती दौर में मुझे अस्वीकृति मिली."
"मुझसे कहा गया कि आप हिंदी और अंग्रेज़ी मिला कर मिलीजुली भाषा में लिखो.
"लेकिन मेरे अंदर से वो मिलीजुली भाषा निकलती ही नहीं थी. इतना रिजेक्शन मिला कि मैंने ठान लिया कि जब भी मैं किसी शो में लिखूंगा तो इस सिनेरियो को ज़रूर बदलने की कोशिश करूंगा. मैं इस बात का कोई क्रेडिट नहीं लूँगा लेकिन हाँ आज कई शो आदाब और नमस्कार से शुरू होते हैं. मुझे लगता है कि केबीसी के ज़रिये भाषा सुधारने का मौका मिला है."

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तकनीकी चीजों का मानवीकरण
तकनीकी चीज़ों के अनोखे नामों पर बात करते हुए तैलंग कहते हैं, "केबीसी एक सवाल-जवाब वाला शो है. होस्ट सवाल पूछता है गेस्ट जवाब देते हैं. वहां राइटिंग की कोई गुंजाइश नहीं है क्योंकि यहाँ कोई कहानी नहीं है, जो भी है सब असली है."
"इसी कारण सोचा गया कि इसमें लेखक का क्या योगदान रहेगा? हमने शो को और दिलचस्प बनाने के बारे में सोचा और चीज़ों का मानवीकरण करने के बारे में सोचा. जैसे कंप्यूटर को अगर आपने कंप्यूटर जी कह दिया तो दर्शक के सामने उसकी एक छवि सी बन जायेगी कंप्यूटर की, और आपको लगेगा कि वो ज़िंदा हैं."
"जैसे घड़ियाल बाबू या मिस चलपड़ी कहने पर आपको लगेगा कि ये कोई ऐसी चीज़ है जो ज़िंदा है. लेकिन ये कोई नहीं बात नहीं है. हमारे बड़े-बूढ़े भी यही करते थे. वो जब हमें चन्दा मामा और सूरज चाचू की कहानी सुनाते थे. ऐसे में आपको लगता है कि आप किसी इंसान के बारे में बात कर रहे हैं."
"इसी सोच के साथ मैंने तकनीकी चीज़ों को नए नाम दिए. मैं चाहता था कि दर्शकों का भी इन चीज़ों के साथ रिश्ता जुड़े क्योंकि जब होस्ट इनसे बात करेगा तो ऐसा लगेगा कि उसका इनके साथ कोई रिश्ता है. ये देख कर आपका भी रिश्ता बन जाएगा. ये हम लेखकों का काम है. इसी सोच के साथ मैंने कुर्सी, कंप्यूटर, सुई समेत और कई चीज़ों के नाम रख दिए."
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लेखक का सबसे बड़ा दुःख
तैलंग कहते हैं कि अभिनेता लेखक के बोल कहता है तो दर्शकों को लगता है कि शब्द भी उसी के हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं होता.
वो कहते हैं कि यही किसी लेखक का सबसे बड़ा दुख होता है.
वो कहते हैं, "अक्सर हमें ये चीज़ झेलनी पड़ती है. लोगों को लगता है कि होस्ट जो सोच रहा है वही बोल रहा है, फिर वो चाहे डायलॉग हो या कविता. लोग हमसे सवाल करते हैं कि आप क्या लिखते हो."
"फ़िल्मों में भी आर्टिस्ट जो बोल रहा है उसमें लेखक का कोई हाथ नहीं होता. हम लेखकों ने इसे अपनी किस्मत मान लिया है कि हमें ख़ुद बताना पड़ेगा कि हम क्या काम करते हैं"
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