कोरोनाः कितना आगे ट्रायल, कब आएगी भारत में वैक्सीन

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- Author, मानसी दाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्ष वर्धन ने अगले साल की शुरूआत तक कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध होने की उम्मीद जताई है.
डॉक्टर हर्ष वर्धन ने राज्य सभा में साथ ही कहा,"वैक्सीन कोई जादू नहीं हैं, बड़े पैमाने पर वैक्सीन के उपलब्ध होने के लिए वक़्त लगेगा. लेकिन कोरोना वायरस को रोकने के लिए मास्क सबसे महत्वपूर्ण है.“
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इससे एक दिन पहले भारत की फ़ार्मा कंपनी डॉक्टर रेड्डीज़ लैब्स ने कहा था कि भारत को इस साल के आख़िर तक कोरोना वायरस की वैक्सीन मिल सकती है. कंपनी ने रूस के साथ रूसी वैक्सीन स्पुतनिक V के 10 करोड़ डोज़ ख़रीदने का क़रार किया है.
वहीं दूसरी तरफ़ ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन बना रही ऐस्ट्राज़ेनिका के भारतीय पार्टनर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (डीसीजीआई) से वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल्स फिर शुरू करने की अनुमति मिल गई है.
ट्रायल के दौरान एक व्यक्ति के शरीर में हुए कथित साइड इफ़ेक्ट के बाद इसका ट्रायल रोक दिया गया था. लेकिन अब कुछ शर्तों के साथ ट्रायल फिर से शुरू करने की इजाज़त दे दी गई है.
दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का कुल आँकड़ा तीन करोड़ के नज़दीक पहुँच चुका है, वहीं इस वायरस से मरने वालों की संख्या नौ लाख 40 हज़ार के पार हो गई है.
इस वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित अमरीका में संक्रमितों की संख्या 66.30 लाख है जबकि मरने वालों की संख्या 196,802 हो गई है.
भारत दूसरे नंबर पर है और अमरीका के क़रीब पहुंच चुका है. यहां अब तक कोरोना वायरस 51.18 लाख लोगों को संक्रमित कर चुका है और 83,198 लोगों की संक्रमण से मौत हो चुकी है.

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क्लीनिकल ट्रायल के तीसरे चरण में कुल 9 वैक्सीन
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार फ़िलहाल 33 कंपनियों के कोरोना वैक्सीन का परीक्षण हो रहा है. इनमें से 9 वैक्सीनों का तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल किया जा रहा है.
इनमें ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्राज़नेका की वैक्सीन के साथ-साथ, कैनसाइनो-बीजिंग इंस्टीट्यूट, जेनसेन फ़ार्मास्युटिकल्स, साइनोवैक, साइनोफ़ार्म-वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स, मॉडर्ना और बायोएनटेक-फ़ाइज़र की वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल चल रहे हैं.
डब्ल्यूएचओ के अनुसार वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल पूरे न होने के कारण विवादों में रहने वाली रूस की स्पुतनिकV वैक्सीन के भी पोस्ट रजिस्ट्रेशन क्लिनिकल ट्रायल जारी हैं. ये ट्रायल फि़िहाल 40,000 लोगों पर हो रहे हैं.
इन 33 वैक्सीन के अलावा 145 और कोरोना वैक्सीन पर भी काम चल रहा है.
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रूसी वैक्सीन को लेकरसवाल
रूस ने पिछले हफ़्ते दुनिया का पहला वैक्सीन बनाने का दावा किया था. उसने 11 अगस्त को स्पुतनिक V को मंज़ूरी दे दी थी.
लेकिन तब पश्चिमी देशों से जुड़े विशेषज्ञों ने कम समय में बनाई गई इस वैक्सीन पर ये कहते हुए संदेह जताया कि शोधकर्ताओं ने शायद पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया है.
हालांकि इसके जवाब में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन का कहना था कि वैक्सीन ने सभी ज़रूरी नियमों को पूरा कर लिया है. उन्होंने ये भी दावा किया था कि उनकी एक बेटी को भी ये वैक्सीन दी गई है.
सितंबर की शुरूआत में इस वैक्सीन को लेकर पहली बार किसी मेडिकल पत्रिका में कोई रिपोर्ट छपी. 'द लांसट' में एक रिपोर्ट में कहा गया कि वैक्सीन के ट्रायल में हिस्सा लेने वालों में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनी है और उनमें इसका कोई गंभीर साइड-इफ़ेक्ट देखने को नहीं मिला है.
लेकिन बीबीसी स्वास्थ्य संवाददाता फ़िलिपा रॉक्सबी के अनुसार वैक्सीन का ट्रायल 18 साल से 60 साल की उम्र वालों पर हुआ है जिन्हें 42 दिनों तक निगरानी में रखा गया.
इस कारण ये तो कहा जा सकता है कि वैक्सीन 18 से 60 उम्र वालों को 42 दिनों तक सुरक्षा देगी लेकिन 42 दिन के बाद क्या ये कारगर साबित होगी? और 60 साल से अधिक उम्र वालों पर इसका क्या प्रभाव होगा? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब मिलना बाक़ी है.

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लेकिन डॉक्टर रेड्डीज़ और आरडीआईएफ़ ने कहा है कि क़रीब 40,000 लोगों पर अभी इसके ट्रायल किए जा रहे हैं जिसके प्रारंभिक नतीजे नवंबर से पहले आ जाएंगे.
डॉक्टर रेड्डीज़ ने एक बयान में कहा, ”स्पुतनिकV के पहले और दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे सकारात्मक रहे हैं. भारतीय लोगों के लिए ये वैक्सीन कारगर हो इसके लिए नियामकों की मंज़ूरी के बाद इसके तीसरे चरण के ट्रायल भारत में होंगे. उम्मीद है कि कोविड-19 से लड़ने में स्पुतनिकV वैक्सीन कारगर साबित होगी.”
कंपनी के अनुसार समय पर नियामकों की मंज़ूरी मिलने पर और ट्रायल पूरे होने पर इस साल के आख़िर तक इस वैक्सीन की डिलीवरी शुरू हो जाएगी.
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कहां तक पहुंची ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन
ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राज़ेनिका ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही है. वहीं इसके लिए क्लीनिकल ट्रायल भी कर रही है.
दुनिया भर में वैक्सीन की पहुँच बढ़ाने के लिए कंपनी ने इसके लिए दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता भारतीय संस्थान सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के साथ क़रार किया है.
लेकिन, वैक्सीन के ट्रायल में शामिल एक व्यक्ति में कुछ साइड इफ़ेक्ट दिखने के बाद ट्रायल्स पर रोक लगा दी गई थी. इसके बाद भारत में भी इसे रोक दिया गया.

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शनिवार को ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी इस वैक्सीन के सुरक्षित होने की बात की जिसके बाद ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राज़ील में इसके ट्रायल एक बार फिर शुरु हो गए.
लेकिन अमरीका में इसके ट्रायल फिर शुरू नहीं हुए हैं. फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की मंज़ूरी के बाद इसके ट्रायल को यहां आगे बढ़ाने की इजाज़त मिलेगी.
इसके बाद बुधवार को एस्ट्राज़ेनिका ने कहा कि स्वतंत्र समीक्षा के अनुसार जिस साइड इफ़ेक्ट के दिखने की बात हो रही है वो शायद वैक्सीन के कारण नहीं है.
इधर भारत में मंगलवार को डीसीजीआई ने लोगों को पूरी जानकारी दे कर उनकी सहमति लेने, स्क्रीनिंग के वक़्त अधिक सावधानी बरतने और प्रक्रिया की निगरानी करने की शर्त पर सीरम इंस्टीट्यूट को ट्रायल की इजाज़त दे दी है. भारत में इस वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल चल रहे हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ़ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन के अनुसार, ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की बनाई वैक्सीन अब तक की सबसे उन्नत वैक्सीन है जिसे एस्ट्राज़ेनिका बड़े पैमाने पर बना रही है.
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सीरम इंस्टीट्यूट ने कोरोना वायरस की एक और वैक्सीन के एक अरब डोज़ बनाने के लिए मँगलवार को अमरीकी कंपनी नोवावैक्स के बीच हुए क़रार में बदलाव किए हैं.
दोनों के बीच पहले अगस्त में 10 करोड़ डोज़ बनाने को लेकर समझैता हुआ था, लेकिन अब इसे बढ़ा कर एक अरब कर दिया गया है.
फ़िलहाल इस वैक्सीन के दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं और उम्मीद की जा रही है कि कुछ सप्ताह में इसके तीसरे चरण के ट्रायल शुरू होंगे.
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अमरीकी चुनाव में चर्चा वैक्सीन की
कोरोना वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित अमरीका में वैक्सीन की चर्चा चुनाव का हिस्सा बन रही है.
इसी सप्ताह सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन के निदेशक डॉक्टर रॉबर्ट रेडफ़ील्ड ने अमरीकी सीनेट के सामने कहा कि कोरोना वैक्सीन ही लोगों के लिए उपलब्ध होगी और देश के हर नागरिक को वैक्सीन देने में छह से नौ महीनों का वक़्त लगेगा.

उन्होंने ये भी कहा कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में मास्क वैक्सीन के मुक़ाबले अधिक महत्वपूर्ण है.
उनके इस बयान से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ख़ासे नाराज़ हुए, जो पहले ही अपने चुनावी भाषणों में वैक्सीन के जल्द से जल्द उपलब्ध होने की बात कर चुके हैं.
डॉक्टर रेडफ़ील्ड के बयान के बाद ट्रंप ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि “ये सरासर ग़लत जानकारी है. जैसे ही वैक्सीन उपलब्ध होगी उसे सीधे लोगों तक पहुंचाया जाएगा. किसी भी सूरत में डॉक्टर रेडफ़ील्ड ने जैसा कहा वैक्सीन में उतनी देरी नहीं होगी.”
साथ ही उन्होंने कहा कि डॉक्टर रेडफ़ील्ड ने मास्क के बारे में ”ग़लती से कह दिया है. वैक्सीन मास्क से बेहतर है.”
अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों की रेस में शामिल डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिद्वंदी जो बाइडन ने कोरोना वैक्सीन बनाने को मंज़ूरी देने के ट्रंप प्रशासन के तरीक़े पर सवाल उठाए हैं.
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उन्होंने कहा है, ”वैक्सीन के मामले में मैं वैज्ञानिकों पर भरोसा करता हूं, डोनाल्ड ट्रंप पर नहीं.”
जो बाइडेन का कहना है कि वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया में किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए. अमरीका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं.
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