जयपुर कैसे पहुंची ढाई हज़ार साल पुरानी मिस्र की ममी

जयपुर

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    • Author, मोहर सिंह मीणा
    • पदनाम, जयपुर से बीबीसी हिंदी के लिए

जयपुर में 14 अगस्त को हुई तेज़ बारिश से अलबर्ट हॉल में पानी भर जाने के कारण यहां रखी 2400 साल पुरानी ममी (मृतदेह) को बहुत मशक्कत के बाद बचाया गया.

यह ममी मिस्र देश के प्राचीन राज्य पैनोपोलिस में अखमीन से संबंधित है, जो 322 से 39 ईस्वी पूर्व यानि क़रीब ढ़ाई हज़ार साल पहले टौलोमाइक युग बताई जाती है.

अल्बर्ट हॉल के दस्तावेज़ों के मुताबिक यह ममी मिस्र के अखमीन में खेम नामक देव के उपासक पुरोहितों के परिवार की तूतू नाम की महिला सदस्य है.

जयपुर के इतिहासकार प्रोफेसर आरपी खंगोरोत ने बताया कि 1883 में सवाई माधो सिंह (द्वितीय) ने ब्रिटिश सरकार और भारतीय राज्यों के सहयोग से इंडस्ट्रीयल आर्ट इकोनॉमिक एंड एजुकेशनल म्यूज़ियम एग्ज़िबिशन आयोजित की थी. इसी प्रदर्शनी के लिए ये ममी ख़ास तौर पर लाई गई थी.

प्रोफेसर खंगारोत ने यह दावा अपनी किताब ए ड्रीम इन द डेज़र्ट में भी किया है. लेकिन, ख़रीदी गई कीमत के बारे में जानकारी नहीं है.

ममी ख़रीदी गई, उपहार में मिली या समझौते के तहत जयपुर लाई गई - इस सवाल पर अल्बर्ट हॉल के अधीक्षक डॉ राकेश छोलक इस स्थिती को साफ़ करने के लिए कोई पुख़्ता दस्तावेज़ मौजूद नहीं है.

ममी को 5 बार शो केस के बिना रखा

14 अगस्त को जयपुर में हुई तेज़ बारिश के कारण बेसमेंट पानी भर जाने से ममी को क्षति से बचाने के लिए शो केस के शीशे तोड़ कर बाहर निकाला गया. यह पहली बार नहीं था जब ममी को शो केस से बाहर निकाला.

अधीक्षक डॉ राकेश छोलक कहते हैं कि, अल्बर्ट हॉल के ग्राउंड फ्लोर पर ममी को शो केस में रखा हुआ था. लेकिन अप्रैल 2017 में इसे बेसमेंट में शिफ्ट किया गया और उस दौरान भी ममी को केस के बाहर निकाला गया था.

जयपुर की ममी

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वह बताते हैं, 2005, 2007 में भी शो केस के बाहर ममी को रखा गया था. जबकि सबसे ज़्यादा 2012 में 4 दिनों के लिए ममी को बाहर निकाला गया है. 2012 में ममी की सुरक्षा जांच के लिए मिस्र से 3 विशेषज्ञ सदस्यों को बुलाया गया, उस दौरान ममी की सुरक्षा जांच के चलते सबसे ज़्यादा 4 दिनों के लिए ममी शो केस से बाहर रखी गई.

जयपुर में हुई कुछ घंटों की बारिश से अल्बर्ट हॉल में भारी नुकसान हुआ है. बेहद पुराने और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ व सरकारी फाइलें पानी में भीग गईं.

बेसमेंट में कमर तक भरे पानी से शो केस की सतह पर पानी पहुंच गया था. लेकिन, कर्मचारियों का हौसला बढ़ाते हुए अधीक्षक ने शो केस का शीशा टोड़ कर ममी को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मशक्कत में कमी नहीं छोड़ी.

इसलिए, क़रीब ढ़ाई हज़ार साल पुरानी ममी अलबर्ट हॉल में अब भी सुरक्षित है.

कैसी है इस ममी की बनावट

जयपुर

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अल्बर्ट हॉल में रखी ममी के ऊपरी आवरण पर प्राचीन मिस्र का पंखयुक्त पवित्र भृंग (गुबरैला) का प्रतीक अंकित है. यह एक किस्म का चिह्न है जो मृत्यु के बाद पुनर्जन्म का संकेत करता है. गर्दन से कमर तक मोतियों से सज्जित परिधान, कॉलर के रूप में पहना हुआ है और पंखदार देवी का अंकन इस मृत देह की सुरक्षा के लिए किया है.

इसके नीचे तीन फ़लक हैं, एक में चिता की शैया पर मृत देह के दोनों ओर स्त्रियां बनाई गई हैं. दूसरे में पाताल लोक के निर्णायकों की तीन बैठी हुई आकृतियां हैं. तीसरे फ़लक में होरस देव के चार पुत्र हैं जिनके मुख मानव, सियार, बंदर और बाज पक्षी के हैं.

मिस्र के विशेषज्ञों ने बताया था इसे सुरक्षित

बारिश के कारण इसे संग्रहालय में दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने की नौबत आई तो उसकी सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे.

लेकिन संग्रहालय चलाने वाले कहते हैं कि इसे यहां काफ़ी संभाल कर रखा गया है.

ममी को नुकसान

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ममी को मज़बूत शीशे के शो केस में रखा गया है. इसके बेहद सुरक्षित तरीक़े से रखा जाता है जिससे ममी को नुकसान न पहुंचे. लेकिन इन दिनों ममी खुले में रखी हुई है.

अल्बर्ट हॉल के अधीक्षक डॉ राकेश छोलक कहते हैं कि, जांच के दौरान 2012 में स्पेशलिस्ट की निगरानी में ममी के ऊपरी दो लेयर हटाए गए थे. लेकिन तीसरा लेयर इसकी स्किन की सुरक्षा के लिए नहीं हटाया गया.

अल्बर्ट हॉल के अधीक्षक डॉ राकेश छोलक कहते हैं कि, जयपुर, लखनऊ, कोलकाता, बड़ौदा, गोवा समेत भारत में 7 ममी मौजूद हैं. 6 मिस्र से हैं जबकि गोवा में रखी ममी ज़्यादा पुरानी नहीं है.

वह बताते हैं कि, 2012 में मिस्र से तीन सदस्यों के विशेषज्ञों के दल से ममी की सुरक्षा जांच कराई गई. उस दौरान ममी के ऊपर तीन सुरक्षा लेयर में से दो को हटा कर एक्सरे किया गया. जिस दौरान पूरी ममी की जांच की गई.

अल्बर्ट हॉल के अधीक्षक डॉ राकेश छोलक

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डॉ छोलक बताते हैं कि मिस्र से आए विशेषज्ञों ने जांच के बाद जयपुर की इस ममी को सबसे सुरक्षित बताया.

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