जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बलों की 100 कंपनियाँ हटाने का फ़ैसला

कश्मीर

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केंद्र सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बलों की 100 कंपनियों को हटाने का फ़ैसला किया है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थितियों की समीक्षा के बाद ये फ़ैसला किया है.

गृह मंत्रालय के मुताबिक़ इनमें सीआरपीएफ़ की 40 कंपनियाँ हैं, जबकि बीएसएफ़, सीआईएसएफ़ और एसएसबी की 20-20 कंपनियाँ शामिल हैं.

इस सप्ताह के अंत तक इन कंपनियों को जम्मू-कश्मीर से हटा लिया जाएगा.

पिछले साल अगस्त में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद इन कंपनियों को वहाँ तैनात किया गया था.

आम तौर पर सीआरपीएफ़ की एक कंपनी में क़रीब 100 सुरक्षाकर्मी होते हैं.

इस साल मई में गृह मंत्रालय ने सीआरपीएफ़ की 10 कंपनियों को जम्मू-कश्मीर से हटाने का फ़ैसला किया था.

सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच में सीबीआई को सहयोग करेगी मुंबई पुलिस

अनिल देशमुख

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महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि वे सुशांत सिंह राजपूत मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हैं. उन्होंने कहा कि सीबीआई को जो भी सहयोग की आवश्यकता होगी, वो दी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने फ़ैसले में ये मामला सीबीआई को सौंपने पर अपनी मुहर लगा दी है. रिया चक्रवर्ती ने बिहार में इस मामले की जाँच के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

सुशांत सिंह राजपूत

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लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिहार में एफ़आईआर दर्ज करने में कोई ग़लत बात नहीं थी और न ही बिहार सरकार की ओर से सीबीआई जाँच में सिफ़ारिश ही ग़लत थी.

इस बीच महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई पुलिस की जाँच को ग़लत नहीं ठहराया है.

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पैरा 34 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार इस पर विचार करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि इस मामले में मुंबई पुलिस की समांतर जाँच की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में जो कहा

1. बिहार सरकार सीबीआई जाँच की सिफ़ारिश कर सकती थी

2. सीबीआई को इस मामले की जाँच करने का निर्देश दिया जाता है

3. पटना में दर्ज एफ़आईआर सही थी

4. मुंबई पुलिस को निर्देश दिया जाता है कि वे सीबीआई को सब सबूत दे दें

प्रशांत भूषण की सज़ा सुनाए जाने पर रोक के लिए याचिका

प्रशांत भूषण

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अदालत की अवमानना मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वकील प्रशांत भूषण ने सज़ा सुनाए जाने पर रोक लगाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल की है.

उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि वो इस मामले में 30 दिनों की सीमा अवधि में पुनर्विचार याचिका दाख़िल करना चाहते हैं.

उनका यह भी तर्क है कि स्वतः संज्ञान वाले मामलों में फ़ैसला आने के बाद अपील दायर करने का कोई प्रवाधान नहीं है.

अदालत की अवमानना मामले में प्रशांत भूषण को गुरुवार को सज़ा सुनाई जानी है.

प्रशांत भूषण ने मुख्य न्यायधीश और चार अन्य पूर्व मुख्य न्यायधीशों को लेकर ट्वीट किए थे. इसी मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया है.

कंटेम्ट ऑफ़ कोर्ट्स ऐक्ट, 1971 के तहत प्रशांत भूषण को छह महीने तक की जेल की सज़ा जुर्माने के साथ या इसके बग़ैर भी हो सकती है.

इसी क़ानून में ये भी प्रावधान है कि अभियुक्त के माफ़ी मांगने पर अदालत चाहे तो उसे माफ़ कर सकती है.

इमरान ख़ान बोले- मेरा ज़मीर इसराइल को स्वीकार नहीं कर सकता

इमरान ख़ान

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इसराइल के साथ द्विपक्षीय रिश्ते स्थापित करने की किसी भी संभावना होने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि उनका ज़मीर कभी इसराइल को स्वीकार नहीं कर सकता.

हाल ही में इसराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच ऐतिहासिक समझौते के संदर्भ में उन्होंने यह बात की. दोनों देशों ने सामान्य द्विपक्षीय रिश्ते बहाल कर दिए हैं.

पाकिस्तान के एक निजी चैनल 'दुनिया' को दिए इंटरव्यू में इमरान ख़ान ने इसराइल को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, "इसराइल पर हमारा रुख़ एकदम साफ़ है. पाकिस्तान इसराइल को मान्यता नहीं दे सकता."

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा, "क़ायद-ए-आज़म मोहम्मद अली जिन्ना ने 1948 में साफ़ कर दिया था कि हम इसराइल को तब तक तस्लीम नहीं कर सकते जब तक कि फ़लस्तीनियों को उनका हक़ नहीं मिलता."

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"फ़लस्तीनियों की टू नेशन थ्योरी थी कि उन्हें उनका देश मिले. यह फ़ैसला होने से पहले ही अगर हम इसराइल को स्वीकार कर लेते हैं तो कश्मीर की भी ऐसी ही स्थिति है, हमें वो मुद्दा भी छोड़ देना चाहिए. इसलिए पाकिस्तान कभी इसराइल को स्वीकार कर नहीं कर सकता."

इमरान ख़ान ने कहा, "इंसान अल्लाह को जवाबदेह है. आप जब इसराइल और फ़लस्तीन की बात करते हैं, तो सोचना चाहिए कि हम अल्लाह को क्या जवाब देंगे. जिन लोगों पर हर क़िस्म की ज़्यादतियां हुई हैं, जिनके सारे हक़ छीन लिए गए, क्या हम उनको यूं ही बेसहारा छोड़ सकते हैं? मेरा तो ज़मीर ऐसा करने के लिए कभी नहीं मानेगा. मैं इसे कभी स्वीकार नहीं कर सकता."

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आगरा: जब यात्रियों समेत पूरी बस को कर लिया हाईजैक

आगरा में फ़ाइनेंस कंपनी के लोग ड्राइवर को उतारकर यात्रियों समेत बस हाईजैक कर ले गए.

उत्तर प्रदेश के आगरा में यात्रियों से भरी एक निजी बस को हाईजैक करने का मामला सामने आया है. घटना के कुछ देर बाद ही पता चला कि बस को फ़ाइनेंस कंपनी के लोग ड्राइवर और कंडक्टर को ज़बरन उतारकर यात्रियों समेत लेकर चले गए.

घटना आगरा के मलपुरा इलाक़े में रायगढ़ टोल प्लाज़ा के पास की है जहां गुरुग्राम से मध्य प्रदेश के पन्ना जा बस को कथित तौर पर अगवा कर लिया गया. बस में 34 यात्री सवार थे. बस के चालक और कंडक्टर को अपहरणकर्ता निजी गाड़ी में बिठा कर ले गए जबकि एक दूसरे ड्राइवर के ज़रिए उस बस को आगे लेकर चले गए.

उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी के मुताबिक, "फ़ाइनेंस कंपनी ने बस को अवैध तरीक़े से सीज़ कर दिया है. बस में ड्राइवर स्टाफ़ समेत सभी यात्री सुरक्षित हैं. बस मालिक की कल मौत हो गई थी और उनका आज अंतिम संस्कार कर रहा है."

यह घटना सुबह क़रीब चार बजे की है. घटना के बारे में आगरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार का कहना था, "रायगढ़ टोल क्रॉस करने के बाद दक्षिणी बाईपास के आगे बस को ओवरटेक किया गया. ओवरटेक करने वालों ने अपने आपको फ़ाइनेंस कंपनी का बताया और कहा कि बस की किश्तें नहीं दी जा रही है. इन लोगों ने ड्राइवर और कंडक्टर को एक दूसरी गाड़ी में बैठाया और अपने ड्राइवर के साथ बस को झांसी की ओर लेकर चले गए."

बस के ड्राइवर रमेश कुमार ने मीडिया को बताया कि कुछ देर तक ड्राइवर और कंडक्टर को भी बस में ही ले गए जबकि आगे जाकर उन्हें उतार दिया गया. रमेश के मुताबिक, "गाड़ी सवार कुछ लोगों ने तड़के चार बजे बस का पीछा करके उसे रुकवाया. वे लोग ख़ुद को फ़ाइनेंस कंपनी का कर्मचारी बता रहे थे. बस को रोकने के बाद उन्होंने उसे अपने कब्ज़े में ले लिया और आगे बढ़ने लगे. रास्ते में एक ढाबे पर बस को रोका और सभी सवारियों के पैसे वापस कराए और सभी को खाना भी खिलाया."

बस ड्राइवर रमेश कुमार का कहना था कि एत्मादपुर क्षेत्र में उन्हें बस से उतार दिया गया जबकि यात्रियों को बस में ही बैठाए रहे. रमेश कुमार ने मलपुरा थाने जाकर जब इसकी सूचना दी तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. बस हाईजैक करने वालों की अभी पुलिस तलाश कर रही है. बस में सवार यात्रियों को किसी दूसरी बस में बैठाकर झांसी पहुंचा दिया गया है.

बस ड्राइवर रमेश के मुताबिक, अपहर्ता दो गाड़ियों में सवार थे और उन लोगों ने मारपीट भी की और मोबाइल भी छीन लिया. बताया जा रहा है कि बस ग्वालियर के किसी ट्रैवल कंपनी की है.

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