महबूबा मुफ़्ती मेरी माँ हैं और वो दबाव में नहीं झुकेंगी: इल्तिजा मुफ़्ती

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- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती की नज़रबंदी तीन महीने के लिए और बढ़ा दी गई है.
जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग ने इस बारे में शुक्रवार को सूचना जारी की है. पाँच अगस्त को उनकी डिटेंशन की मियाद ख़त्म हो रही थी. उन पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट लगाया गया है.
महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तिजा मुफ़्ती ने अपनी माँ की नज़रबंदी और उमर अब्दुल्लाह की रिहाई समेत कई मुद्दों पर बीबीसी से बात की. इल्तिजा ने अपनी माँ के बारे में कहा, ''मेरी माँ (महबूबा मुफ़्ती) घर पर तो हैं लेकिन नज़रबंद हैं. वो फ़ोन का इस्तेमाल न्यूज़ देखने सुनने के लिए करती हैं, लेकिन ट्वीट नहीं कर सकतीं.''
''एक शहर में होते हुए भी मैं अपने भाई-बहनों से नहीं मिल सकती. पिछला एक साल हमारे लिए दर्द भरा रहा, भावनात्मक रूप से, आर्थिक रूप से हर तरह से. ये साल बोझ बन कर रह गया है. आप पत्रकारों के लिए पाँच अगस्त एक सालगिरह होगी पर हमारे लिए ये किसी मातम से कम नहीं है"
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पाँच अगस्त 2019
पाँच अगस्त 2019 को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने न केवल जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और 35A को हटा दिया था, बल्कि जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा ख़त्म कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया था. इस बात को एक साल होने को आया है. केंद्र सरकार के इस फ़ैसले के कुछ ही घंटे पहले उमर अब्दुल्लाह, उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह, राज्य की एक और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती समेत सैकड़ों नेताओं को नज़रबंद या गिरफ़्तार कर लिया गया था.
इन सभी नेताओं का कहना था कि बिना किसी आरोप के उन लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. फ़रवरी में उमर, महबूबा और कई दूसरे नेताओं पर पब्लिक सेफ़्टी एक्ट (पीएसए) लगा दिया गया था.
सात महीनों के बाद 24 मार्च को उमर अब्दुल्लाह को रिहा कर दिया गया था. उसके एक हफ़्ते पहले उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह को भी रिहा कर दिया गया था.
हालाँकि महबूबा मुफ़्ती अब तक हिरासत में हैं और मई में उन पर दोबारा पीएसए लगाया गया था, जिसे शुक्रवार (31 जुलाई) को तीन महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है.
पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती फ़िलहाल अपनी बेटियों के साथ इस साल अप्रैल से अपने घर पर ही नज़रबंद हैं.

महबूबा मुफ़्ती अब भी क्यों हैं नज़रबंद
आख़िर ऐसा क्यों है कि कश्मीर के दो बड़े नेता रिहा हो गए और महबूबा मुफ़्ती अब भी अपने घर में नज़रबंद हैं? इसके पीछे क्या वजह है?
इस पर बीबीसी से बातचीत में इल्तिजा ने कहा, "इसका जवाब तो बीजेपी दे सकती है, गृह मंत्रालय दे सकता है या पीएम दे सकते हैं या पीएमओ वाले दे सकते हैं. जहाँ तक मैंने पिछले एक साल में देखा है, ये मेरी माँ को एक उदाहरण के तौर पर सेट करना चाहते हैं कि अगर आपका स्टैंड है, अगर आप जम्मू-कश्मीर के स्टेटस को अभी भी पकड़ कर रखेंगें, आप अगर कहेंगे कि आपने हमारा सबकुछ छीना, तो हम आपको जेल में डाल देंगे. मेरी माँ को इसके एक उदाहरण के तौर पर दिखाया जा रहा है."
वो आगे कहती हैं, "मेरी माँ इनके प्रेशर में नहीं आने वाली, अगर इनको लगता है कि वो टूट जाएंगी, तो ये ग़लत सोच रहे हैं."
उन्होंने ये भी बताया कि काफ़ी पहले सरकार ने कोशिश की थी नज़रबंद लोगों से बॉन्ड साइन कराने की, लेकिन महबूबा मुफ़्ती ने इनकार कर दिया था. बॉन्ड में एक साल तक अनुच्छेद 370 और 35A पर कुछ ना बोलने की बात थी, और ना मानने पर जुर्माना और दोबारा जेल का प्रावधान था.
पिछले दिनों रिहा होने के बाद उमर अब्दुल्लाह ने पहला इंटरव्यू दिया. उन्होंने उसमें कहा, "मैं इस केंद्र शासित प्रदेश में किसी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनूँगा. आप हमारा स्टेटहुड वापस करें."
इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर कश्मीर में हर तरफ़ चर्चा हुई कि उमर स्टेटहुड पर मुखर हैं पर अनुच्छेद 370 ख़त्म करने को लेकर मुखर नहीं.

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अनुच्छेद 370 और पूर्ण राज्य का दर्जा
क्या उमर के इस बयान को महबूबा मुफ़्ती ने पढ़ा?
इस सवाल के जवाब में इल्तिजा कहती हैं, "माँ जब निकलेंगी तो वो जवाब देंगी. मैं इस राजनीति में नहीं घुसना चाहती कि किसने क्या कहा, मेरी टिप्पणी किस पर क्या है."
इल्तिजा को अनुच्छेद 370 चाहिए या फिर राज्य का दर्जा वापस चाहिए, इस पर उनका जवाब था, "स्टेटहुड हुआ कि आपके पैर काट दिए गए और जूता दिया जा रहा है. लेकिन लोग आकर आपके घर को बर्बाद कर दें, सब सामान ले जाएं और बाद में बोलें घर की चाबी पकड़ो. स्टेटहुड पर तो गृह मंत्री ने कहा था हालात सुधरने पर मिल जाएगा स्टेटहुड. तो वो तो मसला नहीं है. वो तो मिलना ही मिलना है. अगर स्पेशल स्टेटस भूल कर हम स्टेटहुड की बात करें तो वो लोगों के साथ धोखा होगा"
पाँच अगस्त 2019 के पहले भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देता था, लेकिन अब उसे ख़त्म कर दिया गया है. उसी तरह से जम्मू-कश्मीर पहले राज्य हुआ करता था, अब उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है.
इल्तिजा आगे कहती हैं, "मैं बचपन से ऐसी हूं. या तो मुझे सब चाहिए या कुछ भी नहीं. हम किसी से भीख नहीं माँग रहे. हमें सब कुछ चाहिए और आप दीजिए"

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लेकिन महबूबा मुफ़्ती रिहा होने के बाद चुनाव लड़ेंगी या नहीं, वो सड़कों पर उतरेंगी या नहीं, इस पर इल्तिजा ने साफ़-साफ़ कुछ नहीं बोला. उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि हमें एक दूसरे पर उंगली नहीं उठाना है, मिल कर लड़ना है, अब वो वक़्त आ गया है.
इल्तिजा को लगता है कि पाकिस्तान में उनके इंटरव्यू को पसंद किया जाता है. बातों-बातों में उन्होंने इस बात का ज़िक्र भी किया.
जब उनसे पूछा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान जब अनुच्छेद 370 पर बोलते हैं तो उनकी क्या प्रतिक्रिया होती है?
इस पर इल्तिजा ने जवाब दिया, "आपको सुनकर अच्छा नहीं लगेगा, यहाँ के लोगों को उनकी स्पीच बहुत पसंद आई. ये मैं बोल सकती हूँ. मुझे इसमें ख़ौफ़ की कोई बात नहीं. मुझे उनकी स्पीच बहुत अच्छी लगी. किसी की नागरिकता देख कर, आपके अंदर बायस (पक्षपात) आए, हो सकता है बंदा सच बात कह रहा हो, पर वो पाकिस्तानी है तो पक्षपात करें, मैं इसमें विश्वास नहीं करती हूँ. अगर भारत ने ऐसा किया ही नहीं होता तो इसकी नौबत ही नहीं आती. क्यों किया इस तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदा."
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