कोरोना वायरस वैक्सीनः कहाँ तक पहुँची है ज़िंदगी बचाने की जंग

कोरोना वैक्सीन

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    • Author, टीम बीबीसी हिंदी
    • पदनाम, नई दिल्ली

क्या आपको मालूम है कि दुनिया में इससे पहले सबसे तेज़ वैक्सीन किस बीमारी के लिए खोजी गई थी. टाइम मैगज़ीन के मुताबिक़ वो बीमारी मम्प्स थी, जिसकी वैक्सीन तैयार करने में वैज्ञानिकों को चार साल का वक़्त लगा था.

लेकिन कोरोना महामारी जिस तेज़ी से फैल रही है और जिस रफ़्तार से लोगों की जान ले रही है, उसे देखते हुए इसकी वैक्सीन विकसित करने का काम ऐतिहासिक रूप से तेज़ गति से चल रहा है. इस समय कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ दुनिया भर में वैक्सीन विकसित की लगभग 23 परियोजनाओं पर काम चल रहा है.

लेकिन इनमें से कुछ ही ट्रायल के तीसरे और अंतिम चरण में पहुँच पाई हैं और अभी तक किसी भी वैक्सीन के पूरी तरह से सफल होने का इंतज़ार ही किया जा रहा है. इनमें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, मॉडर्ना फार्मास्युटिकल्स, चीनी दवा कंपनी सिनोवैक बॉयोटेक के वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स अहम हैं.

आइए हम जानते हैं कि इनमें से कौन सी वैक्सीन फ़िलहाल किस चरण में हैं.

ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन

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ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैक्सीन प्रोजेक्ट ChAdOx1 में स्वीडन की फार्मा कंपनी एस्ट्राज़ेनेका भी शामिल है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोविड वैक्सीन के ट्रायल का काम दुनिया के अलग-अलग देशों में चल रहा है.

मई के महीने में विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ़ साइंटिस्ट सौम्या विश्वनाथन ने ऑक्सफोर्ड के प्रोजेक्ट को सबसे एडवांस कोविड वैक्सीन कहा था. इंग्लैंड में अप्रैल के दौरान इस वैक्सीन प्रोजेक्ट के पहले और दूसरे चरण के ट्रायल का काम एक साथ पूरा किया गया.

वीडियो कैप्शन, कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के पहले चरण में कैसा मिल रहा है परिणाम

18 से 55 साल के एक हज़ार से ज़्यादा वॉलिंटियर्स पर किए गए ट्रायल में वैक्सीन की सुरक्षा और लोगों की प्रतिरोधक क्षमता का जायजा लिया गया था. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का ये वैक्सीन प्रोजेक्ट अब ट्रायल और डेवलपमेंट के तीसरे और अंतिम चरण में है.

ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन के ट्रायल के इस चरण में क़रीब 50 हज़ार वॉलिंटियर्स के शामिल होने की संभावना है. दक्षिण अफ्रीका, अमरीका, ब्रिटेन और ब्राज़ील जैसे देश ट्रायल के अंतिम चरण में भाग ले रहे हैं.

भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने भी ऑक्सफोर्ड कोविड वैक्सीन के भारत में इंसानों पर परीक्षण के लिए सरकार से मंजूरी मांगी है.

अगर अंतिम चरण के नतीजे भी सकारात्मक रहे, तो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम साल के आख़िर तक ब्रिटेन की नियामक संस्था 'मेडिसिंस एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी' (एमएचआरए) के पास रजिस्ट्रेशन के लिए साल के आख़िर तक आवेदन करेगी.

वैक्सीन

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मॉडर्ना कोविड वैक्सीन

माना जा रहा है कि मॉडर्ना वैक्सीन प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण के शुरुआती हिस्से में है. मॉडर्ना ट्रायल के इस चरण में 30 हज़ार लोगों पर इस वैक्सीन का परीक्षण करेगी. बोस्टन की इस कंपनी ने सोमवार को इसकी जानकारी दी.

विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर किसी नए प्रोडक्ट का परीक्षण तभी किया जाता है, जब वो नियामक एजेंसियों के पास मंज़ूरी के लिए दाखिल किए जाने के आख़िरी दौर में हो. राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी कोरोना वायरस के लिए इसे अब तक की सबसे तेज़ वैक्सीन प्रोजेक्ट करार दिया है.

मॉडर्ना के क्लीनिकल ट्रायल में अमरीका का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ (एनआईएच) भी शामिल है. एनआईएच के निदेशक फ्रांसिस कोलिंस का कहना है कि साल 2020 के आख़िर तक कोरोना की वैक्सीन बना लेने का लक्ष्य रखा गया है.

मॉडर्ना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफन बांसेल ने बताया, "मुझे उम्मीद है कि मॉडर्ना की वैक्सीन अमरीकी एजेंसी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के मापदंडों पर 75 फ़ीसदी तक खरी उतरेगी. हमें उम्मीद है कि ट्रायल में हमारी वैक्सीन कोरोना को रोकने में कामयाब होगी और हम इससे महामारी को ख़त्म कर पाएँगे."

कोविड-19 की बीमारी के लिए ज़िम्मेदार वायरस Sars-Cov-2 की जेनेटिक संरचना को हासिल करने में मॉडर्ना को महज 42 दिन लगे थे. मॉडर्ना वैक्सीन के पहले चरण के नतीजे सकारात्मक रहे थे और दूसरे चरण के आँकड़े अगस्त के आख़िर तक या सितंबर में जारी किए जाने की उम्मीद है.

चाइनीज़ कोविड वैक्सीन

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चीन की प्राइवेट फार्मा कंपनी सिनोवैक बॉयोटेक जिस कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, वो ट्रायल के तीसरे और आख़िरी चरण में पहुँच चुकी है. सरकारी मंजूरी से पहले किसी वैक्सीन को इंसानों पर परीक्षण में खरा उतरना होता है.

मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड के बाद ट्रायल के अंतिम चरण में पहुँचने वाला ये दुनिया का तीसरा वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट है. CoronaVac नाम की इस वैक्सीन का फ़िलहाल ब्राज़ील में नौ हज़ार वॉलिंटियर्स पर ट्रायल चल रहा है.

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कोरोना महामारी के लिए जिस रफ़्तार से वैक्सीन डेवलेपमेंट का काम चल रहा है, उसे देखते हुए ये कहा जा सकता है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले साल की शुरुआत तक सिनोवैक बॉयोटेक की वैक्सीन सरकारी मंज़ूरी के लिए तैयार हो सकती है.

साल 2002-2003 के बीच जब सार्स महामारी फैली थी, तो इससे दुनिया भर में 774 लोगों की जानें गई थीं. तब सिनोवैक ने पहले चरण के ट्रायल शुरू कर दिए थे लेकिन वो महामारी अचानक ही ख़त्म हो गई. हालाँकि तब कंपनी को वैक्सीन प्रोजेक्ट बंद कर देने से बड़ा नुक़सान हुआ था, लेकिन ये पूरी तरह से बेकार नहीं गया.

17 साल बाद जब कोरोना महामारी दुनिया के सामने आई, तो सिनोवैक ने अपने पुराने रिसर्च को फिर से शुरू कर दिया, क्योंकि कोविड-19 सार्स महामारी से काफ़ी मिलती-जुलती है.

भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन

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इस समय भारत में केवल दो वैक्सीन प्रोजेक्ट्स को इंसानों पर परीक्षण की मंज़ूरी दी गई है. फार्मा कंपनी भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन उनमें से एक है. दूसरा वैक्सीन प्रोजेक्ट ज़ाइडस कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड का है.

कोवैक्सीन के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में सरकारी एजेंसी इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी शामिल हैं.

इसके ह्यूमन ट्रायल के लिए देश भर में 12 संस्थाओं को चुना गया है, जिनमें रोहतक की पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़, हैदराबाद की निज़ाम इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ शामिल हैं.

आईसीएमआर के महानिदेशक डॉक्टर बलराम भार्गव ने पिछले दिनों इन 12 संस्थाओं के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर्स से कोवैक्सीन ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल की रफ़्तार में तेज़ी लाने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि ये शीर्ष प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में से एक है, जिस पर सरकार के शीर्ष स्तर से निगरानी रखी जा रही है.

फ़ाइज़र और बॉयोएनटेक की वैक्सीन

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अमरीकी फार्मा कंपनी 'फ़ाइज़र' और जर्मन कंपनी 'बॉयोएनटेक' मिलकर एक कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट BNT162b2 पर काम कर रही हैं. सोमवार को दोनों कंपनियों ने एक साझा बयान जारी कर बताया कि वैक्सीन प्रोजेक्ट इंसानों पर परीक्षण के आख़िरी चरण में पहुँच गई है.

अगर ये परीक्षण सफल रहे, तो अक्तूबर के आख़िर तक वे सरकारी मंज़ूरी के लिए आवेदन दे सकेंगे. कंपनी की योजना साल 2020 के आख़िर तक वैक्सीन की 10 करोड़ और साल 2021 के आख़िर तक 1.3 अरब खुराक की आपूर्ति सुनिश्चित करने की है.

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का दावा करने वाली इस वैक्सीन के दो खुराक दिए जाएँगे. दुनिया भर में 120 जगहों पर इसके ट्रायल चल रहे हैं और इसमें 30 हज़ार वॉलिंटियर्स के शामिल होने की संभावना है.

अमरीका की सरकार ने फ़ाइज़र के साथ दस करोड़ खुराक ख़रीदने का समझौता पहले से कर रखा है. समझौते के तहत ज़रूरत पड़ने पर 50 करोड़ खुराक की आपूर्ति और की जाएगी.

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