विकास दुबे: यूपी पुलिस के सामने अब क्या-क्या विकल्प हैं?

विकास दुबे

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    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

कानपुर में आठ पुलिकर्मियों की हत्या के मुख्य अभियुक्त विकास दुबे को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ़्तार कर लिया गया है.

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारें जहां इसे गिरफ़्तारी बता रही हैं, वहीं विपक्षी नेता पूछ रहे हैं कि कहीं ये सोच समझकर किया गया आत्मसर्मपण तो नहीं है.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट करके पूछा है, “ख़बर आ रही है कि ‘कानपुर-काण्ड’ का मुख्य अपराधी पुलिस की हिरासत में है. अगर ये सच है तो सरकार साफ़ करे कि ये आत्मसमर्पण है या गिरफ़्तारी. साथ ही उसके मोबाइल की CDR सार्वजनिक करे जिससे सच्ची मिलीभगत का भंडाफोड़ हो सके.”

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कांग्रेस पार्टी की नेता प्रियंका गांधी ने लिखा है, “कानपुर के जघन्य हत्याकांड में यूपी सरकार को जिस मुस्तैदी से काम करना चाहिए था, वह पूरी तरह फेल साबित हुई. अलर्ट के बावजूद आरोपी का उज्जैन तक पहुंचना, न सिर्फ़ सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है. बल्कि मिलीभगत की ओर इशारा करता है. तीन महीने पुराने पत्र पर ‘नो एक्शन’ और कुख्यात अपराधियों की सूची में ‘विकास’ का नाम न होना बताता है कि इस मामले के तार दूर तक जुड़े हैं. यूपी सरकार को मामले की CBI जांच करा सभी तथ्यों और प्रोटेक्शन के ताल्लुक़ातों को जगज़ाहिर करना चाहिए."

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उत्तर प्रदेश पुलिस बीते एक हफ़्ते से विकास दुबे को पकड़ने की कोशिश कर रही थी.

इस कोशिश में विकास दुबे गैंग के कई सदस्यों की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो चुकी है.

इसके बावजूद पुलिस विकास दुबे को पकड़ने में नाकाम रही और उज्जैन की स्थानीय पुलिस ने विकास दुबे को गिरफ़्तार किया है.

लेकिन दुबे की गिरफ़्तारी के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनके एनकाउंटर होने जैसी आशंकाएं जता रहे हैं.

ऐसे में सवाल ये उठता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस अब इस मामले में क्या-क्या कर सकती है?

बीबीसी ने इसी मुद्दे के क़ानूनी और प्रक्रिया से जुड़े पक्ष को समझने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक बृजमोहन सारस्वत से बात की.

विकास दुबे

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क्या होगा यूपी पुलिस का अगला क़दम

विकास को उज्जैन से उत्तर प्रदेश लाने के लिए यूपी पुलिस की टीमें रवाना हो चुकी हैं.

सारस्वत मानते हैं कि उत्तर प्रदेश पुलिस की टीमें स्वाभाविक रूप से विकास दुबे के अरेस्ट वारंट की कॉपी लेकर उज्जैन कोर्ट पहुंचेगी ताकि वे अभियुक्त की ट्रांज़िट रिमांड ले सकें.

सारस्वत कहते हैं, “इस मामले में सबसे पहले विकास दुबे की गिरफ़्तारी उस थाने में दर्ज की जाएगी जहां पर उन्हें सबसे पहले पकड़ा गया है. इसके बाद यूपी पुलिस दुबे के अरेस्ट वारंट को स्थानीय मजिस्ट्रेट के सामने पेश करेगी ताकि मजिस्ट्रेट दुबे की ट्रांज़िट रिमांड दे सकें.”

“सीआरपीसी की धारा 80 और 81 के तहत अगर पुलिस किसी अपराधी को दूसरे ज़िले में पकड़ती है तो उसे पहले कोर्ट से ट्रांज़िट रिमांड लेनी होगी. इस प्रक्रिया में अपराधी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा सकता है.”

“विकास दुबे के मामले में भी यूपी पुलिस कोर्ट के सामने अरेस्ट वारंट पेश करेगी ताकि कोर्ट उसे कानपुर ले जाने की रिमांड दे सके. यूपी पुलिस कोर्ट को ये भी बताएगी कि वह किस साधन (कार, बस, या हवाई जहाज़ आदि) से अपराधी को लेकर जाएगी. और इस आधार पर ही ट्रांज़िट रिमांड का समय तय किया जाता है.”

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कहीं कोरोना पीड़ित तो नहीं विकास दुबे?

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, फ़रीदाबाद में पकड़े गए विकास दुबे के सहयोगी कार्तिकेय उर्फ़ प्रभात के कोरोना संक्रमित होने की सूचना सामने आई थी.

ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या उत्तर प्रदेश पुलिस विकास दुबे की रिमांड लेने से पहले उनकी मेडिकल जाँच में कोरोना वायरस की भी जाँच कराएगी.

सारस्वत कहते हैं, “नियम ये कहते हैं कि ट्रांज़िट रिमांड से पहले पुलिस को कोर्ट के सामने अभियुक्त की मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट पेश करनी होती है. इस प्रक्रिया के तहत एक सरकारी डॉक्टर अभियुक्त की मेडिकल जाँच करके उसके स्वस्थ होने पर इस बात की पुष्टि करता है कि वह पुलिस द्वारा ले जाए जाने के लिए स्वस्थ है. कई बार ऐसा भी होता है कि डॉक्टर ये पाते हैं कि अभियुक्त गंभीर बीमारी से ग्रसित है और वे कोर्ट को इसकी जानकारी देते हैं. ऐसी स्थिति में कोर्ट पुलिस की ट्रांज़िट रिमांड की अर्ज़ी ख़ारिज कर देती है. सन 82 में जब वीरेंद्र प्रताप साही को पकड़ने के लिए पुलिस आई थी तो डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि वह गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, इसके बाद कोर्ट ने उनका इलाज कराने का आदेश दिया था."

“ऐसे में पुलिस मेडिकल की प्रक्रिया का पालन ज़रूर करेगी. और अगर अभियुक्त के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका है तो उनका कोरोना टेस्ट कराने में कोई हर्ज़ नहीं हैं.”

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एनकाउंटर की आशंकाएं

विकास दुबे की गिरफ़्तारी की ख़बरें आने के बाद से ये आशंकाएं जताई जा रही हैं कि वे उज्जैन से कानपुर कोर्ट तक पहुंच पाएंगे या नहीं. क्योंकि इससे पहले पुलिस एनकाउंटर में विकास दुबे गैंग के कई सदस्यों की मौत हो चुकी है.

आईपीएस सारस्वत कहते हैं, “लोग ये सब इसलिए कह रहे हैं क्योंकि वे पुलिस पर विश्वास नहीं करते हैं. लेकिन मेरा अनुभव कहता है कि इस मामले में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आएगी क्योंकि इस मामले में सिर्फ़ अभियुक्त और पुलिस शामिल नहीं है. इस मामले में दो प्रदेशों की पुलिस, न्याय तंत्र, स्वास्थ्य तंत्र और मीडिया समेत कई पक्ष शामिल हैं. ऐसे में इस तरह की नौबत इस केस में नहीं आएगी.”

सारस्वत ये भी कहते हैं कि इस मामले में संभव है कि अभियुक्त के वकील कोर्ट से ये कहें कि उन्हें पुलिस के साथ कानपुर तक जाने की इजाज़त दी जाए.

वे कहते हैं, “ये संभव है कि इस अभियुक्त ने कुछ वकीलों को तैयार करके रखा हो जो कि उज्जैन और कानपुर कोर्ट के सामने इनका पक्ष रख सकें.”

वहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह कहते हैं कि आने वाले दिनों में पुलिस कोर्ट से रिमांड लेकर अभियुक्त से पूछताछ करेगी जिससे सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा.

आशंकाएं बहुत हैं लेकिन इतना तय है कि इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस जिन आलोचनाओं का सामना कर रही है, उनका जवाब उसे अपने काम से ही देना होगा.

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