कोरोना वायरस: क्या अनलॉक की कला में फ़ेल होता जा रहा है बिहार?

नीतीश कुमार और अन्य नेता

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    • Author, नीरज प्रियदर्शी
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए

"बिहार के सब भाजपा कार्यकर्ता एवं साथी लोग अभिनंदन के पात्र बानी जा. लोग कहत रहे कि ओहिजा ग़रीबी बा, कोरोना ज़्यादा फैली, लेकिन रउआ लोग सब केहू के ग़लत साबित कर देहनी."

भोजपुरी में यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार जुलाई को बिहार बीजेपी के कार्यकर्ताओं से कही. वे कह रहे थे कि बिहार बीजेपी के लोगों ने कोरोना के दौरान इतना अच्छा काम किया कि यहां संक्रमण का प्रसार अधिक नहीं हुआ.

लेकिन बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े कहते हैं कि प्रधानमंत्री के संबोधन के दो दिनों (चार और पांच जुलाई) के अंदर बिहार में कोरोना संक्रमण के रिकॉर्ड 950 पॉज़िटिव मामले बढ़े हैं.

दरअसल, संक्रमण के रिकॉर्ड मामले मिलने की बात केवल दो दिनों की नहीं है. पिछले कुछ हफ़्तों से लगातार यही हाल है. हर दिन बीते दिन से कोरोना संक्रमण के अधिक मामले मिल रहे हैं.

कोरोना के बढ़ते मामले

अनलॉक होते बिहार में पॉज़िटिव मामलों की संख्या 3807 (31 मई को ) से बढ़कर 11,860 पहुंच गई है. इस तरह इस दौरान संक्रमण के मामले लगभग तीन गुणा बढ़े हैं.

संक्रमण का प्रसार ऐसा है कि अब यह केवल बाहर से आए लोगों या आम लोगों तक ही नहीं रहा.

कई ज़िलों के डीएम और एसपी इसकी चपेट में आ चुके हैं, अस्पतालों में काम करने वाले दर्जनों डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ़ संक्रमित हैं, मंत्रियों- नेताओं तक भी संक्रमण पहुंच गया है, यहां तक कि विधानसभा के सभापति भी सपरिवार संक्रमित हो गए हैं.

बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में महाराष्ट्र में कोविड टास्क फ़ोर्स के प्रमुख डॉ संजय ओक ने कहा था कि "लॉकडाउन अगर विज्ञान है तो अनलॉक कला है, जिसे विभिन्न चरणों में शुरू किया जाता है."

लेकिन बिहार की मौजूदा स्थिति अनलॉक की कला में विफलता की कहानी बयां कर रही है.

इसकी बानगी बिहार के राजनीतिक और सामाजिक गलियारे में भी देखी जा सकती है जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष का सारा फ़ोकस आने वाले चुनाव पर शिफ़्ट हो गया है.

बिहार में संक्रमण के प्रसार को रोकने के उपायों से ज़्यादा चुनावी गतिविधियां हो रही हैं, सड़कों पर ट्रैफ़िक जाम लग रहा है, समारोह और आयोजनों में लोग जुट रहे हैं.

लॉकडाउन में छूट की शर्तें सिर्फ़ काग़ज़ों और घोषणाओं तक सिमट गई लगती हैं.

नीतीश कुमार और अन्य नेता

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राजधानी पटना बना कोरोना हब

राजधानी पटना अपने एक हज़ार पॉज़िटिव मरीज़ों के साथ राज्य का कोरोना हब बना हुआ है. लेकिन बावजूद इसके, बाज़ारों में पहले की तरह भीड़ लगने लगी है और आलम यह है कि सड़कों पर दौड़ती बसों में लोग लद-लदकर सफ़र करते दिखते हैं.

वैसे तो यहां की सरकार भी कहती है कि मास्क पहनें और काम पर चलिए. मगर सरकार से जुड़े लोग स्वयं कई मौक़ों पर मास्क से परहेज़ करते दिखे.

कुछ दिनों पहले नव निर्वाचित विधान पार्षदों के शपथग्रहण समारोह की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, उसमें सभी निर्वाचित पार्षदों के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, विधान सभा के स्पीकर विजय चौधरी, डिप्टी सीएम सुशील मोदी समेत कई अन्य लोग सोशल डिस्टेंसिंग का मज़ाक़ उड़ाते दिख रहे थे.

यह एक ग्रुप तस्वीर थी जिसमें शामिल 16 लोगों के बीच दो ग़ज़ की दूरी का नामोनिशान नहीं था और आधे से अधिक लोगों के कान से लटका मास्क मुंह और नाक को ढकने की जगह उनके गले की शोभा बढ़ा रहा था.

इसी समारोह के बाद विधान परिषद के सभापति सपरिवार संक्रमित होने की ख़बर आई.

उस तस्वीर के बहाने सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह कहते हैं, "जब नेता जनता के सामने इस तरह से पेश आने लगें तो स्वाभाविक है कि जनता संक्रमण को गंभीरता से नहीं लेगी."

संतोष कहते हैं, "जहां तक सरकार की गंभीरता का सवाल है तो वह अब चुनावी मोड में आ गई है. सरकार समय से चुनाव करवाने की तैयारी में है इसलिए इस विषम परिस्थिति में भी एक न्यू नॉर्मल स्थापित करना चाह रही है, जहां कोविड-19 को लेकर निगेटिव बातें कम हों, पॉज़िटिव बातें अधिक हों."

मुज़फ़्फ़रपुर के डीएम

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मुज़फ़्फ़रपुर के डॉक्टर ही बन रहें हैं मरीज़

पिछले कुछ दिनों के दरम्यान यह भी देखने को मिला है कि बिहार के अलग-अलग शहरों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ़ में संक्रमण के मामले बढ़े हैं.

केवल मुज़फ़्फ़रपुर शहर में तीन दर्जन से अधिक डॉक्टर संक्रमित हैं. डॉक्टरों का हब कहा जाने वाला वहां का जूरन छपरा इलाक़ा कोरोना हब बन गया है.

संक्रमितों में प्राइवेट और सरकारी दोनों अस्पतालों के डॉक्टर शामिल हैं. परिणाम ये हुआ है कि शहर के अधिकांश नर्सिंग होम और प्राइवेट अस्पताल बंद हो चुके हैं. मरीज़ दर-दर भटकने को मजबूर हैं.

मुज़फ़्फ़रपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसकेसीएचएम के 10 डॉक्टर संक्रमित पाए गए हैं.

वहां के मेडिकल सुपरिटेंडेंट सुनील कुमार शाही ने बीबीसी से कहा, "अस्पताल में भीड़ इतनी हो जा रही है कि संभालना मुश्किल हो रहा है. यही कारण है कि डॉक्टर भी ख़ुद को नहीं बचा पा रहे. लोग बीमार पड़ेंगे तो डॉक्टर को दिखाने तो आएंगे ही. इसमें तो कुछ बुरा नहीं है. लेकिन ये लोग न तो सोशल डिस्टेंसिंग फ़ॉलो कर रहे हैं और न ही मास्क लगा रहे हैं. हम डॉक्टर होने के नाते लोगों को सलाह भर दे सकते हैं. इसका कड़ाई से पालन कराना तो सरकार की ज़िम्मेदारी है, जहां हम बिल्कुल फ़ेल हैं."

रिपोर्ट लिखते हुए यह नई जानकारी मिली कि पटना के बड़े अस्पताल आईजीआईएमएस के डायरेक्टर डॉ एन‌ आर विश्वास भी कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं. पहले उनका ड्राइवर पॉज़िटिव मिला था.

आम आदमी की जाँच रिपोर्ट तीन दिनों में क्यों?

नीतीश कुमार, अधिकारियों के साथ

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विधान परिषद के सभापति की कोरोना रिपोर्ट पॉज़िटिव आने से सूबे के सियासी जगत में हलचल मच गई. उनसे और शपथग्रहण समारोह से जुड़े सभी लोगों की जाँच हुई. सीएम नीतीश कुमार, विधानसभा के स्पीकर विजय चौधरी और डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने भी शनिवार को अपनी जाँच कराई. एक पुलिस अधिकारी को छोड़ बाक़ी सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है. बीबीसी से इसकी पुष्टि सीएम के पीआरओ विरेंद्र कुमार शुक्ला ने की.

सबसे ख़ास बात ये रही कि सीएम समेत दूसरे अन्य नेताओं और अधिकारियों की टेस्ट रिपोर्ट सैंपल देने के कुछ ही घंटों बाद उसी दिन आ गई.

लेकिन सोशल मीडिया पर लोग अब यह सवाल करने लगे हैं कि क्या बिहार सरकार कोरोना जाँच की प्रक्रिया में भेदभाव कर रही है? यह कहा जा रहा है कि आम आदमी की कोरोना रिपोर्ट आने में कम से कम दो से तीन दिनों का वक़्त लग जा रहा है.

नीतीश कुमार के पीआरओ विरेंद्र इस सवाल के जवाब में कहते हैं, "ऐसे आरोप लगाने वालों को समझना चाहिए कि सीएम के साथ एक प्रोटोकॉल भी है, जिसका पालन करना होता है."

आम आदमी की जाँच में देरी के सवाल पर विरेंद्र कुमार शुक्ल कहते हैं कि वे केवल मुख्यमंत्री से जुड़े मामलों के जवाब देने के लिए ज़िम्मेवार हैं.

प्रतिदिन टेस्ट की गति बढ़ क्यों नहीं रही?

कोरोना वायरस के सैंपल टेस्ट के मामले में बिहार शुरू से ही सबसे पीछे चल रहा राज्य रहा है. पाँच जुलाई की शाम को चार बजे तक राज्य में कोरोना वायरस के 2,57,859 सैंपल टेस्ट हुए हैं.

12 करोड़ से अधिक की आबादी वाले राज्य के लिए अभी तक इतने सैंपल टेस्ट बहुत कम कहे जा सकते हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले कई दिनों से कह रहे हैं, "जाँच की गति बढ़ाई जाए. रोज़ाना 20 हज़ार सैंपल टेस्ट हों."

लेकिन सैंपल टेस्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक़ पिछले क़रीब एक हफ़्ते से रोज़ाना औसतन आठ हज़ार लोगों की जाँच की गई है.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय कहते हैं, "पिछले महीने से तुलना करें तो जाँच की गति बहुत तेज़ी से बढ़ी है. लैब बढ़े हैं. आने वाले हफ़्ते तक हम रोज़ 20 हज़ार जाॉँच करने में सक्षम हो जाएंगे."

मुज़फ़्फ़रपुर

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बढ़ते मामलों से लोगों में डर नहीं?

कोविड-19 के आने वाले ख़तरे के लिहाज़ से यह बात भले ही महत्वपूर्ण है कि बिहार में संक्रमण बहुत तेज़ी से फैल रहा है, मगर बिहार की सरकार, नेताओं और अधिकारियों का ज़ोर यह बताने पर ज़्यादा है कि यहां का रिकवरी रेट 73.90 फ़ीसद है जो कि उनके मुताबिक़ बहुत बेहतर है.

नेताओं और अधिकारियों की सुनकर और मीडिया से जानकर अब यही बात यहां के आम लोग भी कहने लगे हैं. ऐसे में सवाल यह है कि क्या ऐसा कह देने और मान लेने भर से आने वाला ख़तरा कम हो जाएगा?

डॉ सुनील कुमार शाही कहते हैं, "यहां के लोग अभी ख़तरे को समझ ही नहीं पा रहे हैं. समझते तो इस तरह का व्यवहार नहीं करते. पर हमें पता है कि किसी भी नए एरिया से एक भी नया मामला मिलना बहुत चिंता की बात है. और यहां तो रोज़ 400-500 मिल जा रहे हैं. अगर लोग अभी से भी नहीं चेते तो आने वाला समय बहुत ख़राब होने जा रहा है."

डॉ सुनील जिस ख़राब समय की बात कह रहे हैं, लगता है उसकी शुरुआत हो चुकी है. क्योंकि मधुबनी में बढ़ रहे मामलों के कारण वहां अगले तीन दिनों के लिए फिर से पूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक़ ख़बर है कि आने वाले दिनों में दरभंगा, मुज़फ़्फ़रपुर, भागलपुर और पटना में भी फिर से लॉकडाउन लग सकता है.

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सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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कोरोना वायरस के बारे में जानकारी
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