कोरोना वायरसः अनलॉक-1 के दौरान कैसा रहा इन बड़े राज्यों का हाल?
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कोरोना वायरस के प्रभाव को कम करने की लिहाज से केंद्र सरकार ने मार्च में लॉकडाउन लगाया. इसे दो बार बढ़ाया गया और फिर 1 जून से केंद्र ने अनलॉक-1 की घोषणा की. इस दौरान राज्यों में आर्थिक गतिविधियां भी धीरे धीरे शुरू हुईं. अब आज यानी पहली जुलाई से अनलॉक-2 की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है.
बीबीसी ने विभिन्न राज्यों में अपने सहयोगियों से यह जानना चाहा कि अनलॉक-1 के बीते एक महीने के दौरान राज्यों का क्या हाल रहा. वहां कोरोना वायरस के मामलों में कितना इज़ाफ़ा हुआ. राज्य सरकारें इससे निपटने के क्या उपाय कर रही हैं और अनलॉक-1 का आर्थिक गतिविधियों पर क्या असर पड़ा.
अनलॉक होते बिहार के सामने कोरोना के साथ बाढ़ भी चुनौती
बिहार से बीबीसी के सहयोगी नीरज प्रियदर्शी ने बताया कि जैसे-जैसे बिहार अनलॉक हो रहा है, कोरोना संक्रमण के मामले वैसे-वैसे बढ़ते जा रहे हैं.
बिहार के स्वास्थ्य विभाग की तरफ़ से दी गई जानकारी के अनुसार मंगलवार को शाम चार बजे तक तक सूबे में संक्रमण के मामले बढ़कर 9,744 हो गए हैं. 31 मई तक पॉजिटिव मामलों की संख्या 3807 थी. यानी पिछले एक महीने के दौरान 5,937 नए मामले आए हैं.
हालांकि, बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने रिकवरी रेट को लेकर जो आंकड़े जारी किए हैं वो थोड़ी राहत देने वाले हैं. यहां रिकवरी रेट 77 फ़ीसदी है, यानी 7,544 मरीज़ ठीक भी हो चुके हैं.
कोरोना काल की शुरुआत से ही बिहार में आबादी के हिसाब से कम सैंपल टेस्ट को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे. ये सवाल अब भी बने हुए हैं. क्योंकि जांच की प्रक्रिया शुरू होने के लगभग तीन महीने बाद भी अब तक रोज़ाना अधिकतम 10,000 सैंपल टेस्ट ही जांचे जा रहे हैं.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को समीक्षा बैठक के बाद सैंपल टेस्ट को रोजाना 15,000 ले जाने की बात कही.
कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के साथ-साथ बिहार पर बाढ़ का संकट भी मंडरा रहा है. भारी बारिश के कारण उत्तर भारत की सभी प्रमुख नदियां गंडक, कमला, बागमती, कोसी उफ़ान पर हैं. सैकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है. डर इसलिए ज़्यादा बढ़ गया है क्योंकि मौसम विभाग ने बिहार में इस बार सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जताई है.
बिहार के सामने चुनौती लॉकडाउन के दौरान राज्य में लौटे 30 लाख से अधिक प्रवासियों को रोज़गार देने की भी है. हालांकि बिहार सरकार का यह कहना है कि वह लौटकर आए सभी लोगों को रोज़गार देने में सक्षम है और किसी को बिना काम के नहीं रखेगी.
सरकार ने मज़दूरों को उनकी स्किल के आधार पर पहचानकर काम देने की योजना बनाई है, लेकिन लॉकडाउन के एक महीने गुज़र जाने के बाद भी इस योजना के तहत अभी तक केवल पांच लाख मज़दूरों का ही पंजीकरण हो सका है.
असम से बीबीसी से सहयोगी दिलीप कुमार शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकारी की तरफ से घोषित अनलॉक-1 यानी एक जून से लेकर 30 जून तक के दरम्यान असम में हालात ठीक नहीं रहे. दरअसल अनलॉक-1 को लेकर जो दिशानिर्देश जारी किए गए थे उनमें कुछ गतिविधियों ऐसी थीं जिसके कारण कोविड-19 के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई.
हालातों के बारे में इस बात से समझा जा सकता है कि अनलॉक-1 के अंतिम दिनों के दौरान राजधानी शहर गुवाहाटी को 14 दिनों के लिए संपूर्ण लॉकडाउन कर देना पड़ा. फिलहाल गुवाहाटी पूरी तरह बंद है.
असल में 1 जून को राज्य में कोरोना पॉजिटिव के कुल मामले 1463 थे जिनमें से 284 मरीज़ों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी. राज्य में उस समय तक कुल चार लोगों की मौतें हुई थीं.
लेकिन 30 जून की दोपहर तक स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक ट्वीट के अनुसार इस समय असम में कोरोना पॉजिटिव के कुल 7,835 मामले हैं, 5333 लोग ठीक भी हुए है. जबकि 30 जून तक कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 12 हो गई है.
असम के स्वास्थ्य मंत्री ने अनलॉक-2 शुरू होने के ठीक पहले कहा कि कामरूप (मेट्रो) ज़िले में गुवाहाटी और उसके आसपास के इलाकों में सोमवार से शुरू हुए लॉकडाउन जो शहर में कोविड-19 के ख़िलाफ़ "करो या मरो" की लड़ाई है.
जब अनलॉक-1 शुरू हुआ था उस समय हिमंत विस्वा सरमा ने कहा था कि हम हर समय कोविड-केंद्रित नहीं हो सकते. अनलॉक करने से हमें प्रभावी कोविड प्रबंधन का मौका मिलेगा और इससे अर्थव्यवस्था में भी सुधार कर सकेंगे.
असम सरकार ने अनलॉक-1 के नए दिशानिर्देश के तहत कोविद -19 महामारी के रोकथाम के लिए चरणबद्ध तरीके से सरकारी कार्यालयों समेत व्यापारिक प्रतिष्ठानों को खोलने की अनुमति दी थी. इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ सरकार ने कड़ी कार्रवाई भी की लेकिन बाहरी राज्यों से रेल, सड़क और हवाई जहाज से जैसे लोगों का प्रदेश में आना शुरू हुआ कोविड-19 के मामलों में तेज़ी से इज़ाफा होना शुरू हो गया.
हालांकि असम सरकार ने क्वारंटीन के नियमों को तोड़ने वालों के ख़िलाफ़ 'हत्या का प्रयास' में लगने वाली धाराएं लगाने की भी चेतावनी जारी कर रखी है. लेकिन इसी दौरान कुछ ऐसे मामले सामने आए जिनकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं थी.
ऐसे में खासकर जब गुवाहाटी में सामाजिक स्तर पर मामले फ़ैलने लगे तो प्रशासन को संपूर्ण लॉकडाउन जैसा कदम उठाने पड़े. गुवाहाटी में यह लॉकडाउन 12 जुलाई शाम 6 बजे तक जारी रहेगा.
साथ ही राज्य सरकार ने सभी ज़िलों के अंतर्गत आने वाले नगरपालिका और टाउन कमेटी वाले शहरी क्षेत्रों को सप्ताहांत शनिवार और रविवार के दौरान पूरी तरह लॉकडाउन करने का आदेश दिया है. जबकि समूचे राज्य में शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक कर्फ़्यू लगाया गया है.
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झारखंड में चारगुना बढ़ गए पॉजिटिव मरीज़
झारखंड से बीबीसी के सहयोगी रवि प्रकाश ने बताया कि अनलॉक-1 के दौरान राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या चौगुनी बढ़ गई.
31 मई की रात तक राज्य में सिर्फ 610 पॉजिटिव लोगों की पहचान की गई थी और 349 एक्टिव केस थे. जबकि इससे होने वाली मौतों की संख्या भी सिर्फ पांच थी. अब अनलॉक-2 की शुरुआत हो चुकी है. बीते एक महीने के दरम्यान कोरोना से होने वाली मौत का आंकड़ा 15 पर जा पहुंचा है. यानी अनलॉक-1 के दौरान मौत के मामले में तीन गुना इजाफ़ा हुआ है.
वहीं कोरोना संक्रमितों की संख्या भी मंगलवार की सुबह तक 2430 थी. स्पष्ट है कि अनलॉक-1 के दौरान यहां संक्रमण चार गुना तेज़ी से बढ़ा लेकिन इसके मरीज़ ठीक भी होते गए. यही वजह है कि 31 मई को एक्टिव रहे 349 केसेज की तुलना में अब 566 एक्टिव केस हैं.
अनलॉक-1 के दौरान यहां कुल 1820 पॉजिटिव लोगों की पहचान की गई और 10 लोगों की मौत भी हुई. संक्रमण के लिहाज से अनलॉक-1 झारखंड के लिए ठीक नहीं रहा.
इस दौरान बाहर से लोगों का आना ज़्यादा तेज़ी से हुआ और सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही से भी कोरोना कैरियर इधर-उधर घूमते रहे. इस कारण संक्रमित मरीजों की संख्या तेज़ी से बढ़ी.
हालांकि, इस दौरान दुकानों के खुलने और व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन से लोगों को कुछ राहत भी मिली. हालांकि, अनलॉक के बावजूद झारखंड सरकार ने धार्मिक स्थलों को नहीं खोलने का फ़ैसला किया था. इस कारण मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा आदि अभी तक बंद हैं.
ई-कॉमर्स, जूते-चप्पलों और कपड़ों की दुकानें आदि पर अब भी कई तरह के प्रतिबंध हैं. इनके संचालन की अनुमति भी बहुत बाद में दी गई. ऐसी जगहों पर भीड़ अभी भी नदारद है. ऐसे में किसी व्यापारिक गतिविधि के कारण संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है.
फुटपाथ की दुकानें और खोमचे वालों की दुकानें खुल जाने के कारण उन्हें थोड़ी राहत मिली है. बार, रेस्टोरेंट, होटल, सैलून, पार्लर, स्टेडियम, मॉल, सिनेमा हॉल जैसी जगहें अभी भी बंद हैं. इस कारण आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से पटरी पर नहीं लौट सकी हैं.
स्कूलों-कॉलेजों के बंद रहने के कारण शैक्षणिक गतिविधियां भी सिर्फ आनलाइन माध्यम से संचालित की जा रही हैं.
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राजस्थानः अनलॉक-2 में खुलेंगे छोटे धार्मिक स्थल
राजस्थान से बीबीसी के सहयोगी मोहर सिंह मीणा ने जानकारी दी बढ़ते कोरोना पॉजिटिव मामलों के बीच आज यानी 1 जुलाई से अनलॉक-2 के लिए राज्य सरकार ने भी गाइडलाइंस जारी कर लोगों को राहत देने का प्रयास किया है. राज्य सरकार समय-समय पर गतिविधियां शुरू कर लोगों को राहत दे रही है.
राजस्थान में अनलॉक-1 के दौरान राजस्थान बोर्ड ऑफ़ सेकंड्री एजुकेशन ने दसवीं और बारहवीं की बाकी बची परीक्षाएं भी आयोजित करा ली हैं. हालांकि, राज्य में शिक्षण संस्थान खोलने पर अनलॉक-2 में भी कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है.
जबकि आर्थिक गतिविधियां तो अनलॉक-1 से ही शुरू कर दी गई थीं. इससे होटल, रेस्टोरेंट, बार, दुकानें, शॉपिंग मॉल समेत कई आर्थिक गतिविधियां शुरू होने से लोगों को राहत मिली है.
फैक्ट्रियों में काम शुरू किया गया और लोगों को मनरेगा के तहत भी रोज़गार उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
राजस्थान में बसों का संचालन शुरू किया जा चुका है और लगातार बसों की संख्या में बढ़ोतरी की जा रही है, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. हालांकि, सिटी बसों को फिलहाल शुरू नहीं किया गया है.
लॉकडाउन के बाद लोगों की थम चुकी ज़िन्दगी को फिर से पटरी पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं. वहीं, लोगों को कोरोना से बचाव के लिए राज्य स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है.
ग्रामीण इलाकों में छोटे धार्मिक स्थलों को खोला जाएगा, जहां प्रतिदिन 50 ही दर्शनार्थी आते हों. जबकि शहरों में धार्मिक स्थल नहीं खोलेने पर अभी कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है.
राजस्थान में अनलॉक-1 में कोरोना के मामलों में बड़ा अंतर देखने को नहीं मिला है. सरकार लगातार दावा कर रही है कि राज्य का रिकवरी रेट 78 फ़ीसदी तक रहा है. अनलॉक-2 के साथ ही अब 1 जुलाई 2020 से राज्य में आने वाले लोगों को 14 दिन के होम कवारंटीन कि बाध्यता भी नहीं होगी.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में 1 जून 2020 तक 9,100 कोरोना पॉज़िटव मामले मिले चुके थे, जबकि एक्टिव 2,688 मामले थे और 199 मौत हो चुकी थी.
वहीं 30 जून 2020 तक राजस्थान में कोरोना पॉज़िटिव मामलों की कुल संख्या 18,014 पहुंच गई है. जबकि राज्य में 3,381 एक्टिव मामले हैं और अब तक 413 मौत हो चुकी हैं.
राजस्थान में पिछले कुछ दिनों में मिल रहे कोरोना के मामलों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो रोज़ाना औसतन 150 से 200 के बीच मामले सामने आ रहे हैं.
हालांकि, प्रदेश में बढ़ते कोरोना मामलों के बीच राजस्थान सरकार 75 फ़ीसदी से अधिक रिकवरी रेट का दावा कर रही है.
मध्य प्रदेशः लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते नज़र नहीं आ रहे
मध्य प्रदेश से बीबीसी सहयोगी शुरैह नियाज़ी ने बताया कि 1 जून को कोरोना से संक्रमित मरीज़ों की संख्या 8,089 थी, वहीं मौत का आंकड़ा 350 था. अनलॉक-1 के ख़त्म होते होते यानी 30 जून तक पॉजिटिव मामले 13,370 को पार कर चुके हैं वहीं मौतों की संख्या भी 564 हो गई है.
अगर हम देखें तो इस अकेले महीने में कोरोना संक्रमित मरीज़ों की तादाद 5281 बढ़ी है. वही 214 मौतें भी हुई है.
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इमेज कैप्शन, लेकिन सरकार की अब प्राथमिकता कोरोना से हट कर व्यवसायिक गतिविधियों को बढ़ाने की नज़र आ
इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है लेकिन सरकार की अब प्राथमिकता कोरोना से हट कर व्यवसायिक गतिविधियों को बढ़ाने की नज़र आ रही है.
प्रदेश में लगभग सभी मार्केट को खोल दिया गया है. लेकिन भोपाल में जहां पहले सातों दिन खोलने की इजाज़त दे दी गई थी उसे हफ़्ते में पांच दिन करना पड़ा क्योंकि मरीज़ों के आंकड़े में कमी नहीं हो रही थी. अब शहर के बाज़ार शनिवार और रविवार को बंद रखे जाते हैं.
वही जहां तक औद्योगिक गतिविधियों की बात है तो वो लगभग सभी इंडस्ट्रियल एरिया में शुरू हो चुकी है. लेकिन कामगारों की कमी का सामना सभी को करना पड़ रहा है. कामगारों ने लॉकडाउन के बाद अपने घरों का रुख कर लिया था और कम ही लोग है जो इस वक़्त लौट कर आने चाहते हैं.
मंडीदीप इंडस्ट्री एसोसिएशन के महासचिव सीबी मालपानी ने बताया कि ज़्यादातर उद्योगों को काम करने वाले लोगों की कमी का सामना करना पड़ रहा है.
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इमेज कैप्शन, शहर के बाज़ार शनिवार और रविवार को बंद रखे जाते हैं.
राजधानी भोपाल में 15 जून से धार्मिक स्थलों को भी खोला गया है. धार्मिक स्थालों पर हालांकि अभी भी ज़्यादा भीड़ नज़र नहीं आ रही है. लेकिन बाज़ारों में भीड़ पहले की तरह नज़र आने लगी है और लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते नज़र नहीं आ रहे हैं.
नगर निगम ने दुकानों को भी अलग अलग दिनों में खोलने का फ़ैसला लिया था लेकिन उसका असर ज़्यादा नज़र नहीं आ रहा है.
होटल और खाने पीने की दुकानों को भी खोल दिया गया है पर अभी भी बैठने की व्यवस्था नही की गई है बल्कि पार्सल की ही इजाज़त दी गई है.
आज यानी बुधवार से अनलॉक-2 शुरू हो गया है लेकिन इससे बहुत ज़्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं की जा रही है. प्रदेश में स्कूल और कॉलेज पहले की ही तरह बंद रहेंगे. सरकार ने दूसरी गतिविधियों के लिए अभी कोई फ़ैसला नहीं लिया है.
पश्चिम बंगाल में कैसा रहा अनलॉक-1?
कोलकाता से बीबीसी के सहयोगी प्रभाकर मणि तिवारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के मुकाबले एक सप्ताह पहले यानी पहली जून से ही तमाम रियायतों का एलान कर दिया था. इनमें चाय और जूट उद्योग में काम शुरू करने, तमाम बाज़ारों, सार्वजनिक परिवहनों और धार्मिक स्थलों को खोलना शामिल था.
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इमेज कैप्शन, चक्रवाती तूफ़ान अंफन ने भी संक्रमण तेज़ करने में अहम भूमिका निभाई
सरकार ने टीवी धारावाहिकों और फ़िल्मों को शूटिंग की सर्शत अनुमति दे दी थी. अब एक महीने पूरे होने के बाद सरकार के इस फ़ैसले से आर्थिक परिदृश्य तो खास नहीं बदला है. लेकिन कोरोना का संक्रमण ज़रूर तेज़ी से बढ़ा है. ज़्यादातर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पहले ही इसका अंदेशा जताया था.
वैसे, इस दौरान आए चक्रवाती तूफ़ान अंफन ने भी संक्रमण तेज़ करने में अहम भूमिका निभाई. तूफ़ान के लिए बनाए गए राहत शिविरों में कम जगह में भारी तादाद में लोगों के शरण लेने की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन संभव नहीं हो सका.
ममता बनर्जी तो इसी दौरान पहली जुलाई से कोलकाता मेट्रो की सेवाएं दोबारा शुरू करने पर जोर दे रही थीं. लेकिन मेट्रो रेल प्रबंधन ने इससे इनकार कर दिया.
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इमेज कैप्शन, राहत शिविरों में कम जगह में भारी तादाद में लोगों के शरण लेने की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन संभव नहीं हो सका.
मुख्यमंत्री ने उस समय दलील दी थी, "रेलवे भेड़-बकरी की तरह ट्रेनों में ठूस कर प्रवासियों को बंगाल भेज रही है. ऐसे में मंदिर-मस्जिद को खोलने में क्या बुराई है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने तब कहा था कि अचानक एक साथ इतनी रियायतें देने के बाद राज्य में संक्रमण तेज़ी से बढ़ने का अंदेशा है. एक विशेषज्ञ डा. पार्थसारथी घोष का कहना था, "सरकार के दिशानिर्देशों के बावजूद बाज़ारों से लेकर बसों तक कहीं भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन नहीं हो रहा है.
आखिर वही हुआ जिसका डर था. राज्य में संक्रमण तेज़ी से फ़ैला. जून के पहले सप्ताह में ही 2,686 नए मामले सामने आए जो तब तक सामने आने वाले मामलों का एक-तिहाई था. पश्चिम बंगाल में कोरोना का पहला मरीज 17 मार्च को सामने आया था. पहली जून को राज्य में इसके मरीज़ों की संख्या 5,772 थी और मृतकों की तादाद 253. एक महीने बाद 30 जून तक यह संख्या क्रमशः 18 हज़ार और साढ़े छह सौ के पार पहुंच गई है. अब बिना लक्षण वाले मरीज़ों की बढ़ती संख्या सरकार की चिंता बढ़ा रही है.
आखिर अनलॉक के दौरान आर्थिक मोर्चे पर राज्य को कितना फायदा हुआ? इसका जवाब है बेहद मामूली. चाय बागान, जूट उद्योग औऱ दूसरे कुछ उद्योगों के अलावा बाज़ार और शापिंग मॉल्स ज़रूर खुल गए. लेकिन ग्राहकों का टोटा बना रहा. लोग घूमने के बहाने घरों से तो ज़रूर निकले, लेकिन ख़रीदारी नहीं की.
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कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
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वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
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दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
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हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
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ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
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कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
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शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
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पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
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अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.