भारत-चीन तनावः गलवान में मारे गए सैनिकों के शरीर पर धारदार हथियारों के घाव - प्रेस रिव्यू

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भारत और चीन के सैनिकों के बीच पिछले सप्ताह लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसा के बारे में इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के मुताबिक़ मारे गए सैनिकों के शरीर पर धारदार हथियारों की गंभीर चोटें थीं.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि मारे गए जवानों के शरीर पर कई फ्रैक्चर भी थे. अख़बार लिखता है कि गलवान घाटी में हुई इस हिंसक झड़प में भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों को भी मुंहतोड़ जवाब दिया था.

दोनों पक्षों की सेनाओं के बीच कई घंटों तक मुक़ाबला चला. इस हिंसक झड़प में कई सैनिक नदी में गिर गए. सूत्रों के मुताबिक़, नदी में गिरने और ठंड की वजह से भी कई सैनिकों की मौत हो गई.

अख़बार लेह के सोनम नुरबू मेमोरियल अस्पताल के एक डॉक्टर के हवाले से लिखता है "मारे गए सैनिकों के शव देखने से पता चल रहा था कि झड़प कितनी बड़ी और हिंसक रही होगी. ऐसा लग रहा था कि भारतीय सैनिकों ने कई चीनी सैनिकों को मारा होगा. अस्पताल लाए गए सैनिकों के शरीर पर तेज़ धार वाले हथियारों के कई घाव थे और उनमें से कइयों के शरीर में मल्टीपल फ्रैक्चर भी थे."

यह डॉक्टर उस टीम का हिस्सा थे जिन्होंने हिंसक झड़प में मारे गए सैनिकों के शव देखे थे.

चीनी मीडिया ने सीमा विवाद पर पीएम मोदी के बयान पर क्या कहा?

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चीन की मीडिया ने सीमा विवाद पर सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की सराहना की है.

हिंदू अख़बार ने चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के अख़बार ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट का उल्लेख किया है जिसमें पीएम मोदी के बयान पर विशेषज्ञों की राय छपी है.

शंघाई स्थित फुडान यूनिवर्सिटी के सेंटर फ़ॉर साउथ एशियन स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर लिन मिनवांग ने ग्लोबल टाइम्स से कहा "तनाव करने के क्रम में प्रधानमंत्री मोदी का बयान बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा. उन्होंने चीन पर आरोप लगाने के लिए कट्टरपंथियों के आधार को हटा दिया है."

प्रोफ़ेसर लिन मिनवांग ने कहा, "भारत के संदर्भ पाकिस्तान या किसी दूसरे पड़ोसी देश के साथ संघर्ष के मामले में दिल्ली राष्ट्रवाद के तहत एक्शन ले सकता है लेकिन जब बात चीन की आती है तो यह एक अलग कहानी है."

भारत-चीन सीमा विवाद पर पिछले शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक हुई थी जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा पर तनाव कम करने के पक्ष में बयान दिया था.

मोदी

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पीएम केयर्स फ़ंड को आरटीआी के तहत लाने के लिए मुक़दमा

पुणे की एक स्थानीय अदालत में पीएम केयर्स फ़ंड को आरटीआई के तहत लाए जाने के लिए मुक़दमा दायर किया गया है.

ये रिपोर्ट द हिंदू अख़बार में छपी है जिसमें कहा गया है कि मुकदमा दायर करने वालों की मांग यह भी है कि इसे (पीएम केयर्स- पीएम सिटिज़न असिस्टेंस एंड रिलीफ़ इन इमरजेंसी सिचुएशन) रद्द घोषित करते हुए जिन भी लोगों ने इसमें अनुदान दिया है उन्हें वो रकम वापस कर दी जाए.

मुकदमा दायर करने वाले वक़ील तोसिफ़ शेख ने समाजिक कार्यकर्ता राजेश बजाज और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के सतीश गायकवाण की ओर से मुक़दमा दायर किया है.

इस मामले में मांग की गई है कि अगर केंद्र सरकार पीएम केयर्स के तहत जमा हुई धनराशि से जुड़ी जानकारी सार्वजिनिक नहीं करती है तो इसे रद्द कर दिया जाना चाहिए.

गायकवाण के हवाले से लिखता है कि एक बार इसे रद्द घोषित कर दिया गया तो जिन जिन लोगों ने इसमें अनुदान दिया है उन्हें उनकी रकम वापस मिल जाएगी. या फिर ये रकम महाराष्ट्र सरकार को कोविड19 की स्थिति को संभालने के लिए आर्थिक सहायता के तौर पर दी जा सकती है. क्योंकि महाराष्ट्र देश का सबसे अधिक प्रभावित राज्य है.

वहीं तोसिफ़ शेख का कहना है "कोरोना वायरस संक्रमण के इस दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को पीएम केयर्स फंड की घोषणा की थी जबकि आपातकालीन परिस्थितियों और स्वास्थ्य से जुड़ी आपात स्थिति के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष पहले से ही है. जिसकी स्थापना क़रीब 70 साल पहले की गई थी. ऐसे में पीएम केयर्स की कोई ज़रूरत नहीं थी.

शेख़ ने बताया कि कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 23 जून की तारीख़ दी थी.

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नेपाल में रेडियो से भारत के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार

दैनिक हिंदुस्तान की एक ख़बर के अनुसार कालापानी, लिपुलेख और लिंफ़ियाधुरा को नेपाली भूभाग बताने वाले अपने दावे को मजबूत करने के लिए नेपाल अब रेडियो के माध्यम से भारत के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार कर रहा है.

नेपाली सीमा के पास रह रहे भारतीय गांवों के लोगों का कहना है कि नेपाली चैनल रोज़ाना के कार्यक्रमों के बीच में भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिंफ़ियाधुरा क्षेत्रों को वापस किए जाने की मांग करने वाले भारत-विरोधी भाषण भी प्रसारित कर रहा है.

ये सभी एफएम चैनल नेपाल में दारचुला ज़िला मुख्यालय के पास चाबरीगर में स्थित हैं. इन एफएम चैनलों की रेंज तीन किलोमीटर तक की है, जो भारत में धारचूला, बलुआकोट, जौलजीबी और कालिका शहरों में सुने जा सकते हैं.

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गलवान में मारे गए सैनिकों के शरीर पर थे तेज़ धारदार हथियार के घाव

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