भारत-चीन सीमा विवाद: पीएम के बयान और सैटलाइट तस्वीरों को लेकर उठ रहे हैं सवाल

इमेज स्रोत, Yawar Nazir/Getty Images
वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने रविवार को भारत-चीन सीमा विवाद पर सर्वदलीय बैठक के बाद दिए गए प्रधानमंत्री के बयान पर सवाल उठाए हैं.
कपिल सिब्बल ने सवाल किया है कि "प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय बैठक में क्यों कहा कि कोई भी चीन का कोई सैनिक भारतीय सीमा के भीतर नहीं आया है? इसके बाद पीएमओ ने उनके आधिकारिक बयान से ये शब्द हटा क्यों दिए? अगर भारतीय सीमा में किसी से प्रवेश नहीं किया है तो 20 सैनिकों की मौत कैसे हुई और 85 सैनिक घायल कैसे हुए? चीनी सैनिकों से हमारे 10 जवानों और अधिकारियों को कैसे पकड़ लिया?"
शुक्रवार 19 जून को सर्वदलीय में प्रधानमंत्री ने कहा था कि ना कोई हमारे क्षेत्र में घुसा है और ना किसी पोस्ट पर क़ब्ज़ा किया है. उन्होंने ये भी कहा था कि गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसा में देश के 20 जवान शहीद हुए हैं.
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पीएम मोदी ने कहा था कि भारत ने चीनी सरकार से कूटनीतिक रास्तों के ज़रिए संपर्क कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और इसके बाद सेना के देश की सीमा की रक्षा के लिए ज़रूरी कदम उठाने के लिए सेना को फ़ैसले लेने की छूट भी दी है.
हालांकि इसके एक दिन बाद शनिवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने उनके इस बयान पर स्पष्टीकरण दिया और कहा कि गलवान घाटी में हिंसा इसलिए हुई क्योंकि चीनी सैनिक एलएसी के पास कुछ निर्माण कार्य कर रहे थे और उन्होंने इसे रोकने से इनकार कर दिया.
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वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा है कि भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल में पैंगोंग झील के पास भारत की सीमा के भीतर चीनी सैनिक हैं और सैटलाइट फ़ोटो साफ़ तौर पर ये दिखाती हैं.
इस वीडियो में कहा जा रहा है कि सैटलाइट तस्वीरों में दिख रहा है कि गलवान घाटी में सीमा के दूसरी तरफ चीनी सैनिकों ने भारी निर्माण कार्य किया है. लेकिन पैंगोंग में आठ किलोमीटर लंबे उस क्षेत्र पर चीनी सैनिकों ने क़ब्ज़ा कर रखा है जिसे भारत अपना मानता है.
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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सवाल किया है कि "प्रधानमंत्री का वक्तव्य आया कि हमारे भूभाग पर कोई नहीं घुसा. इसके दो घण्टे बाद चीन का बयान आया कि गलवान घाटी उसका क्षेत्र है. प्रधानमंत्री मोदी और चीन एक जुबान में कैसे बोल रहे हैं?"
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लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी नेता चुप नहीं बैठे हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा है कि "विदेशी मामलों की सलाहकार समिति में मेरे साथ राहुल गांधी और शशि थरूर भी शामिल हैं. लेकिन वो चीन के झूठ को फैला रहे हैं और सीमा विवाद को लेकर प्रोपोगैंडा चला रहे हैं."
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वहीं बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इंडिया टुडे का एक लेख को ट्वीट कर कहा है कि चीनी सेना के साथ हुई तीन बार झड़प हुई थी, पहली झड़प के बाद भारतीय सैनिकों ने कुछ चीनी सैनिकों को हिरासत में लिया था.
तीसरी बार लड़ाई के लिए भारतीय सैनिकों ने लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल पार कर चीनी क्षेत्र में प्रवेश किया था.
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हालांकि अमित मालवीय का ये ट्वीट शनिवार को आए भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान से मेल खाता नहीं दिखता.
रविवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव का एक बयान आया था जिसमें कहा गया था कि भारतीय सेना ने कभी लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल के उल्लंघन की कोशिश नहीं की.
बयान में कहा गया था कि गलवान घाटी समेत भारत-चीन के लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल से सटे सभी इलाक़ों की भारतीय सेना को पूरी समझ है और वो इसका पूरा सम्मान करते हैं. भारतीय सेना ने कभी भी लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल के उल्लंघन की कोशिश नहीं की.
उनका कहना था कि भारत लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल में स्थिति में एकतरफ़ा बदलाव करने के आरोप को कतई स्वीकार नहीं करता, भारत ने हमेशा इस यथास्थिति को बनाए रखने की कोशिश की है.
वहीं जून 17 को अमित मालवीय ने एक वीडियो ट्वीट कर लिखा था कि भारतीय सीमा में किसी तरह कोई चीनी सैनिक नहीं आया है. इसमें सैटलाट तस्वीरों के ज़रिए स्थिति समझाने की कोशिश की गई थी. इसी टेलीविज़न का एक वीडियो रविवार को राहुल गांधी ने रीट्वीट किया था.
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15-16 जून की रात गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुए हिंसक संघर्ष में भारत के कमांडिंग ऑफ़िसर समेत बीस सैनिक मारे गए थे. चीन के भी कई सैनिकों के हताहत होने की ख़बर है लेकिन चीन ने आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है.
जिस जगह पर ये झड़प हुई, उसे भारत और चीन के बीच की वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल के नाम से जाना जाता है. इस लाइन के आसपास दोनों देशों की सैनाओं की तरफ से चल रहे निर्माण कार्य को लेकर दोनों मुल्कों में तनाव है.
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