भारत-चीन तनाव: एलएसी पर अब कमांडरों को दी गई खुली छूट - प्रेस रिव्यू

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हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों की मौत के बाद सेना ने एलएसी पर तैनात कमांडरों को मौक़े पर फ़ैसला लेने के लिए खुली छूट दे दी गई है.
अब कमांडर हथियारों के इस्तेमाल पर लगी रोक से बंधे नहीं रहेंगे और हालात के हिसाब से फ़ैसला ले सकेंगे. अख़बार ने सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारतीय सेना रूल्स ऑफ़ एंगेजमेंट (आरओई) में बदलाव कर रही है.
गलवान घाटी में हुए संघर्ष में भारतीय सैनिकों की मौत के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया था कि भारतीय सैनिकों को निहत्थे क्यों भेजा गया.
इसके जवाब में भारत सरकार ने कहा था कि सैनिकों के पास हथियार तो थे लेकिन उन्होंने चीन के साथ हुए समझौते के तहत वो इस्तेमाल नहीं किए.
पैंगॉन्ग के आठ किलोमीटर लंबे इलाक़े पर पीएलए डटी

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द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, गलवान घाटी में ज़मीन पर क्या स्थिति है इसे लेकर अभी भी पूरी स्पष्टता नहीं है. ऐसा शक़ है कि चीन के सैनिकों ने दर्जनों बंकर और ठिकाने बनाए हैं और मई की शुरुआत से ही पैंगोंग में आठ किलोमीटर लंबे उस क्षेत्र पर क़ब्ज़ा कर रखा है जिसे भारत अपना मानता है.
वहीं, सैन्य सूत्रों ने अख़बार को बताया है कि भारतीय सेना पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 के पास के इलाक़े को नियंत्रण में लिए हुए है.
वहीं गलवान घाटी में 15-16 जून की रात चीन और भारत के बीच जहां संघर्ष हुआ था वहां से दोनों ही सेनाएं हट चुकी हैं. अब गलवान घाटी में दोनों ही सेनाए एलएसी के अपनी ओर ही हैं.
एलएसी पर तनाव जारी, संघर्ष का डर

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एलएसी पर हुए संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों की मौत के बाद से माहौल नाटकीय रूप से बदल गया है.
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, स्थिति इतनी तनावपूर्ण है कि यदि चीन और भारत के सैनिक आमने-सामने आए तो हालात और ख़राब हो सकते हैं. 15-16 जून की रात के संघर्ष के बाद से ही दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर डट गए हैं और डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया रुक गई है.
पूर्व सेना प्रमुख वीपी मलिक ने अख़बार से कहा, "अगर जल्द ही तनाव कम नहीं किया गया, ऐसी झड़पें होने की संभावनाएं और बढ़ जाएंगी. जब सैनिक आमने-सामने हों तो तनाव और ग़ुस्सा बहुत बढ़ा हुआ होता है और छोटी सी घटना भी बड़ी हो सकती है."
दिल्ली दंगों की पुलिस चार्जशीट में अब योगेंद्र यादव का नाम

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दिल्ली दंगों के दौरान सिपाही रतन लाल की हत्या के मामल में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में अब स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव का नाम भी आया है. उनके अलावा छात्र नेता कंवलप्रीत कौर और वकील डीएस बिंद्रा का नाम भी चार्जशीट में है.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, ये तीनों 17 अभियुक्तों में तो शामिल नहीं हैं लेकिन चार्जशीट में कहा गया है, "चांद बाग़ में प्रदर्शन के आयोजकों के संबंध डीएस बिंद्रा, कंवलप्रीत कौर, देवांगना कालिता, सफ़ूरा और योगेंद्र यादव जैसे लोगों से मिले हैं."
पुलिस के मुताबिक़, चांद बाग़ का प्रदर्शन मध्य-जनवरी से चल रहा था. 24 फ़रवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में गंभीर सांप्रदायिक दंगा हुआ जिसमें 750 मुक़दमें दर्ज किए गए हैं.
सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व आईएएस अधिकारी हर्ष मंदर का नाम भी दिल्ली दंगों की चार्जशीट में आया है. हर्ष मंदर पर भड़काऊ भाषण देने और न्यायपालिका के प्रति अवमानना भरी बातें कहने के आरोप हैं.
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में कहा गया है कि हर्ष मंदर ने बीते साल दिसंबर में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण दिया.
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हर्ष मंदर का नाम चार्जशीट में आने के बाद इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा है कि भारत का लोकतंत्र अंधेरे में जा रहा है.
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