संदिग्ध कोरोना मरीज़ की सड़क किनारे मदद की गुहार लगाते मौत

    • Author, दीप्ति बथिनि
    • पदनाम, बीबीसी तेलुगू

"कृपया मेरी मदद करें. मुझे अस्पताल ले चलें. मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं."

ये आख़िरी शब्द 60 वर्षीय श्रीनिवास बाबू के हैं.

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रह है जिसमें श्रीनिवास सड़क किनारे गिरे हुए हैं और मदद की गुहार लगा रहे हैं. एक औरत उनसे कई सवाल पूछते नज़र आ रही है.

तेलंगाना के मेडक ज़िले में यह घटना बुधवार को हुई जो हैदराबाद से 70 किलोमीटर दूर है.

स्थानीय लोगों द्वारा सूचित करने के बाद मौक़े पर पहुंची पुलिस ने कहा, "हमने 108 पर कॉल करके एंबुलेंस को बुलाया. एंबुलेंस ने आने में एक घंटे का समय लिया. इस जगह पर पहुंचने के बाद एंबुलेंस स्टाफ़ ने कहा कि उनके पास पीपीई किट नहीं है और मरीज़ को कोविड-19 के लक्षण हैं इसलिए दूसरी एंबुलेंस बुलाई जाए. जब तक दूसरी एंबुलेंस आई तब तक बहुत देर हो चुकी थी."

जांच में पता चला कि घटनास्थल पर पहुंची एंबुलेंस में दो पीपीई किट थीं लेकिन मरीज़ को कोविड होने के डर के कारण स्टाफ़ में डर था और वहां मरीज़ के लिए पीपीई किट भी नहीं थी.

'देरी के कारण जान गई'

मेडक के मेडिकल एंड हेल्थ ऑफ़िसर डॉक्टर वेंकटेश्वर राव ने बीबीसी न्यूज़ तेलुगू से कहा कि उन्होंने श्रीनिवास बाबू की पत्नी से बात की है और वो हैदराबाद में ईस्ट मेरेडपल्ली के रहने वाले हैं.

डॉक्टर वेंकटेश्वर राव ने कहा, "ऐसा लगता है कि श्रीनिवास सरकारी बस से हैदराबाद वापस लौट रहे थे जब उन्होंने बेचैनी की शिकायत की. उन्होंने ख़ुद को नज़दीकी अस्पताल छोड़ने के लिए कहा. चेगुंटा में बस ने उनको प्राथमिक चिकित्सालय के पास उतार दिया. स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया तो पुलिस ने एंबुलेंस को बुलाया. उससे पहले प्राथमिक चिकित्सालय में नर्स ने उन्हें इंजेक्शन और दवाइयां दी थीं. एंबुलेंस को उन्हें ज़िला अस्पताल छोड़ना था लेकिन अस्पताल छोड़ने में देरी के कारण उनकी जान चली गई."

तेलंगाना में जीवीके ईएमआरआई के साथ मिलकर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत 108 एंबुलेंस सेवा चलाई जाती है.

डॉक्टर वेंकटेश्वर राव कहते हैं, "सिर्फ़ मेडक ज़िले में आठ 108 एंबुलेंस हैं. हमने दो एंबुलेंस कोविड-19 के लिए रखी हैं. बाकी की छह रेगुलर इमरजेंसी के लिए हैं. यह जीवीके ईएमआरआई की ज़िम्मेदार है कि वो 108 के स्टाफ़ को पीपीई किट मुहैया कराए. इसके अलावा हमने उन्हें 100 किट दी हैं."

"108 की ड्यूटी है कि वो प्राथमिक उपचार मुहैया कराए और क़ीमती वक़्त ख़राब न करते हुए मरीज़ को अस्पताल ले जाए. मुझे नहीं मालूम की एंबुलेंस के पास पीपीई किट क्यों नहीं थी. मरीज़ को ले जाने से मना करने वाले 108 के ड्राइवर और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन को मैंने बर्ख़ास्त करने के निर्देश दिए हैं."

'कल्याणी सबकुछ ख़त्म हो गया'

बीबीसी न्यूज़ तेलुगू ने एंबुलेंस के ड्राइवर और टेक्नीशियन से बात की तो उनका कहना था कि उनके पास दो पीपीई किट थीं.

उन्होंने कहा, "हम घटनास्थल पर 30 मिनट में पहुंच गए थे. जब हम पहुंचे तो वहां पुलिस, प्राथमिक चिकित्सालय की नर्स और दूसरा स्टाफ़ था. हमने नर्स से पूछा तो उन्होंने कहा कि मरीज़ कोविड संदिग्ध लग रहा है. कोई भी उसके पास नहीं जा रहा था. उनके पास मास्क और ग्लव्स थे. हम भी डरे हुए थे क्योंकि हमने अभी तक एक भी कोविड मामला नहीं देखा था. हमारे पास दो पीपीई थी. अगर हम उन्हें ले जाते तो हमारे पास एंबुलेंस सेनिटाइज़ करने के लिए सेनिटाइज़र भी नहीं था. इसलिए हमने अपने वरिष्ठ अफ़सरों से बात की और उन्हें कोविड वाली एंबुलेंस भेजने के लिए कहा और हम चले गए."

श्रीनिवास बाबू के अंतिम संस्कार के बाद हैदराबाद में उनका परिवार सदमे से बाहर आने की कोशिश कर रहा है. उनके पीछे उनकी पत्नी एक बेटी और एक बेटा रह गए हैं. 26 वर्षीय श्वेता मानसिक रूप से कमज़ोर है.

उनकी पत्नी कल्याणी दोपहर को आए फ़ोन कॉल को याद करते हुए कहती हैं, "कल्याणी सबकुछ ख़त्म हो गया है. मुझे लगता है कि मेरे पास सिर्फ़ पांच मिनट बचे हैं. एंबुलेंस नहीं आएगी. तुम मुझसे बहुत दूर हो. मेरे पिता और बच्चों का ध्यान रखना. अब सबकुछ ख़त्म हो गया है."

यह कहते हुए कल्याणी रो देती हैं और सवाल करती हैं, "मेरी बेटी बिना अपने पिता के नहीं सोती है. यह ऐसी अवस्था में है जहां इसको पता नहीं है कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं. अब मैं अकेले इसका कैसे ख्याल रखूंगी?"

श्रीनिवास बाबू के बेटे भानु चंद कहते हैं, "वीडियो देखने के बाद मुझे किसे दोष देना चाहिए? ऐसा लगता है कि अब किसी में कोई नैतिक मूल्य नहीं बचा है. जब महामारी के बीच एक एंबुलेंस बुलाई जाती है तो उसके पास पीपीई नहीं होता. क्या यह मज़ाक़ है. सभी 'तैयारियां' आख़िर कहां गईं?"

हमने जीवीके ईएमआरआई के सीओओ पी. ब्रह्मानंद से बात की, जिनके अंतर्गत 108 एंबुलेंस आती हैं.

उन्होंने कहा, "राज्य में 351 एंबुलेंस हैं जिनमें से 92 को कोविड-19 के ख़ास सेवा में लगाया हुआ है. इनमें से 30 ग्रेटर हैदराबाद और बाकी 62 अन्य ज़िलों में हैं."

"इन एंबुलेसों में 10 पीपीई और सेनिटाइज़र दिए गए हैं. बाकी की एंबुलेंस रेग्युलर इमरजेंसी के लिए हैं जिनमें चार पीपीई हैं."

उन्होंने कहा, "हमें नहीं पता कि स्टाफ़ ने पीपीई किट क्यों नहीं इस्तेमाल की? सांस से संबंधित सभी दिक़्क़तें कोविड हों ये ज़रूरी नहीं. कोविड मरीज़ समझकर मरीज़ को शिफ़्ट नहीं करना ग़लती है. हमने अपने स्टाफ़ को पीपीई के इस्तेमाल और उसे डिस्पोज़ करने को लेकर ट्रेनिंग दी है. हमने ड्राइवर और टेक्नीशियन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है और उनका हैदराबाद ट्रांसफ़र कर दिया है."

हालांकि, राज्य का कहना है कि उसके पास पर्याप्त पीपीई किट हैं. हाईकोर्ट में सार्वजनिक स्वास्थ्य के निदेशक ने रिपोर्ट फ़ाइल की थी जिसमें सूचित किया गया था कि 2 जून तक उनके पास 7 लाख पीपीई किट थीं.

हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि कितना स्टॉक है यह जानना 'प्रासंगिक' नहीं है.

हालांकि, कोविड-19 के टेस्ट के लिए श्रीनिवास से कोई सैंपल नहीं लिया गया था. अधिकारियों का कहना है कि वो मृत लोगों के कोरोना टेस्ट नहीं कर रहे हैं.

हालांकि तेलंगाना हाईकोर्ट ने मृत लोगों के कोविड-19 टेस्ट करने का निर्देश दिया है.

राज्य सरकार का कहना है कि इस प्रकार का हाईकोर्ट का आदेश लागू करवा पाना कठिन है.

राज्य सरकार का कहना है कि रोज़ाना राज्य में विभिन्न कारणों से 900 से 1000 लोग मरते हैं, यह संभव नहीं है कि सभी का टेस्ट किया जा सके.

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया है.

श्रीनिवास की मौत कोविड-19 के कारण हुई या किसी और सांस की बीमारी की वजह से यह पता नहीं चल पाया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)