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कोरोना: लॉकडाउन क्या फिर होगा सख़्त?
- Author, अपूर्व कृष्ण
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
लॉकडाउन क्या फिर लग सकता है? क्या ढील ख़त्म की जा सकती है?
ये ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब हर कोई जानना चाहता है.
पर तस्वीर साफ़ नहीं हो पा रही, बल्कि और धुंधली हो जाती है जब लोग महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ये चेतावनी सुनते हैं कि लॉकडाउन फिर सख़्त करना पड़ सकता है, जब राजस्थान अपनी सीमा सील कर देता है, जब कई राज्य लॉकडाउन बढ़ा देते हैं.
उद्धव ठाकरे ने दरअसल मुंबई में बसों में चढ़ते वक़्त धक्का-मुक्की होने का वीडियो सामने आने पर नाख़ुशी दिखाई और बुधवार को मुंबई में कहा, "अगर लोग पाबंदियों का पालन करने में नाकाम रहे तो राज्य में लॉकडाउन जारी रखना पड़ सकता है."
वैसे महाराष्ट्र समेत कुछ राज्यों ने 30 जून तक लॉकडाउन बढ़ाने का एलान किया हुआ है. इनमें पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु, तेलंगाना, पंजाब, मिज़ोरम जैसे राज्य शामिल हैं.
भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने भी कंटेनमेंट वाले इलाक़ों में 30 जून तक लॉकडाउन जारी रखने की घोषणा की थी.
गृह मंत्रालय ने चौथे चरण के लॉकडाउन की समाप्ति से एक दिन पहले 30 मई को देश के कंटेनमेंट ज़ोन में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन 30 जून तक बढ़ाने की घोषणा की थी, लेकिन साथ ही कहा था कि इस चरण में ध्यान अनलॉक पर होगा जिसमें कंटेनमेंट ज़ोन से बाहर के क्षेत्रों को चरणबद्ध तरीक़े से दोबारा खोलने के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए थे.
गृह मंत्रालय ने साथ ही कहा कि अब बहुत कुछ फ़ैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है.
उसने अपने आदेश में कहा, "कंटेनमेंट ज़ोन के बाहर होने वाली गतिविधियों पर राज्य करेंगे फ़ैसला. हालात के आकलन के आधार पर राज्य और संघ शासित क्षेत्र कंटेनमेंट ज़ोन (सील क्षेत्र) के बाहर चुनिंदा गतिविधियों पर रोक लगा सकते हैं या आवश्यकता के आधार पर ऐसी बंदिशों को लगा सकते हैं."
राज्यों के हाथ में सख़्ती के अधिकार
इसके बाद से अलग-अलग राज्यों ने अपने यहाँ अलग-अलग तरह की पाबंदियाँ या ढील दी हुई हैं.
जैसे असम जैसे कुछ राज्यों में दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों के लिए इंस्टीच्यूशनल क्वारंटीन पर जाना अनिवार्य कर दिया है, मगर कई दूसरे राज्यों में ऐसा नहीं है.
वैसे ही कई राज्यों ने पड़ोसी राज्यों से लगी अपनी सीमा पर अलग-अलग तरह की पाबंदी लगाई हुई है.
जैसे दिल्ली सरकार ने पड़ोसी राज्यों से आने वाले रास्ते सील की हुई थी जिसे आठ जून को खोल दिया गया.
मगर दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा की सरकार ने कहा है कि अगर ज़रूरी हुआ तो दिल्ली से लगी सीमा फिर सील कर दी जाएगी.
राज्य के गृह व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा है कि गुरूग्राम और फ़रीदाबाद जैसे दिल्ली से सटे शहरों में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं.
वहीं दिल्ली के एक और पड़ोसी राज्य राजस्थान की सरकार ने बुधवार को अपनी सीमा सील करने का फ़ैसला किया.
जबकि गृह मंत्रालय के 30 मई के आदेश में ये लिखा था, "अंतर-राज्यीय और राज्य के भीतर व्यक्तियों और सामान की आवाजाही पर कोई बंदिश नहीं होगी. ऐसी आवाजाही के लिए अलग से किसी प्रकार की अनुमति/स्वीकृति/ई-परमिट नहीं लेना होगा."
लेकिन आदेश में ये भी लिखा था कि राज्य सरकारें स्थिति के आधार पर आवाजाही को नियंत्रित कर सकती हैं, मगर उसे इसकी जानकारी देनी होगी. और राजस्थान ने यही किया.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसकी वजह बताते हुए ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा, "अनलॉक-1 के तहत अंतरराज्यीय आवागमन एवं अन्य गतिविधियां अनुमत होने तथा पास की व्यवस्था समाप्त होने के बाद एक जून से 10 जून के बीच ही प्रदेश में अप्रत्याशित रूप से कोरोना के 2500 से अधिक पॉज़िटिव केस सामने आए हैं, जो चिंता का विषय है."
तो अब एक ओर जहाँ देश में कोरोना संक्रमण के मामले बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं, राज्यों की ओर से या तो सख़्त फ़ैसले लिए जा रहे हैं या ऐसी चेतावनी दी जा रही है.
बढ़ेगा लॉकडाउन?
ऐसी स्थिति में अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं कि क्या लॉकडाउन फिर सख़्त हो सकता है.
स्थिति की नज़ाकत को देखते हुए भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय या पीआईबी ने सोशल मीडिया पर शेयर हो रही एक पोस्ट का ज़िक्र कर इस बात का खंडन किया है कि देश में 15 जून से फिर से लॉकडाउन लग सकता है.
लेकिन ये दिलचस्प है कि लॉकडाउन के बारे में इससे पहले भी अटकलों का बाज़ार गर्म रहा जिन्हें सरकार ने निराधार या फ़र्ज़ी बताया, पर सच कुछ और निकला.
जैसे, पीआईबी ने 15 मार्च को एक पोस्ट की थी जिसमें लिखा था कि व्हाट्सऐप पर एक ऑडियो क्लिप शेयर की जा रही है जिसमें बताया जा रहा है कि देश में लॉकडाउन लगने वाला है, पर ये फ़र्ज़ी दावा है.
इसके चार दिन बाद पीआईबी ने फिर एक पोस्ट कर लॉकडाउन लगाए जाने की बातों को अफ़वाह बताया.
और इनके चंद दिनों बाद, 24 मार्च की रात को प्रधानमंत्री मोदी ने देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन लगाने का एलान कर दिया.
कुछ इसी तरह की स्थिति कैबिनेट सचिव राजीव गौबा के पहले लॉकडाउन के दौरान दिए गए बयान के साथ भी हुई. कैबिनेट सचिव ने 30 मार्च को कहा था कि सरकार का लॉकडाउन बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है.
मगर लॉकडाउन बढ़ा और एक नहीं, दो नहीं, तीन बार बढ़ चुका है. अभी लॉकडाउन का पाँचवाँ दौर है.
लॉकडाउन का पहला दौर 25 मार्च से, दूसरा 15 अप्रैल से, तीसरा 4 मई से, चौथा 18 मई से और पाँचवाँ 1 जून से शुरू हुआ. हालांकि इसे लॉकडाउन-5 की जगह अनलॉक-1 भी कहा जा रहा है.
ये बढ़ेगा या नहीं, सख़्त होगा या नहीं, इसके बारे में अभी केवल एक ही बात निश्चित है - कि इस सवाल का जवाब अनिश्चित है.
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