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कोरोना वायरस: क्या दिल्ली के अस्पताल मरीज़ों से भर चुके हैं और लोग भटक रहे हैं?
- Author, सिन्धुवासिनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
“मेरे दिल्लीवासियों, अगर आपको कोरोना हो जाए तो घबराना मत. आप में से ज्यादातर लोगों का इलाजहोम आइसोलेशनमें ही हो सकता है. लेकिन अगर आपको अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत हो तो हमारी उसके लिए भी पूरी तैयारी है.”
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पिछले काफ़ी वक़्त से इस तरह के ट्वीट कर रहे हैं. हर प्रेस कॉन्फ़्रेंस में भी वो यही कहते हैं कि संक्रमण के मामले भले बढ़ रहे हों, हालात काबू में हैं.
क्या वाक़ई दिल्ली में हालात काबू में हैं?
ये पूछने पर हैदर अली रुंआसे हो जाते हैं. उन्होंने कुछ दिनों पहले ही अपनी पत्नी को खो दिया है और उनके चार बच्चों ने अपनी प्यारी मां को.
अस्पतालों में बेड नहीं, भर्ती से करते रहे इनकार
बटला हाउस में रहने वाले हैदर अली की 58 वर्षीय पत्नी अब इस दुनिया में नहीं हैं. कोरोना वायरस संक्रमण ने उनकी जान ले ली. उन्हें बचाने के लिए हैदर अली ने कई अस्पतालों के चक्कर काटे लेकिन वो बच न सकीं.
होली फ़ैमिली, फ़ोर्टिस, अपोलो, बत्रा और गंगाराम जैसे अस्पतालों ने बेड उपलब्ध न होने की बात कहकर उन्हें भर्ती कराने में अपनी असमर्थता जताई.
हैदर अली बताते हैं, “इतने अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद किसी तरह मजीदिया अस्पताल में जगह मिली लेकिन जैसे ही उन्होंने देखा कि मरीज़ की हालत नाज़ुक है, उन्होंने हमें किसी सरकारी अस्पताल में जाने को कहा. उन्होंने कहा कि हमारे पास अभी वेंटिलेटर नहीं है. हम किसी और अस्पताल में जाते उससे पहले ही मेरी पत्नी चल बसीं.”
सरकार से हैदर अली की एक ही गुज़ारिश है. वो कहते हैं, “जो दावे आप करते हैं, उसे लागू कीजिए. सिर्फ़ बातें मत कीजिए. ज़मीन पर व्यवस्था बदलिए.”
'अस्पताल ने कहा, मरीज़ को ख़ुद लेकर आ जाओ'
दिल्ली के सादिक़ नगर में रहने वाले विनय गुप्ता भी दिल्ली सरकार के दावों और आश्वासनों से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते.
विनय के 59 वर्षीय पिता और 32 वर्षीय भाई, दोनों कोरोना पॉज़िटिव हैं. उनके पिता फ़िलहाल राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी (आरजीएसएस) हॉस्पिटल में भर्ती हैं और भाई घर पर ही आइसोलेसन में हैं.
अपने पिता को अस्पताल में भर्ती कराने और भाई को संभालने में विनय ने जो मुश्किलें झेली हैं, वो डराने वाली हैं.
वो बताते हैं, “25 मई को पहले भाई को बुख़ार आया. उसने 28 तारीख़ को कोविड-19 का टेस्ट कराया. इसके बाद 29 मई की रात पापा को तेज़ बुख़ार आया. बुख़ार इतनी तेज़ था कि हमें रात में ही उन्हें लेकर अस्पताल भागे. पहले हम ईएसआई हॉस्पिटल में गए जहां उन्होंने हमें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में रेफ़र कर दिया. वहां उनका कोरोना संक्रमण का टेस्ट हुआ. डॉक्टरों ने कहा कि टेस्ट की रिपोर्ट पांच दिन बाद आएगी इसलिए उन्हें घर ले जाया जाए.”
इसके बाद पांच दिनों तक के लिए विनय अपने पिता को घर ले आए और इस दौरान तबीयत ख़राब होने पर उन्हें बीच-बीच में ड्रिप चढ़वाने के लिए अस्पताल लेकर जाते रहे.
रिपोर्ट आई तो विनय के पिता कोरोना पॉज़िटिव थे. दोपहर दो बजे के क़रीब आरएमएल अस्पताल से फ़ोन करके उनके कोरोना पॉज़िटिव होने की जानकारी दी गई. हालांकि इसके बाद क्या होगा, कोई टीम मरीज़ को घर लेने आएगी या नहीं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.
विनय का कहना है कि अस्पताल पहले तो अलग-अलग फ़ोन नंबर डायल करने को कहता रहा और फिर आख़िर में कहा कि आप ख़ुद मरीज़ को लेकर अस्पताल आ जाएं.
'हेल्पलाइन से कोई मदद नहीं मिली'
उन्होंने बताया, “पापा को लगातार बुख़ार था. मैं उन्हें ऐसे कैसे लेकर चला जाता? और वो पॉज़िटिव थे, उनके साथ जाने पर क्या मुझे संक्रमण का ख़तरा नहीं होता?”
विनय को इस दौरान ये डर भी सता रहा था कि अगर उनके परिवार से संक्रमण पूरे मोहल्ले में फैल गया तो सब लोग उन्हें दोष देंगे.
आख़िरकार अस्पताल से कोई मदद न मिलती देख विनय ने दिल्ली सरकार का हेल्पलाइन नंबर डायल किया लेकिन वो लगातार व्यस्त था.
वो बताते हैं, “मैंने कम से कम 20-30 बार फ़ोन किया लेकिन हर बार नंबर बिज़ी था. इधर पापा की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी. उन्हें ब्लड प्रेशर की तकलीफ़ है और उम्र भी तकरीबन 60 हो चली है. इसलिए फिर मैंने घबराकर ट्वीट किया. मैंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सत्येंद्र जैन समेत कई लोगों को टैग करते हुए एक के बाद एक कई ट्वीट किए.”
विनय के ट्वीट्स के बाद आख़िरकार आम आदमी पार्टी के विधायक दिलीप पांडेय ने उनसे संपर्क किया. तब जाकर उनके पिता आरजीएसएस हॉस्पिटल में भर्ती हो पाए.
विनय के पिता तो भर्ती हो गए लेकिन भाई अब भी होम आइसोलेशन में हैं. भाई को भर्ती कराने के लिए विनय ने बीएल कपूर और बत्रा हॉस्पिटल का रुख़ किया लेकिन वहां से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा.
उन्होंने बताया, “मैंने दिल्ली सरकार के कोरोना डेल्ही ऐप पर चेक किया तो बीएल कपूर में 93 बेड उपलब्ध थे लेकिन अस्पताल जाने पर उन्होंने कहा कि उनके पास कोई बेड ख़ाली नहीं है. ऐप मे बत्रा हॉस्पिटल में भी 10 बेड ख़ाली दिखा रहे थे लेकिन उन्होंने भी सभी बेड भरे हुए कहकर भर्ती करने से इनकार कर दिया.”
विनय ने बताया कि घर में दो-दो कोविड-19 मरीज़ होने के बावजूद अब तक कोई टीम उनका घर सैनिटाइज़ करने नहीं आई है और इस वजह पूरा परिवार ख़ौफ़ में जी रहा है.
दिल्ली सरकार के ऐप में गड़बड़ी
कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘डेल्ही कोरोना’ ऐप लॉन्च किया था जिसका मक़सद अस्पतालों में उपलब्ध बेड और वेंटिलेटर की जानकारी मुहैया कराना था. लेकिन ऐसा पता चला है कि ऐप से मिलने वाली जानकारी और अस्पतालों की असल स्थिति काफ़ी अलग है.
फ़ेसबुक और ट्विटर पर लोग लगातार लिख रहे हैं कि कैसे उनके कोरोना पॉज़िटिव परिजनों को पर्याप्त बेड और वेंटिलेटर न होने की वजह से अस्पतालों में भर्ती नहीं किया जा रहा है.
ऐप से मिलने वाली जानकारी कितनी सही है, ये समझने के लिए हमने भी दिल्ली के कुछ अस्पतालों में फ़ोन किया.
फ़ोन करने पर जो हुआ, वो कुछ इस तरह है:
- लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) की वेबसाइट पर दिए नंबर पर कॉल करने पर किसी ने फ़ोन रिसीव नहीं किया. ऐप के अनुसार यहां 968 बेड और 48 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं.
- फ़ोर्टिस हॉस्पिटल में कॉल करने पर बेड उपलब्ध न होने की बात कही गई जबकि ऐप में 32 बेड उपलब्ध होने की सूचना है.
- आरएमएल हॉस्पिटल में फ़ोन करने पर किसी ने जवाब नहीं दिया. ऐप के अनुसार यहां 23 बेड और चार वेंटिलेटर उपलब्ध होने की जानकारी है.
- बत्रा हॉस्पिटल में भी सभी बेड भरे होने की बात कही गई. हालांकि ये भी कहा गया कि मरीज़ की डिटेल्स देने पर नाम वेटिंग लिस्ट में डाल दिया जाएगा और जैसे ही बेड खाली होगा, जानकारी दे दी जाएगी. ऐप के अनुसार बत्रा में 80 बेड उपलब्ध हैं.
- बीएलके हॉस्पिटल में कॉल करने पर फ़ोन रिसीव किया गया लेकिन उपलब्ध बेड के बारे में पूछे जाने पर कॉल दूसरे एक्सेंटशन पर फ़ॉरवर्ड की गई, जहां से कोई जवाब नहीं मिला.
इन गड़बड़ियों के बारे में पूछे जाने पर दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य महासचिव डॉक्टर नूतन मुंडेजा ने कहा कि चूंकि ऐप अभी कुछ दिनों पहले ही लॉन्च हुआ है इसलिए सही जानकारी अपडेट होने में देर हो रही है.
उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में ये समस्याएं दूर कर ली जाएंगी. मुंडेजा ने ये भी कहा कि बहुत से लोग डर और घबराहट की वजह से अस्पताल में भर्ती होना चाहते हैं लेकिन कोरोना के 80 फ़ीसदी मरीज़ होम आइसोलेशन में रहकर ही ठीक हो जाते हैं.
वहीं, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने शुक्रवार को टीवी चैनलों से कहा कि बेड की कमी वाली ख़बरें भ्रामक हैं.
उन्होंने कहा, "कुछ प्राइवेट अस्पताल मरीज़ों को भर्ती करने से इनकार कर रहे हैं इसलिए ऐसा लग रहा है कि दिल्ली में बेड की कमी है जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है. हमारे पास अब भी 5000 बेड उपलब्ध हैं. जल्दी ही इनका लाइव डेटा साझा किया जाएगा."
(नोट: मरीज़ों और उनके परिजनों के नाम भारत सरकार के दिशानिर्देशों के तहत बदल दिए गए हैं.)
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