कोरोना वायरस: 'वेंटिलेटर' धमन -1 का विवाद, बनाने वाले पराक्रम सिंह जाडेजा का बीजेपी से नाता?

धमन-1

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    • Author, तेजस वैद्य
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

गुजरात में राजकोट की ज्योति सीएनसी (कंप्यूटराइज्ड न्यूमेरिकल कंट्रोल) कंपनी द्वारा बनाए गए वेंटिलेटर धमन- 1 के ऊपर काफ़ी विवाद हुआ.

धमन-1 का प्रथम लाइव टेस्टिंग 4 अप्रैल को अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में हुआ था. मई के तीसरे सप्ताह में अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में मेडिकल सुप्रीटेंडेंट ने गुजरात मेडिकल सर्विसेज़ कॉरपोरेशन लिमिटेड (जीएमएससीएल) के मैनेजिंग डायरेक्टर को ख़त लिख कर बताया की 'हमें फ़ौरन हाई एंड वेंटिलेटर चाहिए. हमें कोविड-19 के मरीज़ों के लिए धमन-1 और ऐजीवीऐ वेंटिलेटर मुहैया किए गए थे. लेकिन एनेस्थेसिया विभाग के मुखिया ने बताया है कि इन दोनों वेंन्टिलेटर्स से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले है. इसलिए आप हाई एन्ड वेंटिलेटर्स भेजें.'

उसके बाद विपक्ष ने इसे फ़ेक वेंटिलेटर क़रार दिया. हालांकि इस दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी और नायब मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने धमन-1 का ख़ूब बचाव किया. गुजरात में स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव डॉक्टर जयंती रवि ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके ज्योति सीएनसी और धमन-1 का बचाव किया.

उन्होंने कहा था, "जब वेंटिलेटर्स की बहुत कमी थी वैसे में ज्योति सीएनसी ने देश के लिए कुछ कर गुज़रने की भावना से काम किया है. उन पर आक्षेप लगाना उचित नहीं है."

हमने जानने की कोशिश की कि जिन्होंने धमन-1 का निर्माण किया है वो पराक्रम सिंह जाडेजा कौन हैं और उनकी कंपनी ज्योति सीएनसी क्या उत्पादन करती है.

कौन है पराक्रमसिंह जाडेजा?

ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड के चीफ़ मैनेजिंग डायरेक्टर पराक्रम सिंह जाडेजा स्पोर्ट्स में अपना करियर बनाना चाहते थे लेकिन बन गए बिज़नेसमैन.

रश्मि बंसल की किताब 'टेक मी होम: द इन्स्पायरिंग स्टोरीज ऑफ़ टवेंटी एंटरप्रिन्योर्स फ्रॉम स्मॉल टाउन इंडिया विथ बिग ड्रीम्स' में विभिन्न व्यवसायों के संघर्ष और सफलता का उल्लेख किया गया है, जिसमें एक प्रकरण पराक्रम सिंह के बारे में भी है.

पराक्रम सिंह जाडेजा

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उसमें बताया गया है कि पराक्रम सिंह शतरंज और क्रिकेट के अच्छे खिलाड़ी थे. 1985 में गुजरात की तरफ़ से जो चोटी के तीन खिलाड़ी राष्ट्रीय टुर्नामेंट में हिस्सा लेनेवाले थे उनमें एक पराक्रम सिंह थे. उस वक़्त उनकी बारहवीं की बोर्ड परीक्षा और टूर्नामेंट साथ में ही थे. उन्होंने टूर्नामेंट में जाना पसंद किया था. 1989 में वे इंग्लिश काउंटी क्रिकेट के लिए अंडर 19 टीम में चयनित हुए थे. उस वक़्त उनके परिवार को एयर टिकट के लिए आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा था.

उसके बाद पराक्रम सिंह स्पोर्ट्स छोड़कर व्यवसाय में जुड़ गए. उन्होंने ज्योति सीएनसी (कंप्यूटराइज्ड न्यूमेरिकल कंट्रोल) शुरू की. 1989 में कंपनी की शुरुआत हुई और आज एक मल्टीनेशनल कंपनी है.

देश की बड़ी मशीन टूल्स कंपनियों में से एक ज्योति सीएनसी है. मशीनों से जुड़ी बहुत सी चीज़ें जैसे गियर बॉक्स, लेथ मशीन इत्यादि का उत्पादन करके कंपनी ने विकास किया. बाद में सीएनसी मशीन में भी आगे बढ़े.

कंपनी का दावा है कि ज्योति पहली कंपनी है जिसने सीएनसी का गुजरात में उत्पादन शुरू किया. सीएनसी वर्टिकल लाइन मशीन, सीएनसी टर्निंग सेंटर्स, सीएनसी टर्न मिल सेंटर्स जैसी प्रोडक्ट के साथ ज्योति सीएनसी का नाम जुड़ा है. राजकोट की जीआईडीसी (गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) में कंपनी के 3 अलग-अलग प्लांट्स हैं.

ज्योति सीएनसी का कारोबार

ज्योति सीएनसी का कम्पूटराइज़्ड मशीन कटिंग टूल्स का बड़ा कारोबार है. सीएनसी टर्निंग सेंटर, सीएनसी मशीनिंग सेंटर, वर्टीकल लाइन सीएनसी मशीन्स बनाने में उनका बड़ा नाम है.

IMTEX को दिए गए एक साक्षात्कार में पराक्रम सिंह जाडेजा ने बताया था कि 1999-2000 में उन्होंने सीएनसी मशीन बनाने शुरू किए थे.

ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, अलाइड मशीनरी, अग्रिकल्चर, डिफ़ेन्स, रेलवे, मेडिकल इक्विपमेंट्स, प्लास्टिक मशीन्स, ज्वेलरी, पावर और टेक्सटाइल जैसे उद्योग में ज्योति मशीन्स मुहैया कराती है. उनकी सेल्स और सर्विस शाखाएँ भारत के बड़े शहरों में है.

कंपनी की वेबसाइट पर बताया गया है कि ज्योति सीएनसी के ग्राहकों में आर्सेलर मित्तल, बजाज, अशोक लेलैंड, गोदरेज, इंडियन ऑइल, टाइटन,अम्बुजा सीमेंट, एयरटेक वग़ैरह हैं.

कंपनी का कारोबार भारत के बाहर विदेश में भी फैला हुआ है. फ्रांस की मशीन टूल्स कंपनी ह्युरोन को ज्योति सीएनसी ने 2007 में अधिग्रहण किया था. जिसका यूरोप में बड़ा नेटवर्क है. मशीन टूल्स में फॉक्सवेगन, बीएमडबल्यू, फ़रारी, मर्सिडीज़, वॉल्वो, बोइंग, ऑडी, एयरबस जैसे उनके ग्राहक हैं. ज्योति - ह्युरोन के एक्सपोर्ट ऑपरेशन्स अमरीका, टुनिशिया, टर्की, रूस , स्लोवाकिया , साउथ अफ्रीका, स्पेन,श्रीलंका , इटली, नीदरलैंड जैसे देशों में हैं.

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ज्योति सीएनसी के भारत में 1200 कर्मचारी हैं और फ्रांस में 150 कर्मचारी हैं. ज्योति सीएनसी के आर एंड डी सेंटर का उद्घाटन नरेंद्र मोदी ने किया था.

इंडिया टुडे की अप्रैल की एक रिपोर्ट में बताया गया है, "पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री ने ज्योति सीएनसी के पराक्रम सिंह जाडेजा को बताया कि वे स्वदेशी वेंटिलेटर बनाने में अपने हाथ आज़माए. मोदी जब गुजरात में मुख्यमंत्री थे तब से जाडेजा के सीएनसी यूनिट के बारे में जानते हैं."

2008 में ज्योति सीएनसी ने राजकोट में रिसर्च एंड डेवेलपमेंट सेंटर शुरू किया था. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे. उन्होंने उस सेंटर का उद्घाटन किया था. नरेंद्र मोदी ने तब कहा था की "कुछ करने की ललक हो तो कितने उत्तम परिणाम ला सकते हैं वो पराक्रम सिंह में हम देख सकते हैं. मनुफैक्चरिंग क्षेत्र में गुजरात ने बड़ा नाम हासिल किया है. राजकोट के इंजन उद्योग ने पूरी दुनिया में पहचान बनाई है. चीन और भारत के बीच जो स्पर्धा है वह काफ़ी हद तक मैनुफेक्चरिंग क्षेत्र पर निर्भर करता है."

साल 2015 में जर्मनी के हेनोवर मेसे में एक उद्योग मेला रखा गया था. जिसके उद्घाटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिस्सा लिया था. उसमें मेक इन इंडिया के थीम के तहत प्रस्तुति हुई थी. उस मेले में भारत के गौतम अडानी, सायरस मिस्त्री जैसे नामी उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया था, उसमें ज्योति सीएनसी के पराक्रम सिंह जाडेजा भी थे.

हमने गुजरात बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता भारत पंड्या से बीजेपी के साथ पराक्रमसिंह जडेजा के रिश्तों के बारे में पूछा.

भरत पंड्या का कहना था, "जहां तक मुझे याद है जाडेजाजी प्रदेश कार्यकारिणी में या फिर पार्टी में किसी ओहदे पर नहीं है. किसी ज़िले में भी बीजेपी के साथ जुड़े हुए हों ऐसा भी मेरे ध्यान में नहीं आया है. पराक्रम सिंह जाडेजा राजनीति के साथ कहीं जुड़े हुए हों ऐसा मुझे नहीं लगता."

क्या पराक्रमसिंह जाडेजा ने पार्टी फ़ंड में कभी पैसे दिए हैं?

इस बारे में बताते हुए गुजरात में बीजेपी के सौराष्ट्र प्रवक्ता राजू ध्रुव ने कहा, "नहीं पराक्रमसिंह जाडेजा ने कभी फ़ंड के तौर पर पैसे नहीं दिए हैं और ना ही वे राजनीतिक रुझान वाले व्यक्ति हैं. पराक्रम सिंह जाडेजा बीजेपी के न तो प्राथमिक सदस्य हैं और ना ही पार्टी के साथ जुड़े हैं. कोरोना का जो अभूतपूर्व संकट देश में आ पड़ा है तो कुछ कर गुज़रने की चाह से उन्होंने मशीन्स बनाए. उसे राजनीति के साथ जोड़कर नहीं देख सकते."

कांग्रेस लगातार यह आरोप लगा रही है कि विजय रूपाणी ने अपने दोस्त को फ़ायदा पहुँचाने के लिए वेंटिलेटर का काम दिया. ऐसा भी कहा जा रहा है कि पराक्रम सिंह जाडेजा मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के मित्र हैं.

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राजकोट के एक वरिष्ठ पत्रकार ने इस बारे में बताया, "पराक्रम सिंह जाडेजा किसी पार्टी के साथ जुड़े हुए हों ऐसा मेरे ध्यान नहीं आया है. विजय रूपाणी भी राजकोट के हैं और पराक्रम सिंह भी राजकोट से हैं तो वो दोस्त हो सकते हैं. लेकिन उसी वजह से उनको वेंटिलेटर का फ़ायदा पहुँचाया है, यह कहना थोड़ा अतिशयोक्त होगा."

राजकोट के ही अन्य एक वरिष्ठ पत्रकार यह भी बताते हैं, "कोई 1000 मशीन्स सरकार को लागत मूल्य में क्यों देगा? उनके भी अपने राजनीतिक व्यावहारिक समीकरण होंगे ही. लेकिन जब तक उस बारे में कुछ ठोस सामने नहीं आ जाता तब तक कहना उचित नहीं होगा."

ज्योति सीएनसी और उनके शेयर होल्डर के राजनैतिक कनेक्शन का विवाद

31 मार्च 2019 का ज्योति सीएनसी का जो शेयर होल्डर्स लिस्ट है उसमें एक विरानी परिवार है. इस बारे में न्यूज़ पोर्टल 'द वायर' में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्योति सीएनसी कंपनी से जुड़े उद्योगपति परिवारों में से एक विरानी परिवार है, जिन्होंने साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हीं के नाम का छपा हुआ महंगा सूट तोहफ़े में दिया था.

यह तोहफ़ा देने वाले व्यवसायी रमेश कुमार भीखाभाई विरानी सूरत के विरानी परिवार का हिस्सा हैं, जिनकी कई सालों से ज्योति सीएनसी में महत्वपूर्ण वित्तीय हिस्सेदारी है. कंपनी की 2003-04 की फाइलिंग के अनुसार भीखाभाई विरानी के दोनों बेटे- अनिल और किशोर इस कंपनी के बड़े शेयरहोल्डर थे.

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द वायर की रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि ईमेल से भेजे गए जवाब में पराक्रम सिंह जाडेजा ने कहा है कि आज की तारीख़ में विरानी परिवार का कंपनी में कोई शेयर नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि फ़रवरी 2020 में ज्योति सीएनसी की शेयरहोल्डिंग संबंधी फाइलिंग में विरानी परिवार की हिस्सेदारी वित्त-वर्ष 2019 की है.

बीबीसी ने पराक्रम सिंह जाडेजा को पूछा कि वीरानी परिवार आपकी कंपनी में शेयर होल्डर है, उनका कितना हिस्सा है?

इस पर उनका जवाब था, "इस बारे में फ़िलहाल कुछ कहना मुझे उचित नहीं लगता. हमारी कंपनी अभी पब्लिक लिमिटेड नहीं है."

गुजरात भाजपा के मुख्य प्रवक्ता भरत पंड्या ने इस बारे में बताया की "मोदीजी को दिए गए सूट और धमन -1 का कुछ लेना देना ही नहीं है. सूरत के उद्योगपति ने शुभेच्छक के तौर पर सूट दिया था."

इससे भाजपा के प्रति निकटता की छवि भी तो बनती है? इस सवाल पर भरत पंड्या ने कहा की, "जब कोई मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री होता है, फिर चाहे वो किसी भी पार्टी के हों, समाज के कुछ लोग अपनी शुभकामनाएं प्रकट करते हैं. इसका मतलब यह नहीं की पार्टी से उनका नाता है."

किस तरह हुआ धमन-1 का निर्माण?

धमन-1 की एक अलग वेबसाइट भी है जिसमे पराक्रम सिंह जाडेजा ने बताया है कि ज्योति सीएनसी ने कोविड-19 की चुनौती को ध्यान में रखकर ही धमन-1 का प्रोजेक्ट शुरू किया है. हम लोग वेंटिलेटर्स उत्पाद के एक्सपर्ट्स नहीं हैं लेकिन देश में जो उसकी ज़रुरत है उसे ध्यान में रखकर हमने यह प्लान और डिज़ाइन किया.

'हमने मेक इन इंडिया मिशन को ध्यान में रखकर यह प्रोडक्ट विकसित किया है. इस प्रेशर कंट्रोल वेंटिलेटर को बनाने में देश की अलग-अलग 26 कंपनियों से हमने इसके पार्ट्स मंगवाए है. 150 इंजीनियर की एक टीम हमने तैयार की थी. अहमदाबाद की आरएचपी मेडिकल्स के राजेंद्र परमार को वेंटिलेटर्स टेस्टिंग और मेंटेनेंस - रखरखाव का अनुभव है तो उन्हीं की अगुवाई में इंजीनियर की टीम ने काम किया. उनकी वेबसाइट पर यह ज़िक्र है.'

धमन-1

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साथ में यह भी कहा गया है कि "हम वेंटिलेटर्स बनाने के एक्सपर्ट नहीं हैं लेकिन देश में इसकी मौजूदा माँग को देखते हुए हमने इस मशीन का प्लान और निर्माण किया."

धमन-1 का निर्माण जब चल रहा था तब बीबीसी ने अप्रैल के प्रथम सप्ताह में ज्योति सीएनसी के कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन्स के एग्जीक्यूटिव हेड शिवांगी लखाणी से बात की थी. उन्होंने बताया था की "तकनीकी बारीकियों को ध्यान में रखकर 25 लोगों की टीम ने दिनरात एक कर के 10 दिन में प्रोटोटाइप तैयार किया था. उसके बाद 250 लोग इस काम में जुड़े थे."

आम तौर पर वेंटिलेटर की बाज़ार क़ीमत छह लाख और उससे ज़्यादा होती है. अगर इसकी बेसिक क़ीमत ही छह लाख है और आप कह रहे हैं कि एक लाख में बनाया है तो आप कैसे अफोर्ड करते हैं? लखाणी ने बताया था, "जो 26 यूनिट्स हमें अलग-अलग पार्ट्स दे रहे है उन्होंने कोरोना की महामारी के चलते हमको लाग़त क़ीमत पर ही पार्ट्स दिए हैं. सप्लायर्स ने हमसे ओवरहेड कॉस्ट नहीं ली है उसी के चलते हम एक लाख प्लस टैक्स जितने कम मूल्य में इसे दे रहे हैं."

धमन-1 वेंटिलेटर नहीं बल्कि एएमबीयू बैग है: कांग्रेस

गुजरात में धमन-1 वेंटिलेटर के ऊपर काफ़ी विवाद हुआ. शासक पक्ष और विपक्ष दोनों धमन-1 के मामले में आमने सामने आ गए थे.

गुजरात कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने धमन-1 को फेक़ वेंटिलेटर बताते हुए कहा था, "मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने अपने दोस्त की कंपनी का मार्केटिंग करने के लिए गुजरात के लोगों की ज़िंदगियों को दाव पर लगा दिया है. धमन-1 की कई सीमाएं हैं, इस बात से कंपनी ने पहले से ही मुख्यमंत्री को वाक़िफ़ करा दिया था. फिर भी विजय रुपाणी ने पब्लिसिटी स्टंट किए. धमन-1 ऑक्सीजन सप्लाई मशीन है, उसे वेंटिलेटर बता कर मुख्यमंत्री ने गुजरात के लोगों के साथ गुनाह किया है."

अमित चावड़ा ने ट्वीट कर यह भी कहा था की धमन-1 वेंटीलेटर नहीं बल्कि एएमबीयू (आर्टिफ़ीशियल मैन्यूएल ब्रीदिंग यूनिट) बैग है.

धमन-1 प्रेशर कंट्रोल वेंटिलेटर है: पराक्रमसिंह जाडेजा

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इस पर बीबीसी ने ज्योति सीएनसी (कंप्यूटराइज्ड न्यूमेरिकल कंट्रोल) के पराक्रम सिंह जाडेजा से बात की तो उन्होंने कहा की कई डॉक्टरों ने धमन-1 को देखा परखा है, किसी ने हमको यह नहीं कहा कि यह फेक़ वेंटिलेटर है या एएमबीयू बेग है. जितने भी टेक्निकल लोग हैं उनसे मेरा आग्रह है की धमन-1 को खोलकर देखें और जांचे की उसमें बैग है या नहीं? धमन-1 वेंटिलेटर है. साथ में यह समझना होगा की धमन-1 एक बेसिक मॉडल है. यह बात हम शुरुआत से कह रहे हैं कि यह एक बेसिक मॉडल है, हमने कभी यह नहीं कहा की धमन-1 हाई एन्ड मॉडल है."

पराक्रम सिंह जाडेजा ने यह भी कहा, "सिविल अस्पताल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के ख़त में सिर्फ़ धमन-1 का ही ज़िक्र नहीं है. ऐ.जी.वी.ऐ करके अन्य एक कंपनी के वेंटिलेटर का भी उसमे ज़िक्र है, लेकिन विवाद सिर्फ़ धमन-1 का ही बनाया जा रहा है. उस लेटर में इतना ही कहा गया था कि हमें अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं, हमें हाई एन्ड मशीन चाहिए. ऐ.जी.वी.ऐ का मशीन तो एडवांस है फिर भी उस डॉक्टर ने बताया है कि हाई एन्ड मशीन चाहिए. अब देखने की बात यह है कि आख़िर क्यों वो लेटर बाहर आया?"

आपको लगता है कि धमन-1 बेवजह राजनैतिक विवाद का मुद्दा बन गया है? इस सवाल पर पराक्रम सिंह बताते हैं कि "मैं इसमें नहीं पड़ना चाहता हूँ. इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता हूँ." तो धमन-1 का उत्पादन जारी है या बंद कर दिया है?

इस सवाल पर जाडेजा ने बताया की "धमन-1 के जितने भी मॉडल हम मुहैया करवाने वाले थे वो कर दिया गया है. कुछ बाक़ी ऑर्डर्स हैं जो हम सप्लाई कर रहे हैं."

अपग्रेडेड'धमन-3' आएगा

20 मई को गुजरात में स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव डॉ. जयंती रवि ने एक प्रेसवार्ता में कहा था कि "भारत सरकार पूरे देश में वेंटिलेटर मुहैया कराने पर ज़ोर दे रही है तब नोडल एजेंसी एचएचएल लाइफ़केयर लिमिटेड के ज़रिये हाई पावर कमिटी मापदंडो को ध्यान में रख 5000 वेंटिलेटर्स ख़रीदने के ऑर्डर्स दिए गए हैं."

इस बारे में पराक्रम सिंह ने बताया कि "वो धमन-3 के ऑर्डर्स हैं, उसका काम हो रहा है. धमन-3 का वैलिडेशन वग़ैरह हो रहा है. वो अभी हमने लॉन्च नहीं किया हैं. उसका टेस्टिंग और दूसरे जो भी प्रोटोकॉल्स है उसका काम चल रहा है."

धमन-3 के ऑर्डर्स कितने है? इस पर जवाब देते हुए पराक्रम सिंह जाडेजा ने कहा की "एक बार तैयार हो जाये उसके बाद ऑर्डर्स के बारे में देखेंगे."

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