कोरोना संकट: गुजरात के धमन-1 'वेंटिलेटर स्कैम' का सच
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Author, नितिन श्रीवास्तव
पदनाम, बीबीसी संवाददाता
गुजरात के राजकोट शहर की एक कंपनी है 'ज्योति सीएनसी' जिसका दावा है कि "कोविड-19 से लड़ने के लिए उसने एक पहल की है."
'ज्योति सीएनसी' की धमन वेबसाइट का नाम उन 'वेंटिलेटर्स' के नाम पर रखा गया है जिनका निर्माण कंपनी के सीएमडी पराक्रम जाडेजा के 'साहस और दूरदर्शिता के चलते किया गया जिससे कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जारी जंग में गुजरात प्रदेश और दूसरों की मदद हो सके.'
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इमेज कैप्शन, वेबसाइट पर वेंटिलेटर का मॉडल
इसी वेबसाइट पर कंपनी के कुछ और भी दावे हैं:
धमन-1 वेंटिलेटर्स का निर्माण 'मेक इन इंडिया' मिशन को ध्यान में रखते हुए किया गया है और कोविड-19 से निपटने के लिए गुजरात सरकार को 1,000 'वेंटिलेटर्स' दान दिए जा सकें.
'ज्योति सीएनसी' और 26 दूसरी कंपनियों के 150 प्रोफ़ेशनल्स ने दिन-रात मेहनत कर निर्धारित समयसीमा में इसका निर्माण किया.
धमन-1 एक गुजराती शब्द है जिसका पर्याय एक ब्लोअर से है जो हवा पम्प करने का काम करती है.
धमन-1 'वेंटिलेटर' की क़ीमत एक लाख रुपये है जो बाज़ार में उपलब्ध दूसरे वेंटिलेटर्स की क़ीमत से 20% से भी ज़्यादा कम है.
इन दावों के बीच कंपनी ने एक लाइन और लिखी है और वो ये है कि "हम वेंटिलेटर्स बनाने के एक्सपर्ट नहीं हैं लेकिन देश में इसकी मौजूदा मांग को देखते हुए हमने इस मशीन का प्लान और निर्माण किया."
'ज्योति सीएनसी' के ये सभी दावे, धमन-1 की वेबसाइट पर, उस विवाद के बावजूद मौजूद हैं जिसकी वजह से कोरोना वायरस जैसी बीमारी के प्रकोप के बीच भी गुजरात में राजनीति उफ़ान पर है.
लेकिन 5 सवालों के जवाब मिलने अभी बाक़ी हैं:
सिर्फ़ एक मरीज़ पर ट्रायल के बाद ही धमन-1 की सप्लाई अस्पतालों में क्यों शुरू हो गई?
धमन-1 के पास डीजीसीआई (ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ़ इंडिया) का लाइसेंस क्यों नहीं है?
भारत के 'मेडिकल डिवाइस नियमों, 2017', के अनुसार क्या धमन-1 की टेस्टिंग के लिए एथिकल कमिटी का गठन हुआ?
जिन 866 धमन 1 मशीनों की सप्लाई गुजरात के अस्पतालों में हुई, उनमें से कोविड-19 आईसीयू में कितने मरीज़ों पर इसका उपयोग हुआ और मशीनों का इस्तेमाल शुरू होने के बाद उन अस्पतालों में कोरोना संक्रमण से मरने वालों की तादाद कितनी है?
अगर धमन-1 वाक़ई में 'एक सस्ती लेकिन असरदार वेंटिलेटर मशीन है तो फिर अब भारत के दूसरे राज्यों में इसकी सप्लाई क्यों नहीं हो रही जबकि विदेशों से वेंटिलेटर आयात करने के ऑर्डर दिए जा रहे हैं?
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वेंटिलेटर्स क्यों?
साल 2019 ख़त्म होते-होते चीन के वुहान शहर से कोरोना वायरस के मामले बढ़ने शुरू हुए थे.
एशिया के अलावा यूरोप, अमरीका और दक्षिण अमरीका में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे थे और 30 जनवरी को बीमारी ने भारत में भी दस्तक दे दी.
संक्रमण की हालत जानने के लिए ज़िले का नाम अंग्रेज़ी में लिखें
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, "कोविड-19 के इलाज की फ़िलहाल तो कोई वैक्सीन नहीं है, लेकिन जिन संक्रमित मरीज़ों को हॉस्पिटल में भर्ती कराने की ज़रूरत पड़ती हैं, उनमें से ज़्यादातर को साँस लेने में तकलीफ़ की शिकायत बढ़ी हुई होती है."
दुनिया के सभी देशों में कोविड-19 के की वजह से अस्पताल में भर्ती जिन मरीज़ों की रिकवरी हुई, उनमें ज़्यादातर को वेंटिलेटर- साँस लेने और शरीर के अभिन्न अंगों में ऑक्सीजन-ब्लड सप्लाई को मदद करने वाली मशीन की ज़रूरत पड़ी.
तो कोरोना वायरस के संक्रमण के साथ ही वेंटिलेटर्स की मांग भी एकाएक बढ़ती चली गई.
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इमेज कैप्शन, मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने वेंटिलेटर का उद्घाटन किया था
मामला क्या है?
कोरोना वायरस से निपटने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन जारी था और इसी बीच 4 अप्रैल को राजकोट की कंपनी 'ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड' के सीएमडी पराक्रम जाडेजा ने ऐलान किया कि "धमन-1 वेंटिलेटर्स का निर्माण शुरू हो चुका है, 1,000 वेंटिलेटर्स गुजरात सरकार को दिए जाएँगे. उसी दिन यानी शनिवार को इसे अहमदाबाद के एक मरीज़ पर सफलतापूर्वक टेस्ट कर लिया गया है."
ख़बर आग की तरह फैली और न सिर्फ़ स्थानीय बल्कि भारत की राष्ट्रीय मीडिया में भी प्रमुखता से दिखी क्योंकि ख़ुद उसी दिन गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में इसका 'उद्घाटन कर दिया' और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं.
इसके बाद विजय रूपाणी ने पत्रकारों को बताया, "मुझे ख़ुशी है कि वेंटिलेटर बनाने में भी हमारे गुजरात के उद्योगपति कामयाब हुए. ये सर्टिफ़ाई हो गया है और सुबह से मशीन एक मरीज़ पर काम भी कर रही है. इससे गुजरात में तो वेंटिलेटर की कमी ख़त्म होगी ही, उसके अलावा भारत के दूसरे राज्यों में भी इसकी सप्लाई हो सकेगी."
इसके कुछ दिन बाद ही बीबीसी गुजराती से हुई बातचीत में ज्योति सीएनएस की कॉरपोरेट कॉम्युनिनिकेशंस प्रमुख शिवांगी लखानी ने कहा, "कोविड-19 के मरीज़ों को प्रेशर बेस्ड वेंटिलेटर चाहिए और इसी तकनीक को ध्यान में रखते हुए धमन-1 को बनाया गया है. महाराष्ट्र सरकार ने हमसे धमन-1 मँगवाए हैं और अमरीका, ईरान, कीनिया, पुर्तगाल, कज़ाक़िस्तान और फ़्रांस ने भी हमसे सम्पर्क किया है."
12 अप्रैल को हुई इस बातचीत में जब शिवांगी से इस वेंटिलेटर की टेस्टिंग के बारे में पूछा गया तो जवाब मिला, "हमने अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में वेंटिलेटर रखा और उसके पहले गांधीनगर की EQDC (Electronics and quality development centre) पर गुणवत्ता प्रमाणपत्र के लिए भेजा था. उन्होंने जो प्रमाणपत्र दिया उसके बाद सिविल हॉस्पिटल में रखा गया था. हमें सिविल अस्पताल से अच्छे प्रतिभाव मिले है. वहां के मेडिकल स्टाफ़ ने टेस्टिंग कर ली है."
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फिर विवाद क्यों
धमन-1 के ऊपर विवाद का साया तब से गहराया जब 14 मई को गुजरात के उप-मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री नितिनभाई पटेल अहमदाबाद सिविल अस्पताल के दौरे के पर गए और डाक्टरों के साथ एक बैठक भी हुई.
15 मई को सिविल अस्पताल (जो सिर्फ़ गुजरात ही नहीं भारत का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है) के डाक्टरों ने नितिनभाई पटेल के साथ हुई बैठक का हवाला देते एक पत्र लिखकर सरकार से एक 'अत्यावश्यक गुहार' लगाई.
इस पत्र में लिखा था, "आईसीयू में कोरोना संक्रमित मरीज़ों के उपचार के लिए धमन-1 और एजीवीए (दिल्ली की एक कम्पनी द्वारा बनाए गए वेंटिलेटर) मुहैया कराए गए थे. सिविल अस्पताल के एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि दोनों ही वेंटिलेटर्स मरीज़ों पर सफल साबित नहीं हो रहे हैं. हमें हाई-एंड आइसीयू वेंटिलेटर्स की तुरंत ज़रूरत है."
मीडिया में तेज़ी से छपी इस ख़बर ने खलबली मचा दी और गुजरात सरकार ने तुरंत ही एक प्रेस वार्ता में धमन-1 वेंटिलेटर का बचाव किया.
प्रदेश की स्वास्थ्य सचिव जयंती राव ने कहा, "धमन-1 को भारत सरकार द्वारा गठित एक हाई-पावर्ड कमिटी ने ठीक पाया."
उन्होंने आगे कहा, "जब गुजरात को ज़रूरत थी, तब उन्हें धमन-1 के उत्पादक ने 1,000 वेंटिलेटर देने का वायदा किया था और 866 दे दिए हैं. वेंटिलेटरों पर काम जारी है, मगर मौजूदा वेंटिलेटर मरीज़ों के लिए सहायक है."
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बहरहाल, सरकार के इस दावे को ख़ारिज करते हुए अहमदाबाद मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य और जाने-माने एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर बिपिन पटेल ने बीबीसी के लिए लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार भार्गव पारीख को बताया, "धमन-1 वेंटिलेटर सही में वेंटिलेटर नहीं हैं. इस में रेस्पिरेशन सेट करने के लिए और मरीज़ को कितनी मात्रा में ऑक्सीजन देनी चाहिए, उसके मीटर नहीं हैं. इसमें ह्यूमिडिटी नाप की कोई मात्रा नहीं हैं."
उनका दावा है, "वास्तव में जब भी कोई ऑपरेशन होता है या मरीज़ को साँस लेने में दिक़्क़त हो तो हम एनेस्थेटिस्ट वेंटिलेटर का उपयोग करते हैं. इसके कारण कोई भी ऑपरेशन के दौरान या मरीज़ की क्रिटिकल हालत के दौरान उसके मसल्स रिलैक्स रहें और हार्ट को ऑक्सीजन आसानी से मिलने में कोई दिक़्क़त न हो. धमन-1 वेंटिलेटर में ऐसी सुविधा नहीं होने के कारण मरीज़ों को दिक्कत आ सकती हैं. इस वजह से ये मरीज़ के लिए घातक भी हो सकता है."
इस बात के आरोप बढ़ने लगे कि धमन-1 "दरअसल वेंटिलेटर नहीं बल्कि एक एएमबीयू (आर्टिफ़ीशियल मैन्यूएल ब्रीदिंग यूनिट) मशीन है."
गुजरात में विपक्षी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़े का आरोप है, "जिन्हें वेंटिलेटर्स बताकर मरीज़ों का इलाज करने में लगा दिया गया, वो सस्ते ऑक्सीजन बैग भर हैं और मुख्यमंत्री ने अपने जान-पहचान वालों का फ़ायदा कराने के लिए इसे ओके कर दिया."
गुजरात के विपक्षी दलों ने लगातार मामले की न्यायिक जाँच होने की मांग दोहराई है.
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गोले प्रत्येक देश में कोरोना वायरस के पुष्ट मामलों की संख्या दर्शाते हैं.
स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां
आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने बीबीसी से कहा, "अहमदाबाद में जिस तरह कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, उसमें प्रशासनिक लापरवाही साफ़ दिख रही है. ऐसी गम्भीर चीज़ों से निपटने में भी सरकार के भीतर मतभेद दिख रहे हैं ग़लत राय का पालन हो रहा है. इतने सस्ते और जल्दी बने वेंटिलेटर्स से मरीज़ों की जान से खिलवाड़ का क्या मतलब है".
हालाँकि गुजरात की भाजपा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री नितिन भाई पटेल और गुजरात के स्वास्थ्य आयुक्त ने हमारे कई फ़ोन कॉल्स ये कहकर काट दिए, "अभी हम मीटिंग में है, प्लीज़ बाद में बात करिए."
लेकिन सरकार ने इससे पहले विपक्ष के सभी आरोपों का खंडन किया है और इन्हें "राजनीति से प्रेरित बताया है".
इस बीच धमन 1 मशीनों का ऑर्डर दे चुके पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने एक प्रेस वार्ता कर अपने ऑर्डर रद्द करने का फ़ैसला लिया है.
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धमन-1 एएमबीयू या वेंटिलेटर?
गुजरात में अब तक कोरोना के कुल मामले 17,000 पार कर चुके हैं और इस वायरस से मरने वालों की तादाद 1,000 से ऊपर है.
राज्य के क़रीब 70% मामले राजधानी अहमदाबाद और आस-पास रिपोर्ट हुए हैं.
लेकिन इस बीच धमन-1 वेंटिलेटर्स की उपयोगिता और प्रामाणिकता पर विवाद ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है.
हालाँकि ये साबित नहीं हो सका है कि असल में धमन-1 एएमबीयू बैग है या वेंटिलेटर, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स की राय है कि दोनों में बड़ा फ़र्क़ होता है.
डॉक्टर मिनेश पटेल, अहमदाबाद के सीआईएमएस अस्पताल के आइसीयू के कोविड-19 वार्ड के इंचार्ज हैं और दोनों मशीनों में अंतर बताते हैं.
उन्होंने कहा, "एएमबीयू बैग साधारण मरीज़ों को ऑक्सीजन देने वाली मशीन होती है और ये एक आमतौर पर किसी मरीज़ को वेंटिलेटर पर डालने के पहले दी जाती है. एएमबीयू बैग सिर्फ़ 3-6 मिनट तक दिए जाने वाले ऑक्सीजन सपोर्ट के लिए होती है. लेकिन अगर आप मरीज़ को घंटों या कुछ दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना चाहते हैं तो वेंटिलेटर ही उसका ज़रिया है."
हालांकि गुजरात सरकार ने बाद में कई दफ़ा इस बात को दोहराया है कि, "धमन-1 के बाद इसे अपग्रेड करने की प्रक्रिया जारी है."
जानकारों का मानना है कि "वेंटिलेटर्स जैसे मेडिकल उपकरणों का बेहतरीन होना अनिवार्य है."
वीडियो कैप्शन, कोरोना वायरस का मरीज़ों की किडनी पर क्या होता है असर
गुरुग्राम के नारायणा सुपर स्पेशियाल्टी अस्पताल में कार्डिएक क्रिटिकल केयर के कंसलटेंट डॉक्टर जितिन नरूला का मत है कि जिन मरीज़ों को वेंटिलेटर्स की ज़रूरत पड़ती है, उनके फेफड़े पहले से ही सख़्त हो चुके होते हैं और वेंटिलेटर की किसी कमी से और ज़्यादा नुक़सान हो सकता है.
उन्होंने कहा, "आसानी से या सस्ते में मिलने जाने वाले वेंटिलेटर्स के बजाय उन वेंटिलेटर्स को इस्तेमाल करना चाहिए, जिनके भरोसेमंद होने की प्रमाणिकता साबित हो चुकी हो."
ग़ौरतलब ये भी है कि मामले पर बड़ा विवाद खड़ा हो जाने के बाद ज्योति सीएनसी के सीएमडी पराक्रम जाडेजा ने बीबीसी से कहा, "धमन-1 वेंटिलेटर बनाने में हमने सभी मानक फॉलो किए हैं. हमने ISO 86101 और IEC 60601 मानकों का पालन किया है. मिशिगन की कंपनी के आधार पर बनाया है हमने सभी ज़रूरी मंजूरी ले ली हैं, मगर देश की आयात लॉबी हमें परेशान कर रही है. वे नहीं चाहते कि एक स्वदेशी कंपनी इस मार्केट में आए."
वेंटिलेटर्स की गुणवत्ता पर अहमदाबाद के सीआईएमएस अस्पताल के आइसीयू के कोविड-19 वार्ड के इंचार्ज डॉक्टर मिनेश पटेल एक अहम बात की ओर इशारा करते हैं.
उन्होंने कहा, "जैसे किसी भी दवा के साथ होता है, वैसे ही वेंटिलेटर के साथ भी होता है. कई दफ़ा दवाओं के ट्रायल होने के बाद ही मार्केट में आती हैं. उनके लिए यूएसएफ़डीए या आइसीएमआर वग़ैराह की मंज़ूरी सभी लेनी पड़ती है. बतौर एक डॉक्टर हम ये नहीं कह सकते क्या इस्तेमाल करें क्या न करें. आमतौर पर इस्तेमाल वहीं करते हैं जो सभी करते हैं."
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.