कोरोना संकट: सबसे ज़्यादा कमाई करने वाले राज्य ही मुसीबत में, कैसे उबरेगी अर्थव्यवस्था
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Author, गुरप्रीत सैनी
पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कोविड-19 ने भारत की आर्थिक सेहत पर भी बहुत बुरा असर डाला है. इस बात से भारत सरकार भी इनकार नहीं करती और कहती है कि वो देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है.
लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था जिन मज़बूत खंभों यानी राज्यों पर टिकी है, उनकी नींव कोरोना ने हिलाकर रख दी है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि भारत का आर्थिक पुनर्जीवन कितनी मुश्किल और चुनौती भरा रहेगा?
दरअसल भारत की जीडीपी में जिन राज्यों की सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी है उनमें सबसे पहले नंबर पर महाराष्ट्र और दूसरे नंबर पर तमिलनाडु और तीसरे नंबर पर गुजरात हैं. इन राज्यों पर कोरोना की बुरी मार पड़ी है, यहां मामले और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, इसने इन राज्यों की अर्थव्यवस्था की कमर भी तोड़ी है. इसका सीधा असर शनिवार को जारी देश के ताज़ा जीडीपी आंकड़ों में भी देखने को मिला.
संक्रमण की हालत जानने के लिए ज़िले का नाम अंग्रेज़ी में लिखें
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है. यहां बड़े कॉरपोरेट और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के मुख्यालय हैं. व्यूवरशिप के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी फ़िल्म इंडस्ट्री - बॉलीवुड मुंबई में है. महाराष्ट्र देश में कॉटन, गन्ने और केले का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक भी है.
ये राज्य बड़े बाज़ारों से अच्छे से जुड़ा हुआ है, यहां चार अंतरराष्ट्रीय और सात घरेलू हवाई अड्डे हैं. क़रीब तीन लाख किलोमीटर लंबा रोड नेटवर्क और 6,165 किलोमीटर लंबा रेल नेटवर्क है. राज्य का समुद्रतट 720 किलोमीटर लंबा है और 55 बंदरगाह हैं. जहां देश का क़रीब 22 प्रतिशत कार्गो ट्रांसपोर्ट होता है.
2017-18 में महाराष्ट्र का जीएसडीपी यानी ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट $387 अरब रहा था और राज्य ने देश की जीडीपी में 15 प्रतिशत की हिस्सेदारी दी थी.
लेकिन कोरोना ने महाराष्ट्र को बुरी तरह प्रभावित किया है. अबतक सबसे ज़्यादा मामले यहीं सामने आए हैं. कोरोना मामलों को नियंत्रित करने के लिए लगाए लॉकडाउन का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. सब काम धंधे ठप हो गए हैं. फ़िल्म इंडस्ट्री बंद है. आयात निर्यात का काम रुका हुआ है. इस सब से राज्य को बहुत आर्थिक नुक़सान हुआ है.
तमिलनाडु
देश में सबसे ज़्यादा फ़ैक्ट्रियां तमिलनाडु में हैं.
तमिलनाडु का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर काफ़ी विविध है. यहां ऑटोमोबाइल, फ़ार्मा, टेक्सटाइल, चमड़े के उत्पाद, केमिकल समेत कई चीज़ों की बड़ी इंडस्ट्री हैं.
तमिलनाडु के पास बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर है. इस राज्य का रोड और रेल नेटवर्क काफ़ी अच्छा माना जाता है. साथ ही यहां सात हवाई अड्डे हैं. तमिलनाडु के पास 1,076 किलोमीटर यानी देश का दूसरा सबसे लंबा समुद्र तट है. जहां 4 मेजर और 22 नॉन-मेजर पोर्ट हैं.
2017-18 में भारत से हुए कुल ऑटो निर्यात का 45 प्रतिशत तमिलनाडु से हुआ था. पैसेंजर वाहनों के मामले में भी तमिलनाडु एक्सपोर्ट हब है, पैसेंजर वाहनों में भारत के कुल निर्यात का 70 प्रतिशत तमिनलाडु करता है. तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई भारत की ऑटोमोबाइल कैपिटल है. तमिलनाडु देश में सबसे ज़्यादा टायर बनाता है.
2018-19 में तमिलनाडु का जीएसडीपी यानी ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट $229.7 अरब रहा था. तमिलनाडु देश की दूसरी सबसे ज़्यादा जीडीपी वाला राज्य है.
लेकिन कोरोना ने तमिलनाडु को काफ़ी प्रभावित किया है. जिससे बचने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से सभी आर्थिक गतिविधियां बंद हुईं. फ़ैक्ट्रियां बंद करनी पड़ी और बुरे दौर में चल रहा ऑटो सेक्टर और बुरी स्थिति में आ गया. इससे राज्य को आर्थिक तौर पर बहुत नुक़सान हुआ.
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गुजरात
गुजरात कच्चे तेल (तटवर्ती) और प्राकृतिक गैस का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है. यहां जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा पेट्रोलियम रिफाइनिंग हब है. इसके अलावा गुजरात प्रोसेस्ड डायमंड में ग्लोबल लीडर है. वहीं दुनिया में डेनिम का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है.
गुजरात सरकार की माने तों राज्य में 30 हज़ार से ज़्यादा फूड प्रोसेसिंग यूनिट है. 560 कोल्ड स्टोरेज और फिश प्रोसेसिंग यूनिट है.
नेशनल लॉजिस्टिक इंडेक्स 2019 के मुताबिक़, देश में लॉजिस्टिक के मामले में गुजरात नंबर वन है. गुजरात में 49 बंदरगाह हैं, जिनमें एक मेजर पोर्ट है और 48 नॉन-मेजर पोर्ट हैं. राज्य में 17 एयरपोर्ट भी हैं, जिनमें एक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है.
2017-18 में गुजरात में $66.8 अरब का एक्सपोर्ट दर्ज किया गया. जो भारत के कुल निर्यात का 22 प्रतिशत से भी ज़्यादा था. 2016-17 के आंकड़ों को देखें तो गुजरात का जीएसडीपी $173 अरब रहा था.
लेकिन कोरोना की मार के चलते देश में इन सभी आर्थिक गतिविधियों को रोकना पड़ा. जिससे राज्य को नुक़सान हुआ और इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा.
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दिल्ली
प्रति व्यक्ति आय के मामले में दूसरे नंबर पर रहने वाला दिल्ली देश के सबसे तेज़ी से आगे बढ़ रहे क्षेत्रों में से एक है. 2018-19 में इसका ग्रोथ रेट 12.82 प्रतिशत रहा था.
देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पर्यटकों के बीच ख़ासी लोकप्रिय है. साल भर यहां ट्रेड फेयर और कन्वेंशन भी होते रहते हैं. यहां आकर्षित रियर स्टेट मार्केट भी है और एग्रोकेमिकल-बेस्ड प्रोडक्ट को लेकर बड़ी संभावनाएं भी. दिल्ली और आसपास के नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) को पशुधन और डायरी प्रोडक्ट के लिए जाना जाता है. यहां की डायरी में हर दिन तीन मीलियन लीटर दूध की क्षमता है.
भारत का सबसे बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क भी दिल्ली में है. 2018-19 में दिल्ली की जीएसडीपी $109 अरब रही है.
लेकिन कोरोना के चलते मेट्रो रेल को बंद करना पड़ा. पर्यटन रुक गया. व्यापारिक गतिविधियां रुक गईं. इन सब से दिल्ली और फिर देश की अर्थव्यवस्था पर काफ़ी असर पड़ा.
ऐसा मेडिकल टेस्ट जिससे साबित हो सके कि किसी शख्स को कोरोना वायरस था और अब उसमें कुछ इम्युनिटी आ गई है. यह टेस्ट खून में एंटीबॉडीज का पता लगाता है, जिन्हें बीमारी से लड़ने के लिए शरीर पैदा करता है.
बिना लक्षण वाले
ऐसा शख्स जिसे बीमारी हुई मगर उसमें कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए. कुछ स्टडीज से पता चला है कि कोरोना वायरस का शिकार हुए कुछ लोगों में तेज़ बुखार या कफ़ जैसे आम लक्षण नहीं नज़र आए.
कोरोना वायरस
वायरस समूह में से एक वायरस जिससे मनुष्यों या जानवरों में गंभीर या हल्की बीमारी हो सकती है. पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस से कोविड-19 बीमारी हो रही है. सामान्य सर्दी या इंफ्लूएंजा (फ़्लू) फैलाने वाले दूसरे तरह के कोरोना वायरस हैं.
कोविड-19
कोरोना वायरस की वजह से फैल रही बीमारी का सबसे पहले पता 2019 के अंत में चीन के वुहान में लगा. यह मूलरूप में फ़ेफ़ड़ों पर असर डालता है.
संक्रमण की तेज़ी को रोकना
ट्रांसमिशन की दर को कम करना ताकि चार्ट पर प्रदर्शित किए जाने पर मामलों की संख्या के आधार पर पीक को फ्लैट कर कर्व को नीचे लाया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके.
फ़्लू
इंफ्लूएंजा का संक्षिप्त नाम. एक वायरस जो कि सीजनल बीमारियों में मनुष्यों और जानवरों में फैलता है.
सामुदायिक प्रतिरोधक क्षमता
एक बड़ी आबादी तक पहुंचने के बाद किस तरह से एक बीमारी का फैलाव सुस्त पड़ता है.
लड़ने में सक्षम
ऐसा शख्स जिसका शरीर किसी बीमारी के सामने टिक सके या उसे रोक दे वह इससे इम्यून कहा जाता है. एक बार जब कोई शख्स कोरोना वायरस से उबर जाता है तो ऐसा माना जाता है कि वह एक निश्चित अवधि तक इस बीमारी का फिर से शिकार नहीं हो सकता.
वायरस के असर करने की अवधि
किसी बीमारी का शिकार होने और उसका लक्षण दिखाई देना शुरू होने के बीच की अवधि
लॉकडाउन
आवाजाही या रोज़ाना की ज़िंदगी पर पाबंदियां, जिनमें सार्वजनिक इमारतें बंद हैं और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए कहा गया है. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई देशों में लॉकडाउन को कड़े उपायों के तौर पर लागू किया गया है."
शुरुआत
किसी क्लस्टर या अलग-अलग इलाकों में तेज रफ्तार से बीमारी के कई मामले सामने आना.
महामारी
किसी गंभीर बीमारी का कई देशों में एकसाथ तेजी से फैलना महामारी कहलाता है.
एकांतवास
किसी संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए इसकी जद में आए लोगों को अलग रखना.
सार्स
सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम एक कोरोना वायरस का ही प्रकार है जो कि एशिया में 2003 में शुरू हुआ था.
सेल्फ-आइसोलेशन
घर पर ही रहना और अन्य लोगों से सभी तरह के संपर्क से बचना ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके.
सामाजिक दूरी
अन्य लोगों से दूर रहना ताकि बीमारी के ट्रांसमिशन की रफ्तार कम की जा सके. सरकार की सलाह है कि अपने साथ रह रहे लोगों के अलावा दोस्तों और रिश्तेदारों से न मिलें. साथ ही सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से भी बचें.
आपातकालीन स्थिति
किसी संकट के वक्त सरकार द्वारा रोज़ाना की जिंदगी पर पाबंदी लगाने के मकसद से उठाए गए कदम. इसमें स्कूलों और दफ्तरों को बंद करना, लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाना और यहां तक कि सैन्य बलों को तैनात करना ताकि रेगुलर इमर्जेंसी सेवाओं को सपोर्ट किया जा सके."
लक्षण
संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर की कोशिश के तौर पर इम्यून सिस्टम से किसी बीमारी के संकेत. कोरोना वायरस का मुख्य लक्षण बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने में दिक्कत होना है."
टीका
ऐसा इलाज जिससे शरीर एंटीबॉडीज पैदा करता है, जो कि बीमारी से लड़ता है और आगे के संक्रमण से लड़ने की इम्युनिटी देता है."
वेंटीलेटर
ऐसी मशीन जो कि ऐसे वक्त पर शरीर के लिए सांस लेने का काम करती है जब फ़ेफ़ड़े काम करना बंद करने लगते हैं.
विषाणु
एक छोटा सा एजेंट जो कि किसी जीवित सेल के भीतर अपनी कॉपी बना लेता है. वायरस की वजह से ये सेल मरने लगती हैं और शरीर की सामान्य केमिकल प्रक्रियाओं को अवरुद्ध कर देती हैं जिससे बीमारी हो जाती है.
मुख्य कहानी नीचे जारी है
ट्रांसलेटर
इन सभी शब्दों का क्या मतलब है?
राज्यों पर कोरोना की मार
सबसे ज़्यादा कोरोना मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए जा रहे हैं. उसके बाद दिल्ली, तमिनलाडु, गुजरात जैसे राज्य हैं.
ज़्यादा मामले होने की वजह से यहां के ज़्यादातर इलाक़े रेड ज़ोन में रहे हैं. जहां पर लॉकडाउन के दौरान आर्थिक गतिविधियां ना के बराबर रहीं है. जिसकी वजह से काफ़ी आर्थिक नुक़सान हुआ है.
हालांकि लॉकडाउन से हुए नुक़सान को लेकर कोई आधिकारिक आकड़ा नहीं आया है. लेकिन एसबीआई ग्रुप के चीफ़ इकोनॉमिक एडवाइज़र सौम्य कांती घोष ने अपनी टीम के साथ मिलकर एक रिपोर्ट लिखी है, जिसे जीडीपी के आंकड़े जारी होने से पहले 26 मई को जारी किया गया था. इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि कोविड-19 की वजह से राज्यों की कुल जीएसडीपी यानी ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट में 30.3 लाख करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ है. जो कुल जीएसडीपी का 13.5% है.
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सबसे ज़्यादा नुक़सान रेड ज़ोन में
सबसे ज़्यादा नुक़सान (50 प्रतिशत) रेड ज़ोन यानी जहां सबसे ज़्यादा मामले हैं, वहां हुआ. आप जानते ही हैं कि देश के लगभग सभी बड़े ज़िले रेड ज़ोन में हैं. ऑरेंज और रेड ज़ोन को मिलाकर जितना नुक़सान हुआ वो कुल नुक़सान का 90 प्रतिशत है. ग्रीन ज़ोन में सबसे कम नुक़सान हुआ. क्योंकि इस ज़ोन की 80 फ़ीसदी आबादी ग्रामीण इलाक़ों में रहती है, जहां लगभग सभी गतिविधियां खुली हुई थीं.
शनिवार को जब देश की कुल जीडीपी के आंकड़े जारी हुए तो पता चला कि मौजूदा वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में, पिछले साल की तुलना में देश की विकास दर घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई है. इससे पूरे वित्तीय वर्ष की जीडीपी दर 4.2 प्रतिशत पर आ गई, जो 11 साल का सबसे निचला स्तर है.
नुक़सान में किस राज्य की कितनी हिस्सेदारी
बीबीसी हिंदी ने एसबीआई ग्रुप के चीफ़ इकोनॉमिक एडवाइज़र सौम्य कांती घोष से संपर्क किया, जिनकी रिपोर्ट के मुताबिक़ राज्यवार विश्लेषण से पता चलता है कि कुल जीडीपी में जो नुक़सान हुआ है, उसका 75 प्रतिशत 10 राज्यों की वजह से हुआ.
कुल नुक़सान में महाराष्ट्र की 15.6% हिस्सेदारी है, इसके बाद तमिलनाडु की जीडीपी नुक़सान में 9.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है और गुजरात की 8.6% हिस्सेदारी है. इन्हीं तीन राज्यों में सबसे ज़्यादा कोरोना के मामले दर्ज किए गए हैं.
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सेक्टर वार नुक़सान
अगर सेक्टर के हिसाब से देखें तो सिर्फ़ कृषि में सुधार हुआ है. जबकि दूसरे बड़े सेक्टरों में अधिकतर में स्थिति बहुत बुरी रही है. मौजूदा वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के आंकड़ों पर नज़र डाले तों अधिकतर सेक्टरों की नेट सेल नकारात्मक रही है -
ऑटोमोबाइल सेक्टर में नेट सेल -15 रही है
बिजली के उपकरणों की नेट सेल -17 रही है
सिमेंट की नेट सेल -10 रही है
एफएमसीजी की नेट सेल -4 रही है
टेक्सटाइन की नेट सेल -30 रही
स्टील की नेट सेल -21 रही है
हालांकि हेल्थकेयर, आईटी सेक्टर और फार्मा के आंकड़े कुछ सकारात्मक रहे हैं.
लॉकडाउन की वजह से आयात निर्यात पर भी बुरा असर पड़ा, साथ ही पर्यटन से होनो वाली आय भी रुक गई.
आगे की राह
एसबीआई ग्रुप के चीफ़ इकोनॉमिक एडवाइज़र सौम्य कांती घोष के अनुसार लॉकडाउन से बहुत ही समझदारी से बाहर निकलना होगा.
उनकी रिपोर्ट कहती है, कोविड-19 महामारी के बाद भी कंसम्पशन पैटर्न में कुछ बदलाव आने की संभावना है.
" नील्सन रिपोर्ट के मुताबिक़, दो तरह के ग्राहक कंसम्पशन डायनेमिक को तय करेंगे. एक मिडिल इनकम ग्रुप, जिनकी आय लॉकडाउन में ज़्यादा प्रभावित नहीं हुई और दूसरे वो, जिनकी नौकरी चली गई और जिनपर सबसे ज़्यादा बुरा असर पड़ा. बल्कि पहले वाला भी बहुत सोच समझकर ख़र्च करेगा, क्योंकि वो सोचेगा कि अब मेरी बारी हो सकती है. साथ ही वो सस्ती चीज़ें ख़रीदेंगे. प्रतिबंधों में ढील के बावजूद ज़्यादातर लोग घर का खाना खाएंगे. हालांकि हेल्थ, सेफ्टी और क्वालिटी पर लोग खर्च करेंगे."
अगर ऐसा होता है तो ज़ाहिर है कि आने वाले वक़्त में भी जीडीपी के आंकड़ों में भी काफ़ी उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
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वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
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दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
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हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
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ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
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कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
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शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
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पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.