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कोरोना वायरस: ‘पंजाब मॉडल’ की तारीफ़ अमरीका में क्यों?
- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और दिल्ली - ये देश के वो चार राज्य हैं, जहाँ कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे ज़्यादा मामले हैं. जब भी कोरोना के बढ़ते मामलों की बात होती है, इन राज्यों का ज़िक्र आता है.
वहीं जिन राज्यों ने कोरोना से निपटने के लिए अच्छा काम किया है, उनमें केरल का ज़िक्र काफ़ी होता है.
देश में कोरोना का पहला मामला केरल में सामने आया था. इसके बाद भी वहाँ कोरोना से होने वाली मौत का आँकड़ा अभी तक 7 है.
लेकिन इस बीच एक राज्य और है जिसने लोगों का ध्यान भारत में तो नहीं लेकिन अमरीका में अपनी ओर ज़रूर खींचा है.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन में बॉयोस्टैटिस्टिक्स और महामारी रोग विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर भ्रमर मुखर्जी ने भारत के कोरोना प्रभावति 20 राज्यों पर एक स्टडी की है.
उनकी स्टडी के मुताबिक़ केरल के अलावा पंजाब वो दूसरा राज्य है, जिसने कोरोना पर तुलानत्मक रूप से बेहतर काम किया है. केरल और पंजाब को वो "डूइंग वेल" यानी अच्छा काम करने वाले राज्यों का उदाहरण मानती हैं.
प्रोफ़ेसर भ्रमर मुखर्जी ने 'लॉकडाउन इफेक्ट ऑन कोविड 19 स्प्रेड इन इंडिया: नेशनल डेटा मास्किंग स्टेट लेवल ट्रेंड्स' पर एक रिसर्च पेपर लिखा है.
इसी पेपर में उन्होंने पंजाब का ज़िक्र केरल राज्य के साथ किया है. पंजाब और केरल के नाम उन राज्यों की सूची में हैं, जहाँ राज्य सरकारें बेहतर काम कर रही है, जिसके नतीजे भी कोरोना के कुल मरीज़ों की संख्या पर दिख रहे हैं.
पंजाब दूसरे राज्यों से अलग कैसे?
प्रोफे़सर मुखर्जी वहीं हैं, जिन्होंने मॉडलिंग डेटा के आधार पर बताया है कि भारत में जुलाई की शुरुआत तक 630,000 से लेकर 21 लाख लोग इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं.
इसी संदर्भ में उनसे बीबीसी ने सवाल किया कि पीक की बात हर कोई करता है, लेकिन मामले आने बंद कब होंगे?
इसके जवाब में प्रोफ़ेसर भ्रमर मुखर्जी ने कहा, "भारत में लॉकडाउन के असर के बारे में स्टडी के दौरान हमने पाया कि कुछ राज्यों में कोविड-19 के फैलने का सिलसिला अब धीमा पड़ता दिखाई दे रहा है. यही वजह है कि R नंबर जो पहले भारत के लिए 3 के आसपास था वो अब 1.3 के आसपास पहुँच गया है."
R नंबर का मतलब होता है री-प्रोडक्शन नंबर. कोरोना संक्रमण तब तक फैलता रहता है जब तक संक्रमित व्यक्ति से औसतन एक से ज़्यादा लोग संक्रमित होते रहते हैं. इसे 1 से नीचे रखना बेहद ज़रूरी होता है. ज्यादा समय तक 1 से नीचे रहने पर ही महामारी का ख़तरा टाला जा सकता है.
इसी संदर्भ में पंजाब राज्य की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब में पिछले 7-10 दिन तक R नंबर 1 से नीचे रहा है. ये दर कभी 0.5 तो कभी 0.7 रही है. प्रोफे़सर मुखर्जी कोरोना संक्रमण में R नंबर को सबसे अधिक अहमियत देती हैं.
चीन के वुहान शहर में R नंबर 0.3 है. वो कहती हैं कि अगर पंजाब में नए मामले सामने ना आएँ और R नंबर अपनी जगह बना रहा, तो वहाँ से महामारी का ख़तरा टल सकता है.
प्रोफे़सर मुखर्जी पंजाब के कोरोना संक्रमण को एक ग्राफ़ के ज़रिए समझाती हैं. ये ग्राफ़ उन्होंने अपने रिसर्च पेपर में शामिल भी किया है. इसमें ऑरेंज रंग नए मामलों के लिए है, हरे रंग ठीक हुए मामलों के लिए है, और लाल रंग कोरोना से हुई मौत को दिखाता है.
उनके मुताबिक़ पंजाब ने 'रिकवर्ड केस' यानी संक्रमण से ठीक होने वाले मरीज़ों की संख्या भी बाक़ी राज्यों के मुक़ाबले बेहतर है. पंजाब में नए मामले कम आ रहे हैं और ठीक होने वाले मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
प्रोफे़सर भ्रमर मुखर्जी के मुताबिक़ भारत के 20 राज्यों से ही देश के 99 फ़ीसदी कोरोना मामले सामने आए हैं. इसलिए सभी राज्यों में टेस्टिंग हो, या डबलिंग रेट, या फिर मॉर्टेलिटी रेट - राज्यों में बहुत ज़्यादा विविधताएँ देखने को मिलती हैं.
और इन सभी पैमानों पर देंखे तो पंजाब की परफार्मेंस केरल की ही तरह कई जगह अच्छी रही है. वो पंजाब सरकार द्वारा उठाए क़दमों को इसका श्रेय देती हैं.
पंजाब के आँकड़े
पंजाब की कुल जनसंख्या तकरीबन 2 करोड़ 77 लाख है. ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक़ राज्य में 2139 पॉज़िटिव मरीज़ है. वहीं कोरोना से ठीक होने वाले मरीज़ों की संख्या 1918 है.
राज्य में अब तक कोरोना से 40 लोगों की मौत हो चुकी है. मौत का ये आँकड़ा पिछले चार दिन से ऐसा ही बना हुआ है.
राज्य सरकार के प्रवक्ता राजेश भास्करके मुताबिक़ फ़िलहाल पंजाब में डबलिंग रेट 91 दिनों का है, केस फेटेलिटी रेट 1.8 है, रिकवरी रेट 89 फ़ीसदी है और राज्या का R नंबर 0.5 से 0.7 के बीच है.
प्रोफे़सर मुखर्जी के मुताबिक़ जब भारत के नेशनल लेवल डेटा की बात होती है, तो राज्यों की विविधताएँ सामने नहीं आ पाती हैं. इसलिए पंजाब पर अब तक किसी की नज़र नहीं पड़ी है.
पंजाब ने अपने स्तर पर कोरोना का पीक देखा और झेला है. वो इस बात से इनकार नहीं करतीं कि आने वाले वक़्त में और पीक भी आ सकते हैं. लेकिन उनका ये आकलन केंद्र सरकार की तरफ़ से जारी किए गए 15 मई तक के लॉकडाउन डेटा के आधार पर है.
पंजाब में रिकवरी रेट अच्छा होने का एक कारण ये भी है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज करने की गाइडलाइन बदली है.
केंद्र सरकार के नियमों पर अमल करते हुए अब कोरोना मरीज़ों को अस्पताल से छुट्टी देने के पहले उन्हें दोबारा टेस्ट नहीं करवाना पड़ता, सिर्फ़ क्वारंटीन का टाइम अस्पताल में पूरा करना होता है. इस बात को राज्य सरकार भी स्वीकार करती है.
राजेश भास्कर के मुताबिक़ 15 मई से पंजाब ने नए नियमों का पालन शुरू किया है. इसके पहले पंजाब में रिकवरी रेट 30-40 फ़ीसदी थी. आज भी राज्य में औसतन 20-25 मामले हर रोज़ सामने आ रहे हैं.
पंजाब का कोरोना का ग्राफ़
प्रोफे़सर मुखर्जी के मुताबिक़ पंजाब ने शुरुआत में कोरोना मामलों में तेज़ी देखी थी. लेकिन कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और आइसोलेशन के ज़रिए उन्होंने उस पर जल्द ही क़ाबू पा लिया.
बीबीसी ने पंजाब के कोरोना ग्राफ़ की भी पड़ताल की. बीबीसी ने पाया कि पंजाब में 'सुपरस्प्रेडर' के दो मामले सामने आए थे, लेकिन पंजाब में उसके बाद भी ग्राफ़ बहुत तेज़ी से नहीं भागा.
'सुपरस्प्रेडर' का मतलब वो मामले या घटनाएँ, जहाँ एक जमावड़े में कई लोग एक साथ संक्रमित पाए जाएँ. जैसे दिल्ली के निज़ामुद्दीन मरक़ज का मामला था.
पहला मामला 4 अप्रैल को सामने आया, जब मोहाली में एक शख़्स के 33 कॉन्टैक्ट कोरोना पॉज़िटिव मिले. दूसरा मामला 29 अप्रैल का जालंधर से सामने आया, जब एक शख़्स के 45 कॉन्टैक्ट पॉज़िटिव मिले.
महाराष्ट्र के नादेड़ से भी 4200 तीर्थयात्रियों के एक जत्थे में 1200 लोगों के कोरोना पॉज़िटिव होने का मामला सामने आया था. लेकिन राज्य सरकार ने सबके लिए सरकारी क्वारंटीन को ज़रूरी बना दिया था और इनमें से कोई सुपरस्प्रेडर नहीं बना.
आख़िर इस मामले को प्रशासन ने कैसे मैनेज किया? प्रोफे़सर मुखर्जी पंजाब को सुपरस्प्रेडर मामलों से सावधान रहने की हिदायत भी देती हैं. उनके मुताबिक़ अब अगर एक भी सुपरस्प्रेडर मामला वहाँ सामने आया, तो पंजाब के किए कराए पर पानी फिर सकता है.
हाल ही में अमृतसर में एक दिन में 25 नए मामले सामने आए, जिनमें से 16 एक ही पॉज़िटिव कॉन्टैक्ट के हैं.
घरेलू विमान सेवा शुरू होने के बाद लुधियाना में भी एक शख़्स कोरोना पॉज़िटिव पाया गया है. लेकिन राज्य सरकार ने सख़्त नियम बनाते हुए हर यात्री के लिए 14 दिन का क्वारंटीन अनिवार्य बनाया है.
प्रोफे़सर मुखर्जी कहती हैं कि 1 जून से ट्रेनों की आवाजाही के बाद पंजाब सरकार को और ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत है.
पंजाब के लिए चुनौतियां क्या हैं?
पंजाब कुछ पहले राज्यों में से एक है, जिसने देशव्यापी पूर्ण लॉकडाउन के पहले ही पूरे राज्य में कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला किया था. ये 1 मई तक राज्य में लागू भी रहा.
9 मार्च को ही राज्य सरकार ने जीओटैगिंग और जीओफेंसिंग के साथ अपना मोबाइल ऐप भी जारी कर दिया था. प्रोफ़ेसर मुखर्जी के मुताबिक़ इन दोनों फै़सलों ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और आइसोलेशन में काफ़ी मदद की.
लेकिन विपक्ष का आरोप है कि पंजाब सरकार के इंतजाम काफ़ी नहीं हैं.
अकाली दल के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा के मुताबिक़ पंजाब में जो कुछ अच्छा हो रहा है, वो वहाँ के लोगों की इम्यूनिटी की बदौलत है. वरना ना तो राज्य में टेस्ट इतने हो रहे हैं कि कोरोना के मरीज़ों का पता लगाया जा सके और ना ही क्वारंटीन सेंटर और अस्पतालों की हालात अच्छी है. उनका आरोप है कि डॉक्टरों को पर्याप्त पीपीई किट भी नहीं मिल रही.
हालाँकि पंजाब में अब तक एक भी डॉक्टर की कोरोना से मौत नहीं हुई है. पंजाब में आज की तारीख़ में तकरीबन 2000 से 2200 टेस्ट रोज़ाना हो रहे हैं.
टेस्टिंग की संख्या बढ़ाना पंजाब के सामने पहली बड़ी चुनौती है.
पंजाब के सामने दूसरी चुनौती है, लॉकडाउन में ढील के बाद की स्थिति से कैसे निपटें?
पिछले दो महीनों में देश के मुक़ाबले पंजाब के लोगों ने लॉकडाउन के नियमों का ज़्यादा सख़्ती से पालन किया. 1 जून के बाद भी पंजाब अपने सारे पैरामीटर को उसी तरह संभाल के रख सका, जैसे आज हैं.
तीसरी चुनौती है, राज्य में आने वाले एसिम्प्टोमेटिक मामले. राज्य के अधिकारियों के मुताबिक़ पंजाब में 85 फ़ीसदी मामले बिना लक्षण वाले कोरोना के हैं. जैसे-जैसे ज़िंदगी वापस पटरी पर लौटेगी, ऐसे मामलों पर नज़र रखने में राज्य सरकार को मुश्किल ज़्यादा आएगी.
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