कोरोना संक्रमण: तब्लीग़ी जमात से जुड़े बीजेपी नेता के सवाल पर डॉ. हर्षवर्धन ने कहा- ''बहुत हुआ''

हर्षवर्धन

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि देश में कोरोना संक्रमण फैलने को लेकर बार-बार तब्लीग़ी जमात का नाम लेने की जरूरत नहीं है, इस पर पहले ही काफ़ी चर्चा हो चुकी है.

उन्होंने यह जवाब बीजेपी नेता जीवीएल नरसिंहा राव के उस सवाल पर दिया जिसमें उन्होंने पूछा था कि क्या भारत में कोरोना संक्रमण के लिए तब्लीग़ी जमात का कार्यक्रम वजह बना है?

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, ''सच बात ये है कि ये बात पुरानी हो गई है. इस पर चर्चा भी बहुत हो चुकी है, इसका विश्लेषण भी बहुत हो चुका है. हमें इस विषय पर बार-बार कहते हुए तकलीफ़ और कष्ट भी होता है. लेकिन इसमें कोई दोमत नहीं है कि मार्च के दूसरे सप्ताह के आस-पास अगर आप ध्यान दें जब दुनिया में तेजी से संक्रमण हो रहा था और भारत में पहला केस आने के बाद डेढ़ महीना बीत चुका था, तब भी हमारे देश में संक्रमण के मामले मामूली थे. थोड़े से राज्यों में थोड़े से मामले थे और उस समय ये दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद घटना हुई.''

उन्होंने कहा, ''जहां पर यह घटना हुई वहां न तो सोशल डिस्टेंसिंग थी और दिल्ली में कानूनन भी उस समय यह स्थिति थी कि 10-15 से ज्यादा लोग कहीं इकट्ठा नहीं हो सकते थे और उस समय कम से कम एक-डेढ़ दर्जन देशों के लोग आए थे और आप जानते हैं कि उस समय दुनिया के बहुत सारे देशों से आने वाले जो लोग थे वही बीमारी भारत में ला रहे थे. सोशल डिस्टेंसिंग को बिना अपनाए, प्रशासन की बिना जानकारी के हज़ारों लोगों का एक साथ रहना और फिर जब वो जानकारी मिली तो लोगों को वहां से हटाया गया और तब तक बहुत से लोग वहां से जा भी चुके थे. उसके कारण देश में लगभग हर प्रांत में मामले अचानक बढ़े. लेकिन मैं देश में सभी राज्य सरकारों और उनके स्वास्थ्य मंत्रालय और इस काम में गृह मंत्रालय से संबंधित अधिकारियों और विशेषज्ञों ने जो मदद की, इसमें आईटी विभाग का योगदान था, एनएसए का योगदान था, गृह मंत्री ने भी गहराई से मदद की.''

तब्लीगी जमात

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा, ''पूरे देश में गहराई और गंभीरता से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की गई जिससे कि हज़ारों लोगों को एक-एक करके ढूंढा गया, उनके कॉन्टैक्ट को ट्रेस किया गया और आइसोलेट किया गया. एक बहुत बड़ा झटका उस समय देश को लगा और जब इतनी तेज़ी से देश में मामले बढ़े तो उसी के परिणामस्वरूप लॉकडाउन जैसे बड़े फैसले लेने पड़े. लेकिन अभी उसकी चर्चा करने की जरूरत नहीं है. उनको ट्रेस किया गया. उनका इलाज किया गया. उनको क्वारंटीन किया गया.''

डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि दो हफ़्ते पहले वो दिल्ली के एक कोविड केयर सेंटर गए ते जहां बहुत सारे ऐसे लोग जो मरकज़ से जुड़े थे वो 28 दिन क्वारंटीन में रहकर ठीक होने के बाद उन्हें उनके अपने राज्यों जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और जम्मू कश्मीर तमाम जगहों में भेजने का भी काम किया गया.

उन्होंने कहा, ''अभी उसकी चर्चा करने की जरूरत नहीं. वो दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी लेकिन देश के अंदर सारे वर्ग और सारे समुदाय के लोगों के लिए सीख है कि जब देश मिलकर कोई फैसला करता है तो उसमें अनुशासन का सबको मिलकर पालन करना चाहिए. वह स्वास्थ्य और समाज की सुरक्षा के भी ज़रूरी है.''

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