अर्णब गोस्वामी का मामला सीबीआई को सौंपने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं समेत तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या के मामले में रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ़ अर्णब गोस्वामी के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर को सीबीआई को सौंपने से इनकार कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की बेंच ने इस मामले में फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि घटना एक जगह पर हुई है लेकिन एक ही शिकायत को लेकर अलग-अलग जगहों पर मामले चल रहे हैं.
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि मामला सीबीआई को ट्रांसफ़र नहीं किया जाएगा.
कोर्ट ने ये मामला नागपुर से मुंबई ट्रांसफ़र करने का अंतरिम आदेश जारी किया है.
साथ ही कोर्ट ने धारा 32 के तहत की गई शिकायत को ख़ारिज नहीं करने का फ़ैसला सुनाया है. हालांकि कोर्ट ने कहा है कि अर्णब क़ानूनी मदद के लिए कोर्ट का रुख़ कर सकते हैं.
उन्होंने कहा, "सभी एफ़आईआर और शिकायतें एक ही ब्रॉडकास्ट में कही बातों को लेकर है. सभी शिकायतें भी एक ही तरह की हैं. साथ ही शिकायतों में जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया है और जो उसका कन्टेंट है वो भी एक जैसा है."
उन्होंने कहा, "पुलिस को जाँच करने से रोका नहीं गया है."
कोर्ट ने कहा कि संविधान की धारा 32 के अनुसार कोर्ट का ये कर्तव्य है कि वो नागरिकों के अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार की रक्षा करें. भारत में प्रेस की आज़ादी तब तक होनी चाहिए जब तक वो सच बताए.
हालांकि उन्होंने कहा कि "फ्रीडम कभी अब्सोल्यूट नहीं होती. संविधान की धारा 19-1 के अनुसार पत्रकारों की आज़ादी बड़ा मामला है. फ्री न्यूज़ मीडिया के बिना फ्री नागरिकों का अस्तित्व नहीं रहेगा और फ्री नागरिक के बिना फ्री मीडिया का अस्तिस्व नहीं रहेगा."
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अर्णब गोस्वामी के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करने की तीन सप्ताह की समय सीमा को आगे तक बढ़ा दिया है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को गोस्वामी सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराने को कहा है.
क्या है मामला?
पालघर मॉब लिंचिंग मामले में एक टीवी कार्यक्रम में अर्णब गोस्वामी में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी पर टिप्पणी की थी.
इससे नाराज़ हो कर कई जगहों पर उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई थी. महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत की शिकायत के बाद नागपुर पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की थी और उनसे 10 घंटे से भी अधिक तक पूछताछ की थी.
उन पर आईपीसी की दंगा भड़काने, धर्म और नस्ल के आधार पर दो समूहों के बीच दुश्मनी पैदा करने, धार्मिक भावनाओं को उकसाने आदि से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया गया था.
इसके बाद अर्णब ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपने ऊपर दर्ज सभी एफ़आईआर को रद्द करने की माँग की थी.

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