ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. अब से कुछ समय पहले जो सब कुछ हम देख रहे हैं, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी लेकिन जो सामने है उसे झुठलाया नहीं जा सकता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने भी अपने सामने आई इस चुनौती का डटकर सामना किया है और लगातार कर रही है.
केंद्र सरकार के क़दम कितने असरदार
केंद्र सरकार इस आपदा की शुरुआत से ही पूरी ताक़त से लड़ रही है. और इसका असर देश और दुनिया भर की जनता को दिख रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी के समयानुकूल क़दमों की वजह से 1 अरब 30 करोड़ लोगों के देश में ठीक होने वालों का प्रतिशत तीस फ़ीसदी से ज़्यादा है. इसे लेकर पूरे विश्व में भारत की सराहना की जा रही है.
हाँ, ये सही है कि इस बीमारी से अभी भी काफ़ी लोग संक्रमित हैं. और कई अमूल्य जीवन नष्ट हो गए हैं जो कि बेहद दुर्भाग्यशाली हैं.
मगर यहां ये ध्यान देने की बात है कि विकसित देशों जहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इतनी मज़बूत हैं, वहां पर कितना बुरा हाल है. लेकिन भारत सरकार अपने सीमित साधनों के बल पर अपनी जंग लड़ रही है और कुछ हद तक यहां पर स्थिति विदेशों जितनी बुरी नहीं है.
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श्रमिकों के लिए क्या कर रही है सरकार?
विपक्षी दलों की ओर से श्रमिकों की मौत और उनके दुखों के लिए केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है. तकनीकी आधार पर ये बिलकुल भी सही नहीं है. केंद्र सरकार अपने स्तर पर इस संकट से उबरने की हर संभव कोशिश कर रही है. लेकिन इसे राज्य सरकारों की ओर से अपेक्षा के मुताबिक़ समर्थन नहीं मिल रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संदेश में पाँच बार कहा है कि जो जहां है वहीं रहे और किसी क़ीमत पर बाहर न निकले.
इसके कुछ समय बाद ही केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से आह्नवान किया कि वे राज्यों में श्रमिक भाई-बहनों का ख्याल रखें.
इसके अगले दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी एक लाख सत्तर हज़ार करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की.
इसके बाद सभी प्रवासी मज़दूरों को पाँच किलो राशन और एक किलो दाल लगातार मुफ़्त देने की घोषणा हुई.
केंद्र सरकार ने इसके लिए 6195 करोड़ रुपये अलग-अलग राज्यों के पीडीएस सिस्टम में डाला.
श्रमिक भाइयों को सड़कों पर पैदल चलने की त्रासदी से बचाने के लिए हमारी सरकार ने सभी राज्यों से स्पष्ट रूप से कहा कि वे जिस रेलवे स्टेशन पर चाहें मात्र तीन घंटे के नोटिस पर ट्रेन मंगवा सकते हैं.
रेल मंत्रालय की ओर से इस बारे में स्पष्ट सूचना दी गई. रेल मंत्रालय ऐसी रेल गाड़ियों में जाने वाले श्रमिकों के खाने पीने की व्यवस्था भी कर रहा है.
यही नहीं, केंद्र सरकार तत्काल मदद करने के प्रयास करने के साथ-साथ दूरगामी संकट भी दूर करने की दिशा में काम कर रही है.
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आर्थिक मदद के प्रयास
केंद्र सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के घर पहुंचने पर उनके लिए मनरेगा में संभावनाएं पैदा करने की योजना बनाई है.
क्योंकि मनरेगा में प्रवासी मज़दूरों को काम नहीं मिलता है.
लेकिन मनरेगा में अब शहरों से लौटे इन श्रमिकों को काम मिल सकेगा. इसके लिए केंद्र सरकार ने ज़रूरी धन को आवंटित कर दिया है.
वहीं, रेहड़ी लगाने वालों के भविष्य को लेकर भी सरकार काफ़ी सजग और संवेदनशील है.
इस देश में कम से कम 50 लाख लोग रेहड़ी लगाकर अपनी जीविका चलाते हैं. सरकार ने इस वर्ग के लिए पाँच हज़ार करोड़ रुपये का आवंटन किया है.
सरकार इतनी तेज़ी से काम कर रही है कि घोषणा होने के तत्काल बाद पैसे का आवंटन हो रहा है. कल और परसों जो घोषणाएं हुईं हैं उनमें से कई के लिए आर्थिक कोष का आवंटन हो चुका है. राज्यों को पैसा भेजा जा चुका है. इस पैसे से राज्य सरकारों को श्रमिकों को तीन महीने तक मुफ़्त राशन देना है.
सरकार ने प्रवासी श्रमिकों की खाने-पीने से जुड़ी दिक्क़तें दूर करने के लिए वन नेशन वन राशन कार्ड स्कीम शुरू की है. इसे अमल में लाने के लिए तीन महीनों का समय दिया गया है. लेकिन इस दौरान मुफ़्त राशन देने की व्यवस्था तीन महीने तक के लिए की गई है. ख़ास बात ये है कि केंद्र सरकार इसके लिए खुद ख़र्च कर रही है जो कि आज तक नहीं हुआ है.
अब कई लोग ये भी कह रहे हैं कि सरकार प्रवासी मज़दूरों की मदद के लिए उस तरह आगे क्यों नहीं आ रही है जिस तरह प्राकृतिक आपदा के समय सरकार द्रुत गति से काम करती है.
इस सवाल का जवाब सिर्फ़ एक है कि सरकार ने इस आपदा से निपटने में किसी भी हथियार को छिपा कर नहीं रखा है. और सरकार इतनी बड़े देश की विशाल आबादी को बचाने में दिन रात लगी हुई है.
(बीबीसी संवाददाता अनंत प्रकाश के साथ बातचीत पर आधारित)
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कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
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वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
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दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
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हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
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ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
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कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
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शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.