कोरोना: वतन लौटने को बेचैन हैं सऊदी अरब में फंसे भारतीय

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- Author, दिलनवाज़ पाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सऊदी अरब में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए पहली उड़ान जेद्दा से कोझीकोड पहुंच गई. इसमें 150 यात्री सवार थे जिनमें अधिकतर गर्भवती महिलाएं और प्रवासी मज़दूर थे.
लेकिन इस उड़ान में उन सभी लोगों को जगह नहीं मिली जो वापस भारत लौटना चाहते हैं.
भारत सरकार विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए 'वंदे भारत मिशन' चला रही है जिसके तहत सऊदी अरब से कुल पांच विशेष उड़ानें चलाई जाएंगी जिनमें क़रीब 1,000 भारतीयों को वापस भारत लाया जाएगा.
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ये उड़ानें हैं-
- 8 मई- रियाद-कोझिकोड
- 10 मई- रियाद-दिल्ली
- 12 मई- दम्माम-कोच्ची
- 13 मई- जेद्दा-दिल्ली
- 14 मई- जेद्दा कोच्ची
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'वंदे भारत मिशन' के तहत पहले सप्ताह 64 उड़ानों के ज़रिए 12 देशों से 14,800 लोगों को वापस लाया जा रहा है.
भारत के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया, "भारतीयों को वापस लाते वक़्त हर सावधानी बरती जा रही है. हम चाहते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में संक्रमण का एक भी मामला सामने ना आए."
विदेश से लौट रहे लोगों के लिए क्वारंटीन की व्यवस्था की जा रही है जिसका भुगतान लोगों को ही करना है.
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि पहले सप्ताह का अनुभव देखने के बाद अगले सप्ताह उड़ानों की संख्या बढ़ाई जाएगी.
सऊदी अरब में भारत के दूतावास के मुताबिक कुल 60,000 लोगों ने भारत वापस लौटने के लिए आवेदन किया है, लेकिन फिलहाल सिर्फ़ एक हज़ार लोगों को ही वापस लाया जा रहा है.

'दूतावास से नहीं मिल रहा जवाब'
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले और फिलहाल दम्माम में काम कर रहे मोहम्मद नवाज़ ने बीबीसी से कहा, "मैंने आवेदन किया है, लेकिन दूतावास की ओर से जवाब नहीं मिल रहा है, मेरे साथ कई और लोग हैं जो भारत वापस लौटना चाहते हैं."
इसी तरह दिसंबर में सऊदी अरब में एक रेस्त्रां में काम करने पहुँचे एक भारतीय कामगार भी किसी तरह देश लौटना चाहते हैं, लॉकडाउन के बाद से उन्हें वेतन नहीं मिल सका है.
अपना नाम ज़ाहिर नहीं करने का अनुरोध करते हुए एक कामगार ने बीबीसी से कहा, "हम आठ लोग हैं जो एक ही कमरे में रह रहे हैं. कुछ नेक लोग हमें खाना दे रहे हैं."
वो कहते हैं, "मैंने दूतावास में आवेदन तो कर दिया है लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है. हमारे मकान मालिक ने हमें कमरा खाली करने के लिए 15 मई तक का वक़्त दिया है. हमें नहीं पता इसके बाद हम कहां जाएंगे, क्या करेंगे."
इसी साल जनवरी में बिज़नेस वीज़ा पर सऊदी अरब पहंचे एक और कामगार दो महीने से रियाद में फंसे हैं. वो एक आईटी कंपनी में काम करते हैं और बिज़नेस वीज़ा पर सऊदी आए थे. उन्हें मार्च में ही लौटना था लेकिन फ्लाइटें रद्द होने के बाद वो सऊदी में फंस गए हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "मेरा वेतन आधा हो गया है. घर पर मां और दादी बीमार हैं. मैं यहां अकेले फंसा हूं और दूतावास से कोई जवाब नहीं मिल पा रहा है."
सोम कलागा भी बिज़नेस वीज़ा पर सऊदी अरब आए थे और उन्हें मार्च में लौटना था, लेकिन भारत में लॉकडाउन की वजह से उनकी रिटर्न फ्लाइट रद्द हो गई. उन्हें हैदराबाद लौटना है लेकिन फिलहाल हैदराबाद के लिए कोई फ्लाइट नहीं है.
बाकी लोगों की ही तरह सोम ने भी दूतावास से संपर्क किया है लेकिन अभी कोई जवाब नहीं मिला है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "मेरी पत्नी आठ महीने की गर्भवती है, मेरी एक बेटी पांच साल की है और घर पर उनके साथ मेरी बूढ़ी मां हैं. मैं अपने परिवार के होना चाहता हूं ताकि उनकी देखभाल कर सकूं."

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टिकट और क्वारंटीन दोनों का देना होगा पैसा
सऊदी अरब में लॉकडाउन में फंसे भारतीयों को फिलहाल एयर इंडिया की विशेष उड़ानों के ज़रिए लोगों को वापस लाया जा रहा है.
विदेशों से भारत आ रहीं इन विशेष उड़ानों के लिए लोगों को टिकट ख़रीदने होंगे. रियाद से दिल्ली की उड़ान के टिकट की क़ीमत 1023 सऊदी रियाल यानी लगभग 20,000 रुपए है.
लेकिन बीबीसी से बात करने वाले लोगों ने कहा कि वे रात भर एयर इंडिया की वेबसाइट खोलते रहे और बाद में बताया गया कि दूतावास से लिस्ट मिलने के बाद लोगों से संपर्क किया जाएगा.
जून 2019 से सऊदी अरब में काम कर रहे अनिल वशिष्ठ वापस अपने परिवार के पास भारत लौटना चाहते हैं. उन्हें दूतावास की ओर से बताया गया है कि दिल्ली जाने वाली उड़ान में उन्हें जगह मिल जाएगी. लेकिन ये रिपोर्ट लिखे जाने तक अनिल टिकट नहीं ख़रीद सके थे.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "मैंने एयर इंडिया के दिए गए नंबर पर 20 से ज़्यादा बार कॉल किया है. लेकिन अभी तक किसी से कोई बात नहीं हो सकी है."
"दूतावास ने मुझे बताया है कि मुझे फ्लाइट में जगह मिल जाएगी. लेकिन अब मैं टिकट नहीं ख़रीद पा रहा हूं. सबसे बड़ी समस्या जानकारी की है. हम लोगों को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है."
भारत सरकार का कहना है कि सऊदी अरब से दिल्ली लौटने वाले लोगों को क्वारंटीन में रहना होगा और क्वारंटीन का ख़र्च भी स्वयं ही वहन करना होगा.
अनिल बताते हैं, "हमें जानकारी दी गई है कि दिल्ली लौटने पर हमें होटल में रखा जाएगा जिसके बिल का भुगतान हमें ही करना होगा. मुझे ऐसा करने में कोई दिक्कत नहीं है. मैं बस अपने परिवार के पास पहुंचना चाहता हूं."
अनिल सऊदी अरब में फंसे भारतीयों का एक व्हाट्सएप ग्रुप भी चलाते हैं. इस ग्रुप में अधिकतर लोग सही जानकारियां ना मिलने की शिकायत कर रहे हैं.

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सऊदी अरब में इस समय कई तरह के लोग हैं जो भारत लौटना चाहते हैं. सबसे पहले वो लोग हैं जो कम समय के बिज़नेस वीज़ा पर सऊदी अरब गए थे. इनके परिवार भारत में हैं और इस मुश्किल वक़्त में वो किसी भी तरह अपने परिजनों के साथ होना चाहते हैं.
इसके अलावा वो लोग हैं जो सऊदी अरब में रह रहे अपने भारतीय परिजनों से मिलने गए थे और लॉकडाउन की वजह से वहां फंस गए हैं.
वर्क परमिट पर काम कर रहे वो लोग भी लौटना चाहते हैं जिनकी या तो नौकरी चली गई है या जिन्हें बिना वेतन के ज़बरदस्ती छुट्टी पर भेज दिया गया है.
इसके अलावा कई ऐसे लोग हैं जो ऐसे कारोबारों में काम करते थे जो लॉकडाउन की वजह से बंद हो गए हैं. इनमें निर्माण कार्य में लगे मज़दूर भी शामिल है.
इसके अलावा धार्मिक यात्रा पर सऊदी अरब गए लोग भी वहां फंस गए हैं.
सऊदी अरब में फंसे लोगों को उम्मीद है कि पहली पांच फ्लाइटों के बाद घर वापसी अभियान का दूसरा चरण शुरू होगा जिसमें सभी को जगह मिलेगी.
'सभी को वापस लाया जाएगा'
सऊदी अरब में भारतीय दूतावास के अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में फ़ैसला भारत के विदेश मंत्रालय को लेना है. हालांकि उन्होंने ये ज़रूर कहा कि पहले चरण के अनुभव आगे काम आएंगे.
भारतीय विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया, "अगले सप्ताह 120 उड़ानें चलाने की तैयारी है और अगर आगे हालात और बेहतर हुए तो ये संख्या और बढ़ाई जाएगी."
वो कहते हैं, "लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों के कारण परिस्थितियां जटिल हैं. हमारा प्रयास है कि सभी भारतीयों को वापस लाया जाए. इसमें कुछ वक़्त तो लग सकता है लेकिन सभी को वापस लाया जाएगा. हमारी कोशिश है कि विदेश से लाए जा रहे भारतीयों से कोरोना संक्रमण का एक भी मामला न हो. यही वजह है कि अतिरिक्त सावधानियां बरती जा रही हैं और इसी वजह से वक़्त थोड़ा ज़्यादा लग रहा है."

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