पश्चिम बंगाल में कोरोना पर भारी है राजनीति

ममता बनर्जी

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इमेज कैप्शन, लॉकडाउन के दौरान कार से भाषण देतीं ममता बनर्जी
    • Author, प्रभाकर मणि तिवारी
    • पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए

कभी कोरोना से होने वाली मौतों पर राजनीति, तो कभी राशन, पत्र युद्ध, विशेषज्ञ समिति और कभी रेड ज़ोन में शामिल ज़िलों पर....यह सूची लगातार लंबी होती जा रही है.

पश्चिम बंगाल संभवतः अकेला ऐसा राज्य है जहां शुरुआत से ही कोरोना से ज़्यादा इस पर होने वाली राजनीति सुर्खि़यां बटोर रही हैं. हर बीतते दिन के साथ यह लगातार तेज़ हो रही है. दिलचस्प बात यह है कि सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस हो या फिर विपक्षी भाजपा, दोनों इस राजनीति के लिए एक-दूसरे को ही ज़िम्मेदार ठहरा रही हैं.

कोरोना से होने वाली मौतों की पुष्टि के लिए बनी विशेषज्ञ समिति पर विवाद होने के बाद अब ममता बनर्जी ने इससे पल्ला झाड़ लिया है. उनका दावा है कि इसका गठन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने किया है और इसके गठन में उनकी कोई भूमिका नहीं है. सरकार ने भी अब इस समिति के अधिकार सीमित कर दिए हैं. अब कोरोना से होने वाली मौतों की पुष्टि के लिए समिति की मंजूरी जरूरी नहीं होगी. विपक्ष आरोप लगाता रहा है कि कोरोना की मौतों को छिपाने के लिए ही इस समिति का गठन किया गया है.

ममता बनर्जी

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इमेज कैप्शन, लोगों के बीच फ़ेसमास्क बांटती ममता बनर्जी

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के ज़रिए ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को राशन के वितरण में भी धांधली के आरोप लग रहे हैं. इस मुद्दे पर कई जगह हिंसा भी हो चुकी है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार पूरा राशन नहीं दे रही है और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों को ही राशन मिल रहा है.

हालांकि तृणमूल ने इन आरोपों का निराधार बताया है. सरकार ने कहा है कि राशन पर राजनीति बंद नहीं हुई तो वह इसका वितरण रोक देगी. इस बीच, राज्यपाल ने शुक्रवार को एक बार फिर राज्य सरकार पर मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप लगाया है.

फ़िलहाल बंगाल के रेड ज़ोन इलाक़े केंद्र और राज्य के बीच विवाद की ताजा वजह बन गए हैं पहले बंगाल के चार ज़िलों को रेड ज़ोन में होने की बात कही गई ती. लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ताज़ा सूची में 10 ज़िलों के नाम शामिल कर दिए हैं. इसके विरोध में अब राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र भेजा है. इसमें कहा गया है कि राज्य के चार ज़िले ही रेड ज़ोन में हैं, दस नहीं.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की पहली सूची में कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर ज़िले ही रेड ज़ोन में शामिल थे. लेकिन अब शुक्रवार को जारी ताज़ा सूची में रेड ज़ोन में शामिल ज़िलों की तादाद बढ़कर 10 हो गई है. जिन छह नए ज़िलों को इसमें शामिल किया गया है वह पहले आरेंज ज़ोन में थे.

नक्शे पर

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

राज्य के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव विवेक कुमार ने शुक्रवार को केंद के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग की सचिव प्रीति सूदन को पत्र लिख कर कहा है कि केंद्र ने राज्यों के रेड, ऑरेंज व ग्रीन ज़ोन का जो वर्गीकरण किया है उसमें ग़लती है. पत्र में 30 अप्रैल को कैबिनेट सचिव के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस में हुई बैठक का हवाला देते हुए लिखा है कि पश्चिम बंगाल के 10 ज़िलों को रेड जोन में दिखाया गया है लेकिन केंद्र के ही पैमाने से राज्य में सिर्फ़ चार ज़िले इस ज़ोन में हैं. कुमार ने अपने पत्र में नई सूची को एक त्रुटिपूर्ण आकलन क़रार दिया है.

सोशल डिस्टेंसिंग

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इस मुद्दे पर अब भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. तृणमूल नेतृत्व ने कहा है कि यह राज्य सरकार को बदनाम करने की कोशिश है. पार्टी के राज्यसभा सदस्य शांतनु सेन कहते हैं, "भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार का एकमात्र मकसद बंगाल को बदनाम करना और महामारी से निपटने के लिए उसके प्रयासों में बाधा पहुंचाना है."

उनका सवाल है कि केंद्र राज्य सरकार की सहमति लिए बिना 10 ज़िलों को रेड ज़ोन में कैसे शामिल कर सकता है? पार्टी ने इसे संघीय ढांचे का उल्लंघन क़रार दिया है. लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि कोविड-19 पर राज्य सरकार का झूठ रोजाना सामने आ रहा है. उनका आरोप है, "राज्य सरकार शुरू से ही कोरोना की स्थिति पर झूठ बोल रही है. आंकड़ों को छिपाने के इस रवैये ने बंगाल को गंभीर स्थिति में पहुंचा दिया है."

राज्य सरकार ने बीते तीन अप्रैल को कोरोना से होने वाली मौतों की पुष्टि के लिए एक पांच-सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था. इसकी सिफ़ारिशों के आधार पर सरकार ने मृतकों की तादाद सात से घटा कर तीन कर दी थी. उसके बाद ही समिति पर सवालिया निशान लगने लगे थे. विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने कोरोना से होने वाली मौतों को छिपाने के लिए ही इस समिति का गठन किया है.

इसके बाद यहां पहुंची केंद्रीय टीम ने भी सरकार से इस समिति के गठन औऱ कामकाज के तरीके पर सफ़ाई मांगी थी. समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर सरकार ने कहा है कि अब तक जिन 105 लोगों कोरोना पॉजिटिव लोगों की मौत हुई है उनमें से 33 संक्रमण से मरे हैं और बाक़ी 72 मरीज़ दूसरी बीमारियों से. लेकिन भाजपा और कांग्रेस के अलावा राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी सरकार पर मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप लगाया है.

पश्चिम बंगाल के गवर्नर

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सरकार की विशेषज्ञ समिति पर लगातार बढ़ते विवाद के बीच अब इस समिति की भूमिका सीमित कर दी गई है. मुख्य सचिव राजीव सिन्हा ने कहा है, "अब मौतों के तमाम मामले समिति के पास नहीं भेजे जाएंगे. समिति अब कुछ मामलो की जांच कर सरकार को सिफ़ारिशें देगी. समिति का गठन शोध के मक़सद से किया गया था." स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं, "अब अस्पताल की ओर से जारी मृत्यु प्रमाणपत्र में लिखी वजह के आधार पर ही कोरोना से मरने वालों की पुष्टि की जाएगी."

मुर्शिदाबाद मेडिकल कालेज अस्पताल के अधीक्षक के एक पत्र में डाक्टरों से मौत की वजह कोरोना की बजाय कुछ और लिखने की सलाह दी गई थी. इसके बाद सरकार ने जहां अधीक्षक को हटा दिया है वहीं इससे विपक्ष के आरोपों को बल मिला है.

दूसरी ओर, राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को अपने एक ट्वीट में कहा, "राज्य सरकार के मुताबिक कोरोना महामारी से यहां अब तक 105 लोगों की मौत हुई है लेकिन सच्चाई यह है कि मौत का आंकड़ा इससे कहीं ज़्यादा है. हम मौत का वास्तविक आंकड़ा क्यों छिपाना चाहते हैं? दरअसल, स्थिति की गंभीरता के बारे में जानकारी होने पर लोग ज़्यादा जागरूक होंगे." राज्यपाल का कहना है कि कोविड-19 से लड़ाई में सरकार के प्रयासों की तमाम विपक्षी दलों ने सराहना की है. ऐसे मुश्किल दौर में कोई मुख्यमंत्री राजनीतिक दलों की तुलना मौत का इंतजार करने वाले गिद्ध से कैसे कर सकता है? ममता को अपना बयान वापस लेकर माफ़ी मांगनी चाहिए.

दिलीप घोष

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इसबीच, बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में राज्य सरकार की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति की क़ानूनी वैधता को चुनौती दी है. याचिका में राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीसीयू और आईसीयू में मरीज़ों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के फ़ैसले पर भी सवाल उठाया गया है.

घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा है कि स्थिति हाथ से निकलते देख कर उन्होंने इस महामारी से निपटने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन कर दिया. ध्यान रहे कि मुख्यमंत्री ने कोरोना प्रबंधन पर इसी सप्ताह एक मंत्रिमंडलीय समिति के गठन की घोषणा की थी. इसमें वित्त मंत्री अमित मित्रा, शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, शहरी विकास मंत्री फ़रहाद हाकिम और स्वास्थ्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य शामिल हैं. भाजपा नेता का आरोप है कि मुख्यमंत्री संकट की इस घड़ी में भी राजनीति करने में जुटी हैं.

राजनीतिक पर्यवेक्षकों विश्वनाथ चौधरी कहते हैं, "सरकार के कामकाज के तरीके और विपक्ष के मूड को देखते हुए फ़िलहाल कोरोना पर राजनीतिक जंग तेज़ थमने के आसार कम ही हैं."

भारत में कोरोनावायरस के मामले

यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.

राज्य या केंद्र शासित प्रदेश कुल मामले जो स्वस्थ हुए मौतें
महाराष्ट्र 1351153 1049947 35751
आंध्र प्रदेश 681161 612300 5745
तमिलनाडु 586397 530708 9383
कर्नाटक 582458 469750 8641
उत्तराखंड 390875 331270 5652
गोवा 273098 240703 5272
पश्चिम बंगाल 250580 219844 4837
ओडिशा 212609 177585 866
तेलंगाना 189283 158690 1116
बिहार 180032 166188 892
केरल 179923 121264 698
असम 173629 142297 667
हरियाणा 134623 114576 3431
राजस्थान 130971 109472 1456
हिमाचल प्रदेश 125412 108411 1331
मध्य प्रदेश 124166 100012 2242
पंजाब 111375 90345 3284
छत्तीसगढ़ 108458 74537 877
झारखंड 81417 68603 688
उत्तर प्रदेश 47502 36646 580
गुजरात 32396 27072 407
पुडुचेरी 26685 21156 515
जम्मू और कश्मीर 14457 10607 175
चंडीगढ़ 11678 9325 153
मणिपुर 10477 7982 64
लद्दाख 4152 3064 58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह 3803 3582 53
दिल्ली 3015 2836 2
मिज़ोरम 1958 1459 0

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

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