कोरोना वायरस: आगरा के क्वारंटीन सेंटरों में बदहाली, फेंक कर दिया जा रहा है खाना

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिन्दी के लिए
उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की आशंका वाले लोगों को अलग रखने के लिए बने क्वारंटीन सेंटरों में अनियमितता और अव्यवस्था की ख़बरें कई जगह से मिल रही हैं लेकिन आगरा के एक कॉलेज में बने क्वारंटीन सेंटर में रह रहे लोगों को बेहद अमानवीय तरीक़े से दूर से ही फेंक कर खाद्य सामग्री देने संबंधी मामला सामना आया है.
आगरा ज़िले में हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट कॉलेज को क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है. यहां शहर के ही कुछ लोगों को क्वारंटीन किया गया है. इस सेंटर का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें संक्रमण के डर से पीपीई किट पहने कुछ स्वास्थ्य कर्मचारी पानी की बोतल, बिस्किट और अन्य खाद्य सामग्री लोगों को फेंक कर दे रहे हैं. क्वैरेंटीन किए गए लोगों को अंदर से बंद किया गया है और वे गेट के भीतर से हाथ बाहर निकालकर खाने पीने की चीजों को लेने के लिए उतावले होते दिख रहे हैं.
सामग्री् उपलब्ध नहीं है
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बताया जा रहा है कि जिस महिला ने इस वीडियो को बनाकर वायरल किया है, वह ख़ुद भी इसी क्वैरेंटीन सेंटर में है. सेंटर में रहने वाले एक व्यक्ति ने बीबीसी को बताया, "हमें जांच के लिए यहां लाया गया और बेहद अमानवीय तरीक़े से स्वास्थ्यकर्मी पेश आ रहे हैं. न तो हमारी कोई बात सुनते हैं और न ही पास आते हैं. गेट के बाहर ही खाने की चीज़ें और पानी की बोतलें फेंक देते हैं और लोग उन पर टूट पड़ते हैं. अधिकारियों से भी शिकायत की गई है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है."
हालांकि वीडियो सामने आने के बाद ज़िलाधिकारी ख़ुद यहां पहुंचे और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए. डीएम प्रभु नारायण सिंह का कहना था कि जो भी अनियमितताएं पाई गई हैं उन्हें दूर कर लिया गया है और अब लोगों को कोई दिक़्क़त नहीं है. जांच में प्राथमिक तौर पर दोषी पाए गए खंड विकास अधिकारी मनीष कुमार को निलंबित करने के भी निर्देश दे दिए गए हैं लेकिन इन सबके बावजूद क्वारंटीन किए गए कई लोगों की शिकायतें कम नहीं हुई हैं.

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सबसे बड़ा क्वारंटीन सेंटर
आगरा-मथुरा रोड पर स्थित इस क्वारंटीन सेंटर में क़रीब दो सौ लोगों को रखा गया है. यहां भर्ती एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि यहां न तो साफ़-सफ़ाई की कोई व्यवस्था है और न ही परिसर को सैनिटाइज़ किया जाता है. यहां रह रहे लोगों के मुताबिक, जिस तरह से खाना और अन्य सामग्री दूर से दी जा रही है, उससे सोशल डिस्टेंसिंग भी ख़त्म हो जाती है.
यह हाल न सिर्फ़ एक क्वारंटीन सेंटर का है बल्कि आगरा में बनाए गए लगभग सभी सेंटरों का है. यहां इस तरह के 24 क्वारंटीन सेंटर हैं लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते कई सेंटरों को बंद करके अब सिर्फ़ नौ सेंटर चलाने की क़वायद ज़िला प्रशासन कर रहा है. सबसे बड़ा सेंटर यही मैनेजमेंट कॉलेज है जहां छह सौ लोगों को रखने की क्षमता है.

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स्थानीय पत्रकार यशपाल सिंह बताते हैं, "मैनेजमेंट कॉलेज हो या फिर पंचशील डिग्री कॉलेज, सचदेवा मिलेनियम स्कूल, हेरिटेज इंस्टीट्यूट या फिर अन्य सेंटर. सभी का हाल एक जैसा है. यहां रह रहे कई मरीजों ने शिकायत की है कि उनके साथ अछूतों जैसा व्यवहार होता है. जिस तरीक़े के इंतज़ाम होने चाहिए और जैसा प्रशासन दावा कर रहा है, वैसा कहीं नहीं है."
सीएम से भी शिकायत
सोमवार को आगरा के ही अग्रवन में बने क्वारंटीन सेंटर में बदइंतज़ामी की शिकायत लेकर दर्जनों लोग धरने पर बैठ गए. इन लोगों ने कुछ भी खाने-पीने का सामान लेने से ही मना कर दिया. लोगों का आरोप है कि उन्होंने 14 दिन का क्वैरेंटीन समय पूरा कर लिया है, फिर भी उन्हें घर नहीं जाने दिया जा रहा है. यही नहीं, लोगों की शिकायत यह भी है कि 16 दिन बीतने के बावजूद उनकी जांच तक नहीं कराई गई. अधिकारियों के समझाने के बावजूद लोग ज़िद पर अड़े हैं.
उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण से सबसे ज़्यादा प्रभावित लोग आगरा में ही हैं और यहीं सबसे ज़्यादा लोगों की मौत भी हुई है. आगरा में संक्रमण के क़रीब चार सौ मामले हैं और अब तक दस लोगों की मौत हो चुकी है. क्वारंटीन सेंटरों की बदहाली, जांच में लापरवाही और अन्य अनियमितताओं को लेकर आगरा के मेयर नवीन जैन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर शिकायत कर चुके हैं.

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बीबीसी से बातचीत में मेयर नवीन जैन कहते हैं, "स्थिति को नियंत्रित करने में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से नाकाम है. क्वारंटीन सेंटरों में कई-कई दिन तक मरीजों की जांच नहीं हो पा रही. क्वारंटीन सेंटरों पर भोजन-पानी का उचित प्रबंध भी नहीं है. अनियमितता की शिकायत मैंने मुख्यमंत्री जी से भी की है और चेताया भी है कि यदि उचित प्रबंधन नहीं हुआ तो आगरा भारत का वुहान बन सकता है."
वहीं एक क्वारंटीन सेंटर पर काम करने वाले एक स्वास्थ्यकर्मी का कहना था कि दूर से खाद्य सामग्री और दूसरी चीज़ें देने की बात ग़लत नहीं है लेकिन इनके पीछे कोई ग़लत उद्देश्य नहीं है. नाम न बताने की शर्त पर स्वास्थ्यकर्मी ने कहा, "हर व्यक्ति संक्रमण से बचना चाहता है. हम लोगों के पास पीपीई किट ज़रूर है लेकिन इन किट्स पर कितना भरोसा किया जाए. इसलिए हम लोग भी कोशिश यही करते हैं कि किसी संक्रमित व्यक्ति को अनावश्यक न छुएं. किसी को दूर से पानी या बिस्किट देने के पीछे यह क़तई मक़सद नहीं था कि हम उनका अपमान कर रहे हैं."



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