कोरोना वायरस: क्वारंटीन सेंटर में रहना ख़ौफ़ पैदा करने वाला

इमेज स्रोत, Reuters
- Author, बैसीलिओ मुताही
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, नैरोबी
दुनिया भर के दूसरे लोगों की तरह रैचेल गाचुना भी कोरोन वायरस से संक्रमित होने को लेकर चिंतित हैं लेकिन इसके साथ ही कीनिया के क्वारंटीन सेंटर में बंद होने को लेकर उनके मन में ख़ौफ़ है.
जो लोग पहले से क्वारंटीन सेंटर में रह रहे हैं उनकी मानें तो यहां की हालत किसी जेल से कम नहीं है.
क्वारंटीन में रह रही एक महिला ने बीबीसी को बताया, "टॉयलेट बहुत गंदे हैं. जो सफ़ाईकर्मी यहां सफ़ाई करने आते हैं वो भी इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि टॉयलेट कितने गंदे और बदतर हालत में हैं."
उनका कहना है, "यहां पानी का बंदोबस्त अच्छा नहीं है. अगर पानी रहता भी है तो हर कोई हाथ धोने के लिए एक ही नल का इस्तेमाल करता है. यहां बुरी तरह से बदहाली फैली हुई है."
जो लोग सीमा बंद होने से पहले कोरोना प्रभावित देशों से यहां आए हैं और जो कोरोना वायरस के मरीज़ों के संपर्क में किसी न किसी तरह से आए हैं, उन्हें 14 दिनों की क्वारंटीन के लिए इन सेंटर्स में रखा गया है.
हालांकि जहां किसी में कोरोना के लक्षण दिखे हैं वहां इन सेंटर्स में क्वारंटीन पीरियड हर किसी के लिए दो बार बढ़ाया जा चुका है. उन्हें इसके लिए पैसे भी देने पड़ रहे हैं.
ऐसी भी शिकायतें हैं कि कुछ क्वारंटीन सेंटर्स में इतनी ज्यादा संख्या में लोग रह रहे हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन असंभव है.
रैचेल गाचुना ने बीबीसी से कहा, "आप ईश्वर से प्रार्थना करें कि यह कभी ना झेलना पड़े, नहीं तो ईमानदारी से बाताऊं कि मुझे नहीं पता कि मैं क्या करूंगा. "
रैचेल ने काम से छुट्टी ले ली. पहले वो नौरोबी में अपने घर से काम कर रही थी. शहर में लोग अभी भी दिन के वक़्त घर से बाहर निकल रहे हैं.
भागने की कोशिश
अपने परिवार को संक्रमण से बचाने के लिए रैचेल सिर्फ़ ज़रूरी सामान ख़रीदने के लिए बाहर जाती हैं, नहीं तो बिल्कुल घर से बाहर नहीं निकलतीं.
कीनिया में सार्वजनिक तौर पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है. बसों में अब बहुत थोड़े से सवारी यात्रा कर रहे हैं लेकिन फिर भी यहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन मुश्किल हो सकता है.
रैचेल कहती हैं, "मैं बहुत सावधानी बरतने की कोशिश करती हूँ. जब मैं घर आती हूँ तो बच्चों को छूने से पहले नहाती हूँ. कोई गारंटी नहीं कि आपके कपड़ों में बाहर से क्या चिपक कर आ जाए."
उन्होंने अपने जुड़वा बच्चे का ख्याल रखने वाली आया को छुट्टी दे दी है क्योंकि वो इस बात को लेकर फ़िक्रमंद थीं कि आया चूंकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करके आती है, इसलिए उनके परिवार को उससे संक्रमण का ख़तरा है.
उनका यह डर उस वक़्त और भी बढ़ गया जब पिछले हफ़्ते केनयाटा यूनिवर्सिटी के आइसोलेशन सेंटर में रहने वाले दर्जन भर लोगों ने वहां से भागने की कोशिश की. उन लोगों ने वहां के हालात बिल्कुल नहीं रहने लायक़ बताते हुए यह कोशिश की थी.
इन्हीं में से एक सिमोन मुगाम्बी ने बताया, "पहली बात तो यह थी कि हमारे पास देने के लिए पैसे नहीं थे और दूसरी बात यह कि वहां 14 दिनों के बाद रूके रहने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं बनता."
सरकार ने 14 दिनों के क्वारंटीन पीरियड को बढ़ाने की घोषणा की थी. क्वारंटीन से भागने की कोशिश करने वाले दूसरे लोग भी इस फ़ैसले के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर अपनी राय देते हैं.
इनमें से एक ने बताया, "यह आपकी तौहीन करने जैसा है. यह ऐसा है जैसे कि आप सरकार की दया पर जी रहे हो."
मार्च के अंत तक सरकार के पास होटल, होस्टल, स्कूल और यूनिवर्सिटी में बने 50 क्वारंटीन सेंटर्स थे. जहां एक रात के 20 से 100 डॉलर लगते थे.
इनमें से कुछ अब बंद हो चुके हैं. लेकिन कम से कम पाँच इनमें से क्वारंटीन के तीसरे चरण के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं. 2336 लोग जिन्हें क्वारंटीन में रखा गया था उनमें 425 वहां बचे हुए हैं.
जोखिम में जान
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक संगठन केलीन ने क्वारंटीन सेंटर्स के हालात और उनके बारे में सही-सही जानकारी नहीं होने पर चिंता व्यक्त किया है.
संगठन का कहना है कि, "सरकार यह बात साफ़ नहीं कर पाई है कि किसे भुगतान करना है. लोगों का टेस्ट कब होने वाला है."
कीनिया के स्वास्थ्य मंत्री पैट्रीक एमोथ का कहना है कि वो क्वारंटीन में हो रही असुविधाओं के बारे में जानते हैं. लेकिन लोगों की सुरक्षा का ख्याल रखते हुए हम सेवाएँ जारी रख रहे हैं. क्योंकि क्वारंटीन में रखे कुछ लोग कोरोना पॉज़िटिव मिले हैं.
उन्होंने क्वारंटीन सेंटर्स में "लोगों की ओर से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने और इसकी बजाए आपस में नज़दीकी तालमेल रखने की बात कही."
देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल केनयाटा नेशनल हॉस्पिटल के हेड इवानसन कैमुरी ने भी क्वारंटीन में लोगों के व्यवहार की आलोचना की है.

इमेज स्रोत, AFP
इवानसन कैमुरी कहते हैं, "वे बुरा व्यवहार कर रहे हैं. क्वारंटीन में काम करने वाले लोगों पर उन्होंने हमला भी किया है. वो अपनी जान जोखिम में डाल कर काम कर रहे हैं. कम से कम आप उन्हें थोड़ा समर्थन और उनके साथ ठीक से बर्ताव करे."
क्वारंटीन की अवधि बढ़ाने के बाद वहाँ रह रहे एक शख़्स ने एक वीडियो पोस्ट कर यह कहा है कि लोग अपनी नौकरियाँ गंवा रहे हैं और दूसरी ओर यहाँ बिल बढ़ाया जा रहा है.
रैचेल इसे लेकर बहुत चिंतित हैं. वो अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर पहले से ही परेशान है क्योंकि पाबंदियों की वजह से उनकी कंपनी का काम बंद हो चुका है. ऐसे वक़्त में उन्हें अपने बच्चों का ख्याल भी रखना है.
कीनिया एयरवेज के पायलट लोगों को क्वारंटीन में नहीं जाने के लिए क्या करें, इसे लेकर सलाह देते हैं. वो कहते हैं, "क्वारंटीन सेंटर्स बिल्कुल अच्छी जगह नहीं है. आप व्यक्तिगत स्तर पर साफ़-सफ़ाई और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करके वहां जाने से बच सकते हैं."
रैचेल और उनकी तरह कई लोग इस सलाह को अपने दिल से लगा लिया है.

- कोरोना महामारी, देश-दुनिया सतर्क
- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क पहनना क्यों ज़रूरी है?
- कोरोना: मास्क और सेनेटाइज़र अचानक कहां चले गए?
- अंडे, चिकन खाने से फैलेगा कोरोना वायरस?
- कोरोना वायरस: बच्चों को कोविड-19 के बारे में कैसे बताएं?
- कोरोना वायरस: संक्रमण के बाद बचने की कितनी संभावना है
- कोरोना वायरस: क्या करेंसी नोट और सिक्कों से भी फैल सकता है?


इमेज स्रोत, MohFW, GoI

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















