कोरोना वायरसः 'हमने कारों, ऐंबुलेंसों, घरों और सड़कों पर लाशें देखीं'

सड़क पर लाश

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भारत में कोरोनावायरस के मामले

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कुल मामले

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559

मौतें

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

इक्वाडोर के ग्वायास इलाक़ा कोरोना वायरस से फैली महामारी से सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से है.

जब सरकारी रिकॉर्ड में कोविड-19 की महामारी से मरने वाली की संख्या की जांच-परख की जा रही थी तो एक कठोर वास्तविकता से लोगों का सामना हुआ.

ग्वायास में अप्रैल के पहले दो हफ़्तों में 6700 लोगों की मौत कोरोना वायरस की वजह से हुई है. ग्वायास में मरने वालों की औसत संख्या से ये आंकड़ें 5000 से भी ज़्यादा थे.

इस वजह से ग्वायास न केवल इक्वाडोर का बल्कि पूरे लातिन अमरीका में कोविड-19 से सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ा बन गया है.

और ये सिर्फ़ कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौतें नहीं हैं. महामारी के कारण क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाएं बुरी तरह से चरमरा गई थीं.

बहुत से मरीज़ जो दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, उन्हें ज़रूरी मेडिकल सहायता नहीं मिल पाई.

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ग्वायाक्विल, मुर्दों का शहर

इक्वाडोर के सबसे बड़े शहर और ग्वायास क्षेत्र की राजधानी ग्वायाक्विल के मुर्दाघर में काम करने वाली कैटी मेजिया कहती हैं, "हमने कारों में, ऐंबुलेंसों में, घरों में, सड़कों पर लोगों की लाशें देखी हैं."

वो कहती हैं, "एक वजह तो ये है कि अस्पतालों में बिस्तर नहीं थे, इसलिए उन्हें दाख़िल नहीं कराया गया. अगर वे प्राइवेट क्लिनिक में जाते तो उन्हें नकद में पैसे देने होते और ये हर किसी के बस की बात नहीं थी."

25 लाख लोगों के शहर पर कोरोना वायरस की मार जिस तरह से पड़ी है, शहर के मुर्दाघर भर गए हैं. मुर्दाघर के स्टाफ़ संक्रमण की संभावना से डरे हुए हैं, इसलिए कई मुर्दाघरों को बंद कर दिया गया है.

निराश और लाचार रिश्तेदारों ने ऐसे में शवों को घरों के बाहर छोड़ दिया है. कुछ लाशें कई दिनों से पड़ी हैं. ग्वायाक्विल के क़ब्रिस्तान में जगह कम पड़ गई है. शवों को अंतिम संस्कार के लिए पास के शहरों में ले जाया जा रहा है.

मृत लोगों को दफ़नाने के लिए ताबूत कम पड़ रहे हैं, यहां तक कि लोग गत्ते से ताबूत बना रहे हैं. स्थानीय जेलों में बंद क़ैदियों को लकड़ी के ताबूत बनाने के काम में लगाया गया है.

कंस्ट्रक्शन का काम करता एक शख़्स

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आंकड़ों की कहानी

इक्वाडोर के राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो ने माना है कि उनका हेल्थ इमर्जेंसी सिस्टम स्थिति से निपटने में नाकाम रहा है.

16 अप्रैल तक सरकार इस बात पर ज़ोर दे रही थी कि इक्वाडोर में कोरोना वायरस से केवल 400 लोगों की मौत हुई है.

लेकिन जब कोरोना वायरस के संकट से निपटने के लिए बनाए गए ज्वॉयंट टास्क फ़ोर्स ने सभी आंकड़ों की जांच-परख की तो एक बेहद अलग और डरावनी तस्वीर उभरी.

टास्क फ़ोर्स के प्रमुख जॉर्ज वाटेड ने बताया, "गृह विभाग, मुर्दाघरों, सिविल रजिस्टर और हमारी टीम से जो आंकड़ें मिले हैं, उससे पता चलता है कि अप्रैल के पहले 15 दिनों में ग्वायास में 6703 लोगों की मौत हुई है. यहां हर महीने औसतन दो हज़ार लोगों की मौत हो रही है. इसलिए हमारे पास मौत के आंकड़ों के तौर पर सामान्य से 5700 ज़्यादा मामले हैं."

ऐसा नहीं है कि ग्वायास में सभी लोगों की मौत प्रत्यक्ष रूप से कोविड-19 से जुड़ी हुई है.

कुछ लोग दिल का दौरा पड़ने से मरे हैं, कुछ के गुर्दे ख़राब थे या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं थीं और कुछ सही इलाज के अभाव में मर गए.

कॉफ़िन को ले जाने की तैयारी करते लोग

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दूसरे देशों का क्या हाल होगा?

ग्वायास की जो तस्वीर उभरी है, उससे पूरे इलाक़े में कई सवाल खड़े हो गए हैं. ये पूछा जा रहा है कि लातिन अमरीका के दूसरे देशों का क्या हाल होगा?

और वे देश जहां स्वास्थ्य सुविधाएं ख़राब हैं, उनकी क्या स्थिति होगी?

चीन के वुहान शहर में जब से मौत के आधिकारिक आंकड़ों में संशोधन किया गया है, हालात और चिंताजनक बन गए हैं. यूरोप के सर्वाधिक प्रभावित देशों में से एक स्पेन में जिस तरह से मौत के आंकड़ें जुटाए गए हैं और उन्हें स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर शेयर किया गया है, उनमें विरोधाभास पाया गया है.

ग्वायाक्विल शहर में पेशे से डॉक्टर कार्लोस मावयिन बीबीसी से कहते हैं, "इक्वाडोर में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं हमेशा से कमज़ोर रही हैं. ज़्यादातर सरकारों की ये सबसे कमज़ोर कड़ी रही है."

डॉक्टर कार्लोस का मानना है कि कोविड-19 की महामारी के लिए इक्वाडोर सबसे कमज़ोर शिकार है.

वो कहते हैं, "मरीज़ों की बड़ी तादाद ने इक्वाडोर के कमज़ोर स्वास्थ्य सुविधाओं को पूरी तरह से धाराशायी कर दिया."

इक्वाडोर ने रात के कर्फ़्यू को और बढ़ा दिया है और वादा किया है कि वो ज़्यादा संख्या में टेस्ट कराएगा. लेकिन ग्वायाक्विल के लोगों के लिए ये बहुत देरी से उठाया गया बहुत छोटा क़दम होगा.

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