कोरोना लॉकडाउन: कोटा में फंसे बिहारी छात्रों की आवाज़ क्यों नहीं सुन रही नीतीश सरकार

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- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, कोटा से, बीबीसी हिन्दी के लिए
राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा में पढ़ाई कर रहे यूपी, एमपी, हरियाणा, उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों की सरकारों ने अपने राज्यों के स्टूडेंट्स को बसें भेज कर बुला लिया है. कोटा में अब रह रहे क़रीब 9 हज़ार बिहारी स्टूडेंट्स नीतीश सरकार से गुहार लगा कर थक चुके हैं, लेकिन अभी उनके घर जाने पर कोई फ़ैसला नहीं हुआ है.
बिहार सरकार के एक मंत्री ने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी से कहा, "केंद्र की गाइडलाइन हैं कि राज्य के भीतर भी कोई ट्रैवल भी नहीं करेगा. तो अन्य राज्यों से स्टूडेंट्स को लाने के लिए केंद्र को ही गाइडलाइन बदलनी चाहिए."
''सभी सरकारें बसें भेज कर अपने स्टूडेंट्स को बुला रही हैं लेकिन हमारी बिहार सरकार तो हमारे साथ ही नहीं आ रही. सरकार को समझ नहीं आ रहा है कि हम बिहार के टॉपर्स हैं.'' यह बताते हुए कोटा में रह रहीं बिहार की अनम साज़िल रोने लगीं.
अनम आगे कहती हैं, ''यहां कंडीशन बहुत बुरी हो चुकी है. अभी तो एक वक़्त का खाना नसीब हो रहा है लेकिन न जाने आगे क्या होगा. हम घर वालों से बात तक नहीं कर पा रहे हैं, बहुत परेशान हो गए हैं. कोई हमारी बात नहीं सुन रहा है.''बिहार की नूर फ़ातिमा कहती हैं, ''नीतीश कुमार क्यों नहीं समझ पा रहे हैं कि स्टूडेंट्स यहां मानसिक प्रताड़ना से गुज़र रहे हैं. हमारी आंखों के सामने कई राज्यों के छात्र कोटा से जा चुके हैं और हम बिहार के छात्र यहां फंसे हुए हैं.''
फ़ातिमा कहती हैं, ''जब हमारा रिज़ल्ट होता है तब यह सरकार कहती हैं कि हमारे बच्चे बहुत अच्छा रिज़ल्ट लेकर आए हैं. आज जब हम परेशान हैं और कोटा में फंस गए हैं तो कोई सुन ही नहीं रहा है.''

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बिहार के किशनगंज के रहने वाले दिव्य प्रकाश कहते हैं, ''मैं नीट की तैयारी के लिए कोटा आया था. अब यहां फंस चुका हूं क्योंकि हमारी बिहार सरकार घर जाने की कोई व्यवस्था नहीं कर रही है.''
वह कहते हैं कि, ''हमारा मेस बंद हो चुका है और हम ख़ुद खाना बनाते हैं. हमारे लिए बार-बार खाना बनाना पॉसिबिल नहीं है इसलिए दोपहर में एक समय ही खाना खा कर गुज़ारा कर रहे हैं. घर वाले हमें लेकर बहुत चिंता में हैं और हम भी बहुत डरे हुए हैं. बिहार सरकार हमारे लिए कुछ भी नहीं कर रही है, जिस कारण हम बहुत तनाव की स्थिति से गुज़र रहे हैं.''
कोटा में स्टूडेंट्स के परेशान होने के बावजूद बिहार सरकार ने अभी तक कोई क़दम नहीं उठाया है. जबकि अन्य राज्य सरकारों के द्वारा अपने राज्यों के स्टूडेंट्स को बुलाने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसे लॉकडाउन के विरुद्ध बता चुके हैं.
पटना में भी सरकार से हो रही मांग
कोटा में फंसे स्टूडेंट्स के परिजन भी सरकार पर दबाव बना रहे हैं लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है.
पटना के छात्र संजय कुमार साहनी 12 घंटे का अनशन कर बिहार सरकार से बच्चों को वापस बुलाने की मांग कर रहे हैं.
संजय कहते हैं, ''कोटा में फंसे बच्चों की उम्र कम है और उनके पास खाने तक की व्यवस्था नहीं है. जबकि अन्य राज्यों की सरकारों ने अपने स्टूडेंट्स को बुलाने के लिए क़दम उठाए हैं तो बिहार सरकार क्यों पीछे हट रही है.''
पटना विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से कोटा में फंसे बच्चों को बुलाने के लिए आवाज़ उठाई है.

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गर्ल्स स्टूडेंट्स ने 2 दिन भूख हड़ताल भी की
कोटा में पीजी और हॉस्टल में रह रहीं छात्राओं ने दो दिन अनशन भी किया और पोस्टर तैयार कर बिहार सरकार से गुहार लगाई.
बिहार के वेस्ट चंपारन की रहने वाली छात्रा नूर फ़ातिमा कहती हैं कि, ''हमने 2 दिन का अनशन किया लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई. मेरी सरकार अंधी और गूंगी हो चुकी है. सरकार न जाने कब हमारी आवाज़ सुनेगी और हमें नहीं मालूम कब तक जवाब मिलेगा.''
कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से 24 मार्च को शुरू हुए लॉकडाउन के बाद से ये स्टूडेंट कोटा में ही फंसे हुए हैं.
जब गुहार का राज्य सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा तो ये बच्चे अपने-अपने हॉस्टलों में तख्तियां लेकर उपवास पर बैठ गए. इन बच्चों का कहना है कि जब तक उन्हें घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था नहीं होती है उनका उपवास जारी रहेगा.कोटा में फंसे बिहार के छात्रों को वापस लाने के मामले में गुरुवार को एक याचिका पर पटना हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि 5 दिनों के अंदर इस मामले पर जवाब दें.

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कोचिंग संस्थानों को भी डर सता रहा है
देशभर के राज्यों से कोटा में पढ़ने आने वाले छात्रों की संख्या हर साल क़रीब डेढ़ लाख होती है. यह स्टूडेंट्स मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए यहां आते हैं.
कोचिंग के लिए कोटा में 12 नामचीन संस्थान हैं जबकि क़रीब 55 अन्य संस्थानों में बच्चे दिन-रात तैयारी में जुटे रहते हैं.
कोटा के एक नामचीन संस्थान के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोचिंग संस्थानों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं, अब इतनी बड़ी संख्या में बच्चे लौट कर कोटा शायद नहीं आएंगे. बच्चों के परिवारजन भी अब उन्हें जल्द कोटा वापस नहीं भेजेंगे.
संस्थानों ने बच्चों को ऑनलाइन क्लासेज़ और स्टडी मैटीरियल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
देशभर में लॉकडाउन के बीच बिहार में भाजपा के विधायक अनिल सिंह अपने बेटे को कोटा से वापस बिहार ले जाते हैं, लेकिन अन्य स्टूडेंट्स को कोटा से वापस बिहार लाने पर नीतीश सरकार अब तक कोई फ़ैसला नहीं कर सकी है. यही सवाल अब कोटा में फंसे स्टूडेंट्स भी सरकार से कर रहे हैं, कि क्या वह विधायक के बच्चे नहीं इसलिए बिहार वापस नहीं आ सकते हैं?



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