कोरोना से लड़ने में क्या प्लाज़्मा थेरपी ही 'उम्मीद की किरण' है?

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- Author, मानसी दाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बीते साल दिसंबर में चीन से निकला कोरोना वायरस अब दुनिया के ज़्यादातर देशों को अपनी चपेट में ले चुका है.
ये घातक वायरस दुनिया भर में करीब दो लाख लोगों की जान ले चुका है और इसका कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है.
पूरे विश्व के डॉक्टर, वैज्ञानिक आज इस एक वायरस को रोकने कोशिश में हैं, लेकिन टीके के अभाव में उनके लिए भी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं.
ऐसे में कॉन्वालेसंट प्लाज़्मा थेरपी ने थोड़ी उम्मीद जगाई है और भारत समेत दुनिया के कई दूसरे देश भी कोरोना को हराने में इसकी मदद लेना चाहते हैं.
कहा जा सकता है कि प्लाज़्मा थेरपी 'डूबते को तिकने का सहारा' की तरह सामने आई है.

कहां कहां इस्तेमाल हो रहा है प्लाज़्मा थेरपी का?
भारत की राजधानी दिल्ली में प्रदेश सरकार ने कोविड-19 से बीमार 6 लोगों को प्लाज़्मा थेरपी देना शुरु किया और उनमें से चार मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं.
कर्नाटक ने भी इसी सप्ताह प्लाज़्मा थेरपी का क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया है. बिहार सरकार भी पटना एम्स में इसका ट्रायल करना चाहती है.
देश में सबसे पहले प्लाज़्मा थेरपी की बात करने वाले केरल में भी जल्द ही इस दिशा में काम शुरु करने वाला है. देश के अलग-अलग राज्यों से 30 से अधिक अस्पतालों ने इसकी इजाज़त मांगी है.
यूके सरकार ने शनिवार को स्पष्ट किया है कि जो लोग कोविड-19 से गंभीर रूप से बीमार हैं उन पर प्लाज़्मा थेरपी दी जा रही है. सरकार का कहना है कि वो क्लिनिकल ट्रायल शुरु कर रहे हैं और लोगों से प्लाज़्मा लेने की कोशिश बढ़ाएंगे ताकि हर सप्ताह कम से कम 5,000 तक मरीज़ों का इलाज किया जा सके.
अमरीकी फूड एंड ड्रग एमिनिस्ट्रेशन ने कोविड-19 से ठीक हुए लोगों को प्लाज़्मा दान करने की गुज़ारिश की है ताकि दूसरों के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सके.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इबोला वायरस से मुक़ाबले के लिए कॉन्वालेसंट प्लाज़्मा का इस्तेमाल किया गया था.


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एंटी-वायरल न मिलने तक प्लाज़्मा थेरपी पर ही उम्मीद टिकी है
चीन, जहां से कोरोना वायरस दुनिया भर में चलना शुरु हुआ था उसने भी प्लाज़्मा थेरपी का इस्तेमाल कर सफलता पाई है. चीन में फरवरी की शुरुआत से ही इस थेरपी पर काम करना शुरु कर दिया था.
चीनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कमीशन के एक अधिकारी गुओ यानहोंग ने फरवरी के आख़िर में इसके प्रयोग के बारे में कहा था "अब तक ये सुरक्षित और कारगर साबित हुई है."
तो क्या कोरोना के बढ़ते कदम रोकने में कॉन्वालेसंट प्लाज़्मा थेरपी को बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है?
दिल्ली में कोरोना पैनल के चीफ़ और आईएलबीएस अस्पताल के डॉक्टर एसके सरीन कहते हैं कि "आपको समझना होगा कि टीका और प्लाज़्मा थेरपी दो अलग-अलग चीज़ें हैं. प्लाज़्मा थेरपी से इलाज तो हो रहा है लेकिन लंबे वक्त के लिए हमें कोरोना से बचने के लिए टीके की ज़रूरत होगी."
वो कहते हैं, "टीका एक तरह का प्रीवेन्टिव कदम है जिसकी ज़रूरत हर व्यक्ति को पड़गी. जिन्हें टीका नहीं मिलेगा उन्हें कोरोना संक्रमण हो सकता है और ऐसे में उन्हें इलाज की ज़रूरत पड़ेगी. उनके इलाज में प्लाज़्मा थेरपी काम में आती है."
जिन लोगों को कोरोना वायरस के कारण कोविड-19 बीमारी होती है, उनमें पहले स्टेज में वायरस फैलना शुरु होता है. इसके बाद दूसरे स्टेज में ये फेफड़ों में कॉम्प्लिकेशन पैदा करता है. और तीसरे स्टेज में इस कारण ऑर्गेन फेल होने लगते हैं.
डॉक्टर सरीन कहते हैं "संक्रमण के दूसरे स्टेज की शुरुआत में अगर प्लाज़्मा थेरपी दी जाए तो मरीज़ के बचने की उम्मीद रहती है लेकिन टीके की जगह ये नहीं ले सकता."
वो कहते हैं कि, "ये नया वायरस है, इसके टीके पर काम कई जगहों पर चल रहा है लेकिन तब तक इंतज़ार करना होगा."
"कोविड-19 के इलाज के लिए अभी तक एंटी-वायरल ड्रग नहीं हैं. ऐसे में जब तक इसके लिए एंटी-वायरल नहीं मिल जाता तब तक उम्मीद की हलकी किरण प्लाज़्मा थेरपी ही है."
डॉक्टर सरीन मानते हैं कि जब तक कोरोना वायरस का इलाज नहीं मिलता बड़े पैमाने पर इस थेरपी का इस्तेमाल किया जा सकता है.
वो कहते हैं कि इसके लिए प्लाज़्मा डोनर को आगे आना चाहिए और लोग इसके लिए कई बार ख़ून दे सकते हैं क्योंकि इससे व्यक्ति में कमज़ोरी नहीं आती.
कोरोना महामारी के बीच अमरीका में सरकारी स्वास्थ्य एजेंसियां और प्लाज़्मा पर काम करने वाली कई कंपनियों ने एक साथ मिल कर प्लाज़्मा अलायंस बनाया है. ये अलायंस कोविड-19 के इलाज में इसके इस्तेमाल पर मिल कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं.
वहीं भारत में अलग-अलग राज्य अपने स्तर पर आईसीएमआर और ड्रग्स कंट्रोलर-जनरल ऑफ़ इंडिया की इजाज़त के बाद इस पर आगे बढ़ रही हैं लेकिन एक संगठित कोशिश की कमी दिखती है.
इस सवाल पर डॉक्टर सरीन कहते हैं कि, "भारत का मामला थोड़ा अलग है. ये तो सरकार का काम है और इस मामले में अधिक कुछ नहीं कह सकता."

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प्लाज़्मा थेरपी क्या है?
कॉन्वालेसंट प्लाज़्मा थेरपी धारणा पर आधारित है कि वे मरीज़ जो किसी संक्रमण से उबर जाते हैं उनके शरीर में संक्रमण को बेअसर करने वाले प्रतिरोधी ऐंटीबॉडीज़ विकसित हो जाते हैं.
इन ऐंटीबॉडीज़ की मदद से कोविड-19 रोगी के रक्त में मौजूद वायरस को ख़त्म किया जा सकता है.
संक्रामक रोगों के इलाज के लिए सदियों से प्लाज़्मा वाला इलाज होता रहा है. इससे पहले सार्स, मर्स और एचवनएनवन जैसी महामारियों के इलाज में भी प्लाज़्मा थेरेपी का ही इस्तेमाल हुआ था.
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