कोरोना वायरस: क्यों चर्चा में है 'गुजरात' के ये वेंटिलेटर?

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- Author, तेजस वैद्य
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, अहमदाबाद से
कोरोना वायरस महामारी की वजह से पूरी दुनिया में जिस एक मेडिकल इक्यूपमेंट की मांग बहुत बढ़ी है, वो है वेंटिलेटर. जिन देशों में भी कोविड-19 बहुत ज़्यादा तेज़ी से फैला, वहाँ सबसे पहले ज़रूरत के मुताबिक़ वेंटिलेटर की उपलब्धता को लेकर चिंता शुरू हुई और इसकी माँग बढ़ती हुई दिखाई दी.
भारत में भी वेंटिलेटरों की उपलब्धता को लेकर पिछले कुछ हफ़्तों से चर्चा चल रही है.
गुजरात सरकार ने प्रदेश में वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनियों से विशेष तौर पर कहा है कि वो इन मशीनों को तैयार करने पर पूरा ज़ोर दें.
इस बीच राजकोट की एक कंपनी ने एक सस्ता वेंटिलेटर तैयार किया है. कंपनी का कहना है कि इसे महज़ दस दिनों में डिज़ाइन किया गया.
ज्योति सीएनसी नाम के एक मेडिकल इक्यूपमेंट निर्माता ने इसे विशेष रूप से कोविड-19 के मरीज़ों के लिए तैयार किया है. इसे नाम दिया गया है - धमन-1 और इसकी क़ीमत एक लाख रुपये तय की गई है.

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ये वेंटिलेटर कैसे काम करता है?
कंपनी का कहना है कि धमन-1 एक प्रेशर आधारित वेंटिलेटर है जिसे ख़ासतौर पर कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के लिए तैयार किया गया है.
कंपनी की प्रवक्ता शिवांगी लखानी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "वेंटिलेटर की ख़ासतौर पर ज़रूरत तब होती है, जब कोविड-19 बीमारी गंभीर रूप ले लेती है और मरीज़ के फ़ेफड़े थक कर मरीज़ का साथ छोड़ने लगते हैं. उस स्थिति में फ़ेफड़ों को वेंटिलेटर से सपोर्ट दिया जाता है ताकि सांस चलती रहे. वेंटिलेटर सपोर्ट से मरीज़ को ठीक होने में मदद मिलती है."
शिवांगी ने कहा, "धमन-1 की ख़ासियत ये है कि कोविड-19 के मरीज़ों को जिन प्रेशर आधारित वेन्टिलेटरों की ज़रूरत होती है, ये उसी को आधार बना कर बनाए गए हैं."
कंपनी का कहना है कि पहले फ़ेज़ में वो 1000 वेंटिलेटर बना रहे हैं. ये सभी वेंटिलेटर गुजरात सरकार को दिए जाएंगे ताकि प्रदेश के अस्पतालों में ज़रूरत के अनुसार इन्हें पहुँचाया जा सके.
कंपनी का दावा है कि गुजरात के बाहर महाराष्ट्र सरकार से भी उन्हें धमन-1 वेंटिलेटर की डिमांड आई है. साथ ही स्पेन, यूके, कज़ाकिस्तान, ईरान, कीनिया, पुर्तगाल और फ़्रांस से भी इन वेंटिलेटर के बारे में पता किया गया है.

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इसका ख़ाका तैयार कैसे हुआ?
शिवांगी लखानी बताती हैं कि "गुजरात में जब कोरोना वायरस संक्रमण के कुछ शुरुआती मामले सामने आये और वेंटिलेटरों की उपलब्धता को लेकर अलग-अलग स्तर पर मीटिंगों का एक दौर शुरू हुआ. उस समय ज़िलाधिकारी ने भी कुछ उद्योगपतियों के साथ एक बैठक की जिसमें चर्चा हुई कि अगर कोरोना के मामले बढ़े तो वेंटिलेटरों की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होगी."
वे बताती हैं, "इस मीटिंग में बड़ी चिंता संसाधनों की मौजूदगी को लेकर ज़ाहिर की गई. लेकिन उस वक़्त हमारी कंपनी के पास वेंटिलेटर तैयार करने का पर्याप्त बुनियादी माल मौजूद था."
शिवांगी का कहना है कि कंपनी के मुख्य प्रबंध निदेशक पराक्रम सिंह जडेजा ने ज़िलाधिकारी के साथ हुई उस बैठक में गुजरात सरकार के लिए वेंटिलेटर तैयार करने की पेशकश की थी.
ति सीएनसी के प्रबंधकों के अनुसार, "अहमदाबाद स्थित डॉक्टर राजेंद्र सिंह परमार की कंपनी आरएचपी मेडिकल्स ने धमन-1 वेंटिलेटर को तैयार करने में उनकी मदद की है. 25 लोगों की एक टीम ने मिलकर 10 दिन में इस वेंटिलेटर का प्रोटोटाइप मॉडल तैयार किया. अब 250 लोगों की एक टीम सिर्फ़ वेंटिलेटर तैयार करने में लगी हुई है और ये टीम रोज़ 5-7 वेंटिलेटर तैयार कर रही है."
कंपनी अगले 20 दिनों में क़रीब 100 नए वेंटिलेटर तैयार कर उन्हें गुजरात सरकार को सौंपना चाहती है.

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पर क्या ये मान्यता प्राप्त वेन्टिलेटर है?
ज्योति सीएनसी ने जो प्रोटोटाइप वेन्टिलेटर तैयार किया था उसका प्रयोग अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में किया गया. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी उस समय अस्पताल में मौजूद थे, जब इस वेन्टिलेटर के इस्तेमाल के बारे में कंपनी की एक टीम अस्पताल के स्टाफ़ को समझा रही थी.
पर क्या सरकार की तरफ से इस वेन्टिलेटर को अनुमोदन प्राप्त हो चुका है? इसके जवाब में शिवांगी ने कहा, "धमन-1 को पहले गांधीनगर स्थित इलेक्ट्रॉनिक एंड क्वालिटी डेवलपमेंट सेंटर के पास क्वालिटी टेस्ट के लिए भेजा गया था जिन्होंने इसे सर्टिफ़िकेट दिया है. उसके बाद ही गुजरात सरकार ने हमें और वेन्टिलेटर तैयार करने का ऑर्डर दिया है. जो वेन्टिलेटर अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में इस्तेमाल हो रहा है, वहाँ के स्टाफ़ से हमें उसकी अच्छी रिपोर्ट मिली है."
आम तौर पर बाज़ार में वेन्टिलेटर की कीमत काफी अधिक होती है. ऐसे में क्या एक लाख रुपये में नया वेन्टिलेटर, बहुत सस्ता नहीं है?
इसके जवाब में कंपनी प्रबंधन ने कहा कि "एक वेन्टिलेटर की औसत क़ीमत 6 लाख रुपये होती है. विदेश से मंगवाने पर यह क़रीब 8 लाख का पड़ता है. पर हम इसे एक लाख रुपये प्रति वेन्टिलेटर की दर पर तैयार कर रहे हैं."
वे इसकी वजह बताते हैं कि "क़रीब 26 यूनिट हैं जो इस वेन्टिलेटर के लिए छोटे-बड़े पुर्ज़े तैयार कर रही हैं और सभी ने महामारी की वजह से कोई भी अतिरिक्त क़ीमत नहीं ली. इसलिए जो सामान इस वेन्टिलेटर में लग रहा है, वो लगभग उसी क़ीमत में है जितनी क़ीमत उसे तैयार करने में आती है."
वेन्टिलेटरों के प्रयोग पर बात करते हुए ज़ायडस अस्पताल की बायोमेडिकल और प्रोजेक्ट्स की हेड टेरेंस कुरियन ने कहा कि "भारतीय अस्पतालों में इस्तेमाल हो रहे अधिकांश वेन्टिलेटर विदेशों से आयात किये जाते हैं. ख़ास तौर पर, जर्मनी और अमरीका से. अगर ऐसे समय में हम स्थानीय स्तर पर वेन्टिलेटर विकसित करने में सफल हुए हैं तो ये एक बढ़िया बात है."
कुरियन का मानना है कि भारत में बने वेन्टिलेटर अगर सफ़ल होते हैं, तो आने वाले समय में ज़रूरत के मुताबिक़ इन्हें विकसित करना कोई बड़ी बात नहीं होगी.



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