कोरोना वायरस: AC चलाना क्या ख़तरनाक है?

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    • Author, गुरप्रीत सैनी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

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स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

पिछले दो-तीन दिन से अचानक गर्मी बढ़ गई है और एसी यानी एयर कंडीशनर की ज़रूरत महसूस होने लगी है.

लेकिन सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर कई मैसेज ऐसे दावे के साथ शेयर किए जा रहे हैं कि एसी से कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने का ख़तरा बढ़ जाता है. इन मैसेज से लोगों के मन में एसी को लेकर आशंका आ गई है. लेकिन क्या सच में ऐसा है?

इस मामले में एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि एसी चलाने से इतना मसला नहीं है, जितना क्रॉस वेंटिलेशन से है.

घर और कार का एसी

डॉ गुलेरिया के मुताबिक, अगर आपके घर में विंडो एसी लगा है, तो आपके कमरे की हवा आपके ही कमरे में रहेगी, बाहर या दूसरे कमरों में नहीं जाएगी. इसलिए घर में विंडो एसी या गाड़ी में लगा एसी चलाने में कोई दिक्कत नहीं है.

लेकिन ध्यान रखने की ज़रूरत है कि कमरे में लगे विंडो एसी का इग्ज़ॉस्टअच्छी तरह से बाहर हो, जिससे वो किसी एरिया में ऐसे ना जा रहा हो जहां लोग इकट्ठे हों.

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दफ़्तर या सार्वजनिक जगहों पर लगा एसी

डॉ गुलेरिया के मुताबिक, दफ़्तर या सार्वजनिक जगहों अगर सेंट्रल एसी है, तो इसका मतलब है - सारे कमरों में हवा सर्कुलेट हो रही है, तब ये डर रहता है कि अगर दूसरे कमरे में या फिर ऑफिस के किसी दूसरे हिस्से में कोई खांस रहा है या उसे इंफेक्शन है तो एसी के डक्ट से एक कमरे से दूसरे कमरे तक उसके फैलने का ख़तरा है.

अस्पतालों में बंद किए गए सेंट्रल एसी

जिन अस्पतालों में कोरोना मरीज़ों को भर्ती किया जा रहा है, उनमें सेंट्रल एसी बंद किए जा रहे हैं और उनकी जगह विंडो एसी लगाए जा रहे हैं.

डॉ गुलेरिया के मुताबिक, अस्पतालों में एसी ज़रूरी भी है क्योंकि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, डॉक्टर्स या हेल्थकेयर वर्कर्स की परेशानी भी बढ़ेगी, क्योंकि वो सब पीपीई पहनकर मरीज़ों को देखते हैं. जिससे वो गर्मी में पसीना-पसीना हो जाते हैं. अगर इतनी गर्मी में बिना एसी के मरीज़ देखना पड़ेगा, तो एक और समस्या खड़ी हो जाएगी.

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क्या कहती है रिसर्च

अमरीका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी एक रिसर्च की थी, जिसमें ये देखने की कोशिश की गई कि क्या चीन के एक रेस्टोरेंट में कोविड-19 का प्रसार एयर-कंडीशनिंग से जुड़ा था? इस अध्ययन को गुआंगझू सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की एथिक्स कमिटी ने भी अप्रूव किया है.

रिसर्च के मुताबिक 26 जनवरी से 10 फरवरी 2020 तक नोवल कोरोना वायरस ने तीन परिवारों के 10 लोगों को प्रभावित किया, जिन सभी ने चीन के ग्वांगझू शहर में स्थिति एक ही एयर कंडीशन्ड रेस्टोरेंट में खाना खाया था. सभी के टेबलों की दूरी करीब एक मीटर थी.

इनमें से एक परिवार वुहान से ट्रेवल करके लौटा था. 24 जनवरी को परिवार A ने उस रेस्टोरेंट में खाना खाया. परिवार B और C उसके नज़दीक वाले टेबल पर बैठे थे. परिवार A के एक सदस्य में अगले दिन लक्षण दिखने लगे और पांच फरवरी को उस परिवार के चार अन्य सदस्य और परिवार B के तीन और परिवार सी के दो सदस्य बीमार पड़ गए.

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उस रेस्टोरेंट में सेंट्रल एयर कंडीशनर था, इस पांच मंज़ीला इमारत में कोई खिड़की भी नहीं थी.

इस स्टडी का ये निष्कर्ष निकला कि एयर-कंडीशन्ड वेंटिलेशन की वजह से ड्रॉपलेट ट्रांसमिशन हुआ. इंफेक्शन की मुख्य वजह हवा का बहाव था. रिसर्च में सलाह दी गई कि कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए वेंटीलेशन को बेहतर किए जाने की ज़रूरत है.

अध्ययन की सीमाएं

अमरीका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी माना कि उनके अध्ययन की अपनी सीमाएं थीं, क्योंकि उन्होंने एयरबोर्न ट्रांसमिशन रूट पर स्टडी नहीं की थी और वो वहां खाना खाने वाले दूसरे लोगों के सैंपल को भी स्टडी नहीं कर पाए थे.

रिसर्च के मुताबिक, रेस्टोरेंट का कोई भी कर्मचारी या वहां खाना खाने वाले दूसरे लोग इंफेक्ट नहीं हुए थे. साथ ही एयर कंडीशनर के सभी स्मीयर सैंपल भी नकारात्मक थे.

ट्रांसमिशन के संभावित रूट का अध्ययन करने से ये पता चला था कि आउटब्रेक का कारण ड्रोपलेट ट्रांसमिशन हो सकता है. हालांकि रिसर्च कहती है कि सिर्फ यही इसका कारण नहीं रहा होगा, बड़े रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट कुछ ही वक्त के लिए हवा में रहते हैं और बहुत कम दूरी तक जा सकते हैं. इसलिए रिसर्च में ये कहा गया कि एयर कंडीशनर के स्ट्रांग एयरफ्लो की वजह से ड्रॉपलेट एक टेबल से दूरे और फिर तीसरे टेबल तक पहुंचे हो सकते हैं.

इस बारे में दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के एसोसिएट डायरेक्टर, डॉ रोमेल टिकू कहते हैं , "आम तौर पर ऐसा नहीं होता कि कोई खांसेगा और वायरस हवा से एयर कंडीशनर के ज़रिए सर्कुलेट हो जाएगा और सब लोग इंफेक्ट हो जाएंगे. इसका अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है. हां, ये ज़रूर हो सकता है कि इससे सरफेस कंटामिनेशन हो जाए. अगर किसी मरीज़ ने खांसा, तो एयर कंडीशनिंग के कारण आस-पास की ग्राउंडिंग कंटामिनेट हो सकती है. लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि एयर कंडिशनर वायरस कैरी कर रहा है."

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महाराष्ट्र सरकार की सलाह

कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने लोगों को सलाह दी थी कि वो एयर कंडिशनर का इस्तेमाल ना करें. उन्होंने कहा था कि केंद्र की एडवाइज़री है कि गैर ज़रूरी कूलिंग, नमी से बचना चाहिए.

21 मार्च को महाराष्ट्र सरकार ने एयर कंडिशनर के इस्तेमाल को सीमित करने के लिए सर्कुलर भी जारी किया. सर्कुलर में लिखा था, "सूरज की रोशनी अंदर आने देने के लिए खिड़कियां खुली रखनी चाहिए और बहुत ज़रूरी हो तभी एसी चलाए जाने चाहिए."

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा था कि कोविड-19 वायरस, एसी डक्ट और वेंट के ज़रिए जा सकता है.

वहीं मार्च में ही कर्नाटक सरकार ने भी रेस्टोरेंट्स से एयर कंडीशनर बंद करने के लिए कहा था.

फिलहाल तो पूरे देश में लॉकडाउन है और रेस्टोरेंट समेत सार्वजनिक जगहें बंद हैं, साथ ही बहुत से लोग दफ्तरों के बजाए घर से काम कर रहे हैं, इसलिए वो सेंट्रल एसी से बचे हुए हैं.

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लेकिन सवाल ये भी अहम है कि क्या सेंट्रल एसी सच में वायरस को फैलाने में मदद करते हैं?

इस बारे में डॉ रोमेल टिकू कहते हैं कि अभी तक इस बात की पुष्टी नहीं हुई है, किसी मामले में अबतक ये पता नहीं चला है कि एयर-कंडीशनर की वजह से संक्रमण हुआ. "कुछ ऐसी बात ज़रूर हुई है कि वायरस हवा के कारण रिसाइकल हो रहा था, लेकिन अभी तक इसकी भी पुष्टी नहीं हो सकी है."

उनके मुताबिक, एयर कंडीशनर के फिल्टर वायरस पकड़ते हैं. एसी के डक्ट और वेंट में वायरस मिले भी हैं, लेकिन इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि वायरस एसी के ज़रिए सर्कुलेट हो सकता है, वो उसमें कितना एक्टिव रह सकता है और वो वहां कितनी देर बना रह सकता है, क्योंकि इसके वातावरण, तापमान और नमी जैसे कई फेक्टर होते हैं.

डॉ रोमेल के मुताबिक, "अस्पतालों में भी सेंट्रल एसी बंद करने के एहतियाती कदम लिए जा रहे हैं, क्योंकि ये एक नया वायरस है. हो सकता है आज जो हमें पता है वो कल को गलत निकले. या कोई नई चीज़ आ जाए, जिससे पता चले कि हां, एसी से ये हो रहा है. इसलिए एहतियात बरती जा रही है."

इस बारे में केंद्र सरकार ने अभी तक कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है. हालांकि बीबीसी ने पीआईबी यानी प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो की फेक्ट चेक टीम को मंगलवार रात एक मेल लिखा था. जिसके जवाब का हमें इंतज़ार है. डब्ल्यूएचओ से भी अभी हमें इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

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कोरोना वायरस के बारे में जानकारी

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