कोरोना वायरस: बांद्रा में मची अफ़रातफ़री के लिए कौन ज़िम्मेदार?

बांद्रा कोरोना लॉकडाउन
    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत में कोरोनावायरस के मामले

17656

कुल मामले

2842

जो स्वस्थ हुए

559

मौतें

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

बुधवार सुबह से ही भारत में ट्विटर पर दो चीजें ट्रेंड कर रही हैं, पहला Bandra और दूसरा #UddhavResign.

जाहिर है ये दोनों ही ट्रेंड इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि मंगलवार को मुंबई के बांद्रा इलाक़े में जो कुछ हुआ देश में आज भी उसको लेकर बात हो रही है.

लोगों के मन में इस घटना से जुड़े कई सवाल हैं जिसका जवाब अब भी लोगों को नहीं मिला है जिनमें से सबसे अहम है - हज़ारों की संख्या में लोग वहां कैसे पहुंचे?

बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी लिख कर कुछ वीडियो भेजे हैं और उनकी जांच करने की सिफ़ारिश की है. इस पूरे मामले पर मुंबई पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज कर ली है.

कोरोना लॉकडाउन

इमेज स्रोत, Getty Images

बांद्रा स्टेशन पर 14 अप्रैल को लोग क्यों पहुंचे?

ये घटना दोपहर 3.30 से 4 बजे के बीच की है, जब अचानक से वहां एक साथ हज़ारों की संख्या में लोग पहुंचे. बांद्रा स्टेशन पर जमा हुए लोगों में से अधिकतर प्रवासी मज़दूर थे और वो अपने गृह राज्य जाना चाहते थे.

हालांकि स्टेशन के पास भारी भीड़ होने की सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और लोगों को वहां से हटाया.

भीड़ हटाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा. कुछ घंटों की मशक्कत के बाद बांद्रा स्टेशन से लोगों को ख़ाली करा लिया गया.

मीडिया में इस तरह की रिपोर्टें हैं कि इस पूरी घटना की जड़ में सोशल मीडिया का एक पोस्ट है.

सोशल मीडिया पर विनय दूबे नाम के एक व्यक्ति ने एक वीडियो शेयर किया था. विनय को आज़ाद मैदान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

विनय दूबे को उत्तर भारतीयों के एक एसोसिएशन का अध्यक्ष बताया जा रहा है. विनय ने अपने फ़ेसबुक पर वीडियो जारी कर कहा था, अगर राज्य आप्रवासी मज़दूरों को घर भेजने की व्यवस्था नहीं करती है तो 18 अप्रैल को एक बड़ी रैली करेंगे.

छोड़िए Facebook पोस्ट, 1

सामग्री् उपलब्ध नहीं है

सोशल नेटवर्क पर और देखिएबाहरी साइटों की सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

पोस्ट Facebook समाप्त, 1

वीडियो में विनय ने रेल मंत्रालय और प्रधानमंत्री मोदी से गुज़ारिश की थी कि 14 तारीख़ को जब लॉकडाउन ख़त्म हो जाए, तो दो से तीन दिन के लिए ट्रेन और बस के ज़रिए मज़दूरों के उनके घर वापस भेजने का प्रबंध करें.

विनय ने ये वीडियो 12 अप्रैल को पोस्ट किया था. विनय ख़ुद को समाजिक कार्यकर्ता बताते हैं. वो नवी मुबंई में रहते हैं. उनके ट्विटर एकाउंट पर ऐसा दावा है कि वो किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़े हैं.

उनके पोस्ट को तकरीबन 149 हज़ार लोग देख चुके हैं. 16 हज़ार लोग शेयर कर चुके हैं. इस वीडियो को उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा, "यह #वीडियो महाराष्ट्र मे #फंसे हर इंसान तक #पहुचाएँ जो #अपने_गाँव_घर_परिवार में #वापस जाना #चाहता है !!" पूरा वीडियो तकरीबन 6 मिनट 20 सेकेंड का है.

लेकिन इस दावे पर भी सवाल उठ रहे हैं. अगर भीड़ विनय के कहने पर जुटी तो फिर लोग बिना बैग के स्टेशन क्यों पहुंचे?

सिर्फ़ बांद्रा स्टेशन पर भी ही भीड़ क्यों आई, जबकि वहां से दूसरे राज्यों में जाने वाली बहुत ट्रेनें भी नहीं है?

इसलिए स्टेशन पर भीड़ जमा होने के पीछे एक दूसरी कहानी भी सामने आ रही है.

लोकल चैनल की ज़िम्मेदारी ?

एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने ट्वीट कर एक लोकल टीवी चैनल को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.

उन्होंने निजी टीवी चैनल एबीपी माझा का 2.12 सेकेंड का क्लीप शेयर करते हुए हिंदी में लिखा "आज दोपहर @abpmajhatv की इस खबर के बाद शायद बांद्रा में भीड़ जुटी हो, इससे इनकार नहीं किया जा सकता."

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

इस ख़बर पर एबीपी माझा चैनल हेड राजीव खांडेकर से हमने बात करने की कोशिश पर उन्होंने अभी तक जवाब नहीं दिया है लेकिन एबीपी न्यूज़ के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि चैनल पूरे मामले पर अपने रिपोर्टर के साथ है. फ़िलहाल एबीपी माझा का रिपोर्टर पुलिस की हिरासत में है.

एबीपी माझा के जिस रिपोर्टर ने ये खबर चलाई है उसने फ़ेसबुक पोस्ट में टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक ख़बर का लिंक शेयर किया है, जो थोड़ी मिलती जुलती है. ये ख़बर औरंगाबाद से प्रकाशित की गई है.

छोड़िए Facebook पोस्ट, 2

सामग्री् उपलब्ध नहीं है

सोशल नेटवर्क पर और देखिएबाहरी साइटों की सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

पोस्ट Facebook समाप्त, 2

रेलवे का पक्ष

पूरे मामले में रेलवे ने भी अपना पक्ष सामने रखा है.

ये सच है कि साउथ सेंट्रल रेलवे ने कुछ जनसाधारण एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का एक प्रपोजल बनाया था ताकि आप्रवासी मज़दूरों को घर भेजने का प्रबंधन किया जा सके. लेकिन वो केवल आंतरिक बातचीत का हिस्सा था.

आंतरिक मेल

मंगलवार देर शाम साउथ सेंट्रल रेलवे के चीफ़ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर ने बयान जारी कर पूरे मामले में सफ़ाई दी. उन्होंने कहा, "कुछ वेब मीडिया में इस तरह की ख़बरें आई हैं कि फंसे हुए मज़दूरों को वापस उनके घर भेजने के लिए साउथ सेंट्रल रेल ने अलग अलग जगहों से जन साधारण स्पेशल ट्रेन चलाने का प्लान तैयार किया है. लेकिन ये केवल कमर्शियल डिपार्टमेंट की आंतरिक बातचीत का हिस्सा था, जो सोशल मीडिया पर लीक हुआ."

इस संदर्भ में साउथ सेंट्रल रेलवे की तरफ़ से ये कहा गया है कि ऐसी कोई ट्रेन चलाने का फ़ैसला नहीं किया गया है. ऐसी ग़लत ख़बरों से स्टेशन पर भीड़ बढ़ने की संभावना है, जिसे कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई और कमज़ोर होगी.

इस रिलीज़ में आगे ये भी कहा गया है कि जिस भी मीडिया संस्थान ने ऐसी कोई भी ख़बर चली है कृपया इसका खंडन चलाएं, ताकि लोगों तक सही जानकारी पहुंच सके. इसका एक छोटा हिस्सा उन्होंने ट्वीट भी किया.

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

रेल मंत्रालय ने प्रधानमंत्री के लॉकडाउन बढ़ाए जाने के फ़ैसले के तुरंत बाद ही ट्वीट करके और सार्कुलर के ज़रिए ये स्पष्ट कर दिया था कि 3 मई तक किसी भी तरह की पैसेंजर ट्रेन नहीं चलाई जाएगी.

बावजूद इसके लोग स्टेशन पर पहुंचना शुरू हो गए.

छोड़िए X पोस्ट, 3
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 3

लेकिन अफ़वाह, ग़लत जानकारी और स्पष्टीकरण के बीच सवाल रेलवे प्रशासन पर उठना लाज़मी है. अगर कोई जानकारी आंतरिक थी, तो सोशल मीडिया तक कैसे पहुंची?

क्या रेलवे के अफसर इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं?

आख़िर 14 अप्रैल के बाद की स्थिति स्पष्ट नहीं थी, तो रेलवे ने टिकटों की बुकिंग क्यों जारी रखी थी?

15 अप्रैल से बुकिंग कैंसल है, उसके बारे 14 अप्रैल को जानकारी देना, कहां तक सही है?

कुछ ऐसी ही स्थिति सूरत में भी देखने को मिली. वहां भी आप्रवासी मज़दूर रहने और खाने के अभाव में सड़कों पर निकल आए और घर वापस भेजने की मांग कर रहे थे.

उद्धव ठाकरे

इमेज स्रोत, CMO Maharashtra

प्रवासी मज़दूरों पर राजनीति

लॉकडाउन में आप्रवासी मज़दूरों को वापस भेजना और उनके खाने-पीने का इंतजाम करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है.

ये समस्या पहली बार लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी सामने आई थी, जब दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग जुट गए थे.

घटना के तुरंत बाद महाराष्ट्र में इसको लेकर राजनीति भी शुरू हो गई. राज्य सरकार ने ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा.

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने ट्वीट कर बताया कि बांद्रा स्टेशन के बाहर फ़िलहाल हालात सामान्य हैं और भीड़ को हटा दिया गया है.

उन्होंने यह भी कहा कि बांद्रा में जुटी भीड़ हो या सूरत में भड़की हिंसा, इसके लिए केंद्र सरकार ज़िम्मेदार है जो प्रवासी मज़दूरों के घर वापस लौटने की व्यवस्था नहीं कर पा रही है. प्रवासी मज़दूर शेल्टर या खाना नहीं चाहते, वो अपने घर जाना चाहते हैं.

छोड़िए X पोस्ट, 4
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 4

सरकार का दावा है कि महाराष्ट्र में कुल छह लाख प्रवासी मज़दूर हैं, जो इस समय महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाक़े में रह रहे हैं. राज्य सरकार उन तक खाना पानी और दूसरे ज़रूरी सामान पहुंचाने के लिए सभी ज़रूरी काम कर रही है.

लेकिन सवाल महाराष्ट्र सरकार पर भी उठ रहे हैं. जिस राज्य में कोरोना के संक्रमण के सबसे ज़्यादा मरीज़ हैं आख़िर वहां हज़ारों की संख्या में लोग स्टेशन पर कैसे जमा हो गए?

क्या ये उनके ख़ुफ़िया तंत्र की नाकामी नहीं है? प्रशासन को इसकी भनक कैसे नहीं लगी?

विनय दुबे के वीडियो पोस्ट के बारे में क्या मुंबई पुलिस को पता था?

पहले लॉकडाउन की घोषणा के बाद दिल्ली में ऐसा ही हुआ था, तो क्या इस बार राज्य सरकारों को सजग नहीं रहना चाहिए था?

वो भी तब जब पूरे देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित है. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के कुल 2678 मामले हैं. यहां कोरोना की वजह से अब तक 178 लोगों की मौत हो चुकी है.

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने देवेन्द्र फडणवीस के मुताबिक राज्य सरकार ने आप्रवासी मज़दूरों के लिए खाने और रहने के पूरे इंतजाम नहीं किए हैं, जिस वजह से बांद्रा की घटना हुई है.

दरअसल राज्य सरकार ज़िम्मेदारी केंद्र पर डाल रही है और स्थानीय बीजेपी इसे राज्य सरकार की नाकामी बता रही है.

कोरोना वायरस
कोरोना वायरस

अप्रवासी मजदूरों पर केन्द्र ने क्या कहा

इन सब के बीच नजरें आज के केन्द्र सरकार के आर्डर पर टिकीं थी, जिसमें इन मजदूरों के लिए बहुत कुछ नया नहीं कहा गया है. सरकार के ताज़ा आर्डर के मुताबिक मनरेगा के काम के लिए छूट देने की बात कही गई है, लेकिन इन जगहों पर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की बात का ख्याल रखने के लिए कहा गया है. मनरेगा के काम में भी सिंचाई और जल संचय के कामो को ज्यादा प्राथमिकता देने की बात कही गई है.

छोड़िए X पोस्ट, 5
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 5

लेकिन महाराष्ट्र और देश के बाकी राज्यों में ज्यादातर मजदूर फैक्ट्रियों में काम करते हैं, जिस पर आज के सरकारी आदेश में पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा छूट की बात नहीं कही गई है. संदेश साफ़ है, जो जहां हैं वहीं रहे. केंद्र सरकार उन्हें कहीं भी पहुंचाने का इंतजाम नहीं करने वाली है.

कोरोना वायरस हेल्पलाइन

इमेज स्रोत, MohFW, GoI

कोरोना वायरस

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)