कोरोना: गुजरात में संक्रमितों की संख्या तब्लीग़ी जमात की वजह से बढ़ी या टेस्टिंग की वजह से?

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- Author, हरिता कांडपाल
- पदनाम, बीबीसी गुजराती संवाददाता
कई मंचों पर देश में कोरोना वायरस संक्रमण के तेज़ी से फैलने के लिए दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाक़े में तब्लीग़ी जमात के आयोजन में शामिल लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है.
हाल ही में गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने भी राज्य में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के लिए जमात के लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया.
इससे पहले केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव ने कहा था कि तब्लीग़ी जमात के मरकज़ की वजह से देश में क़रीब चार दिन में कोरोना संक्रमण के मामले दोगुना हो गए हैं.
नितिन पटेल ने कहा कि प्रशासन से सहयोग न करने और अपनी यात्रा की जानकारियां छुपाकर कोरोना संक्रमण फैलाने जमात के लोगों ने बड़ी भूमिका निभाई है.
गुजरात में गुरुवार के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ अब तक कोरोना वायरस के संक्रमण के 262 मामले आ चुके हैं.
गुरुवार सुबह राज्य में स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव जयंति रवि ने बताया था कि राज्य में पिछले 24 घंटों में 55 मामले सामने आए हैं.
नितिन पटेल ने आगे कहा कि गुजरात में अंतरराष्ट्रीय यात्रा करके लौटे लोगों में ज़्यादातर हिंदू थे, उन्होंने कोई नखरे नहीं किए और क्वॉरंटीन में चले गए.
सवाल ये है कि क्या गुजरात में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने के लिए सिर्फ़ एक समुदाय को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है?

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क्या कहते हैं आंकड़े?
25 मार्च के दिन गुजरात में कुल संक्रमितों की संख्या 38 थी जो 15 दिन में बढ़कर 262 हो गई.
जब केन्द्र सरकार ने कुछ ज़िलों को हॉटस्पॉट की श्रेणी में रखा तो उसमे अहमदाबाद को भी रखा गया क्योंकि गुजरात में यहीं पर सबसे ज़्यादा संक्रमित पाए गए हैं.
नौ अप्रैल को अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने संक्रमितों की जानकारी दी. उस पर नज़र डालें तो 24 घंटे में सामने आए 48 नये केसों में 45 मुसमान थे. पाँच और छह अप्रैल को भी एएमसी ने जो जानकारी दी उसमें अहमदाबाद के अधिकांश संक्रमित मुसलमान थे.
सात अप्रैल को राज्य सरकार ने गुजरात के चार शहरों में 15 हॉटस्पॉट घोषित किए जिसमें से आठ अहमदाबाद, तीन सूरत, दो वडोदरा और दो भावनगर में हैं.
अहमदाबाद में जो हॉटस्पॉट बनाए गए हैं उनमें ज़्यादातर मुस्लिम बहुल इलाक़े हैं जैसे दाणीलिमड़ा और आस्टोडिया.
अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ अहमदाबाद के पुराने शहर वाले इलाक़े में जो आठ हॉटस्पॉट हैं उन पर फोकस कर के डोर-टु-डोर सर्वे शुरु किया गया है.

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गुजरात में धीरे-धीरे बढ़ी टेस्टिंग
तीन अप्रैल को गुजरात में संक्रमितों की कुल संख्या 88 थी और सात लोगों की मौत हो चुकी थी.
इसी दिन सरकार ने लैब टेस्ट के आंकड़े दिए जिसके अनुसार राज्य में उस दिन तक कुल 1826 टेस्ट किए गए थे.
चार अप्रैल को गुजरात में लैब टेस्ट की संख्या 2276 बताई गई यानी एक दिन में 450 लैब टेस्ट.
पांच अप्रैल की शाम को लैब टेस्ट का आंकड़ा बढ़कर 2568 होता है. और छह अप्रैल को बताया जाता है कि 24 घंटे में 311 टेस्ट किए गए जिनमें 18 पॉज़िटिव पाए गए.
सात अप्रैल को 673 टेस्ट जिनमें से 32 लोग पॉज़िटिव पाए गए और आठ अप्रैल को 672 टेस्ट में 11 पॉज़िटिव पाए गए.
आठ अप्रैल तक गुजरात में सरकार ने 4224 लैब टेस्ट करवाए जिसमें से 186 पॉज़िटिव पाए गए.
नौ अप्रैल को सरकार ने कहा कि 24 घंटे में 1788 लैब टेस्ट किए गए जिसमें से 62 पॉज़टिव पाए गए.
आंकड़े बताते हैं कि पहली बार 24 घंटे में इतनी संख्या में राज्य में टेस्ट किए गए.
नौ अप्रैल तक गुजरात में 6,199 सैम्पल का लैब टेस्ट हुआ और संक्रमितों की संख्या हुई 262.
अगर महाराष्ट्र के साथ तुलना करें जहां भारत में सबसे ज़्यादा कोरोनो संक्रमित हैं तो मेडिकल एजुकेशन एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट महाराष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, महाराष्ट्र में सात अप्रैल तक सरकारी और प्राइवेट लैब्स में कुल 17,563 टेस्ट हो चुके थे जिसमें 748 ( यानी 4.5 फीसदी) पॉज़िटिव पाए गए और क़रीब 1000 टेस्ट के रिज़ल्ट आने बाक़ी थे.

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आंकड़े बढ़ें तो आश्चर्य नहीं
गुजरात के स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव जयंति रवि ने गुरुवार सुबह को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि 55 नए केस सामने आए हैं ये आश्चर्य की बात नहीं है. ये आंकड़ा अभी और बढ़ेगा.
उन्होंने कहा, "समस्या क़ाबू में है. निज़ामुद्दीन की घटना के बाद कुछ इलाक़ों के कई केस मिले जिसके बाद अनुमान हो गया था कि संक्रमण फैलने वाला है, इन इलाक़ों को हॉटस्पॉट या क्लस्टर्स कहा जा रहा है."
उन्होंने बताया कि हॉटस्पॉट्स को सील किया गया है और इन इलाक़ों में थर्मल गन के साथ हर घर में रहने वालों में लक्षणों की छानबीन की जा रही है. सर्वेलान्स पर रखा गया है इन जगहों को और बीमार लोगों की टेस्टिंग और इलाज तुरंत शुरु कराया जा रहा है."
उन्होंने बताया कि जो बुधवारे से गुरुवार तक 55 केस नए सामने आए उनमें से 50 हॉटस्पॉट से ही आए हैं.

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तब्लीग़ी जमात ही ज़िम्मेदार?
जैसे ही दिल्ली के निज़ामुद्दीन में मरकज़ की ख़बर बाहर आई देश के कई राज्यों में जमात के लोगों को लेकर चिंता बढ़ी गई. सभी राज्यों की तरह गुजरात पुलिस ने जमात के लोगों को मोबाइल सर्वेलान्स जैसे तरीक़ों से ट्रेस कर क्वॉरंटीन में डालने की बातें कहीं.
सवाल ये है कि गुजरात मे बढ़े मामलों के लिए सिर्फ़ जमात के लोगों को ही ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है.
अहमदाबाद में वरिष्ठ फ़िज़िशियन डॉक्टर प्रवीण गर्ग का कहना है, "भारत में अब कोरोना संक्रमण स्टेज 3 यानी कम्युनिटी ट्रांसमिशन की तरफ़ बढ़ रहा है."
गुजरात सरकार की तरफ़ से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक़ 262 में से 197 संक्रमित लोकल ट्रांसमिशन के बताए गए हैं यानी ये लोग विदेश यात्रा से लौटे किसी व्यक्ति के सीधे संपर्क में नहीं आए लेकिन उन्हें फिर भी संक्रमण हुआ है.
डॉ गर्ग कहते हैं, "तब्लीग़ी जमात के मरकज़ में विदेश से आए लोगों के कारण संक्रमण फैला और उसके बाद लोग अलग अलग राज्यों में गए ये सच्चाई है. इस बात से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि इनमें से कई पॉज़िटिव हैं और वायरस के कॅरियर भी हैं. लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि लॉकडाउन को 14 दिन बीत चुके हैं और विदेश से आने वाले लोगों से सीधे संक्रमण फैलने का फेज़ भी बीत चुका है."
वो कहते हैं, "देश में एसिम्पटॉमैटिक ( जिनमें लक्षण न दिखें) संक्रमितों के मिलने से भी चिंता बढ़ी है. जिस तरह से लॉकडाउन में कुछ ज़रूर सेवाएं जारी हैं मसलन दुकान पर बैठा दुकानदार या सब्ज़ी वाला संक्रमित हो और उसमें लक्षण नहीं है, वो भी कई लोगों को संक्रमण फैला सकता है."
वो आगे कहते हैं, "इसलिए सिर्फ़ एक समुदाय विशेष के कारण ही संख्या बढ़ी है ये नहीं कहा जा सकता. कई और फ़ैक्टर्स भी हो सकते हैं."
वहीं गुजरात में लैब टेस्टिंग की संख्या में धीरे-धीरे इज़ाफ़ा हुआ है. पिछले एक हफ्ते में क़रीब चार हज़ार सैम्पल्स टेस्ट किए गए हैं.
आठ अप्रैल को 672 लैब टेस्ट और नौ अप्रैल को 24 घंटे में 1788 लैब टेस्ट किए गए हैं. तो छ अप्रैल को मात्र 310 सैम्पल टेस्ट हुए थे.
सरकार ख़ुद मान रही है कि टेस्टिंग सघन होगी और केस भी बढ़ेंगे.
डॉ प्रवीण जैन कहते हैं, "कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने का एकमात्र रास्ता है टेस्टिंग. राज्य सरकारों के पास शुरु से ही टेस्टिंग किट की सीमित मात्रा थी. टेस्टिंग बढ़ेगी तभी और केस सामने आएंगे."
गुजरात की स्वास्थ्य सचिव जयंति रवि ने प्रेस कांफ्रेस में कहा, "जो इलाक़े घनी आबादी वाले हैं और जहां पर केस मिले थे वहीं पर संक्रमण की संभावनाएं ज़्यादा होती हैं. भारत सरकार के निर्देश के अनुसार इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारी या कोरोना संक्रमितों के सीधे संपर्क में आने वाले लोगों का टेस्ट करवाया जा रहा है."
गुजरात में कम टेस्टिंग का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि आईसीएमआर के दिशा-निर्देश के अनुसार टेस्ट करवाए जा रहे हैं.

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'जहां कोई केस नहीं वहां टेस्टिंग की ज़रूरत'
वहीं गांधीनगर में इंडियन इन्स्टीट्युट ऑफ़ हेल्थ के निदेशक प्रोफ़ोसर दिलीप मावलंकर ने बीबीसी से कहा, "अगर एक समदाय को संक्रमण फैलाने के लिए ज़िम्मेदार बताया जा रहा है तो ठोस आंकड़े दे दिए जाएं."
उन्होंने कहा, "संक्रमितों की संख्या इस वजह से भी बढ़ सकती है कि संक्रमितों के परिवार वालों और उनके संपर्क में आए लोगों का टेस्ट किया गया हो." वो इस बात के साथे घर के अंदर भी सोशियल डिस्टंसिंग पर ज़ोर देते हैं.
वो आगे कहते हैं, "टेस्टिंग कम ही है लेकिन गुजरात में कुल टेस्ट में से पॉज़िटिव पाए गए सैम्पल्स की तादाद पांच फीसदी या उसके आसपास देखी गई इसलिए इस पर चिंता नहीं है. लेकिन किस जगह पर और किन लोगों के सैम्पल लिए जा रहे हैं उससे आगे की दिशा तय होगी और केस सामने आएंगे."
उनकी सलाह है, "सरकार को उन ज़िलों में भी सैम्पल्स की टेस्टिंग करानी चाहिए जहां पर एक भी केस नहीं आया है. गुजरात के कई ज़िलों में एक भी संक्रमित केस सामने नहीं आया है. इन ज़िलों में ज़्यादा तादाद में टेस्टिंग होनी चाहिए जिससे तस्वीर साफ़ हो. इससे लॉकडाउन हटाने को लेकर फैसला लेने में भी मदद मिलेगी."
वहीं आने वाले दिनों में टेस्टिंग बढ़ाने को लेकर जयंति रवि ने कहा कि दिल्ली से तीन से चार हज़ार टेस्ट किट्स भेजी जा रही हैं जिनसे और तादाद में वृद्धों और इन्फ्लुएंज़ा से पीड़ित लोगों के सैम्पल टेस्ट किए जा सकेंगे.
उन्होंने ये जानकारी भी दी गुजरात सरकार ने विदेश में पचास हज़ार रैपिड टेस्ट किट्स का ऑर्डर दिया है.

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