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कोरोना वायरस: यूपी में 15 ज़िलों के 100 से ज़्यादा इलाक़े रात 12 बजे के बाद हो जाएंगे सील
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वाधिक प्रभावित 15 ज़िलों में 104 हॉट स्पॉट यानी सबसे संवेदनशील इलाकों को चयनित करते हुए इन इलाकों में पूरी तरह से लॉकडाउन करने का फ़ैसला लिया है.
इनमें नोएडा, ग़ाज़ियाबाद, मेरठ, लखनऊ, आगरा, शामली और सहारनपुर ज़िले शामिल हैं.
हॉट स्पॉट्स में पूरी तरह से लॉकडाउन की यह स्थिति बुधवार रात बारह बजे से शुरू होगी और 15 अप्रैल की सुबह तक जारी रहेगी.
राज्य के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने मीडिया को बताया, "सौ प्रतिशत लॉकडाउन उन्हीं जगहों पर किया जाएगा जो हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित हुए हैं. ये वो जगह हैं जहां छह से ज़्यादा संक्रमण के मामले आए हैं."
"बाकी जगहों पर उसी तरह का लॉकडउन रहेगा जैसा पहले से जारी है. इन इलाकों में सभी ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति सरकार की ओर से की जाएगी. यहां आवागमन पूरी तरह से बंद रहेगा. बैंक भी बंद रहेंगे. हॉट स्पॉट्स में मीडिया भी प्रतिबंधित रहेगा. लेकिन यह स्थिति सिर्फ़ हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित इलाक़ों की होगी, पूरे ज़िलों की नहीं. लोगों को किसी भी प्रकार से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है."
राज्य सरकार ने सभी लोगों को मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है. जो लोग मास्क नहीं पहनेंगे उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी. 15 ज़िलों के जिन इलाक़ों को हॉट स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है उन्हें सैनिटाइज़ किया जाएगा और उन इलाक़ों को पूरी तरह से सील कर दिया जाएगा. आगरा और कानपुर में ऐसे कुछ इलाक़ों को पहले से ही सील किया गया है.
राज्य के पुलिस महानिदेशक हितेश अवस्थी का कहना था, "यह तय किया गया है कि कोई भी आदमी बाहर आकर किसी तरह की सेवा को हासिल नहीं करेगा. जो भी चीज चाहिए होगी, उन्हें घर के दरवाज़े तक पहुंचाया जाएगा. डिलिवरी का काम सिविल सप्लाई वाले करेंगे. इन इलाक़ों को पुलिस फ़ायर ब्रिगेड की मदद से पहले सेनिटाइज़ करेगी. इसके बाद लोगों के आने-जाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए बैरियर लगाए जाएंगे. अधिकारी इन इलाक़ों का लगातार दौरा करते रहेंगे."
सबसे ज़्यादा 22 हॉटस्पॉट आगरा में चिह्नित किए गए हैं जबकि ग़ाज़ियाबाद में 13, नोएडा में 12, कानपुर में 12 और वाराणसी में 4 हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए हैं.
इसके साथ ही शामली में 3, मेरठ में 7, बरेली में 1, बुलंदशहर में 3, बस्ती में 3, फ़िरोज़ाबाद में 3, सहारनपुर में 4, महाराजगंज में 4, सीतापुर में 1 और लखनऊ में 8 बड़े और 5 छोटे हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए हैं.
अवनीश अवस्थी ने बताया कि इन जगहों पर लगभग कर्फ़्यू जैसी स्थिति ही रहेगी.
हॉट स्पॉट के रूप में चिह्नित जगहों पर ज़रूरी सेवाओं के लिए जारी पास को भी निरस्त कर दिया जाएगा.
नोएडा - ग़ाजियाबाद के हॉटस्पॉट इलाके
नोए़डा में सेक्टर 11, हाइड पार्क सेक्टर 78, लोटस बॉलवार्ड सेक्टर 100, अल्फ़ा 1 ग्रेटर नोएडा, निराला ग्रीन शायर सेक्टर 2 ग्रेटर नोएडा और पटवारी गाँव को हॉटस्पॉट बनाया गया है.
इससे पहले, कुछ समाचार माध्यमों में राज्य के मुख्य सचिव आरके तिवारी के हवाले से ये ख़बर चली थी कि 15 ज़िलों को पूरी तरह से लॉकडाउन किया जाएगा.
इस ख़बर के फ़ौरन बाद नोएडा, ग़ाज़ियाबाद और लखनऊ समेत तमाम जगहों पर अफ़रा-तफ़री मच गई.
लोग दोपहर तीन बजे से ही राशन की दुकानों के बाहर जमा होने लगे.
कुछ जगहों पर तो पुलिस को बल प्रयोग भी करना पड़ा.
नोएडा और ग़ाज़ियाबाद के ज़िलाधिकारियों ने बाक़ायदा लोगों से अपील की कि किसी तरह से कोई बंदी नहीं होने जा रही है और लोग राशन इकट्ठा न करें.
ग़ाज़ियाबाद की एक पॉश सोसाइटी में रहने वाले सॉफ़्टवेयर इंजीनियर राजेश त्रिपाठी का कहना था कि वो ख़ुद टीवी चैनल पर यह ख़बर देखने के बाद दो बड़े झोले लेकर राशन की दुकान पर पहुंच गए.
उनके मुताबिक, "जब मैं पहुंचा, तब तक उस दुकान पर मेरे आगे सत्रह लोग लाइन में खड़े थे."
इसके बाद इन जगहों पर पुलिस वालों ने लाउड स्पीकर से लोगों को समझाया कि वो घबराएं नहीं और न ही राशन इत्यादि इकट्ठा करें.
क़रीब पांच बजे के बाद स्थितियां सामान्य होनी शुरू हुईं लेकिन तमाम इलाक़ों में भीड़-भाड़ की ख़बरें अभी भी आ रही हैं.
लखनऊ के पुराने शहर अमीनाबाद, कैसरबाग, अलीगंज के अलावा हज़रतगंज में भी दुकानों पर भीड़ लगी रही.
15 ज़िलों को कथित तौर पर सील करने की ख़बर के बाद नोएडा और ग़ाज़ियाबाद में कर्फ़्यू की भी अफ़वाहें फैलने लगीं.
ग़ाज़ियाबाद के ज़िलाधिकारी ने वीडियो संदेश जारी करके इन अफ़वाहों से दूर रहने और कर्फ़्यू जैसी बात को सिरे से ख़ारिज कर दिया.
हालांकि मीडिया जगत में इस बात को लेकर अभी भी चर्चा हो रही है कि शाम चार बजे होने वाली प्रेस ब्रीफ़िंग से पहले ही मुख्य सचिव का मीडिया में बयान कैसे आ गया, वो भी वह बयान जो सरकारी फ़ैसले से अलग था और जिसके चलते तमाम अफ़वाहें फैलीं और अफ़रा-तफ़री मची.
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