सिंधिया बीजेपी में जाने से पहले मोदी को क्या-क्या कहते थे?

इमेज स्रोत, Getty Images
कांग्रेस पार्टी के महासचिव पद पर रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है.
बीते कुछ महीनों से सिंधिया कांग्रेस पार्टी में अपने स्थान को लेकर अहसज और असंतुष्ट थे और सोमवार, 9 मार्च को उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया था.
दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सदस्यता ग्रहण की.
सिंधिया क़रीब 18 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी में रहे. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पार्टी के कई महत्वपूर्ण पदों को संभाला.
बुधवार को पीएम मोदी का शुक्रिया अदा करते हुए सिंधिया ने कहा कि 'मेरे जीवन में दो तारीख़ें सबसे महत्वपूर्ण हैं. एक वो दिन था जब मैंने अपने पिता माधव राव सिंधिया को खो दिया था. और दूसरा दिन है 10 मार्च जो मेरे पिता की 75वीं पुष्यतिथि भी थी, और उस दिन मैंने अपने जीवन का एक बड़ा निर्णय लिया, ख़ुद को कांग्रेस से अलग कर लिया.'
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
ज्योतिरादित्य सिंधिया क़रीब दो दशक तक कांग्रेस पार्टी में अहम पद पर रहे. इसी दौर में 10 वर्ष तक केंद्र में कांग्रेस पार्टी की सरकार रही और ज्योतिरादित्य केंद्र में मंत्री भी रहे.
मौजूदा समय में ज्योतिरादित्य कांग्रेस के उन चुनिंदा नेताओं में से थे जो भीड़ जमा करना जानते हैं, तीखा भाषण दे सकते हैं और बड़े मंचों पर प्रधानमंत्री मोदी के मुखर आलोचक रहे हैं.
अब जब ज्योतिरादित्य ने अपनी पार्टी बदल ली है, तो आपको जानना चाहिए कि भाजपा और पीएम मोदी के बारे में वे अब तक क्या-क्या कहते रहे हैं.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
सिंधिया के बयान और 'महत्वपूर्ण तारीख़ें'
- 15 अप्रैल 2019
पाँच साल पहले एक आदमी आया था आपके सामने वोट बंटोरने, किसान के नाम पर, नौजवान के नाम पर, राष्ट्र के नाम पर. पाँच साल से उस शख़्स का चेहरा नहीं दिखा. और जब दोबारा वोट माँगने की घड़ी आ गई, तो वो फिर आने वाला है आपके सामने. याद रखिएगा कि पाँच साल में वे आपके सामने तो नहीं आए, लेकिन 84 देशों का दौरा किया. उन्होंने अपने लोगों को गले नहीं लगाया, पर विदेशी नेताओं को झप्पी देते दिखे. किसानों का क्या हाल कर दिया इन्होंने. पर प्रधानमंत्री के पास अपने लोगों के लिए समय नहीं है. उनके पास पाकिस्तान में जाकर बिरयानी खाने का समय है. चीन के राष्ट्रपति को घुमाने का समय उन्हें मिल जाता है. मोदी ने नौजवानों से तो कहा था कि हम लाएंगे अवसरों का भंडार, पर लेकर आए पान और पकौड़े वाली सरकार.

इमेज स्रोत, Congress
- 18 मार्च 2018
ये है मोदी जी का न्यू इंडिया. जिस संसद को लोकतंत्र का मंदिर बताया जाता है, उसमें हिटलरशाही लागू करके लोगों की आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है. मैं मोदी जी और उनकी सरकार को कहना चाहता हूँ कि कांग्रेस पार्टी का एक-एक सांसद और कार्यकर्ता, ना कभी झुका है और ना कभी झुकेगा. चाहे गर्दन कट जाए, पर हम झुकेंगे नहीं, ये एक संदेश हम इस अधिवेशन से देना चाहते हैं. बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर ने कहा था कि पाँच ऊंगली रहेंगी तो बिखर जाएँगी. पर ये मुट्ठी बन जाएँ तो देश का उत्थान, देश का विकास सुनिश्चित हो पाएगा. तो हमें मुट्ठी बनकर इस भाजपा का सामना करना होगा.
- 7 जून 2018
दिल्ली में बैठे हुए हैं प्रधानमंत्री मोदी जो देश में नोटबंदी कर रहे हैं. और मध्य प्रदेश में बैठे हुए हैं उनके छोटे भाई, मेरे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जो मंदसौर में किसान बंदी कर रहे हैं. और मैं माँग करता हूँ कि जिस व्यक्ति ने नोटबंदी की, जिस व्यक्ति ने किसान बंदी की, उन दोनों से नवंबर के महीने में आप लोग वोट बंदी करके बदला लेना.

इमेज स्रोत, Getty Images
- 1 जनवरी 2018
जिन्होंने बयान दिया था कि वे मुँह तोड़ जवाब देंगे, आज ये लोग चुप्पी क्यों साधे हुए हैं, एक भी बयान प्रधानमंत्री की तरफ़ से नहीं आया, जबकि हमारे जवान शहीद हुए हैं.
- 6 फ़रवरी 2017
सरकार ने काम क्या किया, ये पता नहीं. पर मोदी जी ने ढाई साल में पूरी दुनिया ज़रूर घूम ली है. वे 40-50 देशों की यात्रा कर आये हैं. पर देश उनसे पूछना चाहता है कि अब तक इन यात्राओं का नतीजा क्या निकला. देश के लोगों को इससे क्या फ़ायदा मिला. हिन्दी की पुरानी कहावत है- 'हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या'. वास्तविकता है कि वे विदेश में हीरो बन जाते हैं, और देश में ज़ीरो बन जाते हैं.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
- 16 मार्च 2016
प्रधानमंत्री एक विदेशी शादी में गए किसी को बताए बिना. और आज हमें पठानकोट का सामना करना पड़ रहा है. अगर देश की जनता को आप विश्वास में लोगे, विपक्षी पार्टियों को आप विश्वास में लोगे और उन्हें बताओगे कि द्विपक्षीय वार्ता में किन मुद्दों पर चर्चा हुई तो इसका फ़ायदा होगा. पर सावधानी आपने छोड़ी, तो इसका खामियाज़ा देश और हमारे जवानों को भुगतना पड़ रहा है.
- 9 मार्च 2015
6 अप्रैल 2000 में मोदी जी ने एक ट्वीट किया था. उन्होंने लिखा था कि हमारे किसानों को उचित दाम नहीं मिलना चाहिए, क्या उन्होंने काम नहीं किया. कृषि को फ़ायदे का धंधा बनाने की बात आपने की थी. कहा था कि किसानों को आय दोगुनी कर देंगे. पर 21 फ़रवरी को जब सर्वोच्च न्यायालय में आपकी सरकार की तरफ से पक्ष रखा गया तो कहा कि ये असंभव है. एक और यू-टर्न आपकी सरकार का.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

















