सिंधिया बीजेपी में शामिल हुए, बताई कांग्रेस छोड़ने की वजह

सिंधिया और जे पी नड्डा

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ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने बीजेपी में जाने की अटकलों को सही ठहराते हुए बुधवार दोपहर बीजेपी में शामिल हो गए. उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के सामने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की.

बीजेपी ने उन्हें मध्य प्रदेश से राज्य सभा का उम्मीदवार भी घोषित किया है.

बीजेपी मुख्यालय में जेपी नड्डा के साथ प्रेस को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा,"मेरे जीवन में दो तारीख़ें बहुत महत्वपूर्ण रही हैं. जीवन में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जो व्यक्ति के जीवन को बदलकर रख देते हैं. पहला दिवस 30 सितंबर 2001 जिस दिन मैंने अपने पूज्य पिताजी को खोया, एक जीवन बदलने का दिन था वो. और 10 मार्च 2020, जो उनकी 75वीं वर्षगांठ थी, जहाँ जीवन में एक नए मोड़ का सामना कर एक निर्णय मैंने लिया है."

उन्होंने इसके साथ ही कांग्रेस से अपने 18 साल पुराने नाते को तोड़ने की वजह पर विस्तार से अपनी बात रखी.

उन्होंने कहा, "मेरे पूज्य पिताजी ने और पिछले 18-19 सालों में मैंने जितनी श्रद्धा के साथ प्रदेश और देश की सेवा करने की कोशिश की है, भारतीय कांग्रेस पार्टी के द्वारा. मगर आज मन व्यथित और दुःखी है क्योंकि आज जो स्थिति उत्पन्न हुई है, मैं ये कह सकता हूँ कि जनसेवा के लक्ष्य की पूर्ति आज उस संगठन के माध्यम से नहीं हो पा रही."

"वर्तमान में जो स्थिति कांग्रेस में है, वो कांग्रेस पार्टी आज नहीं रही जो पहले थी."

सिंधिया ने कहा कि पार्टी वास्तविकता को स्वीकार नहीं कर रही है और इससे अलग जो बातें सुझाई जा रही हैं उन्हें समावेश नहीं किया जा रहा, और इस वातावरण में जहाँ राष्ट्रीय स्तर पर ये स्थिति है वहीं मध्य प्रदेश में भी यही स्थिति है

ज्योतिरादित्य सिंधिया

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'मध्य प्रदेश में सपने टूटे'

सिंधिया ने कहा,"एक सपना हमने पिरोया था जब 2018 में जब हमारी सरकार बनी थी, मगर 18 महीने में वे सपने पूरी तरह से बिखर गए. कहा गया था कि दस दिन में किसानों के ऋण माफ़ करेंगे, 18 महीने बाद भी वो नहीं हो पाया है."

उन्होंने साथ ही आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के नए रास्ते खुल रहे हैं और आज एक ट्रांसफ़र उद्योग चल रहा है मध्य प्रदेश में, रेत का माफ़िया चल रहा है मध्य प्रदेश में.

सिंधिया ने कहा कि ऐसी स्थिति में उन्हें उम्मीद है कि बीजेपी में उन्हें जनसेवा का मौक़ा मिलेगा.

सिंधिया ने कहा," ऐसी स्थिति में आज मैं सौभाग्यशाली समझता हूँ कि नड़्डा जी ने, प्रधानमंत्री जी ने और अमित शाह जी ने मुझे वो मंच प्रदान किया जिससे मैं जनसेवा पर आगे बढ़ पाएँगे. "

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में कहा," मैं मानता हूँ कि भारत का भविष्य पूर्ण रूप से उनके हाथों में सुरक्षित है ".

मध्य प्रदेश में होली के एक दिन पहले से शुरु हुए राजनीतिक संकट के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया ने होली के दिन कांग्रेस से इस्तीफ़ा दे दिया जिसके बाद कमलनाथ सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई.

सिंधिया के इस्तीफ़े के बाद उनके क़रीबी समझे जाने वाले कम-से-कम 22 विधायकों ने भी इस्तीफ़ा दे दिया जिनमें छह मंत्री भी शामिल थे.

सिंधिया ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजी अपनी इस्तीफ़े की चिट्ठी ट्विटर पर जारी कर दी थी मगर अपनी आगे की योजना पर उन्होंने कुछ नहीं कहा था था.

'कांग्रेस में रहकर काम करना मुश्किल'

अपने इस्तीफ़े में उन्होंने लिखा था कि वो कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे रहें हैं लेकिन इस रास्ते की शुरुआत एक साल पहले हो चुकी थी.

उन्होंने लिखा था, "मेरे जीवन का उद्देश्य शुरू से ही अपने राज्य और देश के लोगों की सेवा करना रहा है. मुझे लगता है कि अब इस पार्टी (कांग्रेस) में रहकर मैं अपना ये काम नहीं कर पा रहा हूं."

उन्होंने आगे लिखा कि अपने लोगों और कार्यकर्ताओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए यही सही है कि अब वो इससे आगे बढ़ें और एक नई शुरुआत करें.

उधर कांग्रेस ने कहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी से निकाल दिया गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बयान जारी कर कहा था कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण ज्योतिरादित्य सिंधिया के तत्काल प्रभाव से निष्कासन को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंज़ूरी दे दी है.

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अपने इस्तीफ़े को सार्वजनिक करने सेपहले उन्होंने सोमवार की सुबह पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और फिर शाह के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की थी.

उनके इस फ़ैसले के साथ ही मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार का संकट और गहरा गया है.

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