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बंगाल की हर जेल में खुलेगा रेडियो स्टेशन
- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए
पश्चिम बंगाल की तमाम 57 जेलों में जल्द ही कैदी अपनी पसंद का गीत-संगीत बजाते और सुनते नजर आएंगे.
राज्य की ममता बनर्जी सरकार ने जेलों में कैदियों की स्थिति और रहन-स्तर की बेहतरी के लिए जो कवायद शुरू की है, यह उसी का हिस्सा है.
वैसे, देश की कुछ अन्य जेलों में भी अपने रेडियो स्टेशन हैं. लेकिन पश्चिम बंगाल संभवतः पहला ऐसा राज्य है जहां एक साथ तमाम जेलों में अलग रेडियो स्टेशन खोला जाएगा.
सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दमदम केंद्रीय जेल में यह परियोजना शुरू की थी.
वहां मिली कामयाबी को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से अब तमाम जेलों में इसे शुरू करने का फैसला किया गया है.
इससे पहले सरकार ने डांस थैरेपी के तहत इन कैदियों को अभिनय और नृत्य का प्रशिक्षण दिया था.
जानी-मानी ओडिशी नृत्यागंना अलकनंदा राय ने लगभग दो वर्षों तक कई कैदियों को प्रशिक्षण देकर नृत्य और अभिनय की कला में माहिर बनाने की कोशिश की थी.
कैदी सिलते हैं पुलिस की वर्दी
लंबे अरसे तक प्रशिक्षण हासिल करने के बाद प्रेसीडेंसी और अलीपुर जेल में रहने वाले 54 कैदियों ने कुछ साल पहले एक नृत्य और नाट्य मंडली की स्थापना की थी.
इसमें दस महिलाएं भी शामिल थी. इस समूह ने तब जेल से बाहर भी कई नाटकों का मंचन कर दर्शकों की सराहना बटोरी थी.
इसके अलावा एक गैर-सरकारी संगठन की सहायता से कैदियों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है.
कई जेलों के कैदी तो अब पुलिसवालों की वर्दी सिल रहे हैं. अब तमाम सुधार गृहों में रेडियो स्टेशन खोलना भी सरकार की इसी कवायद का हिस्सा है.
राज्य के जेल मंत्री उज्ज्वल विश्वास बताते है, "हमने दमदम केंद्रीय जेल में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे शुरू किया था. यह योजना काफी सफल रही थी. इसलिए सरकार ने अब तमाम सुधार गृहों में इसे शुरू करने का फैसला किया है. शुरुआत में राज्य के छह केंद्रीय सुधार गृहों में इसे शुरू किया जाएगा."
राज्य के जेल मंत्री बताते हैं कि संगीत उपकरणों को रखने के लिए जेल परिसर में एक कमरा मुहैया कराया गया है.
इस रेडियो स्टेशन से प्रसारित होने वाले गीत-संगीत को कैदियों तक पहुंचाने के लिए उनके कक्ष से बाहर जगह-जगह लाउडस्पीकर लगाए जाएंगे. यह काम चरणबद्ध तरीके से होगा.
कैदी बनेंगे रेडियो जॉकी
जेल प्रशासन एक गैर-सरकारी संगठन की सहायता से पांच-छह कैदियों को रेडियो जॉकी बनने का प्रशिक्षण दे रहा है.
दमदम केंद्रीय सुधार गृह में रेडियो जॉकी का प्रशिक्षण लेने वाले कैदियों में पति की हत्या के आरोप में मई, 2017 से उम्र कैद की सजा काट रही मनुआ मजुमदार और शारदा चिटफंड घोटाले के सिलसिले में जेल में बंद देबजानी मुखर्जी भी शामिल हैं.
इस सुधार गृह में फिलहाल 10 घंटे प्रसारण होता है जिसे आगे बढ़ाने की योजना है.
जेल विभाग के एक अधिकारी बताते हैं, "हर सुधार गृह में प्रस्तावित रेडियो स्टेशन के लिए पांच हजार गाने जुटाए गए हैं. इसके जरिए रोजाना आठ घंटे तक गीतों का प्रसारण होगा."
सरकार की इस पहल से कैदियों के चेहरों पर मुस्कान लौट रही है. दमदम जेल में सजा काट रहे सुनील का कहना है, "रेडियो स्टेशन ने हमारे सूने जीवन में खुशियां लौटा दी हैं. जेल में आने के बाद मैं तो हंसना ही भूल गया था. अब मेरे चेहरे पर फिर मुस्कान लौट आई है. सुनील अब सजा काटकर बाहर निकलने के बाद समाज की बेहतरी के लिए काम करना चाहते हैं."
जेल मंत्री विश्वास कहते हैं, "सरकार की मंशा इन कैदियों का मनोबल बढ़ाकर एक जिम्मेदार नागरिक बनाने की है. हम चाहते हैं कि सजा पूरी कर रिहा होने के बाद वे समाज में सिर उठाकर जी सकें."
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