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अमित शाह के कोलकाता दौरे पर घमासान के आसार
- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए
संसद में नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) पारित होने के बाद रविवार को पहली बार कोलकाता आने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस दौरे पर घमासान के आसार हैं.
सीपीएम समेत विभिन्न संगठनों ने उनके दौरे का विरोध करने, काले झंडे दिखाने और 'शाह गो बैक' के नारे लगाने का ऐलान किया है. सीपीएम ने कहा है कि शाह का स्वागत भी उसी तरह किया जाएगा जिस तरह जनवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किया गया था.
यानी विरोध प्रदर्शन और काले झंडे दिखा कर. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने हालांकि ऐसा कुछ नहीं कहा है. लेकिन उनकी पार्टी के विधायक और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सिद्दीकुल्ला चौधरी ने शाह के दौरे के विरोध में एक शांतिपूर्ण रैली आयोजित करने की बात कही है. दूसरी ओर, बीजेपी ने इन तमाम विरोध प्रदर्शनों को सरकार की ओर से प्रायोजित क़रार दिया है.
अमित शाह भुवनेश्वर से सुबह लगभग 11 बजे यहां नेताजी सुभाष चंद्र एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे. वो सबसे पहले राजारहाट में नेशनल सिक्यॉरिटी गार्ड्स (एनएसजी) के नए बने परिसर के उद्घाटन समारोह में शिरकत करेंगे. शाह उसके बाद दोपहर को धर्मतल्ला इलाके में सीएए के समर्थन में पार्टी की ओर से आयोजित एक रैली को संबोधित करेंगे.
बीजेपी के नए अभियान "और नहीं अन्याय" की शुरुआत
इस मौक़े पर प्रदेश बीजेपी की ओर से शाह का अभिनंदन किया जाएगा. पार्टी का दावा है कि इस रैली में एक लाख से ज़्यादा लोग जुटेंगे. रैली के बाद शाह शाम को कालीघाट जाकर दर्शन-पूजन करेंगे. उसके बाद अगले निकाय चुनावों पर पार्टी के शीर्ष नेताओँ के साथ विचार-विमर्श करने के बाद रात को दिल्ली लौट जाएंगे. रैली के दौरान ही अमित शाह निकाय चुनावों के लिए बीजेपी के नए अभियान "और नहीं अन्याय" की भी शुरुआत करेंगे.
उनके इस लगभग 11 घंटे के दौरे पर सियासत गरमा गई है. शहीद मीनार के जिस मैदान में शाह की सभा होगी उसके ठीक बगल में ही कांग्रेस के युवा, महिला और छात्र संगठनों के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करेंगे. सीपीएम और कांग्रेस के कार्यकर्ता दमदम एयरपोर्ट से लेकर शहीद मीनार तक के रास्ते में अमित शाह के ख़िलाफ़ नारेबाजी और काला झंडा दिखाने की योजना बना चुके हैं.
सीपीएम ने सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर मोदी की तरह शाह के ख़िलाफ़ भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. पार्टी के पोलितब्यूरो सदस्य मोहम्मद सलीम कहते हैं, "पार्टी के युवा और छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शाह के दौरे के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरेंगे. हमने जिस तरह काले झंडे दिखा कर और 'मोदी गो बैक' के नारे लगा कर प्रधानमंत्री का स्वागत किया था, शाह का भी वैसा ही स्वागत किया जाएगा."
राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप
सलीम ने शाह की रैली को अनुमति देने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना कर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच गोपनीय तालमेल होने का आरोप दोहराया है. उनका कहना है, "ममता भले शाह के लिए रेड कार्पेट बिछाएं, बंगाल में उनका (शाह का) स्वागत नहीं होगा."
सीपीएम विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती आरोप लगाते हैं, "दिल्ली की हिंसा के लिए अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी दोनों ज़िम्मेदार हैं." वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफआई) के प्रदेश सचिव सृजन भट्टाचार्य कहते हैं, "कोलकाता में अमित शाह को किसी भी तरह से नफ़रत नहीं फैलाने दी जाएगी."
दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी इस दौरे के विरोध में प्रदर्शन का ऐलान किया है. लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी कहते हैं, "भुवनेश्वर में शाह के साथ बैठक कर ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि भाजपा के साथ उनका गोपनीय तालमेल है."
तृणमूल कांग्रेस ने अब तक किसी विरोध प्रदर्शन का ऐलान तो नहीं किया है. लेकिन उनकी पार्टी के विधायक और राज्य सरकार ने मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी, जो जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष भी हैं, ने कहा है कि वे संगठन के बैनर तले एक शांति जुलूस निकालेंगे.
उनका कहना था, "हम इस जुलूस में दिल्ली की हिंसा के लिए शाह के इस्तीफ़े की मांग उठाएंगे." एक अन्य संगठन नो-एनआरसी मूवमेंट ने रविवार को प्रदेश भाजपा मुख्यालय का घेराव करने की योजना बनाई है.
दूसरी ओर, भाजपा ने विरोध प्रदर्शन के लिए माकपा और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है.
प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, "कांग्रेस और वामपंथी दल अपनी विध्वंसक नीतियों की वजह से विलुप्त होने की कगार पर हैं. अब अपने पैरों तले की खिसकती ज़मीन बचाने के लिए यह दोनों एक जैसी नीतियां अपना रही हैं. लेकिन आम लोग उनको नकार देंगे."
विभिन्न संगठनों की ओर से शाह के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन के ऐलान ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती खड़ी कर दी है. इससे पहले जनवरी में प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान तो कोई प्रदर्शनकारी उन तक नहीं पहुंच सका था. इसकी वजह यह थी मोदी के तमाम कार्यक्रम इंडोर थे लेकिन अबकी शाह की रैली खुले मैदान में है.
हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी ओर से सुरक्षा इंतजाम में कोई कसर नहीं छोड़ी है.
पुलिस के एक अधिकारी नाम नहीं बताने की शर्त पर कहते हैं, "शाह के खिलाफ किसी भी प्रदर्शन या रैली को अनुमति नहीं दी गई है. हमने रैलीस्थल पर सुरक्षा का कड़ा इंतजाम किया है. इसी तरह एयरपोर्ट से उन तमाम रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है जहां से शाह के काफिले को गुजरना है."
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