दिल्ली हिंसा: अमित शाह ने CAA मुद्दे पर विपक्ष को बनाया निशाना - LIVE

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केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह ने नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर एक बार फिर विपक्ष पर निशाना साधा है.
शुक्रवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक सभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने विपक्षी पार्टियों पर एक बार फिर आम लोगों को और ख़ासकर मुसलमानों को सीएए के मामले में गुमराह करने का आरोप लगाया.
दिसंबर 2019 में सीएए क़ानून बनने के बाद से देश के क़रीब 200 जगहों पर इस क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनों में समाज के सभी हिस्से के लोग हैं लेकिन मुसलमान महिलाओं का इन विरोध प्रदर्शनों में सबसे अहम रोल रहा है.
अमित शाह ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा, "कांग्रेस, ममता दीदी, सपा, बसपा ये सारे लोग CAA का विरोध कर रहे हैं. ये कह रहे हैं कि इससे अल्पसंख्यकों के नागरिक अधिकार चले जाएंगे... अरे इतना झूठ क्यों बोलते हो? मैं आज फिर से यहां कहना चाहता हूं कि CAA से देश के एक भी मुसलमान, एक भी अल्पसंख्यक का नागरिकता अधिकार नहीं जाने वाला है. CAA नागरिकता लेने का क़ानून है ही नहीं, बल्कि नागरिकता देने का क़ानून है."
सीएए क़ानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आए छह धर्म ( हिंदू, सिख, इसाई, जैन, बौद्ध, पारसी) के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है. भारतीय मुसलमानों का तर्क है कि भारतीय संविधान में धर्म के आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है और इसलिए ये क़ानून संविधान के ख़िलाफ़ है.
इस क़ानून को चुनौती देने वाली याचिका फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट में है और सर्वोच्च अदालत को इस क़ानून की संवैधानिकता पर फ़ैसला लेना है.
दिल्ली हिंसा: एलजी अनिल बैजल पहुंचे दंगा पीड़ितों के बीच

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दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाक़ों का शुक्रवार को दौरा किया.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उप-राज्यपाल ने कहा कि वो ख़ुद अपनी आंखों से देखना चाहते थे कि ज़मीनी हालात क्या हैं.
सोमवार को दिल्ली के उत्तर-पूर्वी ज़िले में शुरू हुई हिंसा में अब तक 39 लोग मारे जा चुके हैं और क़रीब 200 घायल हैं.
दिल्ली पुलिस: कांग्रेस के 'राजधर्म' वाले बयान पर भड़की भाजपा

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बीजेपी नेता और क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के राष्ट्रपति से मुलाक़ात पर ऐतराज़ जताया है.
कांग्रेस के राजधर्म वाले बयान पर उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा, "हमें राजधर्म के बारे में बताया जा रहा है. आज मैं कांग्रेस पार्टी को राजधर्म के बारे में कुछ सवाल करना चाहता हूं."
उन्होंने सवाल किया, "इंदिरा गांधी ने युगांडा से विस्थापित भारतीयों की मदद की थी. राजीव गांधी ने श्रीलंका से विस्थापित तमिलों की मदद की थी. कांग्रेस नेताओं ने दूसरे देशों से हुए विस्थापित भारतीयों को नागरिकता दी थी और इसके समर्थन में रहे हैं. तो फिर अगर भाजपा कुछ देशों के आस्था से पीड़ित लोगों को नागरिकता देना चाहती है तो आपको उससे क्या ऐतराज़ है?"
उन्होंने कहा, राजधर्म के मामले में बीजेपी को टोकने के बजाय कांग्रेस पार्टी आइने में अपना चेहरा देखे.
कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के नेतृत्व में गुरुवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाक़ात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा.
इसके बाद सोनिया गांधी ने कहा था कि "देश के संविधान के अनुसार नागरिकों के जानोमाल की रक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा राष्ट्रपति का राजधर्म है और मुझे उम्मीद है कि इसका पालन करते हुए वो निर्णायक क़दम उठाएंगे."
उन्होंने कहा कि "कांग्रेस के कार्यकाल में एनपीआर बनाने पर सहमति बनाई गई थी. आप करें तो ठीक और हम करें तो उस पर आप लोगों को उकसा रहे हैं. ये किस तरह का राजधर्म है?"
शिवसेना ने साधा निशाना
शिव सेना ने दिल्ली हिंसा के दौरान अमित शाह की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि दिल्ली जब जल रही थी तब गृह मंत्री अमित शाह कहां थे और क्या कर रहे थे? इस तरह के सवाल शिव सेना के मुख्य पत्र सामना में पूछे गए हैं.
इतना ही नहीं सामना में दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस मुरलीधर के तबादले पर भी सवाल उठाया है. सामाना में लिखा गया है कि अदालत को भी सच बोलने की सजा मिलने लगी है क्या?

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ताहिर हुसैन के ख़िलाफ़ सबूत तलाशने पहुंची टीम

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दिल्ली हिंसा के दौरान प्रभावित भजनपुरा के चांद बाग़ इलाक़े में शुक्रवार को फोरेंसिक साइंस लबोरेटरी की टीम पहुंची.
टीम आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और नेहरू विहार इलाक़े से पार्षद ताहिर हुसैन के दफ्तर पर सबूत इकट्ठा करने पहुंची थी.
इससे पहले हिंसा के दौरान ख़ुफ़िया विभाग के अंकित शर्मा की मौत के मामले में उनके पिता की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की थी.
26 फरवरी को अंकित की लाश चांदबाग़ के एक नाले से निकाली गई थी.
ताहिर हुसैन पर दंगों में शामिल रहने के आरोप लगाए गए हैं. आरोप लगने के बाद गुरुवार को आम आदमी पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था.
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इसी सप्ताह सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें ताहिर हुसैन एक बहु-मंज़िला इमारत की छत पर हैं और हाथ में डंडे लिए नज़र आ रहे हैं. वीडियो में पीछे खड़े कुछ लोग छत से पत्थर फेंकते भी दिख रहे हैं.
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ये वीडियो ट्वीट कर आरोप लगाया था कि हिंदुओं के ख़िलाफ़ हिंसा में ताहिर हुसैन की भूमिका रही है.
ताहिर हुसैन उन पर लगे आरोंपों से इनकार करते रहे हैं. उनका कहना है कि वो दंगाइयों को रोकने का काम कर रहे थे और उन्हें डंडे मारकर नीचे भगा रहे थे.
एसएन श्रीवास्तव होंगे दिल्ली के नए कमिश्नर

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एसएन श्रीवास्तव होंगे दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर. वो रविवार को अपना कार्यभार संभालेंगे.
गृह मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि श्रीवास्तव 1 मार्च 2020 से पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगे.
एसएन श्रीवास्तव इससे पहले जम्मू-कश्मीर सीआरपीएफ में तैनात थे. उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के बाद उन्हें आनन-फानन में दिल्ली बुलाया गया था. उन्हें विशेष पुलिस आयुक्त (लॉ एंड ऑर्डर) की जिम्मेदारी दी गई थी.
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एसएन श्रीवास्तव AGMUT 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. इससे पहले वो दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल में भी रह चुके हैं. स्पेशल सेल में रहते हुए उन्होंने आईपीएल मैच फिक्सिंग का मामला उजागर किया था.
दिल्ली के मौजूदा पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक 29 फरवरी को रिटायर हो रहे हैं. उनका कार्यकाल पिछले महीने खत्म हो गया था. दिल्ली चुनाव के मद्देनज़र उन्हें एक्टेन्शन दिया गया था.
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पुलिस ने बनाई दो जांच टीमें
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़े मामलों की जांच दिल्ली पुलिस ने क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी है.
दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को कहा कि हिंसा से जुड़े मामलों की जांच के लिए दो ख़ास जांच दल बनाए गए हैं. इन टीमों का नेतृत्व दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर जॉय तिर्की और राजेश देव करेंगे.
दोनों टीमों में चार एसिस्टेंट कमिश्नर रैंक के अफ़सर भी शामिल होंगे. साथ ही जांच की निगरानी अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर बीके सिंह करेंगे.
पुलिस ने अब तक कुल 48 एफ़आईआर दर्ज किए हैं.
इधर दिल्ली पुलिस ने एक नोटिस जारी कर कहा है जिस किसी के पास हिंसा से जुड़े किसी तरह के भी सबूत हों वो सात दिनों के भीतर सभी सबूत पुलिस को दें.
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नोटिस में कहा गया है कि, "उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 23 फरवरी को हुई हिंसा के अगर कोई प्रत्यक्षदर्शी हो, किसी के पास अपने मोबाइल या कैमरे पर दंगों से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो हो या फिर अगर किसी व्यक्ति के पास किसी घटना से जुड़ी कोई जानकारी हो तो सीलमपुर में मौजूद डीसीपी के दफ्तर से संपर्क कर उन्हें ये सबूत सौंपें."
साथ ही इस नोटिस में दो मोबाइल नंबर जारी कर कहा गया है कि "लोगों से गुज़ारिश है कि लोग सात दिनों के भीतर सभी तरह के सबूत पुलिस को उपलब्ध कराएं."
पुलिस का कहना है कि जानकारी देने वालों और गवाहों की पहचान गुप्त रखी जाएगी.

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