दिल्ली हिंसा: ताहिर हुसैन ने कहा- मैं तो दंगे रोक रहा था

ताहिर हुसैन
    • Author, विकास त्रिवेदी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, उत्तर पूर्वी दिल्ली से
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आम आदमी पार्टी के नेता ताहिर हुसैन का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह हाथ में डंडे और पत्थर लिए नज़र आ रहे हैं.

इस वीडियो के आधार पर ताहिर हुसैन पर उत्तर पूर्वी दिल्ली के करावल नगर इलाक़े में हुए दंगों में शामिल रहने के आरोप लग रहे हैं. ताहिर हुसैन नेहरू विहार इलाक़े से आम आदमी पार्टी के पार्षद हैं और उनके क़रीबी लोगों पर भी ऐसे ही आरोप लग रहे हैं.

वायरल हो रहे वीडियो में पीछे खड़े कुछ लोग छत से पत्थर फेंकते भी दिख रहे हैं. मगर ताहिर हुसैन दावा करते हैं कि वह "दंगा नहीं फैला रहे थे, बल्कि दंगाइयों को रोक रहे थे."

बीबीसी से उन्होंने कहा, "ये सरासर ग़लत है. उस वीडियो में मैं दंगाइयों को रोकने का काम कर रहा हूं, दंगाइयों को वहां से भगा रहा हूं. मैंने उन्हें डंडे मारकर नीचे भगाया."

"उस वीडियो में मैं लगातर फ़ोन पर बात करता दिख रहा हूं. मैं पुलिस से मदद मांग रहा था. मेरे जितने जानने वाले थे, मैं जितनों को फ़ोन कर सकता था, मैंने किया. आप वीडियो में देख सकते हैं कि हर जगह धुआं-धुआं हो रहा है. सिर्फ़ मेरी छत ही ऐसी जगह थी जहां धुआं नहीं था."

ताहिर हुसैन
इमेज कैप्शन, ताहिर हुसैन (दाएं) बीबीसी संवाददाता विकास त्रिवेदी के साथ

दरअसल, बीजेपी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने एक वीडियो ट्वीट किया था, जिसमें उन्होंने ताहिर हुसैन पर हिंदुओं के ख़िलाफ़ हिंसा में शामिल रहने का आरोप लगाया.

अमित मालवीय ने वीडियो के कैप्शन में लिखा था, "स्थानीय लोगों से हिंदुओं के ख़िलाफ़ हिंसा में 'आप' पार्षद मोहम्मद ताहिर हुसैन की भूमिका के वीडियो मिल रहे हैं. इससे पता चलता है कि केजरीवाल क्यों चुप हैं. न तो उन्होंने अपने विधायकों के साथ मीटिंग की और न उन मौलवियों के साथ, जिन्हें सरकार शांति की अपील के लिए पैसे देती है."

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इस वीडियो में ताहिर हुसैन के साथ के लोग भी नीचे पत्थर गिराते देखे जा रहे हैं. इस बारे में पूछे जाने पर आप पार्षद ने कहा, "वहां हमारे अपने मज़दूर थे. वो दंगे रोकने का प्रयास कर रहे थे. जो लोग नीचे पत्थर मारते दिख रहे हैं, वो दूसरे लोग हैं. वो मेरे मज़दूर नहीं थे. हम लोग पत्थर मारने वालों को रोक रहे थे. मैं वहां इसलिए खड़ा था क्योंकि वहां से ठीक नीचे पार्किंग है और वहीं से सीढ़ियां सीधे छत पर आती हैं. मैं वहां खड़ा था ताकि और लोगों को ऊपर आने से रोक सकूं."

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कपिल मिश्रा से रिश्ते

एक समय में कपिल मिश्रा और ताहिर हुसैन अच्छे दोस्त हुआ करते थे. इतना ही नहीं, कपिल मिश्रा का दफ़्तर भी कभी ताहिर हुसैन के घर में हुआ करता था. फिर दोनों के सम्बन्ध इतने कैसे बिगड़ गए?

इस सवाल के जवाब में हुसैन ने कहा, "कपिल मिश्रा को हमने ही यहां से विधायक बनवाया था. मैं बिज़नसमैन आदमी हूं. हमने कपिल मिश्रा का पूरा साथ दिया था लेकिन उन्होंने यहां की जनता के साथ धोखा किया, हमारी पार्टी के साथ धोखा किया और आज उन्होंने सबसे बड़ा धोखा हमारे साथ किया."

"उन्होंने अपनी राजनीति के लिए एक षड्यंत्र के तहत मुझे फंसाया है. मैं चाहता हूं कि इसकी जांच हो और जो भी इसके दोषी हों, उन्हें सख़्त से सख़्त सज़ा हो. मैं हर तरह की जांच में सहयोग देने के लिए तैयार हूं."

भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी आईबी के लिए काम करने वाले अंकित शर्मा के परिजन ताहिर हुसैन पर उनकी हत्या का आरोप लगा रहे हैं.

ताहिर हुसैन

अंकित के बारे में पूछे जाने पर ताहिर हुसैन ने कहा, "मैं अंकित को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता था. मुझे जो भी जानकारी मिली है, वो मीडिया के माध्यम से मिली है. मुझे अंकित शर्मा की मौत का दुख है. अंकित शर्मा को न्याय मिलना चाहिए."

कपिल मिश्रा ने ताहिर हुसैन के लोगों पर अंकित की हत्या का आरोप लगाया है. ताहिर हुसैन ने बीबीसी से बातचीत में इस आरोप से इनकार किया.

उन्होंने कहा, "मेरे जितने भी लोग हैं, कपिल मिश्रा उन्हें ख़ुद अच्छी तरह जानते और पहचानते हैं."

ताहिर हुसैन

इमेज स्रोत, FB/Tahir Hussain

'जान को ख़तरा'

क्या वो हिंसाग्रस्त इलाक़ों में जनता से मिलने गए? इसके जवाब में ताहिर हुसैन ने कहा, "इस समय मीडिया में दुष्प्रचार ज़ोरों पर है. अगर मैं कहीं अकेले बाहर गया तो मेरी जान को ख़तरा हो सकता है. मुझे जान से मारा जा सकता है."

ताहिर हुसैन ने बताया कि उन पर लगे आरोपों के बाद अरविंद केजरीवाल ने उनसे संपर्क नहीं किया है.

उन्होंने कहा, "दंगों के दौरान मैंने संजय सिंह से बात की थी. उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं ख़ुद को सुरक्षित रखूं. उन्होंने कहा था कि वो जल्दी से जल्दी मदद भेजने की कोशिश करेंगे. उन्होंने डीसीपी को तीन बार फ़ोन किया था. एक बार कॉन्फ़्रेंस कॉल पर मेरी भी डीसीपी से बात करवाई थी. उन्होंने मुझसे गूगल लोकेशन मांगी थी, जो मैंने उन्हें भेजी भी थी. इतना सब कुछ होने के बाद पुलिस यहां पहुंची. अगर संजय भाई इतने सक्रिय न होते तो शायद पुलिस यहां आती ही नहीं."

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