दिल्ली हिंसा के पीड़ित दो युवकों की कहानी

- Author, पीयूष नागपाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाक़े में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध और समर्थन को लेकर भड़की हिंसा में अब तक नौ लोगों की जान जा चुकी है.
इनमें दिल्ली पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल भी हैं.
कई इलाक़ों में सोमवार दोपहर हिंसक घटनाएं घटीं. इसके बाद देर रात चांद बाग़, भजनपुरा, बृजपुरी, गोकुलपुरी, और जाफ़राबाद में भी डर का माहौल बना रहा. कुछ हिंसक घटनाएं भी सामने आईं.
इस हिंसा के शिकार लोगों में मुस्तफ़ाबाद और चांदबाग़ के रहने वाले दो युवक शामिल हैं. एक युवक की मौत हो चुकी है और दूसरा युवक बुरी तरह घायल है.
उनके परिवारवालों ने हमें उस दिन का आंखों देखा हाल बताया.
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सामान लेने निकले थे राहुल सोलंकी
मुस्तफ़ाबाद में रहने वाले 26 साल के राहुल सोलंकी की सोमवार शाम 6 बजे गोली लगने से मौत हो गई थी. राहुल सोलंकी वेस्टीज कंपनी में पेशे से इंजीनियर थे.
उनके भाई रोहित सोलंकी ने बताया, ''राहुल घर का सामान लेने के लिए बाहर निकले थे. रास्ते में उन्हें कुछ लोगों ने घेर लिया. कुछ लोगों के हाथों में बंदूक़ें थीं और वो भगाते हुए सभी के घरों में घुस रहे थे.''

''ये देखकर राहुल ने भी भागना शुरू कर दिया लेकिन हेल्मेट पहने हुए एक शख़्स ने उन्हें गोली मार दी. गोली उनके गले में जाकर लगी.''
गोली मारने वाला राहुल सोलंकी से 70 मीटर की दूरी पर था. ये घटना शाम क़रीब 6 बजे गोली मारी गई.
राहुल सोलंकी का परिवार इलाज के लिए उन्हें चार निजी अस्पतालों में लेकर गया लेकिन बिना इलाज ही उन्हें वापस भेज दिया गया. इमरजेंसी की सुविधा होने के बावजूद भी उनका इलाज नहीं हुआ.
अस्पताल ले जाने तक उनकी सांसें चल रही थीं. बाद में उन्हें ग़ाज़ियाबाद लोनी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया.
रोहित सोलंकी कहते हैं, ''जीवन में सब ख़त्म हो गया है. भाई कहता था कि एक-दो महीने रुक जाओ फिर किसी को कमाने की भी ज़रूरत नहीं रहेगी. तू बस मेरे साथ रहना. हमें इंसाफ़ चाहिए. आज सिर्फ़ मेरा भाई मरा है. आगे जाने किस-किस के मरेंगे. घरों में घुसते जा रहे हैं. ना इन पर कोई कार्रवाई हो रही है, न कुछ हो रहा है. इतने दिनों से रोड जाम करके रखा है. बच्चों के पेपर हैं. जिस मर्ज़ी से नाम पूछते हैं और फिर मार देते हैं.''

गोडाउन से घर जा रहे थे सग़ीर
चांदबाग़ के रहने वाले सग़ीर को तब गोली लगी जब वो गोडाउन से अपने घर जा रहे थे. उन्हें बाहर के हालात का अंदाज़ा नहीं था. फ़िलहाल वो अस्पताल में ज़िंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं.
सग़ीर के भाई समीर ने बताया कि जब वो भीड़ से निकल रहे थे तो अचानक कहीं से गोली चली और जांघ के आरपार हो गई. सग़ीर को शाम छह बजे क़रीब पुलिया के पास चांदबाग़ इलाक़े में गोली लगी थी.
सग़ीर की एक हार्डवेयर की दुकान है. उनके माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है.
समीर ने बताया कि सग़ीर एक सीधे-साधे आदमी थे. उनकी शादी नहीं हुई थी.
समीर कहते हैं, ''पुलिसवालों ने कुछ नहीं किया और ना ही वो यहां पर आए. मेरे भाई को भी वहीं के अनजान लोग छोड़कर गए हैं.''
''डॉक्टर कह रहे हैं कि अभी कुछ कह नहीं सकते. एक ऑपरेशन तो कर दिया था. सुबह जब फिर से चेक करने आए तो उससे बहुत ख़ून निकल रहा था. ख़ून रुक नहीं रहा था. उसे ऑपरेशन थियेटर में लेकर गए और अब भी इलाज चल रहा है. यही बोलना चाहेंगे कि ये सब जो चल रहा है बस ख़त्म हो जाए. ग़रीब लोग परेशान हो रहे हैं.''

इमेज स्रोत, AFP
अब तक जो मालूम है
पूर्वी दिल्ली में हिंसा और आगज़नी से जुड़े कुछ तथ्यों पर डालें नज़र-
- नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में पिंक मेट्रो लाइन पर पाँच स्टेशन लगातार दूसरे दिन बंद.
- बंद किए गए मेट्रो स्टेशन हैं- जाफ़राबाद, मौजपुर-बाबरपुर, गोकुलपुरी, जौहरी एन्कलेव, शिव विहार.
- हिंसा प्रभावित इलाक़े में मंगलवार को सभी सरकारी-प्राइवेट स्कूल बंद.
- सीबीएसई प्रवक्ता रमा शंकर के मुताबिक़, हिंसा प्रभावित इलाक़ों में किसी सेंटर पर मंगलवार को कोई पेपर नहीं है.
- ब्रह्मपुरी इलाक़े में दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने फ्लैग मार्च निकाला.
- समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, रैपिड एक्शन फोर्स टीम को ब्रह्मपुरी इलाक़े में दो खाली बुलेट शेल्स मिले.
- करावल नगर इलाक़े के टायर मार्केट में मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे के क़रीब आग लगी. इसी इलाक़े में रविवार को भी वाहनों को फूंका गया था.
- फ़ायरिंग और आगज़नी की घटनाओं के बाद दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय उप राज्यपाल अनिल बैजल से मिलने सोमवार देर रात पहुंचे.
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