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जानवरों की तरह बच्चे पैदा करना देश के लिए हानिकारक: शिया नेता - पांच बड़ी खबरें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के 'दो बच्चों का नियम' वाले बयान की कड़ी में एक शिया वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा है कि आबादी पर नियंत्रण के लिए भारत में क़ानून लागू करना अच्छा होगा.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश शिया वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिज़वी का कहना है, ''कुछ लोगों का कहना है कि बच्चे का पैदा होना कुदरती प्रक्रिया है और इसमें दख़ल नहीं दिया जाना चाहिए. लेकिन जानवरों की तरह बच्चे पैदा करना समाज और देश के लिए हानिकारक है. आबादी पर काबू के लिए क़ानून लागू करना देश के लिए अच्छा होगा.''
इस बयान से कुछ दिन पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने उत्तर प्रदेश में ही एक कार्यक्रम में कहा था कि 'आरएसएस की आगामी योजना देश में दो बच्चों का क़ानून लागू कराना है.'
आरएसएस प्रमुख भागवत का कहना था कि ये योजना आरएसएस की है, लेकिन इस पर कोई भी फ़ैसला सरकार को लेना है.
आंध्र प्रदेश की होंगी तीन राजधानियां
आंध्र प्रदेश विधानसभा ने विपक्ष के भारी विरोध के बीच उस विधेयक को मंज़ूरी दे दी है जिसमें राज्य की तीन राजधानियां बनाने का प्रावधान है.
सोमवार देर रात आंध्रप्रदेश विधानसभा में पारित विधेयक के मुताबिक विशाखापट्टनम, कुर्नूल और अमरावती को राज्य की तीन राजधानियों के तौर पर विकसित किया जाएगा.
इससे पहले राज्य विधानसभा में बेहद नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला जहां विपक्ष के नेता और आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
वे तेलुगूदेशम पार्टी के विधायकों के साथ विधानसभा के मुख्य द्वार से पैदल मार्च निकाल रहे थे. मुख्यमंत्री वायएस जगन मोहन रेड्डी के भाषण के दौरान बाधा पहुंचाने वाले तेलुगूदेशम पार्टी के 17 विधायकों को विधानसभा से निलंबित किया गया जिसके विरोध में चंद्रबाबू नायडू मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर धरने पर बैठ गए.
चंद्रबाबू नायडू ने कहा, ''दुनिया में किसी राज्य की तीन राजधानियां नहीं हैं. आज एक काला दिन है. हम अमरावती और आंध्रप्रदेश को बचाना चाहते हैं. सिर्फ मैं ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के लोग इसके लिए सड़कों पर उतर रहे हैं. सरकार हर एक को हिरासत में ले रही है, ये लोकतंत्र के लिए ख़राब है.''
मलेशिया से पाम ऑयल भारतीय बंदरगाहों पर फंसा
मलेशिया से भारत पहुंचा हज़ारों टन रिफाइंड पाम आयल भारतीय बंदरगाहों पर फंसकर रह गया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की ख़बर के मुताबिक, मलेशिया से रिफाइंड पाम आयल लेकर जो जहाज़ प्रतिबंध से पहले भारत आ चुके थे, उन्हें बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.
जानकार मलेशिया से आए इस रिफाइंड पाम आयल की मात्रा 30 हज़ार टन से अधिक बता रहे हैं.
भारत, मलेशिया से आने वाले खाद्य तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन कश्मीर और एनआरसी-सीएए मामले पर मलेशिया के प्रधानमंत्री के बयान के बाद भारत ने अपना रुख़ बदला है. इससे मलेशिया को आर्थिक नुकसान हुआ है.
मलेशिया, इंडोनेशिया के बाद रिफाइंड पाम ऑयल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है.
भारत ने मलेशिया से आने वाले रिफाइंड पाम ऑयल पर 8 जनवरी को रोक लगा दी थी.
फ़र्ज़ी ख़बरें नया ख़तरा: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कहा है कि पत्रकारिता 'मुश्किल दौर' से गुजर रही है जहां फ़र्जी ख़बरें नए ख़तरे के रूप में सामने आई हैं.
दिल्ली में आयोजित 'रामनाथ गोयनका एक्सलेंस इन जर्नलिज्म' पुरस्कार समारोह में उन्होंने कहा कि फ़र्ज़ी ख़बरों का प्रसार करने वाले पत्रकारिता के पेशे को कलंकित कर रहे हैं.
इसी आयोजन में बीबीसी हिन्दी की संवाददाता सर्वप्रिया सांगवान को प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
उन्हें यह पुरस्कार भारत के परमाणु कार्यक्रम की वजह से मुश्किलें झेल रहे लोगों पर आधारित उनकी स्टोरी के लिए दिया गया है.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सर्वप्रिया सांगवान को ये पुरस्कार दिया.
'श्रीलंका में लापता हुए 20 हज़ार से अधिक लोग मर चुके हैं'
श्रीलंका के राष्ट्रपति ने पहली बार ये स्वीकार किया है कि देश में गृहयुद्ध के दौरान लापता हुए 20 हज़ार से अधिक लोग मर चुके हैं.
राष्ट्रपति राजपक्षे ने राजधानी कोलंबो में संयुक्त राष्ट्र के एक दूत से मुलाक़ात के दौरान ये टिप्पणी की.
राष्ट्रपति कार्यालय के बयान में कहा गया है कि लापता लोगों के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे.
श्रीलंका में ऐसे हज़ारों परिवार हैं जो देश में इस मांग के साथ रैलियां निकालते रहे हैं कि सरकार लापता लोगों का पता लगाए.
कई लोगों ने उम्मीद लगा रखी थी कि वो अभी भी जीवित होंगे और हो सकता है कि उन्हें सुरक्षाबलों ने पकड़ रखा हो.
श्रीलंका की सेना ने 26 साल तक चले ख़ूनी संघर्ष के बाद मई 2009 में विद्रोही तमिल टाइगर्स को परास्त किया था.
युद्ध ख़त्म होने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षाबलों पर अत्याचार के आरोप लगाए थे.
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