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जेएनयू प्रशासन हिंसा और विवाद पर क्या कह रहा है?
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुई हिंसा और विवाद के बाद मंगलवार को जेएनयू के प्रो वॉइस चांसलर चिंतामणि महापात्र ने छात्रों से प्रदर्शन ख़त्म करने की अपील की है.
समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि आंदोलन और प्रदर्शन करना छात्रों के मूलभूत अधिकार हैं लेकिन उन्हें कोई भी कदम उठाने से पहले सबके हितों के बारे में सोचना चाहिए.
महापात्र ने कहा, "मैं छात्रों से गुज़ारिश करता हूं कि आप प्रदर्शन ज़रूर करें लेकिन क़ानून-व्यवस्था को बिगड़ने न दें. आज कैंपस में जो कुछ हो रहा है उससे आम छात्रों को नुक़सान हो रहा है."
उन्होंने रविवार को हुई हिंसा की निंदा की और कहा कि वो पिछले 40 वर्षों से जेएनयू को जानते हैं लेकिन इससे पहले ऐसी घटना नहीं देखी. उन्होंने कैंपस में नक़ाबपोश हमलावरों के घुसने और मारपीट की बात स्वीकार की लेकिन वो नक़ाबपोश कौन थे इस बारे में कुछ नहीं कहा.
महापात्र ने कहा, "अभी फ़िलहाल स्थिति में नियंत्रण में है. ऐसे में हमारी प्राथमिकता है कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया फिर से कैसे शुरू की जाए. मुझे पता चला कि कई छात्रों के अभिभावक ताज़ा हिंसा से चिंतित हैं और उन्हें वापस घर बुला रहे हैं. छात्र परेशान और घबराए हुए हैं."
पिछले कई महीनों से हलचल का केंद्र बने जेएनयू में स्थिरता कब आएगी? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि स्थिरता जल्दी वापस लाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है और जेएनयू प्रशासन इस मद्देनज़र केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ ही दिल्ली के उप राज्यपाल के संपर्क में भी है.''
महापात्र ने जेएनयू कैंपस में अशांति का प्रमुख कारण फ़ीस वृद्धि का विरोध कर रहे छात्रों द्वारा रजिस्ट्रेशन के इच्छुक छात्रों को रोकना बताया.
दिल्ली स्थित जवाहर लाल यूनिवर्सिटी में रविवार शाम हुई हिंसा में 30-35 छात्र और कुछ प्रोफ़ेसर घायल हुए थे. कैंपस में 50 के क़रीब नक़ाबपोश छात्रों ने घुसकर हमला किया था जिनकी अभी पहचान नही हो पाई है.
इस मामले में एक एफ़आईआर दर्ज की गई है दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम इसकी जांच कर रही है.
जेएनयू के छात्र और छात्र संगठन पिछले कुछ महीनों से फ़ीस वृद्धि और नए हॉस्टल मैनुअल के ख़िलाफ़ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
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