कश्मीर: किस हाल में रह रहे हैं हिरासत में रखे गए लोग

- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
श्रीनगर में चार और पांच अगस्त की दरमियानी रात को जब राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जा रहा था तो इस सुरक्षा कार्रवाई की जद में आने वालों में डॉक्टर राजा मुज़फ़्फ़र भट भी एक थे.
उस रात तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी हिरासत में लिया गया था- फ़ारूक़ अब्दुल्लाह, उमर अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ़्ती.
जम्मू और कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने और बाहरी लोगों के राज्य में प्रॉपर्टी ख़रीदने से रोकने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 और 35-A के प्रावधान को निष्प्रभावी करने से पहले एहतियाती सुरक्षा उपाय के तौर पर इन लोगों को हिरासत में लिया गया था.
हिरासत में लिए जाने की रात डॉक्टर राजा मुज़फ़्फ़र भट बडगाम ज़िले में अपने घर में थे. डॉक्टर राजा लंबे समय से सूचना के अधिकार के लिए काम कर रहे हैं. इसके अलावा वे भ्रष्टाचार, प्रशासन और दूसरे मुद्दों पर लिखते भी रहे हैं.
उनका दावा है कि उन्हें 86 दिनों तक जेल में रखा गया और आज तक उन्हें पता नहीं चल पाया कि ऐसा क्यों किया गया था.

तीन महीने जेल क्यों
डॉक्टर राजा मुज़फ़्फ़र भट ने बीबीसी को बताया, "मैं जेल में था और इस सवाल का जवाब भी खोज रहा था कि आख़िर मैं यहां क्यों हूं. एक रोज़ मैंने एक ख़त लिखा और इसे मुख्य सचिव बीआरवी सुब्रमण्यम को स्पीड पोस्ट से भेजने के लिए जेल के एक कर्मचारी से चुपके से गुज़ारिश की."
डॉक्टर राजा बताते हैं, "मैंने उन्हें लिखा कि मैं कोई दया करने के लिए नहीं कह रहा हूं और न ही जेल से छोड़ने की बात कर रहा हूं. मैं बस ये जानना चाहता हूं कि मेरा अपराध क्या है जिसके लिए मुझे जेल में रखा गया है."
जहां पर डॉक्टर राजा को क़ैद में रखा गया था, वो सरकार की मिल्कियत वाला एक होटल और ऑडिटोरियम था जिसे उप-जेल का दर्जा दे दिया गया था.
जेल के दिनों को याद करते हुए डॉक्टर राजा बताते हैं, "क़ैदियों को लॉन में टहलने की इजाज़त नहीं थी. हम पहली और दूसरी मंज़िल के अलावा कहीं और आ-जा नहीं सकते थे. वहां अख़बार नहीं मिलते थे लेकिन सैटेलाइट टीवी हमें सीमित रूप में मुहैया कराया गया था. लेकिन नौकरशाह से राजनेता बने डॉक्टर शाह फ़ैसल जैसे कुछ क़ैदी किताबें लेकर आए थे. मैंने कई किताबें पढ़ीं जिनमें बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी की आत्मकथा भी शामिल थी."

'तनाव में हैं बंदी'
डॉक्टर राजा मुज़फ़्फ़र भट बताते हैं कि हिरासत में लिए जाने की रात घड़ी में दो बज रहे थे और तब बच्चे सो रहे थे.
वो कहते हैं, "मैंने अपनी पत्नी से बच्चों को ये कहने के लिए कहा कि मैं ट्रैकिंग ट्रिप पर जा रहा हूं. मुझे लगा कि कुछ दिनों में मुझे छोड़ दिया जाएगा. लेकिन जब हफ़्तों गुज़र गए तो बच्चों को ये बताना पड़ा कि मैं जेल में हूं. बच्चे मासूम होते हैं, उन्हें लगता है कि जेल तो केवल अपराधियों के लिए होती है. मुझे इस बात पर फ़िक्र होती है कि हमारी पांचवीं पीढ़ी भी सालों से चले आ रहे संघर्ष में उलझ रही है."
एक साथी क़ैदी से हुई बातचीत का ज़िक्र करते हुए डॉक्टर भट ने बताया कि जेल में बंद राजनीतिक क़ैदी गहरे सदमे में है.
उन्होंने कहा, "एक पूर्व मंत्री रो रहे थे. उन्होंने मुझे बताया कि मैं एक वफ़ादार हिंदुस्तानी हूं. कहने लगे कि स्वतंत्रता दिवस की परेड में शरीक़ होने के लिए मैंने नमाज़ तक छोड़ दी. वे इस बात के लिए रो रहे थे कि उनके जैसे वफ़ादार हिंदुस्तानी को भी जेल में रखकर सताया जा रहा था."
इन 34 राजनीतिक क़ैदियों के अलावा जम्मू और कश्मीर समेत भारत भर की अलग-अलग जेलों में कम से कम 1500 कश्मीरी लोगों को क़ैद में रखा गया है.

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क्या कहती है सरकार
भारत के गृह मंत्रालय के अनुसार चार अगस्त से 6500 लोगों की गिरफ़्तारी हुई है लेकिन पिछले तीन महीनों के दौरान 5000 लोगों को रिहा भी किया गया है.
घाटी में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसी गिरफ़्तारियां क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने करने के लिए की जाती हैं. बाद में ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जाता है जिसके नतीजे में लोगों को छोड़ा जा सकता है.
जेल के अंदर क़ैदियों पर लगे प्रतिबंधों के बारे में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब किसी इमारत या होटल को जेल घोषित किया जाता है तो वहां पर भी जेल नियमावली को लागू किया जाता है. अधिकारी कहते हैं कि ये सब क़ैदियों की सुरक्षा के लिए होता है.
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