कश्मीर पर अमित शाह के 'स्थिति सामान्य हो चुकी है' दावे का सच

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गृह मंत्री अमित शाह ने 20 नवंबर को राज्य सभा में दावा किया है कि भारत प्रशासित कश्मीर में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है.
ये पहला मौका था जब अमित शाह जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा ख़त्म होने के बाद आधिकारिक रूप से राज्य सभा में कश्मीर के हालातों पर अपना बयान दे रहे थे.
बीते कई सालों से जम्मू और कश्मीर से रिपोर्टिंग कर रहे बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर ने इन दावों की सच्चाई जानने की कोशिश की है.

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क्या स्थिति सामान्य है?
अमित शाह ने दावा किया है कि "वहां पर स्थिति सामान्य ही है. इसके बारे में कई भ्रांतियां फैली हुई हैं. मैं पूरी स्थिति के सामान्य होने के बारे में बताना चाहता हूं."
पाँच अगस्त के बाद से अस्पताल से लेकर स्कूल और अशांति पर रिपोर्ट करने के बाद रियाज़ बताते हैं कि पिछले दिनों बर्फ़बारी के बाद से घाटी में स्थितियां सामान्य होती दिख रही थीं.

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रियाज़ मसरूर अमित शाह के भाषण के दौरान श्रीनगर के लाल चौक पर मौजूद थे.
कश्मीरी लोगों पर इस भाषण के असर को बताते हुए रियाज़ कहते हैं, "बीते दिनों से यहां पर अनाधिकारिक हड़ताल चल रही थी. दुकानें 11 बजे तक खुलती थीं और इसके बाद दुकानें बंद हो जाती थीं.
"लेकिन बर्फ़बारी होने के बाद से घाटी में हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे थे. लोग दुकानें खोल रहे थे."
"लेकिन अमित शाह के भाषण के एक घंटे बाद ही लाल चौक पर दुकानें बंद हो गई. इसके साथ ही डाउन टाउन श्रीनगर में भी दुकानें बंद हो गईं और कुछ लड़कों ने दुकानों पर पत्थरबाज़ी भी की."

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क्या पत्थरबाज़ी की घटनाओं में कमी आई?
अमित शाह ने दावा किया है, "195 पुलिस स्टेशन से सीआरपीसी 144 हटा ली गयी है और पत्थरबाज़ी की घटनाओं में कमी आई है."
रियाज़ मसरूर बताते हैं, "ये बात बिलकुल दुरुस्त है. कश्मीर में अब उतनी पत्थरबाज़ी नहीं होती जितनी पहले ऐसी परिस्थितियों में होती थी."
"स्थानीय लोग बताते हैं कि इसके लिए 5 अगस्त के बाद से साढ़े छह हज़ार लोगों की कि गई गिरफ़्तारी ज़िम्मेदार है. हालांकि, इनमें से पांच हज़ार लोगों को छोड़ दिया गया है."
"यहां पर पथराव की घटना सिर्फ़ एक बार देखी गई है जब यहां पर यूरोपीय संघ का प्रतिनिधि मंडल आया था. इस एक दिन में साठ ऐसी घटनाएं घटी थीं."

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क्या पुलिस की गोली से किसी की जान नहीं गई?
अमित शाह दावा करते हैं कि 5 अगस्त के बाद पुलिस फ़ायरिंग में किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है.
रियाज़ मसरूर बताते हैं, "ये बात पूरी तरह सही है कि 5 अगस्त के बाद से अब तक पुलिस फ़ायरिंग में किसी की भी मौत नहीं हुई है."
"बीती 6 अगस्त को पुलिस ने विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ लड़कों का पीछा किया था. इसके बाद लगभग चार-पांच लड़कों ने दरिया में छलांग लगा दी जिससे पानी में डूबने की वजह से एक लड़के की मौत हो गई."
"वहीं, सौरा इलाके में एक अन्य व्यक्ति की मौत हुई थी जिनका नाम असरार ख़ान था. इन्हें टियर गैस का शेल लगा था."
"एक अन्य वृद्ध की मौत टीयर गैस के धुएँ में दम घुटने की वजह से हुई थी. ऐसे में अमित शाह की बात बिलकुल सही है."

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क्या व्यापार ठीक चल रहा है?
अमित शाह ने दावा किया है कि कश्मीर में हालात सामान्य हो गए हैं.
उन्होंने कहा कि व्यापार ठीक ढंग से चल रहा है, बच्चे स्कूल जा रहे हैं और अस्पताल भी सुचारू ढंग से चल रहे हैं.
बीते डेढ़ महीने में कश्मीर के अलग-अलग अस्पतालों का दौरा कर चुके रियाज़ बताते हैं, "ये सरकारी आँकड़े हैं और इन आँकड़ों पर ज़मीनी स्थिति से मिलाया जाए तो कुछ अलग तस्वीर सामने आती है."
वहीं, फल व्यापारियों की स्थिति को लेकर रियाज़ कहते हैं, "सेब उगाने वालों ने 27 सितंबर तक फल तोड़े ही नहीं थे. इसके बाद सरकार ने कहा कि उनके फल नैफेड के तहत ख़रीदे जाएंगे. ये एक अच्छी पहल थी क्योंकि किसानों को अपने घर से ही माल बेचने का मौका मिल रहा था. इस स्कीम के तहत पहले 51 रुपये और फिर 64 रुपये कीमत लगाई गई. लेकिन किसानों के लिए ये कीमत आकर्षक नहीं थी."
"इसके बाद फल व्यापारियों के सामने सुरक्षा को लेकर समस्याएं भी आईं क्योंकि संदिग्ध बंदूकधारियों ने कई लोगों को मार दिया. ऐसे में 20 हज़ार डिब्बे यहां से निकल ही नहीं पाए और लोगों ने स्थानीय स्तर पर ही उन्हें बेचा."
"ऐसे में जब आप पूरी स्थिति को देखते हैं और कड़ी से कड़ी मिलाते हैं तो स्थिति सामान्य नज़र नहीं आती है. ऐसे में इस स्थिति को सरकार किस तरह सामान्य बता रही है, इसे लेकर सरकार और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की स्थिति है."
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