कश्मीर में 5 अगस्त के बाद पूरी स्थिति सामान्य हो चुकी हैः अमित शाह

कश्मीर, अमित शाह

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राज्यसभा में बुधवार को विपक्ष ने जम्मू-कश्मीर के हालात का मुद्दा उठाया. इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में 5 अगस्त के बाद पुलिस फ़ायरिंग में किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई और पत्थरबाज़ी की घटना में अपेक्षाकृत कमी आई है.

इस दौरान उन्होंने कहा कि "स्कूलों में परीक्षाएं सुचारू रूप से ली जा रही हैं. 11वीं के 50,537 में से 50,272 यानी 99.48 फ़ीसदी छात्रों ने तो 10वीं के 99.7 फ़ीसदी छात्रों ने परीक्षा दिए हैं. घाटी के सभी अस्पताल खुले हैं."

पेट्रोल, डीज़ल, केरोसिन, एलपीजी और चावल में बीते वर्ष की तुलना में 8 से 16 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है. 22 लाख मिट्रिक टन सेब उत्पादन की उम्मीद है. सभी लैंडलाइन चालू हैं. दुकानें भी लगातार खुली रह रही हैं."

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इंटरनेट पर लगे बैन को हटाने की मांग पर क्या कहा?

ग़ुलाम नबी आज़ाद ने पूछा कि कश्मीर में साढ़े तीन महीने से इंटरनेट पर प्रतिबंध है, यह ऐतिहासिक है.

इस पर अमित शाह ने कहा, "आज के जमाने में इंटरनेट सूचना के लिए बहुत ज़रूरी उपक्रम है, उसे जितना जल्दी शुरू किया जाना चाहिए."

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"पूरे देश में 90 के दशक में मोबाइल आया लेकिन कश्मीर में इसे 2003 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने शुरू किया, उससे पहले इसे सुरक्षा कारणों से शुरू नहीं किया गया. इंटरनेट को भी कई सालों तक रोका गया, 2002 में ही वहां इंटरनेट को अनुमति दी गई."

"ये बात ठीक है कि ये सूचना का बहुत महत्वपूर्ण उपक्रम है लेकिन जब देश की सुरक्षा सवाल हो, जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की सुरक्षा का सवाल हो और आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई का सवाल हो तो हमें कहीं न कहीं अपनी वरीयता तय करनी पड़ती है और जैसे ही वहां के प्रशासन को उचित लगेगा हम तुरंत इस पर पुनर्विचार करेंगे."

जम्मू कश्मीर

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स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या बोले अमित शाह?

राज्यसभा सांसद नजीर अहमद ने 3 महीने से जम्मू-कश्मीर में शिक्षा सेवाओं के प्रभावित होने और अस्पतालों में दवाइयों की कमी को लेकर सवाल पूछे.

इस पर अमित शाह ने कहा कि "अस्पतालों में दवाओं की कोई कमी नहीं है. मोबाइल दवाओं की वैन शुरू की गई है. अस्पतालों में भी दवाएं भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं और लोग भी अस्पताल पहुंच रहे हैं. स्वास्थ्य को लेकर वहां की सरकार ने पूरे इंतजाम किए हैं."

अमित शाह ने कहा, "श्रीनगर में सितंबर 2019 में 7 लाख 67 हज़ार और अक्तूबर में 7 लाख 91 हज़ार लोग ओपीडी में आए. कहीं पर भी स्वास्थ्य को लेकर कोई समस्या नहीं है."

"अगर किसी दूर दराज के इलाके में कोई स्वास्थ्य सेवा में कमी है तो आप मुझसे सीधे संपर्क कर सकते हैं, 24 घंटे के अंदर ही सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी."

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'सामान्य हो चुकी है कश्मीर की स्थिति'

अमित शाह ने कश्मीर की स्थिति पर पूछे जा रहे सवालों पर कहा कि वहां पूरी स्थिति सामान्य हो चुकी है.

उन्होंने कहा, "सामान्य ही है स्थिति वहां पर. इसके बारे में कई भ्रांतियां फैली हुई हैं. मैं पूरी स्थिति के सामान्य होने के बारे में बताना चाहता हूं. जहां तक क़ानून व्यवस्था का सवाल है, 5 अगस्त के बाद पुलिस फ़ायरिंग में किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई. 195 पुलिस स्टेशन से सीआरपीसी 144 हटा लिया गया है. पत्थरबाज़ी की घटनाओं में कमी आई है."

शाह ने कहा, "सभी 20,411 स्कूल खुले हैं. परीक्षाएं सुचारू रूप से ली जा रही है. 11वीं के 50,537 में से 50,272 छात्रों ने यानी 99.48 फ़ीसदी छात्रों ने और वहीं 10वीं के 99.7 फ़ीसदी छात्रों ने परीक्षाएं दी हैं. घाटी के सभी अस्पताल खुले हैं. स्वास्थय को लेकर कहीं पर भी कोई समस्या नहीं है. पेट्रोल, डीज़ल, केरोसिन, एलपीजी और चावल बीते वर्ष की तुलना में 8 से 16 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है."

हालांकि कश्मीर के आम लोग गृहमंत्री के इस दावे को ख़ारिज करते हैं. बीबीसी सहयोगी माजिद जहांगीर ने श्रीनगर की सडक़ों पर कुछ आम कश्मीरी लोगों से बात की और उनसे गृहमंत्री के दावों के बारे में पूछा.

एक व्यक्ति ने कहा, ''हालात सही नहीं हैं. दुकानें खुली हैं लेकिन काम नहीं चल रहा है. स्कूल बंद हैं और बच्चे घर पर बैठे हैं. मेरे भी बच्चे घर पर बैठे हैं. मैं भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान हूं.''

उन्होंने कहा कि वो ख़ुद कॉलेज में ही काम करते हैं और कॉलेज खुले ज़रूर हैं लेकिन क्लास नहीं होती है. वो कहते हैं कि लाल चौके के आस-पास कुछ दुकानें खुली हैं लेकिन डाउनटाउन में दुकानें सिर्फ़ सुबह में खुलती हैं, शाम में नहीं खुलती हैं.

एक दूसरे व्यक्ति ने कहा कि हालात सामान्य हो या ख़राब हो लेकिन 370 ख़त्म करना कश्मीरियों के हक़ में नहीं है. उन्होंने कहा कि इंटरनेट अब भी बंद हैं और बहुत लोग बेरोज़गार हो गए हैं.

एक तीसरे व्यक्ति ने कहा कि हालात सामान्य बोल रहे हैं, लेकिन अभी तक प्रिपेड बंद है, इंटरनेट बंद है, सारा कुछ बंद है.

उन्होंने कहा, ''हालात ठीक हैं या नहीं ये तो अमित शाह को ही पता है. हमको पता नहीं है. हम क्या कह सकते हैं, हम तो कश्मीरी हैं. अमित शाह को पता है क्या करना है. हम कौन होते हैं, हम तो कश्मीरी हैं. हमको तो भूखे प्यासे मरना है यहां. ''

सेब

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अमित शाह ने सेब के बारे में क्या कहा?

अमित शाह ने कहा, "बड़ी मात्रा में सेब बाहर निकल चुके हैं. 22 लाख मिट्रिक टन सेब के उत्पादन की संभावना है. पूरे सेब के बाहर निकलने की व्यवस्था हो चुकी है. नाफेड ने ख़रीदी की व्यवस्था भी की है."

इस दौरान उन्होंने कहा, "93,247 लैंडलाइन खुल चुकी हैं. 59 लाख मोबाइल चालू हैं. अति आवश्यक कार्यों के लिए 10 ज़िलों में 280 इटर्मिनल चालू कराए गए हैं जहां इंटरनेट की व्यवस्था है."

राज्यसभा में बोलने से पहले संसद पहुंचे अमित शाह

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'प्रेस, मीडिया काम कर रहा है'

इस दौरान अमित शाह ने कहा कि "उर्दू, अंग्रेज़ी के सभी अख़बार, सभी टीवी चैनल चालू हैं. उनका सर्कुलेशन बीते वर्ष के अनुकूल ही हैं. मतलब सभी प्रेस मीडिया काम कर रहा है."

"बैंकिंग सुविधा पूरी तरह से चालू है. शुरू के तीन दिन छोड़ कर एक दिन भी क्लियरिंग बंद नहीं रहा है."

"घाटी में सभी इलाकों में अधिकांश दुकानें खुली रहती हैं."

पूरे देश में लागू होगी एनआरसी

अमित शाह ने इस दौरान ये भी कहा कि पूरे देश में एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीज़ेन्स लागू की जाएगी. लेकिन उन्होंने ये भी दावा किया कि इससे किसी भी धर्म के लोगों को चिंतित होने की ज़रूरत नहीं. शाह ने कहा कि ये बस एक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य देश के सभी नागरिकों को एनआरसी के अंदर लाना है.

अमित शाह ने कहा कि असम के जिन लोगों का नाम एनआरसी लिस्ट में नहीं आया है वो अपनी शिकायत लेकर ट्राइब्यूनल में जा सकते हैं. उनके अनुसार इस काम के लिए पूरे राज्य में ट्राइब्यूनल गठित किए जा रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा कि अगर किसी के पास ट्राइब्यूनल में जाने का पैसा नहीं है तो असम सरकार उनको वकील हायर करने में आर्थिक मदद करेगी.

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