कश्मीर: पुलिस का दावा 300 पत्थरबाज़ों को रिहा किया- प्रेस रिव्यू

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इंडियन एक्सप्रेस में जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह का इंटरव्यू छपा है. वो पिछले एक साल से राज्य के डीजीपी पद पर तैनात हैं.
अख़बार को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस अगर पांच लोगों को हिरासत में लेती है तो सिर्फ़ एक ही शख़्स हिरासत में रहता है, बाकी चार छोड़ दिए जाते हैं.
सिंह ने कहा कि राज्य की पुलिस कश्मीरी युवकों और स्थानीय लोगों से बातचीत करके उन्हें छोड़ देती है और पिछले कुछ वक़्त में इसी प्रक्रिया के तहत 300 पत्थरबाजों को रिहा किया गया है.
डीजीपी के अनुसार अभी राज्य में कुछ सौ लोग हिरासत में हैं और ये 'बहुत बड़ी संख्या' नहीं है.
उन्होंने कहा कि नज़रबंद किए गए या हिरासत में लिए गए नेताओं की संख्या भी 35 से ज़्यादा नहीं है. दिलबाग सिंह ने कहा कि नेताओं को अब तक हिरासत में रखे जाने की वजह ये है कि बाहर आने पर वो स्थानीय लोगों को 'उकसा' सकते हैं.
उन्होंने कहा, अगर आप कुछ पाबंदियां लगाकर ज़िंदगियां बचा लें तो इससे अच्छा और क्या होगा?
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'मसूद अज़हर पाकिस्तान की जेल से रिहा'
हिंदुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अज़हर को पाकिस्तान की जेल से गुपचुप तरीके से रिहा कर दिया गया है.
अख़बार लिखता है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो ने भारत सरकार को अलर्ट किया है और बताया है कि राजस्थान से लगी भारत-पाकिस्तान की सीमा पर पाकिस्तान ने अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए हैं.
अख़बार ख़ुफ़िया एजेंसियों से मिली जानकारी के हवाले से लिखता है कि पाकिस्तान राजस्थान और सियालकोट-जम्मू सेक्टर में किसी 'बड़े एक्शन' की तैयारी में है.
रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले जानकारी रखने वाले दो ख़ुफ़िया अधिकारियों का कहना है कि मसूद अज़हर को हमले कराने के मक़सद से रिहा किया गया है.
कुछ महीने पहले ही मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 'वैश्विक आतंकवादी घोषित' किया गया था.
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'अर्थव्यवस्था मज़बूत है, घबराएं नहीं'
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का मूलभूत ढांचा मज़बूत है इसलिए घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है और न ही घबराने जैसी स्थिति है.
ये ख़बर अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी है.
उन्होंने ये बात मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर एक प्रेस वार्ता में कही. जावड़ेकर ने कहा कि कभी-कभी आर्थिक स्लोडाउन आता है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद बहुत मज़बूत है, इसलिए चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.
जीडीपी ग्रोथ रेट गिरकर 5 फ़ीसदी आने और ऑटो समेत तमाम सेक्टर में सुस्ती की ख़बरों के बीच जावडेकर ने कहा कि अर्थव्यवस्था में ये दौर अस्थायी है.
अलग-अलग सेक्टर में जा रही नौकरियों के सवालों पर उन्होंने कहा कि कई देशों में ऐसे हालात हुए, यूपीए के समय में भी ऐसा हुआ था लेकिन इससे घबराने की ज़रूरत नहीं है.
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चंद्रयान-2वाले चंद्रकांत कुमार
दैनिक भास्कर ने चंद्रयान-2 मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तीन वैज्ञानिकों की प्रोफ़ाइल को पहले पन्ने पर जगह दी है.
अख़बार में छपी जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल के हुबली ज़िले से ताल्लुक रखने वाले चंद्रकांत कुमार ने चंद्रयान-2 का सिग्नल सिस्टम बनाया है. इस सिस्टम के जरिए तीन लाख 84 हज़ार किलोमीटर दूर ऑर्बिटर से इसरो को धरती पर सिग्नल मिलता है.
चंद्रकांत के नाम पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. उनके माता-पिता ने उनका नाम सूर्यकांत रखा था लेकिन स्कूल में दाखिले के वक़्त शिक्षक ने कहा कि चंद्रकांत नाम ज़्यादा अच्छा रहेगा और इस तरह उन्हें चंद्रकांत नाम मिला.
चंद्रयान-2 की मिशन डायरेक्टर ऋतु करीधल के बारे में अख़बार लिखता है कि स्कूल में अपने भौतिक विज्ञान के शिक्षक से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने भौतिक विज्ञान में ही ग्रैजुएशन भी किया.
रिपोर्ट के अनुसार ऋतु करीधल अपने बच्चों को समय देने के लिए रात-रात भर जगकर ऑफ़िस का काम करती थीं.
इसरो प्रमुख के सिवन के बारे में अख़बार लिखता है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए वो अपने पिता के ख़िलाफ़ ही सात दिन तक अनशन पर बैठे रहे थे.
दरअसल सिवन के पिता चाहते थे कि वो बीएससी करें और साथ ही खेती में भी हाथ बटाएं लेकिन सिवन इंजीनियरिंग करना चाहते थे.
सात दिनों के अनशन के बावजूद जब उनके पिता नहीं माने तब उन्होंने बीएससी में ही दाखिला ले लिया लेकिन तब तक उनके पिता को उनकी शिद्दत का अंदाज़ा हो गया था और उन्होंने अपने बेटे को इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए चेन्नई भेज दिया.
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कबाड़ी की दुकान से मिले साहिर के ख़त
नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर के अनुसार, मशहूर गीतकार साहिर की कुछ चिट्ठियां, डायरियां और कुछ निजी तस्वीरें मुंबई में एक कबाड़ी की दुकान से मिली हैं. इसकी जनाकारी जब एक एनजीओ को हुई तब उसने दुकानदार से 3,000 रुपये में खरीद लिया.
एनजीओ फ़िल्म हेरीटेज फ़ाउंडेशन को हाल ही में जुहू में कबाड़ की एक दुकान में अखबारों और पत्रिकाओं की ढेर में साहिर की ये चीजें मिलीं. अब एनजीओ की योजना इन सामानों के संरक्षण और प्रदर्शनी लगाने की है.
एनजीओ के संस्थापक निदेशक शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर ने बताया, "इन डायरियों में उनके रोज़ाना के कार्यक्रम, जैसे गाने की रिकॉर्डिंग के लिए वो कहां जाएंगे और दूसरी निजी बातें लिखी हुई है. कई नज़्में और नोट भी हैं.उस दौर के संगीतकार रवि, उनके दोस्त और कवि हरबंस द्वारा उन्हें लिखी गई चिट्ठियां भी हैं. कुछ अंग्रेज़ी में और कुछ उर्दू में लिखी गई हैं."
साहिर की कुछ निजी तस्वीरें भी मिली हैं जिनमें कुछ तस्वीरें उनकी बहनों और दोस्तों के साथ और कुछ पंजाब में उनके घर की हैं. फ़ाउंडेशन के विशेषज्ञ उन नज़्मों को देख रहे हैं और यह पता लगा रहे हैं कि उनमें से कौन प्रकाशित नहीं हुईं हैं.
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