रंजन गोगोई बोले, जजों को मौन रहना चाहिएः प्रेस रिव्यू

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सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई का शुक्रवार को अंतिम कार्यदिवस था, वो 17 नवंबर को वे रिटायर हो जाएंगे.
दैनिक भास्कर में प्रकाशित समाचार के अनुसार अंतिम दिन रंजन गोगोई अगले चीफ़ जस्टिस एसए बोबडे के साथ कोर्ट पहुंचे, वो सिर्फ़ 3 मिनट तक कोर्ट में बैठे और 10 मामलों में नोटिस व स्टे का आदेश देकर कहा, ''आप सभी को धन्यवाद''
अखबार लिखता है कि रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के साथी जजों को मीडिया से दूरी बनाए रखने की सलाह दी. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करने के बजाय लिखित बयान जारी किया है.
रंजन गोगोई ने कहा, ''बेंच की अपने जजों से अपनी स्वाधीनता का प्रयोग करते समय 'मौन' बनाए रखने की अपेक्षा होती है. ऐसा नहीं है कि जज बोलते नहीं. वे बोलते हैं, लेकिन जब उनके कार्य की अनिवार्यता हो. इससे आगे बिल्कुल नहीं.''
रंजन गोगोई सुर्खियों में तब आए थे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य जजों के साथ मिलकर 12 जनवरी 2018 को तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के ख़िलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. भारतीय न्यायव्यवस्था के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के जजों ने इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी.

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गगनयान मिशन के लिए चुने गए संभावित भारतीय पायलट
भारत के पहले अंतरिक्ष मानव मिशन के लिए भारतीय वायु सेना के पायलटों को तैयार किया जा रहा है. इसी के तहत 12 पायलटों का चयन किया गया है. ये सभी पायलट रूस में ट्रेनिंग ले रहे हैं.
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित समाचार में बताया गया है कि भारत के महत्वकांशी गगनयान मिशन के लिए भारतीय वायुसेना के इंस्टिट्यूट ऑफ़ एयरोस्पेस मेडिसिन (आईएएम) में बीते तीन महीने में 60 में से पहले 12 एयर फ़ोर्स पायलटों को शॉर्ट लिस्ट किया गया.
अखबार लिखता है कि शॉर्टलिस्ट ना होने वाले अधिकतर पायलटों को मेडिकल टेस्ट के दौरान उनके ख़राब दांतों की वजह से बाहर कर दिया गया.
चयनित 12 पायलटों की ट्रेनिंग रूस के यूरी गैगरिन कॉस्मोनोट ट्रेनिंग सेंटर में चल रही है, इन 12 में से सात पायलटों ने अपनी ट्रेनिंग का बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है.
इनमें से आखिरकार तीन पायलटों को साल 2022 के लिए प्रस्तावित गगनयान योजना के तहत अंतरिक्ष में जाने का मौक़ा मिलेगा.

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सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल को आगामी सत्र के एजेंडे में रखा
सरकार आगामी शीतकालीन सत्र में संसद में नागरिकता संशोधन बिल पेश करेगी. सरकार ने इसके बारे में आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है.
हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित ख़बर में बताया गया है कि संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से शुरू हो रहा है. इस सत्र में सरकार कई अहम बिल पेश करेगी, जिसमें नागरिकता संशोधन बिल भी होगा.
इस बिल का काफ़ी विरोध होता रहा है. इस विधेयक के क़ानून बनने के बाद, अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 12 साल की बजाय महज छह साल में ही भारतीय नागरिकता मिल सकेगी.
पूर्वोत्तर के लोगों का विरोध है कि यदि यह बिल पास होता है तो इससे राज्यों की सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत के साथ खिलवाड़ होगा. वहीं कई संगठन इस बिल में मुस्लिम समुदाय को अलग रखने का विरोध भी कर रहे हैं.
लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि अगर सरकार इस बिल को सदन में पेश करेगी तो वह उसका विरोध करेंगे.

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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच संसाधनों का बंटवारा
जम्मू कश्मीर राज्य के दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजन के बाद अब उसके संसाधनों और देनदारियों के विभाजन को लेकर केंद्र ने तीन सदस्यीय समिति गठित की है.
द हिंदू में प्रकाशित इस समाचार में बताया गया है कि केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले की जानकारी गृह मामलों पर संसद की स्थायी समिति के सदस्यों को दी.
संसद की इस स्थायी समिति ने केंद्रीय गृह सचिव से पूछा कि आख़िर कब तक कश्मीर घाटी में नेताओं को नज़रबंद कर रखा जाएगा और क्या स्थायी समिति के सदस्य भी यूरोपीय सांसदों की तरह कश्मीर का दौरा कर सकते हैं. इस पर अजय कुमार भल्ला ने जवाब दिया कि वो इस विषय में बाद में बताएंगे.

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भल्ला समेत वरिष्ठ अधिकारियों के दल ने आनंद शर्मा के नेतृत्व वाली संसदीय समिति को बताया कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम की धारा 84 के अंतर्गत जम्मू कश्मीर और लदाख के बीच संसाधनों, अधिकारों और दायित्वों के बंटवारे के लिए एक सलाहकार समिति का गठन किया गया है.
वित्त वर्ष 2019-20 के बचे हुए पांच महीनों के लिए 14वें वित्त आयोग में आवंटित निधि का 70 प्रतिशत जम्मू कश्मीर को और 30 प्रतिशत लद्दाख को दिया जाएगा.
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