'अगर शिवसेना फ़ैसला ले कि सरकार बनानी है तो स्थिर सरकार बना सकती है'

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24 अक्तूबर को महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे आए अब आठ दिन हो चुके हैं. बीजेपी-शिवसेना गठजोड़ को स्पष्ट बहुमत भी मिल गया है लेकिन राज्य में सरकार के गठन का रास्ता अभी तक साफ़ नहीं हो सका है. बीते एक हफ़्ते के दौरान इन दोनों सहयोगी पार्टियों के बीच लगातार रश्साकशी चल रही है. दोनों ही दल अपना अपना मुख्यमंत्री चाहते हैं और दोनों ही तरफ से इसे लेकर लगातार बयान आ रहे हैं.

एक तरफ जहां बीजेपी का कहना है कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस ही मुख्यमंत्री रहेंगे वहीं शिवसेना लगातार 50-50 फॉर्मूले की बात बोल रही है और ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद के बंटवारे की बात कर रही है.

पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुखपत्र सामना के एडिटर संजय राउत पहले दिन से ही बयानबाज़ी कर रहे हैं.

जहां एक ओर संजय राउत ने तो दूसरी तरफ शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी कहा कि वो शिवसेना से ही मुख्यमंत्री बनाने की बात पर कायम हैं.

अब शिवसेना ने एक बार फिर अपनी पार्टी से मुख्यमंत्री बनाने के लिए रुख और आक्रामक कर दिए हैं.

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बहुमत साबित करने की बात

राउत के मुताबिक उद्धव ठाकरे ने कहा है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री शिवसेना से ही होगा और अपनी इस बात पर वह अडिग हैं. उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी की एक बैठक में यह बात कही है. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के समय बीजेपी और शिवसेना के बीच 50-50 फॉर्मूला तय हुआ था और अब बीजेपी को उसे मानना होगा.

वहीं दूसरी तरफ बीजेपी का कहना है कि इस तरह का कोई फ़ॉर्मूला तय नहीं किया गया था, इस पर उद्धव ठाकरे ने कहा, "जब बीजेपी पहले से तय फ़ॉर्मूले पर आगे बढ़ना नहीं चाहती तो फिर किसी भी तरह की बातचीत का सवाल ही नहीं उठता. मुख्यमंत्री जी को इस तरह नहीं बोलना चाहिए जबकि उस बैठक में अमित शाह और मेरे साथ देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे."

संजय राउत ने बहुमत साबित करने की बात भी कही है. उन्होंने कहा कि अगर शिवसेना ठान ले तो सरकार बनाने के लिए बहुमत मिल जाएंगे.

संजय राउत ने यह भी कहा, "अगर शिवसेना यह फ़ैसला ले ले कि सरकार बनानी है तो राज्य में स्थिर सरकार बना सकती है. लोगों ने जनादेश इसी आधार पर दिया है कि 50-50 के फॉर्मूले पर सरकार का गठन किया जाए. वो शिवसेना से मुख्यमंत्री चाहते हैं."

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इसके साथ ही संजय राउत ने बीजेपी से यह सवाल भी पूछा कि वो इतने दिन गुज़र जाने के बाद भी वह शांत क्यों हैं और सरकार गठन के लिए चर्चा क्यों नहीं कर रहे.

संजय राउत के इसी सवाल के जवाब में महाराष्ट्र में बीजेपी के नेता सुधीर मुंगातिवर ने कहा कि शिवसेना और बीजेपी के बीच जल्द ही बातचीत शुरू होगी. उन्होंने कहा, "बीजेपी चर्चा की शुरुआत करेगी. दिवाली की वजह से कुछ देर हो गई लेकिन अब जल्द ही बातचीत होगी."

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क्या कांग्रेस के साथ जाएगी शिवसेना?

इस बीच ऐसी ख़बरें भी आ रही हैं कि कांग्रेस शिवसेना को समर्थन करने का मन बना रही है. बताया जा रहा है कि कुछ कांग्रेसी नेताओं ने दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाक़ात की है.

हालांकि कांग्रेस के नेता शिवसेना के साथ किसी भी तरह के गठबंधन करने से इनकार कर रहे हैं. कांग्रेस के नेता संजय निरुपम ने कहा कि वो बीजेपी-शिवसेना के ड्रामे का हिस्सा नहीं बनेंगे.

संजय निरुपम ने ट्विटर पर लिखा, "यह तमाम कयास झूठे हैं, वो दोनों दल एक साथ मिलकर हमें निशाना बनाने की कोशिश करेंगे. कांग्रेस का कोई भी नेता शिवसेना को समर्थन देने के बारे में सोच भी कैसे सकता है?"

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पवार से मिले राउत की मुलाक़ात से उपजे सवाल

लेकिन महाराष्ट्र की सियासत उस समय एक बार फिर गरमा गई जब संजय राउत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार से मुलाक़ात की.

राउत ने इस मुलाक़ात की पुष्टि की लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह कोई राजनीतिक मुलाक़ात नहीं था.

शरद पवार

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उन्होंने कहा, "राज्य में समय से पहले हुई बारिश से किसान परेशान हैं. हमने इस मुद्दे पर मुलाक़ात की. शरद पवार एक वरिष्ठ नेता हैं इसलिए हम उनके साथ बातचीत करने पहुंचे थे. नरेंद्र मोदी भी उनके साथ सलाह मशविरा करते हैं."

इससे पहले गुरुवार को शिवसेना का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलने भी पहुंचा था. इस उन्होंने राज्यपाल से किसानों को मदद करने की अपील की थी. गुरुवार को शिवसेना ने अपने वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे को अपने विधायक दल का नेता भी चुना था. जबकि महाराष्ट्र में जगह-जगह शिवसेना के कार्यकर्ता आदित्य ठाकरे के भावी मुख्यमंत्री वाले बैनर पोस्टर लगा रहे हैं.

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