सुभाष चंद्र बोस पर प. बंगाल में बनी फ़िल्म 'गुमनामी' पर क्यों मचा है हंगामा?

गुमनामी

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    • Author, प्रभाकर एम.
    • पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रहस्यमय गुमशुदगी पर बनी फ़िल्म 'गुमनामी' पर बोस परिवार के सदस्यों और फ़िल्म निर्देशक श्रीजित मुखर्जी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज़ हो रहा है. यह फ़िल्म शुरुआत से ही विवादों में है.

अब ताज़ा मामले में बोस परिवार के 32 सदस्यों ने फ़िल्मकार पर सेंसर बोर्ड के मंज़ूरी के लिए फ़िल्म का नाम 'गुमनामी बाबा' से बदल कर 'गुमनामी' करने का आरोप लगाया है.

बीते रविवार को नेताजी की ओर से स्थापित राजनीतिक दल फ़ॉरवर्ड ब्लॉक के दफ्तर में फ़िल्म का ट्रेलर दिखाने वाले निदेशक श्रीजित मुखर्जी ने बोस परिवार के सदस्यों के आरोपों को निराधार बताया है.

अगस्त के पहले सप्ताह में सेंसर बोर्ड की हरी झंडी हासिल करने वाली यह फ़िल्म दो अक्तूबर को रिलीज़ होगी.

बोस परिवार ने अपने साझा बयान में फ़िल्म के ट्रेलर के प्रदर्शन की अनुमति देने के लिए फ़ॉरवर्ड ब्लॉक नेताओं की भी खिंचाई की है.

बयान में कहा गया है, "तय तारीख़ को फ़िल्म की स्क्रीनिंग नहीं की जानी चाहिए और फ़ॉरवर्ड ब्लॉक नेताओं को भी फ़िल्म से दूरी बरतनी चाहिए."

फ़िल्म निर्देशक मुखर्जी ने कहा कि इसी सप्ताह नेताजी की ओर से स्थापित राजनीतिक पार्टी फ़ॉरवर्ड ब्लॉक के वरिष्ठ नेताओं ने ट्रेलर देखा है और वे लोग फ़िल्म का प्रीमियर देखने पर भी सहमत हो गए हैं.

इस फ़िल्म को लेकर बोस परिवार के सदस्यों की आलोचना झेलने वाले मुखर्जी कहते हैं, "मैंने फ़ॉरवर्ड ब्लॉक नेताओं को समझाया है कि फ़िल्म में नेताजी की गुमशुदगी से जुड़े तीनों थ्योरी को संतुलित तरीक़े से दिखाने का प्रयास किया है. फ़िल्म में गुमनामी बाबा को नेताजी नहीं बताया गया है."

ऑडियो कैप्शन, आखिर क्या हुआ था उस विमान में जिसमें सुभाष बोस सफर कर रहे थे.

बोस की गुमनामी पर आधारित पटकथा

सत्तर के दशक में उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद में रहने वाले गुमनामी बाबा को ही कई लोग नेताजी कहते थे.

मुखर्जी ने बताया कि फ़ॉरवर्ड ब्लॉक के वरिष्ठ नेताओं ने ट्रेलर देखा है और वे फ़िल्म का प्रीमियर देखने पर भी सहमत हो गए हैं.

पार्टी का एक 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल प्रीमियर देखने के बाद के बाद इस बात का फ़ैसला करेगा कि क्या गुमनामी से नेताजी के अनुयायियों और आम लोगों की भावनाएं आहत होती हैं?

निर्देशक का कहना है कि उन्होंने किसी एक थ्योरी पर ज़ोर नहीं दिया है. यह निष्कर्ष निकालना आम लोगों का काम है.

यहां फ़ॉरवर्ड ब्लॉक मुख्यालय में फ़िल्म के ट्रेलर की स्क्रीनिंग के दौरान नरेन दे, हरिपद विश्वास, देबब्रत विश्वास और नरेन चटर्जी जैसे फ़ॉरवर्ड ब्लॉक के वरिष्ठ नेता मौजूद थे.

नरेन चटर्जी ने पत्रकारों से कहा, "हमने ट्रेलर देखा है. लेकिन सिर्फ़ ट्रेलर से पूरी फ़िल्म के बारे में अनुमान लगाना मुश्किल है. पार्टी नेतृत्व ने निदेशक मुखर्जी की उस दलील को भी सुना है जिसमें उन्होंने नेताजी की गुमशुदगी से संबंधित तीनों थ्योरी के संतुलित रूप से फ़िल्मांकन की बात कही है."

सुभाष चंद्र बोस

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क्या कहते हैं 'गुमनामी' के निर्देशक

फ़ॉरवर्ड ब्लॉक नेता कहते हैं कि अगर फ़िल्म में नेताजी की गरिमा कम करने या उनके बारे में भ्रामक सूचनाएं फैलाने का कोई प्रयास किया जाता है तो पार्टी उस पर कड़ा विरोध जताएगी. प्रीमियर में शामिल होने के बारे में पार्टी सचिवमंडल ही फ़ैसला करेगा.

इसबीच, बोस परिवार के 32 सदस्यों के हस्ताक्षर वाले एक बयान में कहा गया है, "गुमनामी बाबा फ़िल्म का निर्माण शुरू करने के एलान के बाद से ही श्रीजित मुखर्जी कहते रहे हैं कि उनकी फ़िल्म चंद्रचूड़ घोष और अनुज धर की लिखी पुस्तक 'कोनुनड्रम' पर आधारित है. लेकिन अब सेंसर बोर्ड के मंज़ूरी के बाद उन्होंने अपना बयान बदलते हुए कहा है कि उक्त फ़िल्म न्यायमूर्ति मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट पर आधारित है. उन्होंने फ़िल्म का नाम भी बदल दिया."

दूसरी ओर, मुखर्जी ने फ़ेसबुक पर अपने एक पोस्ट में इन आरोपों को झूठा बताया है. उनका दावा है कि पहले से ही फ़िल्म का नाम 'गुमनामी' था.

वह कहते हैं, "इस विवाद के महीनों पहले फ़िल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले ही यह फ़ैसला हो गया था कि पटकथा 'कोनुनड्रम' नहीं, बल्कि मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट पर आधारित होगी. लेकिन बोस परिवार सोचता है कि रातोंरात फ़िल्म की पटकथा बदल कर उसकी शूटिंग की जा सकती है."

मुखर्जी का कहना है कि उनकी फ़िल्म नेताजी की गुमशुदगी की तीनों थ्योरी या मतों का ज़िक्र करती है. अपनी ओर से किसी नतीजे पर पहुंचने का प्रयास नहीं किया गया है.

चंद्र बोस और कृष्णा बोस

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इमेज कैप्शन, चंद्र कुमार बोस और कृष्णा बोस

बोस परिवार का क्या कहना है?

इनमें पहले में 1945 में विमान हादसे में नेताजी की मौत, रूस में उनकी मौत और 1970 के दशक में उत्तर प्रदेश के फ़ैज़ाबाद में एक साधु की उपस्थिति शामिल है.

कई लोगों का मानना है कि गुमनामी बाबा के तौर पर रहने वाला वह साधु ही नेताजी थे. हालांकि सुबूतों के अभाव में मुखर्जी आयोग ने इस मत को ख़ारिज कर दिया था.

मुखर्जी का दावा है कि अब फ़िल्म के बारे में नए-नए बयान जारी कर बोस परिवार के लोग बेवजह बांह मरोड़ने का प्रयास कर रहे हैं.

इससे पहले बीते सप्ताह भी बोस परिवार की ओर से जारी एक साझा बयान में कहा गया था कि नेताजी जैसे महान नेता की विरासत और छवि ख़राब करने के लिए एक भ्रामक अभियान चलाया जा रहा है.

उस बयान पर नेताजी की पुत्री अनिता फाफ के अलावा भतीजी चित्रा घोष, पड़पोते चंद्रा कुमार बोस, भतीजे द्वारका नाथ बोस और भतीजी कृष्णा बोस के हस्ताक्षर थे.

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